लखपा शेरपा:10 बार एवरेस्ट फ़तह करने वाली महिला को जब घरेलू हिंसा ने तोड़कर रख दिया

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लखपा शेरपा पहाड़ों की दुनिया ही नहीं निजी ज़िंदगी की भी फ़ाइटर हैं. लखपा ने एक-दो नहीं बल्कि पूरे 10 बार माउंट एवरेस्ट फतह किया है.
उन्होंने अपने ही रिकॉर्ड को बार-बार तोड़ा है. मगर निजी ज़िंदगी में रिश्तों के आगे बार-बार उन्हें हार माननी पड़ी है.
लखपा ने खूब सुर्खियां बटोरीं. चेहरे पर मुस्कान थी. मगर आंखों में छिपा था दर्द. एक टूटी शादी का, प्रेम के बाद मिले ज़ख्मों का. लेकिन ये दर्द कैसे छिपाना था, वो लखपा शेरपा बखूबी जानती थीं.
लखपा एक नेपाली शेरपा महिला हैं. एक बिन ब्याही मां से लेकर पति की मारपीट झेलने तक, उनका निजी जीवन संघर्षों से भरा रहा.
अब उनकी कहानी नेटफ्लिक्स पर एक डॉक्यूमेंट्री के ज़रिए दिखाई जाएगी. महिलाओं में सबसे अधिक बार एवरेस्ट फतह करने वाली शेरपा ने बीबीसी से बात की है.
वो बताती हैं कि कैसे उनका पति मारपीट करता था. ये मारपीट केवल घर की चारदीवारी तक सीमित नहीं थी. बल्कि 2004 में एवरेस्ट समिट के दौरान सबके सामने भी की गई.
इसके गवाह वहां मौजूद लोग बने. दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर सबसे ज़्यादा बार चढ़ने वाली महिला लखपा शेरपा फिलहाल अमेरिका में अपने तीन बच्चों की परवरिश कर रही हैं.
इन्हें पालने के लिए वो ग्रोसरी स्टोर में क्लीनर के तौर पर काम करती हैं. उनका सपना खुद की गाइडिंग कंपनी शुरू करने का है. वो पहाड़ों पर मिले अपने अनुभव और विशेषज्ञता को बाकी लोगों के साथ साझा करना चाहती हैं.

मामूली ट्रेनिंग के सहारे बनाए रिकॉर्ड

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लखपा शेरपा की ज़िंदगी पर बनने वाली नेटफ्लिक्स डॉक्यूमेंट्री का नाम 'माउंटेन क्वीन: द समिट्स ऑफ लखपा शेरपा' है. जिसे लूसी वॉकर ने डायरेक्ट किया है. इस फिल्म पर वह बीबीसी से कहती हैं, "मैं लोगों को दिखाना चाहती हूं कि महिलाएं ये कर सकती हैं."
लखपा ने मामूली ट्रेनिंग के बूते एवरेस्ट की रिकॉर्डतोड़ 10 बार चढ़ाई की है. वो अब अमेरिका के कनेक्टिकट के पहाड़ों पर चलकर खुद को फिट रखे हुए हैं.
उनकी फिटनेस को देख फिल्म डायरेक्टर लूसी उनके लंबे कद और मज़बूत शरीर की तारीफ़ करती हैं. वो कहती हैं कि लोग इसे हलके में लेते हैं. लेकिन ये एक अकल्पनीय उपलब्धि है कि आप अपनी नौकरी के साथ-साथ एवरेस्ट की चढ़ाई भी कर रही हैं.
हालांकि, जवाब में शेरपा कहती हैं कि वह पढ़ाई-लिखाई में उतनी अच्छी नहीं है. लेकिन पहाड़ों से साथ उनका अच्छा तालमेल है.
माता-पिता के 11 बच्चे
याक पालकों के यहां 1973 में नेपाल की पहाड़ियों पर उनका जन्म हुआ. वो अपने माता-पिता के 11 बच्चों में एक थीं.
शेरपा ऐसी जगह पली-बढ़ीं, जहां लड़कियों की शिक्षा को प्राथमिकता नहीं दी जाती थी. पहाड़ों पर घंटों चलने के बाद वो अपने भाई को स्कूल छोड़कर आतीं. लेकिन उन्हें स्कूल के भीतर जाने की अनुमति नहीं थी. हालांकि, अब उनके देश में चीज़ें सुधर रही हैं. लड़कियों की शिक्षा की दर 1981 में 10 फ़ीसदी थी, जो 2021 में बढ़कर 70 फ़ीसदी हो गई.
मगर शेरपा लिखे हुए शब्दों को पढ़ नहीं पातीं. शिक्षित नहीं होने के कारण उन्हें तमाम दिक्कतें आती हैं. ऐसे में उनके तीनों बच्चे उनकी मदद करते हैं. उनके बेटे का जन्म 90 के दशक में हुआ था. वहीं बेटी सनी 22 साल की और शाइनी 17 साल की हैं. शेरपा कभी स्कूल नहीं गईं.
बिन ब्याही मां बनने के बाद विदेशी शख़्स से प्यार

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जब लखपा शेरपा 15 साल की थीं, तब पहाड़ी अभियानों पर कूली के तौर पर काम करने लगीं. अपने काम के चलते वो पारंपरिक तौर पर होने वाली अरेंज मैरिज के लिए ना कहने में सक्षम थीं.
लेकिन जीवन मुश्किलों से तब भरा, जब वो बिना शादी के गर्भवती हो गईं. वो काठमांडू में किसी के साथ रिश्ते में थीं. ऐसे में बिन ब्याही मां का घर जाना बेहद "शर्म" की बात थी.
उन्होंने पहाड़ों से अपना नाता नहीं तोड़ा. इसी काम के दौरान उनकी मुलाकात रोमानियाई मूल के अमेरिकी पर्वतारोही जॉर्ज डिज्मेरेस्कु से हुई. वह होम रिनोवेशन कॉन्ट्रैक्टर का काम करते थे. वह तानाशाह निकोल चाउसेस्कु के अधीन वाले रोमानिया से भाग निकले थे.
जब वर्ष 2002 में उनकी मुलाकात शेरपा से हुई, तब तक वो अमेरिका में अपनी नई जिंदगी शुरू कर चुके थे. जॉर्ज से शेरपा को दो बेटियां सनी और शाइनी हुईं.
जब सबके सामने मारपीट करने लगा पति

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जॉर्ज शादी के बाद हिंसक हो चुके थे. उन्होंने शेरपा के साथ मारपीट करना शुरू कर दिया.
साल 2004 में लखपा शेरपा और जॉर्ज, न्यू इंग्लैंड क्लाइंबिंग ग्रुप के साथ एवरेस्ट पर चढ़ाई कर रहे थे, तब सबने जॉर्ज के हिंसक व्यवहार को देखा.
शिखर पर पहुंचने के बाद इन्हें खराब मौसम का सामना करना पड़ा.
स्थानीय अखबार के लिए रिपोर्टिंग करने पहुंचे पत्रकार माइकल कोडास को भी वो घटना याद है.
वह कहते हैं कि जॉर्ज का व्यवहार अचानक बदल गया. उन्होंने डॉक्यूमेंट्री में बताया कि शेरपा उस वक्त जॉर्ज के साथ टेंट में थीं.
जॉर्ज ने वहीं शेरपा के साथ मारपीट की. इसकी तस्वीरें कोडास ने क्लिक कीं. जिनमें शेरपा अचेत अवस्था में पड़ी दिखीं.
जॉर्ज उन्हें टेंट से खदेड़ रहे थे, उन्होंने कहा कि 'इस कचरे को बाहर फेंक दो.'
कोडास ने इस हिंसक घटना का ज़िक्र अपनी 2008 में आई किताब 'हाई क्राइम्स: द फेट ऑफ एवरेस्ट इन द एज ऑफ ग्रीड' में किया है.
रिश्ता तबाह होने के बावजूद शेरपा ने जॉर्ज के साथ नाता बनाए रखा. ऐसे ही कई और साल बीते. लेकिन 2012 में एक बार फिर जॉर्ज ने शेरपा के साथ मारपीट की. इतनी ज़्यादा कि वो अस्पताल पहुंच गईं.
एक सामाजिक कार्यकर्ता की मदद से वो अपनी बेटियों को लेकर महिला आश्रय स्थल गईं. आख़िरकार साल 2015 में उन्होंने तलाक ले लिया.
अदालत ने 2016 में शेरपा को उनकी दोनों बेटियों की कस्टडी सौंप दी. उस वक्त छपी आउटसाइड ऑनलाइन की एक रिपोर्ट में बताया गया कि जॉर्ज को छह महीने का सस्पेंड सेंटेंस और एक साल का प्रोबेशन दिया गया. उन्हें शांति भंग करने का दोषी पाया गया.
लेकिन उसे सेकंड डिग्री असॉल्ट में दोषी नहीं पाया गया क्योंकि अदालत के दस्तावेज़ों के मुताबिक शेरपा के सिर पर कोई चोट नहीं दिखी थी.
शादी से मिले सदमे ने जीना मुश्किल कर दिया

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जॉर्ज डिज्मेरेस्कु की 2020 में कैंसर से मौत हो गई. मगर उन्होंने लखपा शेरपा को जो ज़ख्म दिए, उन्हें भरना मुश्किल है. शेरपा कहती हैं कि वो अपने जीवन को गुप्त रखना चाहती थीं. वह नहीं चाहती थीं कि दुनिया उसके बारे में जाने.
मगर जब उनके बेटे ने लूसी वॉकर के अतीत में किए काम को देखा, तो अपनी मां को फिल्म करने की सलाह दी.
वहीं शेरपा को फिल्म के लिए राज़ी करने को लेकर लूसी ने उनसे कहा, "अगर आप अपनी कहानी साझा करेंगी, तो लोग आपको और अधिक प्यार करेंगे. क्योंकि जब आप लोगों को अपने मुश्किल समय के बारे में जानने देंगी, तब मुझे लगता है कि अन्य लोग आपसे अधिक जुड़ाव महसूस कर पाएंगे.'
अपनी शादी पर शेरपा कहती हैं कि इससे मिले सदमे के बाद जीवन मुश्किल हो चुका था. रुंधी हुई आवाज़ में उन्होंने कहा, "मैंने अपने जीवन में बहुत कुछ झेला है. कड़ी मेहनत की है. बहुत हिम्मत की है. कई बार मैं कहती हूं कि मैं क्यों जीवित हूं, मैं मर क्यों नहीं गई, कितने खतरे थे. मैं लगभग स्वर्ग पहुंच गई थी और फिर वापस लौटी. काफी मुश्किल था. घायल महिला बड़ी कठोर हो जाती है. जल्दी हार नहीं मानती. और मैं आज भी यही कर रही हूं."
लखपा के लिए पहाड़ों पर चढ़ाई करना केवल उनका जुनून नहीं बल्कि हीलिंग प्रोसेस है. साल 2022 में उन्होंने 10वीं बार एवरेस्ट पर चढ़ाई कर एक और रिकॉर्ड तोड़ा. उनकी ज़िंदगी पर बनी डॉक्यूमेंट्री 31 जुलाई को नेटफ्लिक्स पर रिलीज़ होगी.
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