रूस का राष्ट्रपति चुनाव, जिसमें प्रतिद्वंद्वी भी कर रहे हैं व्लादिमीर पुतिन के समर्थन की बात

रूस राष्ट्रपति चुनावों में वोटिंग

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    • Author, स्टीव रोज़नबर्ग
    • पदनाम, संपादक, बीबीसी रूसी सेवा

रूस के राष्ट्रपति चुनाव के लिए शुक्रवार से मतदान शुरू हो गया है, जो कि तीन दिन तक चलेगा. हालांकि इसमें कोई शक़ नहीं कि मज़बूत प्रत्याशियों के बिना हो रहे इन चुनावों में 5वीं बार भी व्लादिमीर पुतिन के ही जीतने की संभावना है.

शुक्रवार को रूस के सुदूर पूर्वी इलाक़े कामचात्का पेनिनसुला में मतदान केंद्र स्थानीय समयानुसार सुबह 8 बजे खुला और रविवार को सुदूर पश्चिमी शहर कालिनिनग्राद में शाम 8 बजे मतदान समाप्त होगा.

पिछले दिसंबर में ही 71 साल के व्लादिमीर पुतिन ने 5वीं बार राष्ट्रपति पद के लिए मैदान में उतरने की घोषणा की थी.

मतदान शुरु होने से पहले बोरोव्स्क की सड़कों पर घूमते हुए मेरे दिमाग में मॉस्को से क़रीब 100 किलोमीटर दूर इस कस्बे के बारे में दो बातें आईं.

पहली, राष्ट्रपति चुनाव को लेकर यहां कोई सरगर्मी नहीं है. मैंने यहां बहुत कम चुनावी बैनर या बिलबोर्ड देखे और न तो कोई राजनीतिक पर्चे ही बांटे जा रहे थे.

दूसरी चीज़, जिसपर बिना ध्यान दिए आप नहीं रह पाएंगे वो है बोरोव्स्क की सड़कों पर हर तरफ़ दिखने वाली कला.

इनमें से ज़्यादातर स्ट्रीट आर्ट व्लादिमीर ओवचिनिकोव ने बनाई है. पूरे शहर की दीवारें और इमारतों पर उनका किया काम दिखता है.

उनकी अधिकांश पेंटिंग किसी विवाद का हिस्सा नहीं रही हैं. जैसे एक विशालकाय ग्लोब, जो इस शहर के इतिहास को बयां करता है या फिर एक प्रसिद्ध फ़ुटबॉलर की तस्वीर.

हालांकि, व्लादिमीर जब आज के रूस की तस्वीर गढ़ते हैं, तो वो बेहद अंधकारमय दिखती है.

रूस राष्ट्रपति चुनाव

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ये 86 वर्षीय कलाकार मुझसे कहते हैं, "मैं इसे महत्वकांक्षाओं का शिखर कहता हूं."

वह अपने घर पर मुझे जो पेंटिंग दिखा रहे थे उसमें मार्शल आर्ट की यूनिफ़ॉर्म पहने एक शख्स इंसानी खोपड़ियों के पहाड़ पर बंधी रस्सी पर चलते दिखाया गया है.

वो कहते हैं, "सत्ता में ऊंचे पद पर बैठे किसी व्यक्ति की महत्वाकांक्षा इस स्थिति तक पहुंच सकती है."

ग्राफ़िटी से प्रशासन में नाराज़गी

रूस का राष्ट्रपति चुनाव
इमेज कैप्शन, बोरोव्स्क की दीवारें व्लादिमीर ओवचिनिवोक की कला से रंगी हुई हैं
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इससे भी अधिक नाटकीय उनकी वह तस्वीर है जिसमें दो मीट पीसने वाले ग्राइंडर लोगों को काट रहे हैं. इनमें से एक पर साल 1937 का लेबल है (स्टालिन के आतंक के लिए जाना जाने वाला वर्ष), दूसरे पर विशेष सैन्य अभियान (यूक्रेन में रूस का युद्ध) का लेबल है.

अपनी बात ख़त्म करते हुए व्लादिमीर कहते हैं, "हमने कोई सबक नहीं सीखा."

व्लादिमीर ने जब यही मीट वाली ग्राफ़िटी एक दीवार पर बना दी थी, तो उनपर रूसी सेना के 'अपमान' के लिए जुर्माना लगाया गया था.

यही उनके साथ तब भी हुआ जब उन्होंने एक स्ट्रीट आर्ट में एक बच्ची पर मिसाइल गिरते हुए दिखाया, जिसने यूक्रेन के नीले और पीले रंग वाले कपड़े पहने थे.

व्लादिमीर अपनी कला का इस्तेमाल न सिर्फ़ मौजूदा वक्त पर टिप्पणी करने के लिए करते हैं बल्कि वह इससे रूस के अतीत पर भी रोशनी डालते हैं.

यूक्रेन में जारी जंग को लेकर बनाई उनकी ग्राफ़िटी रूसी प्रशासन में नाराज़गी की वजह बना था.

व्लादिमीर ने मुझसे कहा, "मेरी पेंटिंग लोगों को सोचने पर विवश करती है कि क्या हम सही हैं या फिर इस जंग में हम ग़लत हैं? मेरा मानना है कि ये एक पड़ोसी देश की क्षेत्रीय अखंडता के ख़िलाफ़ है. अगर मैं चुप रहता हूं तो मैं इसका मतलब है मैंने सब माफ़ कर दिया."

"बहुत से लोग चुप रहते हैं क्योंकि उन्हें डर है कि उनका दमन किया जा सकता है, नौकरी जा सकती है और वे आलोचनाओं का शिकार बन सकते हैं."

रूस का राष्ट्रपति चुनाव
इमेज कैप्शन, व्लादिमीर कहते हैं कि उनकी पेंटिंग लोगों को यूक्रेन युद्ध के बारे में सोचने पर विवश करती है

बीते दिनों जेल में विपक्षी नेता एलेक्सी नवेलनी की जेल में मौत के बाद, व्लादिमीर ने उनका एक चित्र स्थानीय स्मारक स्थल पर लगाया जो राजनीतिक दमन का शिकार बने लोगों के सम्मान में बनाया गया था.

व्लादिमीर ने मुझसे कहा, "किसी ने उसी दिन उसे हटा दिया. लेकिन घर पर मैंने एक कार्डबोर्ड पर एक रफ़ ड्राफ़्ट पेंट किया. बाद में मैंने इसे ले जाकर स्मारक पर रख दिया."

व्लादिमीर रूस के भविष्य को किस तरह से देखते हैं?

इसपर उन्होंने कहा, "कुछ लोगों का अनुमान है कि देश में दमन और बढ़ेगा और हम पूरी तरह तानाशाही वाली व्यवस्था की ओर बढ़ रहे हैं."

राष्ट्रपति की छवि

व्लादिमीर पुतिन

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इमेज कैप्शन, व्लादिमीर पुतिन पाँचवीं बार चुनाव जीतने की राह पर हैं

व्लादिमीर ओवचिनिकोव ने मुझसे कहा कि वह कभी टेलीविज़न नहीं देखते.

अगर उन्होंने ऐसा किया, तो उन्हें सरकारी टीवी पर रूस की अलग ही छवि दिखाई देगी, जो रूस को लेकर राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का वर्ज़न होगा.

वो कहते हैं कि टीवी पर उन्हें जो दिखता वो विदेशों में आक्रामक और घर में दमनकारी रूस नहीं है. यह गौरवशाली अतीत और उतने ही गौरवशाली भविष्य वाला रूस है. उन नायकों और देशभक्तों का रूस जो बाहरी आक्रमण से मातृभूमि की रक्षा के लिए झंडे के चारों ओर घूम रहे हैं. यह वह रूस है जो अपने मौजूदा नेता से प्यार करता है.

कुछ दिन पहले रूस के चैनल वन के शाम के न्यूज़ बुलेटिन में एक फुटेज दिखी जिसमें राष्ट्रपति पुतिन का लोग ठीक वैसे स्वागत कर रहे थे जैसे किसी पॉप स्टार का.

एक महिला रुआंसी आवाज़ में कहती हैं, "अपना ध्यान रखिए." इसके बाद वह पुतिन को चूमती हैं.

एक शख्स चिल्लाता है, "ज़िंदाबाद!"

अगर कोई ख़बरों के लिए सिर्फ़ चैनल वन पर निर्भर है तो शायद वह ये निष्कर्ष निकालेंगे कि व्लादिमीर पुतिन के राष्ट्रपति चुनाव में बड़ी जीत की संभावना है.

लेकिन पेंटिंग की तरह ही, यहां भी संदर्भ महत्वपूर्ण है. और यहां संदर्भ बहुत ज़रूरी है.

रूस में सरकार का न केवल टेलीविज़न पर नियंत्रण है, बल्कि वह चुनाव सहित पूरी राजनीतिक व्यवस्था को चलाता है.

पुतिन के ख़िलाफ़ खड़े उम्मीदवार क्या कहते हैं?

राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार निकोलाई खारितोनोव (बाएं)
इमेज कैप्शन, राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार निकोलाई खारितोनोव (बाएं)

राष्ट्रपति पुतिन के सामने कोई बड़ी चुनौती नहीं है. उनके सबसे मुखर आलोचकों या तो देश छोड़कर चले गए हैं या फिर रूस की जेल में बंद हैं. उनके धुर विरोधी रहे विपक्षी नेता अलेक्सी नवेलनी की मौत हो चुकी है.

लेकिन रूस को ये दावा करना पसंद है कि वहां दुनिया का 'सबसे अच्छा लोकतंत्र' है. इसलिए बैलट पर पुतिन के अलावा आधिकारिक तौर पर तीन और उम्मीदवार हैं.

इनमें से एक के साथ मैं हाल ही में टकराया. ये बेहद अजीब अनुभव था.

मैंने कम्युनिस्ट पार्टी के प्रत्याशी निकोलाई खारितोनोव से पूछा, "आपको क्यों लगता है कि आप पुतिन से बेहतर राष्ट्रपति होंगे?"

उन्होंने कहा, "इस पर मेरा जवाब देना नहीं बनता. ये सही नहीं होगा."

मैंने अपने सवाल जारी रखते हुए उनसे पूछा, "लेकिन क्या आपको लगता है कि आपका घोषणापत्र पुतिन से बेहतर है?"

उन्होंने जवाब दिया, "ये मतदाता तय करेंगे."

मैंने पूछा, "लेकिन आप क्या सोचते हैं?"

उन्होंने कहा, "मैं क्या सोचता हूं ये मायने नहीं रखता. सब कुछ मतदाताओं पर निर्भर है."

पुतिन के ख़िलाफ़ खड़े उम्मीदवार

रूस राष्ट्रपति चुनाव

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इमेज कैप्शन, रूसी राष्ट्रपति चुनाव में पुतिन के ख़िलाफ़ तीन उम्मीदवार हैं. (बाएं से) न्यू पीपुल्स पार्टी नेता व्लादिस्लाव दवानकोव, मौजूदा राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, लीबरल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ़ रशिया के नेता लियोनिड स्लट्स्की और कम्युनिस्ट पार्टी नेता निकोलाई खारितोनोव.

अपनी बात करने की बजाय खारितोनोव ने पुतिन की तारीफ़ की.

उन्होंने कहा, "आज व्लादिमीर पुतिन 1990 के दशक की कई समस्याओं को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं, जब येल्त्सिन ने रूस को पूंजीवाद की ओर खींच लिया था. वह सभी क्षेत्रों में जीत के लिए देश को एकजुट कर रहे हैं और ये होगा."

कुछ बातों से मुझे लगा कि निकोलाई खारितोनोव दिल से इस चुनावी दौड़ में नहीं हैं.

एक राजनेता बोरिस नादेज़दिन थे, जिन्हें कोशिशों के बावजूद बैलट पर जगह नहीं मिली. वो युद्ध विरोधी नज़रिए के लिए जाने जाते हैं.

नादेज़दिन ने मुझसे कहा, "हमारे राष्ट्रपति चुनाव के बारे में ये कहना एकदम असंभव है कि ये निष्पक्ष और पारदर्शी हैं."

उन्होंने दावा किया कि उन्हें चुनाव लड़ने से इसलिए रोका गया क्योंकि उनका युद्ध-विरोधी संदेश तेज़ी से लोकप्रिय हो रहा था.

वह कहते हैं, "कई सर्वे ये दिखाते हैं कि रूस में क़रीब 30-35 फ़ीसदी लोग मेरे जैसे प्रत्याशी को वोट करना चाहते हैं, जो शांति की बात करता है. ये सरकार के लिए बिल्कुल असंभव परिणाम है."

व्लादिमीर पुतिन

चुनाव पर क्या सोचते हैं रूस के लोग?

वापस बोरोव्स्क की गलियों में आते हैं. यहां प्रोतवा नदी के पुल पर खड़े होकर मैं नज़ारों का आनंद ले रहा हूं. यहां से ये पूरा शहर खुद किसी पेंटिंग की तरह दिखता है.

शहर में पहाड़ी के ऊपर एक ख़ूबसूरत चर्च है, जिसके नीचे बर्फ़ से ढंके घर हैं. गर्म कोट पहने लोग बर्फ़ीले रास्तों पर सावधानी बरतते हुए चल रहे हैं.

मैं भी जनता का मूड जानने के लिए शहर में घूम रहा था. बोरोव्स्क की सड़कों पर लोग युद्ध, चुनाव और अपने राष्ट्रपति के बारे में क्या सोचते हैं?

स्वेतलाना नाम की एक युवती ने मुझसे कहा, "कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि आप कैसे वोट करते हैं, सब कुछ पहले से तय है. मुझे इसमें (चुनाव) हिस्सा लेने का कोई मतलब नहीं दिखता."

लेकिन यहां कई लोग, ख़ासतौर पर बुज़ुर्ग रूसियों ने मुझे बताया कि वे वोट करेंगे. जब मैंने लोगों से बात की तो ये साफ़ हो गया कि जैसा टीवी पर दिखता है, रूस में पुतिन के अनेकों समर्थक हैं.

रूस में राष्ट्रपति चुनाव

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लुदमिला ने मुझसे कहा, "मुझे उम्मीद है कि व्लादिमीर पुतिन चुनाव जीतेंगे और इससे युद्ध ख़त्म हो जाएगा. इतने सारे युवा मारे गए हैं. जब शांति होगी तो कई देश आख़िरकार ये समझ जाएंगे कि रूस को हराया नहीं जा सकता."

मैंने पूछा, "आप क्यों चाहती हैं कि पुतिन जीतें? आख़िरकार वे वही शख्स हैं जिन्होंने ये विशेष सैन्य अभियान शुरू किया."

लुदमिला मानती हैं कि इसको लेकर लोगों की अलग-अलग राय है. उन्होंने कहा, "कुछ लोग कहते हैं कि ये युद्ध कभी शुरू नहीं किया जाना चाहिए था. कुछ कहते हैं कि वह (पुतिन) सही थे. मैं अभी उनको लेकर कोई राय नहीं बनाऊंगी. हमें सभी राजनीतिक पहलुओं के बारे में नहीं पता. पुतिन क़रीब पच्चीस सालों से सत्ता में हैं."

मैंने बीच में टोका, "क्या 14.5 करोड़ आबादी वाले देश में कोई दूसरा ऐसा नहीं जो उनकी (पुतिन) जगह ले पाए?"

लुदमिला ने जवाब दिया, "ऐसा नहीं है, हमारे देश में कई प्रतिभाशाली नेता हैं जो किसी आपात स्थिति में देश को चला सकते हैं."

निकोलाई खारितोनोव कहते हैं कि वो भी मौजूदा राष्ट्रपति के लिए वोट करेंगे.

वह कहते हैं, "हमारे पास ऐसे कई नेता हैं जिन्होंने लंबे समय तक शासन किया. कुछ अच्छे और कुछ बुरे. हमारे पास स्टालिन और ब्रेज़नेव थे. आप एक नेता को बदल सकते हैं, लेकिन इससे हमारे जीवन पर कोई बड़ा फ़र्क नहीं पड़ेगा."

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