ट्रंप ने भारत पर टैरिफ़ लगाने के बारे में अब क्या कहा?

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप

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इमेज कैप्शन, ट्रंप ने अब सभी देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ़ लगाने की घोषणा कर दी है लेकिन यह साफ़ नहीं है कि यह उत्पाद पर लगेगा या सेक्टर पर

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा कर दी है कि दोस्त हो या दुश्मन, सब पर रेसिप्रोकल टैरिफ़ लगाएंगे.

उन्होंने इस बीच ये भी दावा किया है कि भारत अमेरिकी सामान पर लगाने वाले टैरिफ़ में कटौती करने को तैयार हो गया है.

रेसिप्रोकल टैरिफ़ के मायने ये हैं कि यानी जितना टैरिफ़ दूसरे देश अमेरिका से आयात किए उत्पादों पर लगाते हैं, उतना ही अमेरिका अब उन देशों से आयात किए सामान पर लगाएगा.

फ़िलहाल तो इसका मतलब ये समझ आता है कि अगर भारत अमेरिका के जूतों पर 26.1% टैरिफ़ लगाता है तो अमेरिका भी भारत से आयात जूतों पर इतना ही टैरिफ़ लगाएगा.

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ट्रंप ने चीन, मैक्सिको, कनाडा पर टैरिफ़ लगाए और अपने भाषण में भारत का भी नाम लिया. उन्होंने कहा कि भारत हम पर 100 फ़ीसदी टैरिफ़ लगाता है.

हालांकि, ये 100 फ़ीसदी टैरिफ़ हर उत्पाद पर नहीं है. टैरिफ़ अलग-अलग प्रोडक्ट्स पर अलग-अलग है.

जैसे अमेरिका से आयातित मिनरल पर भारत 9.2, जूतों पर 26.1, और कपड़ों या टैक्सटाइल पर 24.8 फीसदी टैरिफ़ लगाता है.

ये भी ज़रूरी नहीं कि हर देश के उत्पादों पर इतना ही टैरिफ़ लगाया जाता है. इन्हीं सब उत्पादों को जब इंडोनेशिया, मलेशिया या फिलीपींस से भारत आयात करता है तो कम टैरिफ़ लगाता है.

भारत ने क्या कहा है?

अमेरिका में ट्रंप के साथ पीएम मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर

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अमेरिकी टैरिफ़ को लेकर चीन, कनाडा और मैक्सिको ने कड़ी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने भी अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ़ लगा दिए हैं. चीन ने तो विश्व व्यापार संगठन में अमेरिका की शिकायत भी की है लेकिन भारत की प्रतिक्रिया ऐसी नहीं है.

भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जानकारी दी है कि वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल अमेरिकी सरकार के साथ नेगोशिएट करने की कोशिश कर रहे हैं.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने रेसिप्रोकल टैरिफ़ को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा था कि भारत का उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) के जरिए दो तरफ़ा व्यापार को मजबूत करने का है.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी विशाखापत्तनम में एक कार्यक्रम के दौरान बताया है. निर्मला सीतारमण ने कहा कि 'इस बढ़े हुए टैरिफ़ का प्रभाव भारत पर पड़ेगा, अभी देखना होगा कि अमेरिका के साथ बातचीत का क्या हल निकलता है.'

भारत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिकी दौरे से पहले कुछ उत्पादों पर आयात शुल्क घटाने की घोषणा की थी. बर्बन व्हिस्की, वाइन, लक्ज़री मोटरसाइकिल, फोन बनाने के लिए ज़रूरी पार्ट्स वगैरह इसमें शामिल हैं.

पीएम मोदी ने इस दौरे पर अमेरिका से ऊर्जा और रक्षा उपकरण की खरीद ज़्यादा बढ़ाने की भी बात की. इसके बावजूद ट्रंप ने फॉक्स न्यूज़ पर इंटरव्यू में कहा कि सभी देश टैरिफ़ लगा कर हमारा फ़ायदा उठा रहे हैं.

उन्होंने साथ बैठे एलन मस्क की तरफ़ इशारा करते हुए कहा कि ये देश इनके लिए कार बेचना नामुमकिन बना रहे हैं, जैसे भारत. इस पर एलन मस्क ने कहा कि हां, वहां इंपोर्ट ड्यूटी 100 फ़ीसदी है.

निर्मला

भारत के साथ ऐसा क्यों कर रहे हैं ट्रंप?

समुद्र में तेल का रिग

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इमेज कैप्शन, भारत अपनी ज़रूरत का क़रीब 80 प्रतिशत तेल आयात करता है.

दरअसल, ट्रंप चाहते हैं कि दूसरे देशों की कंपनियां अमेरिका में ही उत्पाद बनाएं या फिर अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ़ हटा या कम कर दें. जिससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था को फ़ायदा हो सके .

यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव की वेबसाइट के मुताबिक 2024 में अमेरिका और भारत के बीच 129.2 अरब डॉलर का व्यापार हुआ. इसमें अमेरिका ने 41.8 अरब डॉलर का सामान भारत भेजा, वहीं भारत ने 87.4 अरब डॉलर का सामान अमेरिका भेजा.

यही बात ट्रंप को नागवार गुजर रही है. वो कह रहे हैं कि अमेरिका का व्यापार घाटा बढ़ गया है. वह निर्यात कम कर रहे हैं और आयात ज्यादा कर रहे हैं.

इसका मतलब कि वह खर्चा ज़्यादा कर रहे हैं और कमाई कम कर रहे हैं. चीन की वजह से तो ये व्यापार घाटा बहुत ही ज़्यादा है और भारत की वजह से भी अमेरिका व्यापार घाटा बढ़ा है.

भारत के पास क्या विकल्प है?

अमेरिका में वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल

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इमेज कैप्शन, लक्ज़री उत्पादों पर भी टैरिफ़ बढ़ाया जा सकता है.

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल अमेरिका में हैं और यूएस ट्रेड रिप्रेंजेंटेटिव से बात कर रहे हैं.

विशेषज्ञों का कहना है​ कि भारत को देखना चाहिए कि कौन से ऐसे उत्पाद हैं जिससे टैरिफ़ हटाने पर ज्यादा नुकसान नहीं होगा.

उस पर ट्रंप सरकार के मुताबिक नेगोशिएट किया जा सकता है.

लक्ज़री उत्पादों पर भी टैरिफ़ बढ़ाया जा सकता है. उससे आम लोगों पर प्रभाव नहीं पड़ेगा वहीं मध्यम वर्ग वाले उत्पादों से टैरिफ़ घटाए जा सकते हैं.

भारत पर टैरिफ़ का कितना असर पड़ सकता है?

 दवाइयां

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इमेज कैप्शन, टैरिफ़ की वजह से दवाइयां अमेरिका में महंगी हुई तो इस सेक्टर पर प्रभाव पड़ सकता है

ट्रंप की घोषणा के बाद यह साफ नहीं हुआ है कि टैरिफ़ उत्पादों के अनुसार लागू होंगे या फिर पूरे सेक्टर पर लागू किया जाएगा. अमेरिका अगर उत्पादन के अनुसार रेसिप्रोकल टैरिफ़ लगाता है तो भारत पर ज्यादा असर नहीं होगा.

भारत जो उत्पाद अमेरिका को भेजता है वह उत्पाद अमेरिका भारत को नहीं भेजता है लेकिन पूरे सेक्टर पर टैरिफ़ लगता है तो फिर भारत के कुछ उत्पादों के निर्यात पर असर होगा.

भारत टेक्सटाइल और कृषि उत्पादों में भारत काफ़ी टैरिफ़ लगाता है. ऐसे में अमेरिका ने भी अगर उतना ही टैरिफ़ उन्हीं सेक्टर पर लगा दिया तो भारत के लिए काफी मुश्किल हो जाएगी.

भारत फार्मा सेक्टर में भी एक बड़ा एक्सपोर्टर है. टैरिफ़ की वजह से दवाइयां अमेरिका में महंगी हुई तो इस सेक्टर पर प्रभाव पड़ सकता है. निर्यात घट सकता है.

1 फरवरी 2025 को जारी सरकारी नोटिफ़िकेशन बताता है कि 2023-24 में भारत का एक्सपोर्ट 778.21 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है. इसकी सबसे बड़ी वजह इलेक्ट्रोनिक्स, फार्मा, इंजिनियरिंग गुड्स, और कृषि उत्पादों की वजह से हुई है.

भारत के एक्सपोर्ट के लिए ये सभी सेक्टर्स महत्वपूर्ण हैं. आने वाले दिनों में पता चलेगा कि ट्रंप किस तरह भारत पर टैरिफ़ लगाएंगे और किन सेक्टर्स में इसका प्रभाव दिखेगा.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

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