‘पर्थ का घमंड’ तोड़ने के बाद ये है टीम इंडिया की अगली चुनौती

बुमराह और कोहली

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इमेज कैप्शन, जसप्रीत बुमराह की कप्तानी में भारतीय टीम ने ऑस्ट्रेलिया को 295 रनों से हराया है
    • Author, विमल कुमार
    • पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, ऑप्टस स्टेडियम, पर्थ से

‘टूटा है गाबा का घमंड’… पूर्व टेस्ट गेंदबाज़ और अब कमेंटेटर की भूमिका में नज़र आने वाले विवेक राज़दान की पिछले ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर कही गई ये बात भारतीय क्रिकेट इतिहास की यादगार स्मृतियों का अभिन्न हिस्सा है.

जसप्रीत बुमराह और उनके साथियों ने सोमवार को अगर पर्थ में भी राज़दान की इसी बात को दोहराते हुए कहा हो- ‘टूटा है पर्थ का घमंड’ तो ग़लत नहीं होगा.

हो सकता है कि बहुत सारे जानकार ये याद दिलाएं कि 2008 में अनिल कुंबले की टीम ने भी इस शहर में पहली बार टेस्ट जीता था, लेकिन वो पुराना मैदान वाका था जबकि ये नया स्टेडियम ऑप्टस है जहां इससे पहले टेस्ट क्रिकेट में ऑस्ट्रेलिया ने हार का मुंह देखा ही नहीं था.

शायद न्यूज़ीलैंड के हाथों घर में ही टीम इंडिया को पिटता देख ऑस्ट्रेलियाई कप्तान पैट कमिंस और उनके कई सीनियर साथियों ने लाल गेंद से किसी मैच में टेस्ट सिरीज़ के लिए अभ्यास करना भी उचित नहीं समझा.

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बुमराह की दरियादिली

जसप्रीत बुमराह

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इमेज कैप्शन, जसप्रीत बुमराह ने पहली पारी में 5 और दूसरी पारी में 3 विकेट लिए

कमिंस ने आख़िरी बार मार्च में न्यूज़ीलैंड दौरे पर टेस्ट खेला था और उन्हें ऐसा लगा होगा कि जिस टीम में रोहित शर्मा न हों, जब मोहम्मद शमी न आ रहे हों तो उतना क्या घबराना? शायद वो यहीं चूक गए!

अपने दूसरे टेस्ट में कप्तानी करते हुए जसप्रीत बुमराह ना सिर्फ़ ख़तरनाक तेज़ गेंदबाज़ी का नज़ारा पेश करते हुए पहली पारी में 5 और दूसरी पारी में 3 विकेट लेकर मैन ऑफ़ द मैच बने, बल्कि एक लीडर की तरह दरियादिली भी दिखाई.

बुमराह ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस के दौरान मेरे एक सवाल के जवाब में कहा, "अगर मुझे मैन ऑफ़ द मैच चुनने को कहा जाता तो मैं यशस्वी जायसवाल को चुनता क्योंकि उन्होंने इस मैच में अपने टेस्ट की सबसे लाजवाब पारी खेली."

मैच ख़त्म होने के बाद टीम इंडिया का जश्न जब ड्रेसिंग रूम में ख़त्म हो गया तब बुमराह पिच पर दोबारा लौटे और उन्होंने दूर स्टैंड में बैठे अपने बेटे और पत्नी संजना गणेशन की तरफ इशारा करते अभिवादन किया और प्यार जताया.

जब मैंने उनसे दोबारा पूछा कि आख़िर इस पल के क्या मायने थे तो वो थोड़े भावुक होते भी दिखे.

उन्होंने कहा, “देखिये, मेरा बेटा टी20 वर्ल्ड कप में भी मुझे खेलते देख चुका है लेकिन उसे क्या ही याद रहेगा और यहां भी उसने मुझे जीतते देखा और ये भी शायद उसे याद ना रहे, लेकिन मेरे पास उसे सुनाने के लिए कई यादगार कहानियां तो होंगी.”

कई खिलाड़ियों के लिए यादगार कहानियां

विराट कोहली और यशस्वी जायसवाल

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इमेज कैप्शन, विराट कोहली और यशस्वी जायसवाल ने दूसरी पारी में शतक लगाया
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मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ.

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यादगार कहानियां तो इस मैच में टीम इंडिया के हर खिलाड़ी के पास होगी.

इस मैच में अगर देवदत्त पड्डीकल और ध्रुव जुरैल को छोड़ दिया जाए तो शायद हर खिलाड़ी के लिए ये मैच हमेशा यादगार रहेगा.

ओपनर केएल राहुल ने अपने आदर्श राहुल द्रविड़ की राह पर चलते हुए फिर से एक मुश्किल विदेशी टेस्ट में अतिरिक्त ज़िम्मेदारी लेते हुए अल्टीमेट टीम मैन की भूमिका निभाई और दूसरी पारी में 77 रन बनाए.

इसकी वजह से दोहरे शतक वाली साझेदारी ने ऐसा चट्टानी आधार दिया कि पिच के टूटने से पहले ऑस्ट्रेलिया के हौसले ही टूट गये.

22 साल के जायसवाल ने अपनी उम्र और अनुभव को झुठलाते हुए 161 रनों की ऐसी यादगार पारी खेली जिसकी सचिन तेंदुलकर के 114 रन (1991 में पर्थ में ही) और विराट कोहली के 2018 वाले शतक (पर्थ में ही) से भी तुलना हो सकती है.

वहीं, कोहली तो कोहली हैं और तेंदुलकर की ही तरह ऑस्ट्रेलिया उन्हें भरपूर रास आता है.

जिस बल्लेबाज़ ने पिछले पांच सालों में महज़ दो शतक लगाए हो और अपने करियर के शायद सबसे संघर्षपूर्ण दौर से गुज़र रहा हो, वो अचानक ही ऑस्ट्रेलिया में कदम रखते ही जायसवाल की तरह 22 साल का युवा बन जाता है. टीम की जीत में एक यादगार नाबाद शतक भी जड़ देता है.

भारत और ऑस्ट्रेलिया

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इमेज कैप्शन, भारत ने 5 मैचों की टेस्ट सिरीज़ में 1-0 की बढ़त हासिल कर ली है

भारत के सामने अगली चुनौती है एडिलेड

कप्तान बुमराह के मुताबिक कोहली कभी भी ऑउट ऑफ़ फ़ॉर्म नहीं थे. उन्होंने ये भी कहा कि टीम को कोहली की ज़रूरत है और कोहली को खुद को किसी के सामने इस स्टेज में साबित करने की कोई ज़रूरत नहीं है.

टीम इंडिया के लिए 5 टेस्ट मैचों की सिरीज़ में खुद के दबदबे को साबित करने के लिए अभी सिर्फ़ शुरुआत ही हुई है.

नियमित कप्तान रोहित शर्मा रविवार शाम को पर्थ पहुंचते ही होटल में पहुंचे और करीब 22 घंटे बाद नैट्स में अभ्यास करते हुए नज़र आये.

रोहित को पता है कि गुलाबी गेंद से एडिलेड में चुनौती आसान नहीं होगी क्योंकि पिछली बार उस मैदान पर टीम पहली पारी में 36 रन पर ऑलआउट हो गई थी.

बहरहाल, जिस तरह से ऋषभ पंत ने पहली पारी में एक बेहद उपयोगी पारी खेली, हर्षित राणा ने अपने पहले ही मैच में कमाल दिखाया.

नीतीश रेड्डी ने ये दिखाया कि हार्दिक पंड्या जैसा ही ऑलराउंडर अब लाल गेंद की क्रिकेट में शायद भारत को मिल चुका है.

नीतीश कुमार रेड्डी

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इमेज कैप्शन, नीतीश रेड्डी ने पर्थ टेस्ट से अंतरराष्ट्रीय टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू किया है

ऑफ़ स्पिनर वॉशिंगटन सुंदर ने भी अपने बल्ले से उपयोगी पारी खेलने के अलावा विकेट भी झटके और दिखाया कि कोच गौतम गंभीर उनकी काबिलियत पर इतना भरोसा क्यों करते हैं. मुमकिन है कि भारतीय क्रिकेट में अश्विन-जडेजा के बाद वाला दौर भी शुरू हो चुका है.

न्यूज़ीलैंड की टीम से हारे अभी एक महीने भी पूरे नहीं हुए थे कि भारत के कई जानकारों ने टीम इंडिया के पतन की भविष्यवाणी करनी शुरू कर दी थी. लेकिन, पिछले दो दौरों पर इस टीम ने दिखाया है कि ऑस्ट्रेलिया उनसे हमेशा ज़ोरदार प्रदर्शन करवाने में कामयाब होता है ऐसे में क्या मुमकिन है कि लगातार तीसरी बार सिरीज़ जीत का सपना देखा जा सकता है?

फिलहाल, ऐसा सोचना बहुत जल्दबाज़ी होगी क्योंकि इन दोनों टीमों का हालिया इतिहास ये बताने के लिए काफी है कि जब-जब दोनों एक-दूसरे को थोड़ा भी हल्का लेते हैं, दूसरी टीम ज़ोरदार पलटवार करती है.

बुमराह और रोहित को इस बात का बखूबी एहसास है. लेकिन, फिलहाल मौका है चार दिनों के भीतर पर्थ में 295 रनों से मिली जीत का जश्न मनाने का क्योंकि भारतीय क्रिकेट में ऐसी शामें विदेशी ज़मीं पर बहुत कम ही देखने को मिलती हैं.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

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