ऑस्ट्रेलिया में इन वजहों से मुश्किल होगी टीम इंडिया की राह

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- Author, शारदा उगरा
- पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
भारतीय टेस्ट टीम को न्यूज़ीलैंड के हाथों अपने ही मैदान पर लगातार तीन टेस्ट में हार का सामना करना पड़ा है. इस करारी हार के बाद टीम इंडिया को ऑस्ट्रेलिया जैसी मज़बूत टीम का सामना, उनके ही मैदानों पर करने जा रही है.
सिरीज़ का पहला मुक़ाबला 22 नवंबर से पर्थ की तेज़ पिच पर होना है.
पहले टेस्ट में रोहित शर्मा घरेलू वजह से हिस्सा नहीं ले पाएंगे और टीम की कमान जसप्रीत बुमराह को संभालनी होगी.
इस मुश्किल दौरे के लिए टीम की घोषणा के वक्त से ही भारतीय टीम की चुनौतियों को लेकर चर्चा हो रही है.

ऑस्ट्रेलियाई दौरे के लिए भारतीय टीम की घोषणा न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ सिरीज़ के दूसरे टेस्ट के दूसरे दिन हुई थी.
तब भारतीय टीम पहले टेस्ट में हार के बाद दूसरे टेस्ट की पहली पारी में 156 रनों पर सिमट गई थी.
इन सबका असर ऐसा था कि दुनिया को इस टीम के बारे में रात के दस बजे ईमेल के ज़रिए पता चला था.
पहली पारी में भारत की फ्लॉप बल्लेबाज़ी के साथ ही आशंका जताई जाने लगी थी कि घरेलू मैदान पर लगातार 18 टेस्ट सिरीज़ जीतने के बाद भारतीय टीम हार के कगार पर है.
ये आशंका पुणे टेस्ट के बाद हक़ीक़त में तब्दील हुई और मुंबई में तीसरे मैच में हार के बाद टीम की साख पर भी बट्टा लगा.
दबाव में भारतीय टीम

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न्यूज़ीलैंड के हाथों मिली हार ने ऑस्ट्रेलियाई दौरे के लिए भारतीय टीम को और दबाव में ला दिया है.
बांग्लादेश को 2-0 से हराने के बाद अगर भारतीय टीम न्यूज़ीलैंड को भी सिरीज़ के तीनों मैच में हराती तो लगातार पांच टेस्ट जीत के साथ जून, 2025 में होने वाली वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फ़ाइनल में टीम को प्रवेश मिल जाता.
इससे ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर किसी तरह का अतिरिक्त दबाव नहीं होता. सिरीज़ के शुरू होने से पहले टीम इंडिया के खिलाड़ियों के घायल होने की ख़बरें भी आ रही हैं.
लेकिन, टीम चयन के वक्त से ही इस पूरी टीम को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं. इस टीम को लेकर लगातार ये सवाल उठाया जा रहा है कि भारतीय बल्लेबाज़ी कमजोर दिख रही है.
बीते कुछ सालों में भारतीय क्रिकेट में नई प्रतिभाएं सामने आती रही हैं और इसको लेकर गर्व का भाव भी दिखा है.
एक दौर ऐसा भी आया जब दावा किया जाने लगा कि हर फॉर्मेट की टीम में एक-एक जगह के तीन-तीन दावेदारों में होड़ है.
ये भी माना जाने लगा था कि विश्व स्तर पर भारतीय टीम किसी भी टीम को टक्कर देने की स्थिति में है.
सीमित ओवरों के क्रिकेट को लेकर इन दावों में थोड़ी सच्चाई भी थी, लेकिन टेस्ट क्रिकेट में भारत के पास बहुत ज़्यादा विकल्प कभी नहीं दिखे.
भारत की क्या कमजोरी

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हमारे पास स्ट्रोक्स खेलने वाले बल्लेबाज़ ज़रूर हैं, लेकिन उनके दमदार विकल्प नहीं दिखते. विकेट पर टिकने वाले बल्लेबाज़ों का भी अभाव है.
ऐसे में अगर इंजरी ने टीम के खिलाड़ियों को ज़्यादा परेशान किया तो ऑस्ट्रेलियाई मैदान पर खेलने वाली टीम के पास ना तो अनुभव होगा और ना ही फॉर्म.
यह बल्लेबाज़ी और गेंदबाज़ी, दोनों पहलूओं पर टीम की कमजोरी को दर्शाता है. न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ सिरीज़ में भारतीय बल्लेबाज़ों की कमजोरी भी ज़ाहिर हुई थी.
बल्लेबाज़ों की इसी कमजोरी के चलते ही टेस्ट मैच पांच दिनों के बदले तीन से चार दिन के भीतर समाप्त हो रहे हैं.
भारतीय टीम में ऐसा कोई बल्लेबाज़ नहीं दिखता जो घंटों विकेट पर टिक कर बल्लेबाज़ी करे और लंबी लंबी साझेदारी के साथ पारी को आगे बढ़ाए.
अगर टेस्ट मैच की पहली पारी में टीम 46 या फिर 153 रनों पर सिमट जाए तो घरेलू मैदान हो या फिर विदेशी पिच हो, टीम को कोई मदद नहीं मिलती.
रोहित-विराट पर निर्भर टीम

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भारतीय बल्लेबाज़ी काफ़ी हद तक रोहित शर्मा और विराट कोहली पर निर्भर है, लेकिन अगर बीते पांच सालों में इन दोनों के प्रदर्शन पर नज़र डालें तो इनका प्रदर्शन भी औसत नज़र आता है.
रोहित शर्मा के पांच सालों में 34 टेस्ट मैचों में 39 से कम की औसत से रन बनाए हैं जबकि विराट कोहली ने इसी दौरान 36 टेस्ट मैचों में 34 से कम की औसत से रन बनाए हैं.
इन दोनों के अलावा टीम की बल्लेबाज़ी काफ़ी हद तक चेतेश्वर पुजारा और अजिंक्य रहाणे पर निर्भर थी और ये दोनों बल्लेबाज़ टीम से बाहर हो चुके हैं.
इन दोनों को उम्र, फॉर्म और ज़रूरत के नाम पर टीम से बाहर किया गया है.
न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ सिरीज़ से स्पष्ट हुआ है कि टीम को आक्रामक क्रिकेट खेलने के साथ साथ रक्षात्मक ढंग से खेलने वालों की ज़रूरत है.
इसके अलावा केएल राहुल और शुभमन गिल में ऑस्ट्रेलियाई चुनौती से पार पाने जैसी परिपक्वता नहीं दिखती.

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केएल राहुल अब तक 53 टेस्ट खेल चुके हैं, लेकिन उनकी बल्लेबाज़ी की औसत 34 तक नहीं पहुंच सकी है जबकि 29 टेस्ट खेलने के बाद शुभमन गिल का औसत भी 36 के आसपास ही है.
अगर बीते पांच साल के प्रदर्शन के हिसाब से देखें तो 38 टेस्ट मैचों में 44 से ज़्यादा की औसत से ऋषभ पंत का रिकॉर्ड सबसे बेहतर है.
हालांकि इसी दौरान दस महीने तक भीषण कार एक्सीडेंट के चलते उन्हें क्रिकेट से दूर रहना पड़ा था. इसके अलावा यशस्वी जायसवाल और सरफ़राज़ ख़ान जैसे युवा बल्लेबाज़ों ने उम्मीद जगाई है.
यशस्वी जायसवाल ने 14 टेस्ट मैचों में 56 से ज़्यादा की औसत से रन बनाए हैं जबकि सरफ़राज़ ख़ान ने छह टेस्ट मैचों में 37 की औसत से रन बनाए हैं.
इन दोनों बल्लेबाज़ों के लिए ऑस्ट्रेलियाई दौरा बेहद निर्णायक साबित होने वाला है. अगर इस मुश्किल दौरे पर वे खुद को साबित करने में कामयाब हुए तो लंबे समय तक टीम में इनकी जगह पक्की हो सकती है.
गेंदबाज़ी भी बनेगी चुनौती

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बल्लेबाज़ी की मुश्किल के अलावा गेंदबाज़ी में टीम इंडिया के सामने चुनौती दिख रही है. मोहम्मद शमी सिरीज़ के पहले हॉफ़ तक शामिल नहीं हो पाएंगे.
इससे जसप्रीत बुमराह को मोहम्मद सिराज के साथ गेंदबाज़ी की कमान संभालनी होगी.
इस सिरीज़ से पहले खेली गई गावस्कर-बॉर्डर ट्राफ़ी में मोहम्मद सिराज ने तीन टेस्ट मैच में 11 विकेट झटकते हुए शानदार डेब्यू किया था.
बुमराह और सिराज के साथ तीसरे गेंदबाज़ी का विकल्प बहुत अनुभवी नहीं है.
आकाश दीप, प्रसिद्ध कृष्णा, हर्षित राणा और नीतीश कुमार रेड्डी- चारों के चारों गेंदबाज़ पहली बार टेस्ट सिरीज़ के लिए ऑस्ट्रेलिया का दौरा कर रहे हैं.

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स्पिन गेंदबाज़ी की कमान अश्विन और जडेजा के हाथों में होगा, जिनकी चमक अब पहले जैसी नहीं रही है.
लेकिन टीम को कुलदीप यादव को कमी सबसे ज़्यादा खल सकती है. कुलदीप ने अब तक ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ दो टेस्ट खेले हैं और दोनों में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया को परेशान किया है.
डेब्यू करते हुए कुलदीप ने 2017 में धर्मशाला में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ 99 रन देकर चार विकेट झटके थे. जबकि 2019 में सिडनी टेस्ट में उन्हेोंने 99 रन देकर पांच विकेट लिए थे.
पांच साल के बाद वे कहीं ज़्यादा मैच्योर गेंदबाज़ होकर उभरे हैं लेकिन ग्रॉइन इंजरी के चलते वे इस दौरे से बाहर है. वैसे भारतीय टीम पिछली चार बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफ़ी जीत चुकी है.
ऑस्ट्रेलिया ने दस साल पहले ये सिरीज़ जीती थी, तब बीच दौरे में एमएस धोनी ने टेस्ट से संन्यास ले लिया था.
ऐसा लग रहा है कि इस बार भाग्य और समय- दोनों टीम इंडिया के प्रतिकूल दिख रहे हैं. हालात बदलने के लिए टीम इंडिया को अपना पूरा दमखम झोंकना होगा.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित















