न्यूज़ीलैंड से सिरीज़ हारने के बाद भारतीय टेस्ट टीम के सीनियर खिलाड़ियों पर उठते सवाल

न्यूज़ीलैंड सिरीज़

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, न्यूज़ीलैंड के साथ तीन टेस्ट की मौजूदा सिरीज़ में पहले दो टेस्ट हार चुका है.
    • Author, संजय किशोर
    • पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए

बात 12 साल पुरानी है. साल 2012 में उद्योगपति मुकेश अंबानी और नीता अंबानी ने मुंबई में एक पार्टी रखी. यह समारोह सचिन तेंदुलकर के सौवें शतक के जश्न मनाने के लिए आयोजित किया गया था.

इसमें क्रिकेट और कारोबार से जुड़े लोगों के अलावा बॉलीवुड की मशहूर हस्तियाँ मौजूद थीं. स्वर कोकिला और सचिन तेंदुलकर की बहुत बड़ी प्रशंसिका लता मंगेशकर भी आयीं थीं और सचिन के अनुरोध पर उनके लिए गाना भी गाया…

“तू जहां-जहां चलेगा, मेरा साया साथ होगा…”

उस समारोह में भारत के दो बेहद प्रतिभाशाली बल्लेबाज़ भी मौजूद थे जिन पर सचिन की विरासत को आगे बढ़ाने की ज़िम्मेदारी थी.

बीबीसी हिंदी का व्हाट्सऐप चैनल
इमेज कैप्शन, बीबीसी हिंदी के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

नहीं निकल पाए आगे

मंच का संचालन कर रहे सलमान खान ने कहा, “सचिन का रिकॉर्ड तोड़ना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन है…सचिन क्या लगता है आपको कि क्या कोई आपका रिकॉर्ड तोड़ पाएगा? क्या लगता है आपको, तोड़ पाएगा? सीधे-सीधे बोल दो नहीं तोड़ पाएगा.”

ठहाकों के बीच सचिन तेंदुलकर का जवाब था, “आई थिंक इसी रूम में बैठे हुए हमारे यंगस्टर…मुझे नज़र आ रहे हैं यंगस्टर…रोहित और विराट…”

उस समय विराट कोहली 24 और रोहित शर्मा 25 साल के थे.

तब तक विराट ने 14 टेस्ट खेले थे और 38.17 की औसत से तीन शतक सहित 891 रन बना चुके थे. जबकि रोहित शर्मा का टेस्ट करियर शुरु भी नहीं हुआ था.

उस वाक़ये के क़रीब बारह साल बाद विराट कोहली और रोहित शर्मा का टेस्ट करियर अंतिम चरण में है. सचिन तेंदुलकर के कई रिकॉर्ड टूटे लेकिन इनमें से कोई सचिन तेंदुलकर नहीं बन पाया. ख़ासकर टेस्ट क्रिकेट में सचिन जैसा मुक़ाम कोई छू नहीं पाया.

सचिन तेंदुलकर के सौवें शतक के समारोह में शामिल दोनों यंगस्टर शतकों के मामले में उनसे अब शायद ही आगे निकल पाएँ. विराट कोहली के नाम जहां 81 अंतरराष्ट्रीय शतक हैं जबकि रोहित 48 ही शतक बना पाए हैं.

12 साल तक सिरीज़ नहीं हारने का रिकॉर्ड टूटा

न्यूज़ीलैंड

इमेज स्रोत, Getty Images

छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
कहानी ज़िंदगी की

मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ.

एपिसोड

समाप्त

न्यूज़ीलैंड के साथ तीन टेस्ट की मौजूदा सिरीज़ में भारत 0-2 से पिछड़ रहा है. भारतीय क्रिकेट टीम अपने घर में 12 साल बाद टेस्ट सिरीज़ हारी है वहीं न्यूज़ीलैंड 36 साल में बाद भारत में टेस्ट जीतने में कामयाब रही है और सिरीज़ पर तो पहली बार क़ब्ज़ा किया है. इस हार के पीछे भारतीय बल्लेबाज़ी के स्तंभ विराट कोहली और रोहित शर्मा की असफलता है.

कोहली ने न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ अब तक दो मैचों में सिर्फ़ 88 रन बनाए हैं, जिसमें एक अर्धशतक और एक शून्य पर आउट होना शामिल है. श्रृंखला में उनका 22 का औसत ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ 2016/17 श्रृंखला के बाद से घरेलू मैदान पर किसी प्रतिद्वंद्वी (कम से कम दो मैचों) के ख़िलाफ़ सबसे खराब औसत है, जहां पांच पारियों में 46 रन बनाने के बाद उनका औसत सिर्फ 9.2 था.

रोहित की स्थिति तो और भी ज़्यादा चिंताजनक है क्योंकि लगातार दूसरी बार, घरेलू टेस्ट श्रृंखला में (जहां उन्होंने कम से कम दो मैच खेले हैं) उनका औसत 15 से नीचे रहा है. पिछले महीने बांग्लादेश के साथ सिरीज़ में 13.50 की औसत से सिर्फ 27 रन बनाने के बाद, भारतीय कप्तान ने न्यूज़ीलैंड के खिलाफ अब तक 15.50 की औसत से 62 रन बनाए हैं.

चार दिग्गजों का आख़िरी टेस्ट?

आर अश्विन

इमेज स्रोत, ANI

एक नवंबर से मुंबई में न्यूज़ीलैंड के साथ शुरु हो रहे सिरीज़ के तीसरे और आख़िरी टेस्ट मैच में विराट कोहली और रोहित शर्मा के अलावा रविचंद्रन अश्विन और रविंद्र जडेजा भी शायद अंतिम बार वानखेड़े स्टेडियम में सफ़ेद कपड़ों में खेलते हुए नज़र आएँ.

यह आशंका इसलिए भी है क्योंकि भारत एक साल बाद अक्टूबर में घर में टेस्ट खेलेगा जब वेस्टइंडीज़ की टीम यहाँ आएगी. दूसरी वजह है कि ये चारों खिलाड़ी 35 साल के ऊपर के हैं. अगले एक साल तक फ़ॉर्म और फ़िटनेस बनाए रखना मुश्किल होगा.

इन चार दिग्गजों के समय में भारत ने तीन विश्व ख़िताब जीते. टीम दो बार वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फ़ाइनल में पहुँची और बारह साल तक टीम घरेलू मैदान पर टेस्ट सिरीज़ नहीं हारी.

2012 की सर्दियों में इंग्लैंड के हाथों 2-1 से टेस्ट सिरीज़ हारने के बाद से भारत ने घरेलू मैदान पर 55 टेस्ट खेले हैं, जिनमें से मेज़बान टीम ने 42 में शानदार जीत दर्ज की है और सिर्फ छह में उसे हार मिली है. उन 55 में से, चारों खिलाड़ियों ने एक साथ 22 टेस्ट खेले हैं, जिसमें 17 जीते हैं. इनमें से दो टेस्ट ड्रा रहे जबकि तीन में हार का सामना करना पड़ा. विडंबना यह है कि तीनों हार रोहित के हिस्से में आई हैं

दिसंबर 2020 तक विराट कोहली का करियर बुलंदियों पर था. विराट 87 टेस्ट में 53.41 की औसत से 7318 रन बना चुके थे जिसमें 27 शतक शामिल थे. साल 2021 से उनके करियर में ढलान शुरु हो गया. पिछले क़रीब तीन साल में उनका औसत 34.34 तक जा गिरा जिसका असर उनके करियर औसत पर पड़ी जो 50.34 से 48.31 तक गिर गया है. पिछले तीन साल में 30 टेस्ट में उन्होंने दो शतक समेत 1717 रन बना पाए हैं. पुणे में मिच सैंटनर की गेंद पर दो बार आउट हो जाने का मतलब है कि

उन्हें गेंद की लंबाई समझने में दिक्कत हो रही है. दाएं हाथ के बल्लेबाज़ को बाएं हाथ की स्पिन के साथ संघर्ष करना पड़ा. एशियाई मैदानों पर स्पिनरों के ख़िलाफ़ उनका औसत 28.3 शुभ संकेत तो बिल्कुल भी नहीं है.

दिनेश कार्तिक भी मानते हैं, “पिछले दो-तीन वर्षों में विराट कोहली का टेस्ट रिकॉर्ड स्पिन के ख़िलाफ़ अच्छा नहीं रहा है.”

विराट और रोहित का लचर प्रदर्शन

भारत

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में तीसरे टेस्ट के लिए प्रैक्टिस के दौरान भारतीय खिलाड़ी.

पूर्व भारतीय कोच और क्रिकेटर अनिल कुंबले की राय है कि कोहली को घरेलू क्रिकेट खेलने से फ़ायदा हो सकता था.

"शायद घरेलू मैचों में सिर्फ़ एक या दो पारियों से मदद मिल सकती थी.”

विराट कोहली के दो साल बाद साल 2013 में टेस्ट करियर की शुरुआत करने वाले रोहित शर्मा ने 2022 तक 45 टेस्ट मैचों में 46.13 की औसत से 3137 रन बनाए थे जिसमें 8 शतक शामिल थे.

मगर 2023 से उनके करियर औसत में गिरावट दर्ज होने लगी. जनवरी 2023 से कप्तान रोहित शर्मा ने 18 टेस्ट में 35.61 की औसत से 1104 रन बनाए हैं जिसमें चार शतक शामिल हैं.

रोहित शर्मा का एशिया में स्पिन के मुकाबले औसत 36.2 है. रोहित शर्मा की बल्लेबाज़ी में धैर्य की कमी नज़र आती है. शुरु से ही आक्रामकता दिखाने की उनकी कोशिश टीम पर भारी पड़ रही है.

सलामी बल्लेबाज और कप्तान रोहित, जब अपने करियर के चरम पर थे तो उनकी पहचान एक फ्री-स्कोरिंग और शानदार बल्लेबाज के तौर पर थी. उन्होंने 2018-19 और 2020-21 में ऑस्ट्रेलिया में दो श्रृंखला जीत में अहम भूमिका निभाई थी.

मगर पिछली आठ टेस्ट पारियों में छह बार दहाई के अंक तक भी नहीं पहुँच पाए हैं. उनके नाम सिर्फ एक अर्धशतक है.

इस साल की शुरुआत में वेस्टइंडीज़ में विश्व कप जीतने के बाद विराट कोहली और रोहित शर्मा ने टी20 अंतरराष्ट्रीय छोड़ दिया और अब टेस्ट क्रिकेट में दोनों के लचर प्रदर्शन से ऑस्ट्रेलिया में टीम की मुश्किलें बढ़नी तय हैं जहां उन्हें पाँच टेस्ट की सिरीज़ खेलनी है.

अपनी पिच पर विदेशी ज़्यादा सफल

न्यूज़ीलैंड

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, भारतीय क्रिकेट टीम मैनेजमेंट ने पुणे में टर्निंग ट्रैक बनवाया, लेकिन मेहमान टीम को फायदा हुआ.

बेंगलुरु की तेज़ पिच पर हारने के बाद भारतीय क्रिकेट टीम मैनेजमेंट ने पुणे में टर्निंग ट्रैक बनवाया. मगर यह दांव भी उल्टा पड़ गया. न्यूज़ीलैंड के स्लो लेफ़्ट आर्म ऑर्थोडॉक्स मिचेल सैंटनर ने पहली पारी में 53 रन देकर सात और दूसरी में 104 रन देकर छह शिकार बनाए. मैच में उनका बॉलिंग फ़िगर रहा 13/157

वहीं भारतीय स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने पहली पारी में 3 और दूसरी में दो विकेट लिए. आपको ये भी बता दें कि 2011 में ट कैप मिलने के बाद से अश्विन ने घरेलू मैदान पर सभी टेस्ट मैच खेले हैं.

अश्विन की गेंदों अब बल्लेबाज़ों को चकमा नहीं दे पा रही हैं. दिसंबर 2022 तक 88 टेस्ट में 24.30 की औसत और 2.77 की इकॉनमी से 449 विकेट लिए थे. साल 2023 से 16 टेस्ट में अश्विन ने 21.61 की औसत और 3.22 की इकॉनमी से 84 विकेट लिए हैं. जबकि उनका करियर इकॉनमी रहा है 2.83

इस साल इंग्लैंड ने उनके ख़िलाफ़ 4.12 और बांग्लादेश ने 3.31 की दर से रन बनाए. मौजूदा सिरीज़ में उनका इकॉनमी दर है 3.89

रविंद्र जडेजा की टेस्ट करियर दिसंबर 2012 में शुरु हुआ था. दिसंबर 2022 तक जडेजा ने 60 टेस्ट में 2.43 की इकॉनमी से 242 विकेट लिए. साल 2023 से उन्होंने 26 टेस्ट खेले हैं जिसमें 2.83 की इकॉनमी से 67 विकेट लिए हैं. कहा जा रहा है कि रविंद्र जडेजा का ध्यान अब भटक रहा है. बांग्लादेश ने उनके ख़िलाफ़ 3.27 की औसत से स्कोर किया, इंग्लैंड ने 3.24 की औसत से, जबकि न्यूज़ीलैंड ने उसके खिलाफ 3.24 की औसत से स्कोर किया है.

टर्बनेटर हरभजन सिंह और कमेंटेटर हरभजन सिंह ने हाल ही में कहा है कि अगर विराट कोहली और रोहित शर्मा ऑस्ट्रेलिया दौरे पर बेहतर प्रदर्शन करने में नाकाम रहे तो टेस्ट सिरीज़ उनके अंत का संकेत दे सकती है. अगर टीम विश्व टेस्ट चैंपियनशिप फ़ाइनल में जगह बनाने में विफल रहती है तो दोनों की मुश्किलें बढ़नी तय हैं

“कौन कहता है भरपाई नहीं होती. भरपाई बिलकुल होती है. गावस्कर साहब गए, तेंदुलकर साहब आए, तेंदुलकर साहब गए, हमें कोहली मिला और भविष्य में भी ऐसा होगा.”

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)