तिलक वर्मा को लेकर सूर्यकुमार यादव का वो फ़ैसला और बदल गया पूरा खेल

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- Author, विमल कुमार
- पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
टीम इंडिया के पूर्व विकेटकीपर पार्थिव पटेल से क़रीब तीन साल पहले एक सवाल पूछा था कि आने वाले वक़्त में किस बल्लेबाज़ को भारतीय क्रिकेट का भविष्य के तौर पर देखते हैं.
पार्थिव ने गहरी सांस ली और फिर कहा, ''शायद आपने ये नाम अभी उतना नहीं सुना होगा लेकिन मुझे जो दिखता है, उस लिहाज से हैदराबाद के तिलक वर्मा में वो दम है, जिसके चलते वो भविष्य का सितारा बनेगा.''
पार्थिव पटेल उस वक़्त मुंबई इंडियंस के स्कॉउट टीम ( पर्दे के पीछे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को ढूंढने वाली टीम) का हिस्सा थे.
अब पार्थिव मुंबई का दामन छोड़ गुजरात टाइटंस के बल्लेबाज़ी कोच बन गए हैं लेकिन उन्हें तिलक वर्मा पर की गई अपनी भविष्यवाणी पर नाज़ होगा.

तिलक वर्मा ने सेंचुरियन में खेले गए तीसरे टी-20 मैच में टीम इंडिया के लिए अपने करियर की पहली सेंचुरी लगाई और टीम को चार मैचों की सिरीज़ में 2-1 की निर्णायक बढ़त दिला दी.
इससे ये तो तय हो गया कि अगर कोई एक टीम सिरीज़ जीतेगी तो वो टीम इंडिया ही होगी और आख़िरी मैच हारने के बावज़ूद वो अफ्रीकी ज़मीन से सिरीज़ हार कर नहीं लौटेगी.

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मुश्किल हालत के बावजूद निखरे
22 साल के तिलक वर्मा की कहानी मौजूदा पीढ़ी के छोटे शहरों से आर्थिक तंगी की हालत से गुज़रने के बावजूद हौसला पस्त न होने देने वाले कई उभरते हुए खिलाड़ियों की ही तरह है.
उनके पिता हैदराबाद में एक इलेक्ट्रिशियन थे जिनके पास आज से एक दशक पहले इतने पैसे नहीं होते थे कि बेटे को प्राइवेट कोचिंग दिला पाएं.
तिलक के बचपन के कोच सलीम बयाश ने पहली बार टेनिस गेंद से ही क्रिकेट खेलते देखकर उनकी प्रतिभा को पहचान लिया था.
उनके पिता से वादा किया कि उन्हें बेटे की क्रिकेट के लिए पैसे की परवाह करने की ज़रूरत नहीं है.
आज आलम ये है कि मुंबई इंडियंस ने आईपीएल 2025 के लिए रोहित शर्मा, हार्दिक पंड्या, सूर्यकुमार यादव और जसप्रीत बुमराह जैसे दिग्गजों को भारी कीमत पर रिटेन किया तो तिलक वर्मा पर भी 8 करोड़ खर्च करने से नहीं हिचके.
सेंचुरियन मैच में टीम इंडिया की शुरुआत टॉस हारने के साथ हुई और सिरीज़ के पहले मैच के शतकवीर ओपनर संजू सैमसन फिर से बिना खाता खोले वापस लौट गए.
ऐसे में सूर्यकुमार यादव ने कप्तान के तौर पर एक साहसिक फ़ैसला लिया और तीसरे नंबर पर तिलक वर्मा को भेजा. तिलक वर्मा ने तीसरे नंबर पर कभी बल्लेबाज़ी नहीं की थी.
ये सच है कि दूसरे छोर पर साथी ओपनर अभिषेक शर्मा ताबड़तोड़ अंदाज़ में रन बटोर रहे थे और सूझबूझ का परिचय देते हुए तिलक ने शुरुआत की 20 गेंदों पर सिर्फ़ 27 रन बनाए थे.
लेकिन उसके बाद तिलक ने विकेट के हर छोर पर सहजता से खेलते हुए चौकों-छक्कों की झड़ी लगा दी.
आठ चौके और सात छक्के की मदद से सिर्फ़ 56 गेंदों पर तिलक ने नाबाद 107 रन बनाए और अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की सबसे अहम पारी खेली.
गौरतलब है कि भारतीय पारी के दौरान तिलक के शतक और अभिषेक के अर्द्धशतक अलावा किसी भी खिलाड़ी ने 20 का आंकड़ा भी नहीं छुआ.
नज़दीकी मुक़ाबले में अगर आख़िरी ओवर में भारत अगर मेज़बान को मात देने में कामयाब रहा तो इसके लिए 'मैन ऑफ द मैच' तिलक का ही योगदान सबसे बड़ा रहा.

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तिलक को लेकर भविष्यवाणी
पार्थिव पटेल इकलौते पूर्व खिलाड़ी नहीं हैं, जिन्हें तिलक ने अपनी प्रतिभा से प्रभावित किया.
पहले ही आईपीएल सीज़न में मुंबई इंडियंस और टीम इंडिया के कप्तान रोहित शर्मा ने भी सार्वजनिक तौर पर कहा कि तिलक वर्मा में दम है.
9 टी-20 खेल चुके तिलक ने भले ही अब तक टेस्ट क्रिकेट नहीं खेला है और वन-डे मैच भी सिर्फ़ चार ही खेले हैं लेकिन पिछले साल भारत में होने वाले वन-डे वर्ल्ड कप के चयन के दौरान उनका नाम भी तगड़े दावेदारों में से एक था. इसकी वजह थी 2023 का वेस्ट इंडीज़ दौरा.
टीम इंडिया के लिए टी20 क्रिकेट में शतक बनाने वाले खिलाड़ियों में तिलक अब शुमार हो चुके हैं.
उनकी बल्लेबाज़ी में बेफिक़्री वाले अंदाज़ को देखते हुए हो सकता है, बहुत सारे फैंस को टेस्ट क्रिकेट में ऋषभ पंत वाला धमाकेदार अंदाज़ याद आ जाए.
लेकिन पूरी पारी के दौरान तिलक ने साबित किया कि वो मौके की नज़ाकत के लिहाज़ से गियर बदलने में यक़ीन रखते हैं.
सफ़ेद गेंद के खेल में आधुनिक दौर में विराट कोहली शानदार बल्लेबाज़ हैं.
तीसरे नंबर पर खेलते हुए कोहली ने भारत के लिए सबसे ज़्यादा रन बनाए हैं और वर्ल्ड कप में संन्यास के बाद से ही इस बात को लेकर चर्चा चल रही है कि कौन सा बल्लेबाज़ तीसरे नंबर पर इस फ़ॉर्मेट में टीम इंडिया की लंबी रेस का घोड़ा साबित होगा.
क्या सेंचुरियन में लगाई गई सेंचुरी तिलक की तरफ़ से उसी सवाल को ख़त्म करने की पहली कोशिश तो नहीं हैं?

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ख़ुद से तुलना
पार्थिव पटेल सेंचुरियन में खेले जा रहे मैच में जब कमेंट्री कर रहे थे तो ऐसा लग रहा था कि तिलक से ज़्यादा ख़ुशी उन्हें मिल रही हो.
ये बात अलग है कि पार्थिव ने कमेंट्री के दौरान कभी भी ये जताने की कोशिश नहीं की उन्होंने इस खिलाड़ी के बारे में कुछ साले पहले ही इतनी तगड़ी भविष्याणी की थी.
मैच जीतने के बाद जब तिलक नंबर तीन पर भेजने के निर्णय को लेकर अपने कप्तान सूर्या की जमकर तारीफ़ कर रहे थे तो उनके चेहरे पर वो भाव साफ़ था कि कैसे उन्होंने उम्मीदों पर खरा उतरने में कामयाबी पाई.
तिलक को ये अहसास भी होना चाहिए ये महज़ एक शानदार शुरुआत ही है.
अगर आने वाले सालों में वो ऐसी ही पारियां हर फॉर्मैट में मुश्किल हालात में खेलते रहे तो उनकी तुलना कोहली या पंत से न होकर ख़ुद से होगी, जिसने नई पीढ़ी का शानदार बल्लेबाज़ होने की बड़ी उम्मीद जगाई है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित















