एमए बेबी को क्यों सौंपी गई सीपीएम की कमान, क्या हैं उनकी पांच सबसे बड़ी चुनौतियां?

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- Author, आनंद मणि त्रिपाठी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
तमिलनाडु के मदुरै में हुई भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की 24वीं कांग्रेस में मरियम अलेक्ज़ेंडर बेबी यानी एमए बेबी को पार्टी का नया महासचिव चुना गया है.
2012 से पोलित ब्यूरो के सदस्य रहे बेबी को यह ज़िम्मेदारी ऐसे समय में सौंपी गई है जब पार्टी अपने कमजोर दौर से गुज़र रही है. 70 के दशक से पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, केरल में इस पार्टी का दबदबा रहा. इसका प्रभाव आंध्रप्रदेश और बिहार में भी दिखाई दिया.
2004 में सीपीआई(एम) ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 43 लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज की. इसके साथ ही पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में सरकार भी बनाई. इसको पार्टी का स्वर्णकाल कहा जाता है.
एक समय देश की प्रमुख राजनीतिक ताक़त रही सीपीआई(एम) अब केरल तक सिमट कर रह गई है. पिछले एक दशक में हुए लोकसभा चुनाव में यह पार्टी दहाई का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाई है.

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पार्टी के भीतर सत्ता का संतुलन

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एमए बेबी की नियुक्ति पार्टी के भीतर केरल यूनिट की मज़बूत होती स्थिति को भी बताती है. विश्लेषक बताते हैं कि पश्चिम बंगाल यूनिट, जो एक समय पार्टी की सबसे प्रभावशाली इकाई थी, अब निर्णायक भूमिका में नहीं रह गई है.
वरिष्ठ पत्रकार अरविंद मोहन कहते हैं कि पश्चिम बंगाल धड़ा ऑल इंडिया किसान सभा के अध्यक्ष अशोक धवले को महासचिव बनवाने के पक्ष में था, लेकिन आख़िरकार बेबी का चयन हुआ.
उनका कहना है, "यह साफ़ दिख रहा है कि पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और अन्य राज्यों की यूनिट को किनारे करके केरल यूनिट ने कब्ज़ा जमा लिया है. इस समय विजयन की खूब चल रही है और उन्हें तीसरे कार्यकाल के लिए प्रोजेक्ट भी कर दिया गया है."
लेकिन बड़ा सवाल अब भी बाक़ी है. और ये है - मार्क्सवादी पार्टी में लगातार आ रही गिरावट कब और कैसे थमेगी?

अरविंद मोहन कहते हैं, ''केरल में भारतीय जनता पार्टी का प्रभाव बढ़ रहा है, कांग्रेस समर्थित यूडीएफ़ का विरोध भी बीजेपी के पक्ष में जाता दिख रहा है. कांग्रेस का नायर, ईसाई, इडवा और मुस्लिम वोट बेस भी अब खिसकने लगा है. ऐसे में बीजेपी एक बड़ी चुनौती बनने जा रही है."
अरविंद मोहन मानते हैं, "देश की राजनीति में पहचान बनाने के लिए हिंदी पट्टी में पहचान ज़रूरी है. प्रकाश करात या फिर सीताराम येचुरी हिंदी पट्टी में दख़ल रखते थे. इसके कारण ही पार्टी चर्चा में रहती थी. अब पोलित ब्यूरो में हिंदी पट्टी का कोई चर्चित नाम नहीं है. ऐसे में अब पार्टी भी उतनी चर्चित नहीं रहेगी. पार्टी के लिए अब यह एक बड़ी चुनौती है."
एमए बेबी का सियासी सफ़र

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सीपीआई(एम) के पूर्व महासचिव सीताराम येचुरी के निधन के बाद यह पद रिक्त था.
तब से पूर्व महासचिव प्रकाश करात अंतरिम समन्वयक की भूमिका में पार्टी को संभाल रहे थे. अब बेबी तीन साल के कार्यकाल के लिए औपचारिक रूप से पार्टी का नेतृत्व करेंगे.
एमए बेबी का महासचिव बनना यह संकेत देता है कि पार्टी ने फ़िलहाल अपनी रणनीति का केंद्र केरल को ही बनाए रखने का फ़ैसला किया है. बेबी का राजनीतिक सफ़र भी इसी राज्य से शुरू हुआ और राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा.
मरियम अलेक्जेंडर बेबी का जन्म केरल के कोल्लम ज़िले के प्रक्कुलम में हुआ था. वह पोलित ब्यूरो में एकमात्र ईसाई चेहरा हैं. 2012 से पोलित ब्यूरो के सदस्य रहे बेबी, केरल इकाई से दूसरे ऐसे नेता हैं जो पार्टी के शीर्ष पद पर पहुँचे हैं. इससे पहले ईएमएस नंबूदरीपाद पार्टी की कमान संभाल चुके हैं.
वैसे प्रकाश करात का परिवार भी केरल से आता है लेकिन वे कभी राज्य की राजनीति में एक्टिव नहीं रहे.
संगीत, सिनेमा और साहित्य में गहरी रुचि रखने वाले बेबी को केरल में पार्टी का सांस्कृतिक चेहरा माना जाता है.
70 वर्षीय बेबी ने अपनी राजनीतिक यात्रा केरल छात्र संघ से शुरू की. वह एसएफ़आई के राष्ट्रीय अध्यक्ष और डीवाईएफ़आई (डेमोक्रेटिक यूथ फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया) के अध्यक्ष भी रह चुके हैं.

साल 1986 में महज़ 32 वर्ष की उम्र में वे राज्यसभा पहुंचे और उस समय देश के सबसे युवा सांसदों में शामिल हुए. 1998 तक वह उच्च सदन में रहे.
साल 1999 में उन्हें सीपीआई(एम) की केंद्रीय समिति में शामिल किया गया लेकिन पार्टी के भीतर समीकरणों में बदलाव के कारण उनकी भूमिका सीमित होती चली गई.
2006 में वे कुंदरा विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर वीएस अच्युतानंदन मंत्रिमंडल में शामिल हुए और केरल के शिक्षा मंत्री बने. 2011 में दोबारा कुंदरा से निर्वाचित हुए.
2012 में कोझिकोड में आयोजित पार्टी कांग्रेस में उन्हें पोलित ब्यूरो में शामिल किया गया. हालांकि 2014 के लोकसभा चुनाव में कोल्लम सीट से उन्हें हार का सामना करना पड़ा.
एमए बेबी की चुनौतियां

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महासचिव बनने के बाद एमए बेबी ने पार्टी की दिशा को लेकर एक साफ़ बयान दिया.
उन्होंने कहा, "हमारा लक्ष्य साम्यवादी ताकतों को एक साथ लाना और ताकत बढ़ाना है. हम यह मानते हैं कि हमारी ताकत में गिरावट आई है लेकिन जब तक हम यह पता नहीं लगाते कि ऐसा क्यों हुआ है, हम सही दिशा नहीं दे पाएंगे."
केरल में पार्टी की सत्ता को लेकर उन्होंने कहा, "केरल में सीपीआई (एम) के नेतृत्व में लोकतांत्रिक मोर्चा सत्ता में है. विजयन के नेतृत्व में पार्टी 2026 का विधानसभा चुनाव लड़ेगी. तीसरी बार सत्ता बरकरार रखना हमारा का लक्ष्य होगा."
सीपीआई(एम) के महासचिव बनने के बाद एमए बेबी के सामने जिन प्रमुख चुनौतियों की बात हो रही है, उन्हें वरिष्ठ पत्रकार समीर के. पुरकायस्थ पांच हिस्सों में बांटते हैं:
1. पार्टी फंड
पार्टी इलेक्टोरल बॉन्ड नहीं लेती, और केवल केरल में ही सत्ता में है. ऐसे में संसाधनों की भारी कमी है. कई राज्यों में कार्यालय का खर्च तक निकालना मुश्किल हो रहा है.
2. युवाओं का रुझान
समाजवाद की विचारधारा अब युवाओं को जोड़ नहीं पा रही है. जेएनयू और जादवपुर जैसे संस्थानों को छोड़ दें तो पार्टी का छात्र राजनीति पर प्रभाव सीमित हो गया है.
3. मास लीडर की कमी
पार्टी के भीतर ज़मीन से जुड़े मास लीडरों की कमी है. अब नेताओं का चयन बूथ स्तर से करना होगा, ताकि हरकिशन सुरजीत सिंह और ज्योति बसु जैसे जननेता दोबारा उभर सकें.
4. सड़क से संसद तक
आंदोलनों में लाल झंडा दिखता है लेकिन चुनावों में वह समर्थन नहीं बन पाता. ये दूरी अब पार्टी के लिए गंभीर समस्या बन गई है.
5. समाजवाद और पूंजीवाद में संतुलन
पार्टी को अपने वैचारिक ढांचे में संतुलन लाना होगा. सिर्फ पूंजीवाद के विरोध से काम नहीं चलेगा.
वरिष्ठों की भूमिका में बदलाव, लेकिन सक्रियता बरकरार

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पार्टी की बैठक में 85 सदस्यीय केंद्रीय समिति का चुनाव हुआ, जिसमें 30 नए चेहरों को जगह दी गई.
इसके बाद इसी समिति ने 18 सदस्यीय पोलित ब्यूरो का गठन किया. नए सदस्यों में अमरा राम, विजू कृष्णन, मरियम धावले, यू. वासुकी, के. बालकृष्णन, जितेंद्र चौधरी, श्रीदीप भट्टाचार्य और अरुण कुमार शामिल हैं.
इस बार पोलित ब्यूरो में प्रकाश करात और वृंदा करात का नाम शामिल नहीं है. पार्टी ने यह तय किया है कि संगठनात्मक पदों पर 75 वर्ष की आयुसीमा का सख़्ती से पालन होगा.
इसी कारण से प्रकाश करात, वृंदा करात, माणिक सरकार, सुभाषिनी अली, जी. रामकृष्णन और सूर्यकांत मिश्रा ने इस्तीफ़ा दे दिया.
हालांकि, प्रकाश करात, माणिक सरकार और सुभाषिनी अली अब भी केंद्रीय समिति के विशेष आमंत्रित सदस्य बने रहेंगे. इनके साथ एस. रामचंद्रन पिल्लई, हन्नान मोल्लाह और बिमान बसु को भी विशेष आमंत्रित सदस्यों के रूप में रखा गया है.
वरिष्ठ सीपीआईएम नेता प्रकाश करात ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा, "पार्टी कांग्रेस ने भविष्य के लिए हमारी राजनीतिक लाइन, पार्टी को आगे ले जाने के लिए आवश्यक संगठनात्मक कदमों की रूपरेखा तैयार कर ली है. उसी आधार पर एक नया नेतृत्व, नई केंद्रीय समिति, पोलित ब्यूरो और नए महासचिव एमए बेबी का चुनाव हुआ है."
राजनीतिक विश्लेषक यह मानते हैं कि हिंदी पट्टी में प्रकाश करात और वृंदा करात का दखल बना रहेगा.
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