नूंह में छाई रहस्यमयी ख़ामोशी और रह रहकर उठते अनगिनत सवाल-ग्राउंड रिपोर्ट

मेवात के एक घर में सदमे में बैठी महिलाएं
इमेज कैप्शन, 'पुलिस ने हमारी एक नहीं सुनीं. उन्होंने हमें भी काफ़ी धमकाया और गोली मारने तक की धमकी दी. हम बेबस हैं.'
    • Author, शकील अख़्तर और तापस मलिक
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, नूंह से

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से क़रीब 75 किलोमीटर और हरियाणा के नूंह से क़रीब छह किलोमीटर दूर म्योली गांव में सन्नाटा पसरा है.

कर्फ्यू के बीच एक घर में महिलाएं सदमे में बैठी हैं.

नूह में दंगे के दूसरे दिन स्थानीय पुलिस ने इस परिवार के नौ लोगों को उनके घर से गिरफ्तार कर लिया. इन गिरफ़्तारियों के बाद से ही ये महिलाएं सदमे में हैं.

इनमें से अधिकतर महिलाएं उन बच्चों की मां हैं जिन्हें गिरफ्तार किया गया है.

होरी नाम की महिला ने रोते हुए कहा, "उन्होंने मेरे बेटों को मेरे हाथों से छीन लिया, उन्हें जूते-चप्पल के बग़ैर घसीटते हुए ले गए. मेरे बेटे निर्दोष हैं. मैं सरकार से अपील करती हूं कि वो जिस तरह से मेरे बच्चे को ले गई है, उसी तरह से उसे लौटा दे."

एक अन्य महिला हमीदन ने कहा, "पुलिस ने हमारी बात नहीं सुनी. उन्होंने हमें खूब धमकाया और गोली मारने तक की धमकी भी दी. हम बहुत बेबस हैं."

टूटी हुई इमारतें
इमेज कैप्शन, नूंह में हिंदू-मुसलमान सांप्रदायिक दंगों के बाद बहुत से मुसलमानों की दुकानों और घरों को तोड़ दिया गया है.

तीन मंज़िला इमारत ध्वस्त

गांव के सरपंच की बैठक में म्योली के बुज़ुर्ग बीते दिनों के दंगों को याद करते हुए कहते हैं, "नूंह धार्मिक सौहार्द की एक मिसाल रहा है."

पूर्व सरपंच तैय्यब हुसैन ने कहा, "यहां कई सालों से सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश हो रही थी. पिछली यात्रा के दौरान हंगामा करने की भी कोशिश की गई और एक मज़ार को नुक़सान पहुंचाया गया था."

म्योली से छह किलोमीटर दूर नूंह शहर के एक प्रमुख चौराहे पर एक बड़ी इमारत का ताज़ा मलबा यहां के हालात को दर्शाता है. यह एक तीन मंजिला इमारत थी जिसमें यहां का चर्चित 'सहारा होटल' भी था.

पुलिस ने यह कहते हुए इमारत को ध्वस्त कर दिया कि इमारत की छत से हिंदू श्रद्धालुओं पर पथराव किया गया था.

इमारत के मालिक आक़िल हुसैन का कहना है कि कुछ टीवी चैनलों ने उनकी इमारत जैसी ही दूसरे शहर की एक इमारत की तस्वीर दिखाई थी, जिसके आधार पर पुलिस ने उनकी तीन मंज़िला इमारत को ध्वस्त कर दिया.

आक़िल हुसैन ने बीबीसी को बताया, "मैंने ये इमारत अपनी ज़िंदगी की कमाई से बनाई थी. प्रशासन ने बिना किसी नोटिस या हमारी जानकारी में लाए इसे ध्वस्त कर दिया. अब हम कहां जाएं?"

नूंह में हिंसा, योगेन्द्र यादव

31 जुलाई को क्या हुआ?

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आक़िल हुसैन की पत्नी शमा नाज़रीन ने रोते हुए कहा, "हम न्याय के लिए कहां जाएं? हमारे छोटे बच्चे रो रहे हैं. क्या हमें न्याय मिलेगा? लाचारी के अलावा कुछ नहीं बचा है."

31 जुलाई को एक धार्मिक जुलूस के दौरान हिंदूवादी कार्यकर्ताओं और स्थानीय मुसलमान युवाओं के बीच टकराव हुआ था. इस घटना के बाद नूंह में हिंदू-मुस्लिम दंगे भड़क उठे.

यात्रा पर हमले के दौरान चार हिंदुओं की मौत हो गई जबकि दर्जनों वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया. यात्रा से पहले कट्टरपंथी हिंदू संगठन बजरंग दल के कुछ नेताओं ने यात्रा में शामिल होने का एलान किया था.

उनके कुछ उत्तेजक वीडियो में कथित तौर पर नूंह के मुसलमानों को चुनौती दी गई थी कि 'अगर वे रोक सकते हैं तो उन्हें रोक कर दिखाएं.'

यात्रा में शामिल बहुत से युवा तलवारों और बंदूकों के साथ आये थे.

यात्रा में शामिल होने की घोषणा करने वाले बजरंग दल के नेताओं में से एक मोनू मानेसर पर गोहत्या के संदेह में मेवात क्षेत्र के दो युवकों को ज़िंदा जलाने का मामला दर्ज किया गया है. लेकिन घटना के कई महीने बीत जाने के बाद भी अब तक उन्हें गिरफ़्तार नहीं किया जा सका है.

मोनू मानेसर

इमेज स्रोत, MONU MANESAR/TWITTER

इमेज कैप्शन, मोनू मानेसर पर दो मुसलमान युवाओं की हत्या करने का मुक़दमा दर्ज है लेकिन अभी तक उनकी गिरफ़्तारी नहीं हुई है.

क्या कहते हैं स्थानीय लोग?

नूंह के एक स्थानीय निवासी ने कहा, "हम हर तरह के उकसावे को सहते रहे हैं. हमें यात्रा से कोई दिक्कत नहीं है. हम भी इसमें भाग लेते हैं. लेकिन हमें लगातार उकसाया जा रहा है. हम सहते आ रहे हैं, अब हमारे सामाने हालात ऐसे हैं कि या तो मेवात छोड़ दें, या स्थिति का सामना करें."

हरियाणा का नूंह शहर मेवात क्षेत्र का हिस्सा है. मेवात राजस्थान, हरियाणा और यूपी में मथुरा और आगरा के कुछ हिस्सों तक फैला हुआ है.

हरियाणा में मेवात क्षेत्र राज्य का एकमात्र मुस्लिम बहुल क्षेत्र है जहां मुसलमानों की आबादी 70 से 80 प्रतिशत के बीच है. यहां के अधिकांश मुसलमान किसान हैं और कई लोग पशुपालन में भी लगे हुए हैं.

मेवात के मुसलमान कई सालों से गोरक्षा के नाम पर सरकार समर्थित 'गौ रक्षक' संगठनों से गंभीर कठिनाइयों और उत्पीड़न का सामना कर रहे हैं.

गौ-तस्करी के आरोप में कई बार मवेशी लाने और ले जाने वालों को लूटा जा चुका है. मेवात के कई लोगों को भीड़ द्वारा अत्याचार का भी शिकार होना पड़ा है.

कुल मिलाकर इन अपराधों में शामिल आरोपियों पर कार्रवाई न होने से नूंह और पूरे मेवात के लोग काफी गुस्से में हैं. भड़काऊ बयानों और वीडियो ने उन्हें और भी नाराज़ कर दिया है.

वीडियो कैप्शन, नूंह ग्राउंड रिपोर्ट: हिंसा के बाद अब घरों और दुकानों पर चले बुलडोज़र

'धार्मिक जुलूस में तलवारों का क्या उपयोग?'

31 अगस्त को हिंदुओं की धार्मिक यात्रा से पहले माहौल काफ़ी तनावपूर्ण था. स्थानीय सुरक्षा अधिकारियों ने माना है कि उन्होंने प्रशासन को बिगड़ते हालात के बारे में आगाह किया था.

किसान नेता और प्रमुख बुद्धिजीवी योगेन्द्र यादव ने बीबीसी से कहा कि ख़ुफ़िया रिपोर्ट के बावजूद पुलिस ने एहतियाती क़दम नहीं उठाए.

यादव कहते हैं, "जुलूस में बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद को सौ गाड़ियां लाने की इजाजत दी गई थी. धार्मिक यात्रा अच्छी बात है, लेकिन धार्मिक जुलूस में तलवारों और बंदूकों का क्या उपयोग? यह दंगा कराने की एक सुनियोजित साजिश थी."

डॉ. शुभ्रू कमल दत्ता, नूंह में हिंसा

पाकिस्तान का हाथ?

सरकार के क़रीबी माने जाने वाले दक्षिणपंथी बुद्धिजीवी डॉ. शुभ्रू कमल दत्ता का मानना ​​है, "जिस तरह से नूंह में हिंदू श्रद्धालुओं पर हमला किया गया, उससे साफ़ है कि यह एक साज़िश के तहत किया गया था. यह बहुत ही सुनियोजित हमला था. इसमें पाकिस्तान की सीक्रेट सर्विस का हाथ हो सकता है. इसमें चरमपंथियों का भी हाथ हो सकता है. इसकी गहन जांच होनी चाहिए."

वह आगे कहते हैं, "सहनशीलता और संयम एकतरफ़ा नहीं हो सकता, जब तक यह दोनों तरफ़ से न हो, ऐसी समस्याएं पैदा होंगी."

योगेन्द्र यादव का आरोप है कि इसमें कोई शक़ नहीं कि नूंह में मुस्लिमों ने हिंदू श्रद्धालुओं पर हमला किया. लेकिन उन्हें लगातार इस हमले के लिए उकसाया गया. श्रद्धालुओं की तरह, अधिकांश दंगाई मेवाती नूंह के बाहर से आए थे, जो लगातार उकसावे और उत्पीड़न से तंग आ चुके थे

यादव कहते हैं, "हिंसा को किसी भी रूप में उचित नहीं ठहराया जा सकता है, लेकिन आप देख रहे हैं कि पुलिस नूंह में मुसलमानों के घरों को ध्वस्त कर रही है, लेकिन जिन दंगाइयों ने गुड़गांव और सोहना में मुसलमानों के घरों और कारों को जला दिया और इमाम की हत्या कर दी, लोगों को उनके घरों से निकाल दिया, उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जा रहा है. मोनू मानेसर और बिट्टू बजरंगी अभी भी आज़ाद हैं."

सूनसान सड़कें
इमेज कैप्शन, दंगों के बाद बहुत से नौजवान गिरफ़्तारी के डर से इलाक़ा छोड़कर चले गए हैं.

बहिष्कार की अपील

योगेंद्र यादव का कहना है, "कुछ ही महीनों में हरियाणा में चुनाव होने वाले हैं. किसान आंदोलन के बाद हरियाणा की बीजेपी सरकार किसानों का समर्थन खो चुकी है और अब मुसलमानों के ख़िलाफ़ नफ़रत फैलाकर हिंदुओं को चुप कराने की कोशिश कर रही है."

नूंह से दूर, हरियाणा के कई ज़िलों में स्थानीय पंचायतें मुसलमानों के सामाजिक और आर्थिक बहिष्कार की अपील करते हुए प्रस्ताव पारित कर रही हैं. इन

प्रस्तावों में लोगों से कहा जा रहा है कि वे अपने घर मुसलमानों को किराये पर न दें, मुसलमानों के साथ व्यापार न करें, उन्हें अपने गांवों में न घुसने दें.

मध्य प्रदेश में भी कई इलाक़ों में इसी तरह के प्रस्ताव पारित किये गये हैं. दिल्ली के उपनगर गाज़ियाबाद में भी मुस्लिम बहिष्कार के पोस्टर चिपकाए गए हैं.

जानेमाने वकील और कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने इन पंचायतों को असंवैधानिक और अवैध बताते हुए सुप्रीम कोर्ट का ध्यान इस ओर दिलाया है.

तैनात पुलिसकर्मी
इमेज कैप्शन, नूंह में अब भी कर्फ्यू है

इसके बाद हरियाणा प्रशासन ने कई पंचायतों से ये प्रस्ताव वापस करा दिए हैं.

गुरुवार को, हरियाणा की एक अन्य महापंचायत ने प्रस्तावों की निंदा की, जिसमें मोनू मानेसर और बिट्टू बजरंगी सहित मुसलमानों पर हमला करने वालों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की गई.

भारतीय संसद में विपक्षी दल कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने कहा कि सरकार पूरे देश में नफ़रत की आग भड़का रही है. उन्होंने कहा, "पहले मणिपुर में आग लगाई गई, अब हरियाणा में आग लगाई जा रही है. यह आग पूरे देश को निगल जाएगी."

दिल्ली से क़रीब सौ किलोमीटर दूर नूंह में हुए दंगों के बाद अब तक 300 से ज्यादा मुसलमानों को गिरफ्तार किया जा चुका है. कोर्ट के दखल के बाद फिलहाल मुस्लिम घरों को तोड़ने पर रोक लगा दी गई है, लेकिन अब तक 200 से ज्यादा कच्चे-पक्के घर और दुकानें तोड़ी जा चुकी हैं.

नूंह में दंगों के बाद गिरफ्तारी के डर से बड़ी संख्या में युवा यहां से दूसरी जगहों पर चले गए हैं. दुकानें बंद हैं, मोहल्ले सुनसान हैं और सड़कें खाली हैं. शहर रहस्यमयी सन्नाटे में डूबा हुआ है.

दंगा विरोधी अर्धसैनिक बलों के साये में, टूटी इमारतों के बीच, जो लोग यहां हैं वो सहमे हुए किसी नई मुसीबत के अंदेशे में जी रहे हैं.

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