अलका याग्निक को 'अचानक बहरापन' कैसे हो गया? जानें आख़िर क्या है ये बीमारी?

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मशहूर गायिका अलका याग्निक ने इंस्टाग्राम पोस्ट के ज़रिए अपनी सेहत को लेकर अहम जानकारी साझा की है. इसमें उन्होंने जानकारी दी है कि, “वायरल अटैक की वजह से उन्हें सुनाई देना बंद हो गया है.”
प्रशंसकों, फॉलोअर्स और दोस्तों को संबोधित इस इंस्टाग्राम पोस्ट में अलका याग्निक ने लिखा, "कुछ हफ्ते पहले, विमान से उतरते समय मुझे अचानक एहसास हुआ कि मैं कुछ भी नहीं सुन पा रही हूं. इस घटना के बाद कई हफ्तों तक काफी धैर्य रखने के बाद , मैं अब चुप्पी तोड़ना चाहती हूं. मैं अपने सभी दोस्तों और शुभचिंतकों को बताना चाहती हूं कि क्यों मैं लंबे समय से दिखाई नहीं पड़ रही हूं.”
यह कहते हुए अलका याज्ञनिक ने आगे कहा, "जांच के बाद मेरे डॉक्टरों ने पता लगाया है कि मुझे एक सेंसरी न्यूरल हीयरिंग लॉस यानी सुनाई देना बंद हो गया है. ये एक दुर्लभ लक्षण है. ये एक वायरल अटैक की वजह से हुआ है. मैं इस अप्रत्याशित झटके के लिए तैयार नहीं थी. मैं अब इसे धीरे-धीरे स्वीकार कर रही हूं. कृपया मेरे लिए अपनी प्रार्थनाएं जारी रखें.”
अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा है, “मैं अपने प्रशंसकों और युवा सहयोगियों को बहुत तेज़ संगीत और हेडफोन के ख़तरों के बारे में चेतावनी देना चाहती हूं. किसी दिन मैं आप लोगों से अपने पेशेवर जीवन के जोख़िमों के बारे में बात करना चाहूंगी. मैं आपके प्यार और समर्थन से आपके पास वापस आऊंगी. इस कठिन समय में आपका समर्थन मेरे लिए बहुत मायने रखता है."
सेंसरी न्यूरल(संवेदी तंत्रिका) बहरापन क्या है?
अमेरिकन स्पीच लैंग्वेज हियरिंग एसोसिएशन की वेबसाइट के अनुसार, “इस प्रकार का बहरापन तब होता है जब आंतरिक कान को क्षति पहुंचती है या चोट लगती है. कान के अंदरूनी हिस्से की नसों में रुकावट के कारण मस्तिष्क से संचार में बाधा उत्पन्न होती है.
कुछ लोगों के लिए हल्की आवाज़ें सुनना मुश्किल हो जाता है. तेज़ आवाज़ें अक्सर दबी-दबी सुनाई देती हैं. इस प्रकार की सुन्नता अक्सर स्थायी होती है और दवा या सर्जरी का इस पर असर नहीं होता है.
इस तरह के बहरेपन के लिए श्रवण यंत्र (हियरिंग एड) का सहारा लिया जा सकता है. इस प्रकार का बहरापन बीमारी, आनुवंशिकता, बढ़ती उम्र, सिर पर चोट, आंतरिक कान की संरचना में गड़बड़ी या तेज़ आवाज़ या विस्फोट सुनने के कारण हो सकता है.

इस बीमारी का कारण क्या हो सकता है?
इस बीमारी के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए हमने ईएनटी स्पेशलिस्ट(कान-नाक-गला विशेषज्ञ) डॉक्टर नीता घाटे से संपर्क किया.
बीबीसी मराठी से बात करते हुए उन्होंने कहा, “सबसे पहले कान की संरचना को समझते हैं. कान के तीन भाग होते हैं. बाहरी कान का आवरण, मध्य कान और आंतरिक कान शामिल होते हैं. मध्य कान तीन हड्डियों की एक श्रृंखला है जो कान के बाहरी हिस्से की झिल्ली से शुरू होती है.”
“आंतरिक कान में संवेदी बाल कोशिकाएं और श्रवण तंत्रिका होती हैं, जो मस्तिष्क तक जाती हैं. जब ध्वनि उत्पन्न होती है, तो ध्वनि तरंगें उत्पन्न होती हैं और कान का पर्दा कंपन करता है. हड्डी की श्रृंखला के माध्यम से वे कंपन आंतरिक कान तक पहुंचते हैं और विद्युत संकेतों में परिवर्तित हो जाते हैं जो मस्तिष्क तक पहुंचते हैं और हम सुनते हैं."
डॉ. नीता ने कहा, “इसमें जब आंतरिक कान की कोशिकाएं या तंत्रिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, तो बहरेपन को सेंसरीन्यूरल हियरिंग लॉस(संवेदी तंत्रिका का बहरापन) कहा जाता है.”
डॉक्टर नीता ने ऐसे बहरेपन के कई कारण बताए:
- कभी-कभी बहरापन आनुवंशिक होता है.
- संक्रमण से सेंसरीन्यूरल बहरापन हो सकता है. विशेष रूप से वायरल संक्रमण से.
- यदि गर्भावस्था के दौरान माँ को उच्च रक्तचाप हो, कुछ संक्रमण(उदाहरण के लिए-खसरा-चिकन पॉक्स) या प्रसव के दौरान जटिलताएँ हों, तो नवजात शिशु बहरा हो सकता है.
- जो लोग बहुत शोर-शराबे वाली जगहों पर काम करते हैं उनमें इस तरह का बहरापन विकसित हो सकता है.
- उम्र के साथ श्रवण तंत्रिकाएं कमजोर होने के कारण बहरापन भी हो सकता है.
- संक्रमण या दुर्घटना से भी ऐसा हो सकता है.
इसके साथ ही वर्षों से मानव निर्मित कारकों के कारण भी इस तरह का बहरापन हो सकता है, जैसे:
- ध्वनि प्रदूषण
- ज़ोर-ज़ोर से गाना
- लगातार ईयरफ़ोन लगाकर सुनने से कानों पर असर पड़ सकता है.
ट्रेन, बस, सड़क पर चलते समय जब आप ईयरफ़ोन लगाते हैं तो आसपास पहले से ही शोर होता है. इसमें आपको चीज़ें और भी ऊंची आवाज़ में सुनाई देती हैं. इससे सुनने की क्षमता पर असर पड़ता है.
किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
डॉक्टर नीता ने कहा, "हम अक्सर इस बात पर ध्यान नहीं देते कि हमारे एक कान से सुनने की क्षमता कम हो गई है क्योंकि हमारा दूसरा कान ठीक होता है. इसलिए सबसे पहले सुनने की क्षमता में कोई भी समस्या होने पर इसे नज़रअंदाज न करते हुए तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए. सुनने की क्षमता के कुछ परीक्षण होते हैं और यह इस पर निर्भर करता है कि कितना नुकसान हुआ है और इसका इलाज क्या किया जा सकता है."
उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि हमें स्वयं और हमारे परिवार के सदस्यों को बहरेपन(श्रवण हानि) के लक्षणों को नजरअंदाज़ नहीं करना चाहिए. यानी अगर घर में कोई व्यक्ति लगातार तेज़ आवाज में टीवी चला रहा है तो घर के सदस्यों को सोचना चाहिए कि कहीं कोई समस्या तो नहीं है.
श्रवण हानि का एक और संकेत यह है कि ऐसा व्यक्ति ध्वनि तो सुन सकता है, लेकिन शब्दों को नहीं समझ सकता. शोर में भी साफ सुनाई नहीं देता. डॉक्टर नीता ने कहा कि इन सभी लक्षणों को नजरअंदाज न करते हुए लगातार सतर्क रहना चाहिए. उन्होंने कहा, “समय रहते चीज़ें पता चलने पर ही इलाज की दिशा तय की जा सकती है.”
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