किडनी की पथरी से लेकर गले की टॉन्सिलोलिथ तक: शरीर में कितने तरह के पत्थर बनते हैं, इनसे कैसे बचा जा सकता है

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मानव शरीर की सभी अद्भुत क्षमताओं में से शायद सबसे अजीब में से एक है पथरी पैदा करने की उसकी क्षमता.
कई लोगों ने किडनी (गुर्दे) में या गॉल ब्लैडर (पित्ताशय) में होने वाली पथरी और उससे होने वाली मुश्किलों के बारे में सुना होगा. लेकिन इनके अलावा भी शरीर में और पत्थर हो सकते हैं और ये शरीर के ऐसे हिस्सों में हो सकते हैं जिनके बारे में किसी ने सोचा नहीं होगा.
शरीर के ये पत्थर किससे बने हैं? और ये न बनें इसके लिए हम क्या कर सकते हैं?
दुनिया के लगभग दस में एक व्यक्ति को किडनी में पथरी यानी किडनी स्टोन की समस्या होती है.
ये मूल रूप से ख़ून से लीक होकर पेशाब में जाने वाले कैल्शियम और ऑक्सालेट के कारण बनते हैं. ऑक्सालेट प्राकृतिक कंपाउंड है जो पौधों और इंसानों दोनों में पाए जाते हैं.
अधिक मात्रा में कैल्शियम और ऑक्सालेट लीक होने से ये जम सकते हैं और एक स्टोन यानी पत्थर का रूप ले सकते हैं.
किडनी में होने वाली पथरी का आकार भी अलग-अलग हो सकता है. ये एक मिलीमीटर से कम चौड़ाई से लेकर एक सेंटीमीटर या उससे अधिक तक हो सकते हैं.
पथरी असामान्य आकार के भी हो सकते हैं. लेकिन अगर किडनी के कनाल (कैलिसेस) के ब्रांच के भीतर पथरी बनना शुरू हुई तो ये हिरण के सींग का आकार भी ले सकती है. इसे स्टैगहॉर्न कैलकुलस कहा जाता है.
पथरी कब बनती है समस्या?

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किडनी में होने वाली पथरी तब परेशानी का सबब बन सकती है जब वो यूरेटर्स के रास्ते यानी किडनी से ब्लैडर तक पेशाब लेकर जाने वाली दोनों नलियों में से किसी का रास्ता रोक दे.
अगर ऐसा हुआ तो व्यक्ति को पेशाब करने में तो दिक्कत आती ही है, उसके पीठ के निचले हिस्से में भी गंभीर दर्द हो सकता है.
इस वजह से किडनी के आसपास पेशाब जमा होने लगता है या फिर संक्रमण का ख़तरा पैदा हो जाता है.
गॉल ब्लैडर यानी पित्ताशय में पथरी बनना भी एक सामान्य स्थिति है, इन्हें गॉलस्टोन्स कहते हैं.
ये वसा हज़म करने में मदद करने वाला पित्त को पित्ताशय से अंतड़ियों तक लेकर जाने वाली नलियों में या पित्ताशय के भीतर बनते हैं.
कोलेस्ट्रॉल या पित्त में मौजूद पिगमेन्ट्स के कारण गॉलस्टोन बन सकते हैं, ये एक या एक से अधिक भी हो सकते हैं.
किडनी स्टोन की तरह, अगर गॉलस्टोन पित्ताशय की संकरी जगह (जैसे सामान्य पित्त नली) में चला जाता है तो वो पेट में दर्द, संक्रमण और जॉन्डिस जैसी समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं.
पथरी बनने के दूसरे कारण

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इनके अलावा, शरीर के अलग-अलग बॉडी फ्लूड के कारण भी पथरी बन सकती है. उदाहरण के लिए सैलिवरी स्टोन यानी लार में पथरी.
कान और जबड़े और जीभ के नीचे मौजूद ग्रंथियों से लार बनती है. मुंह में गिरने के बाद ये भोजन को गीला करने और उसे हज़म करने की प्रक्रिया में बड़ी भूमिका निभाती है.
लार की पथरी कैल्शियम, मैग्नीशियम और फॉस्फेट जैसे अलग-अलग तत्वों से बन सकती है.
जिस नली से लार मुंह तक पहुंचती है अगर उसमें सैलिवरी स्टोन बन जाए या अटक जाए तो वो मुंह में लार गिरने की प्रक्रिया रोक सकती है.
ऐसा हुआ तो व्यक्ति को भीषण दर्द और मुंह में सूजन आ सकती है. लार गिरने से रुकने पर यदि सैलिवरी ग्रंथी में संक्रमण हुआ तो इस कारण मुंह से दुर्गंध भी आ सकती है.
टॉन्सिल में पथरी

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इसके अलावा टॉन्सिल में भी पथरी पाई जा सकती है.
गले में नीचे और पीछे की तरफ टॉन्सिल्स ग्रंथी होती है. ये लिम्फोइड टिशू के समूह होते हैं जो शरीर की रोग प्रतिरक्षा प्रणाली का हिस्सा होते हैं. लेकिन ये विडम्बना है कि उनमें बार-बार सूजन और संक्रमण हो सकता है.
टॉन्सिल्स में कैविटी यानी गड्ठे होते हैं जिन्हें क्रिप्ट्स कहा जाता है. कभी-कभी ये क्रिप्ट्स खाने और लार के टुकड़ों को रख सकते हैं, यही टॉन्सिल स्टोन या टॉन्सिलोलिथ होता है.
ये स्टोन अपेक्षाकृत नरम और कम पथरीले होते हैं, लेकिन वक्त के साथ ये भी सख्त हो सकते हैं और मुश्किल बन सकते हैं.
इस कारण व्यक्ति को सांस में दुर्गंध और बार-बार संक्रमण का सामना करना पड़ सकता है.
इनके अलावा भी शरीर के दूसरे पदार्थ सख्त होकर स्टोन में बदल सकते हैं. उदाहरण के लिए, कुछ स्थितियों में इंसान का मल इतना कठोर हो सकता है कि वह एक पत्थर की तरह सख्त हो जाए. इसे कोप्रोलाइट कहते हैं.
इसके अलावा त्वचा के टुकड़े जो नाभि में जमा हो जाएं वो भी सख्त होकर पत्थर की तरह बन सकते हैं. इन स्टोन को ओम्फैलोलिथ कहा जाता है.
स्टोन न हो, इसके लिए क्या करें?

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ये अच्छी बात है कि कुछ सरल तरीके अपना कर हम मुश्किल पैदा करने वाले स्टोन्स से बच सकते हैं.
इनमें सबसे महत्वपूर्ण बात शरीर में उचित मात्रा में जल का होना. सही मात्रा में पानी पीने से पेशाब डाइल्यूट यानी पतला होता है, इससे कब्ज़ से बचाव होता है और मुंह में बैक्टीरिया नहीं बनते.
ये तरीका शरीर में कई तरह के स्टोन बनने से रोक सकता है.
टॉन्सिल स्टोन से बचने के लिए मुंह साफ रखना बेहद ज़रूरी है. नियमित ब्रश करने से भी इसका जोखिम कम हो सकता है.
इनके अलावा आहार भी महत्वपूर्ण है, ख़ासकर पित्ताशय में होने वाली पथरी के लिए. वसा युक्त खाना और मोटापा इस तरह के स्टोन का कारण बन सकता है.
कई ऐसे कारण भी हैं जिन्हें आप चाह कर भी टाल नहीं सकते, जैसे कि महिला का 40 साल से अधिक की उम्र का होना जिससे पित्ताशय में पथरी बनने की संभावना बढ़ जाती है.
कैल्शियम और ऑक्सालेट से भरपूर खाद्य पदार्थों जैसे डेयरी उत्पाद, पालक और रूबार्ब से परहेज करने से भी किडनी स्टोन बनने से रोकने में मदद मिल सकती है.
पहले से पथरी की समस्या हुई तो?

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एक सवाल ये भी है कि अगर किसी को पहले से ही पथरी है तो क्या होगा? अगर इसके कारण व्यक्ति अस्वस्थ महसूस कर रहा है तो पथरी को एंडोस्कोपी या ऑपरेशन के ज़रिए निकालना पड़ सकता है.
किडनी स्टोन के मामले में आप तब तक इंतजार कर सकते हैं जब तक स्टोन आपके शरीर से मूत्र नली होते हुए मूत्राशय तक न पहुंचे और शरीर से निकल न जाए.
कभी-कभी मूत्राशय से स्टोन निकलने पर सिंक में स्टोन के टकराने से इसकी हलकी आवाज़ भी आ सकती है.
ये भी हो सकता है कि आपका डॉक्टर आपसे कहे कि स्टोन पकड़ने के लिए मूत्र विसर्जन के वक्त आप चाय की छननी का इस्तेमाल करें.
कभी-कभी नींबू चूसने से सैलिवरी स्टोन से राहत मिल सकती है. नींबू लार बनने की प्रक्रिया को बढ़ा सकता है जिससे लार की नली में एक साथ अधिक लार आए और इस तरह स्टोन बाहर निकल जाए.
सैलिवरी स्टोन और टॉन्सिलोलिथ को एक सपाट उपकरण के ज़रिए भी हटाया जा सकता है.
देखा जाए तो अलग-अलग प्रकार की पथरी के लिए अलग-अलग तरह के इलाज मौजूद हैं लेकिन रोज़मर्रा के सरल उपाय भी इनके बनने के जोखिम को कम करने में मदद कर सकते हैं.
(ये जानकारी यूके के ब्रिस्टल विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ़ फिजियोलॉजी, फ़ार्माकोलॉजी और न्यूरोसाइंस में सीनियर लेक्चरर डैनियल बॉमगार्ड्ट के लेख से ली गई है. ये लेख द कन्वर्सेशन में प्रकाशित हुआ था. मूल लेख को अंग्रेजी में यहां पढ़ा जा सकता है.)
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