दुनिया की सबसे लंबी परीक्षा, 13 घंटे तक न लंच ब्रेक न डिनर ब्रेक

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- Author, ह्योजुंग किम
- पदनाम, बीबीसी कोरियन
नवंबर में, एक कुख्यात कॉलेज प्रवेश परीक्षा के लिए दक्षिण कोरिया थम सा जाता है.
शोर कम करने के लिए दुकानें बंद हो जाती हैं, उड़ानों को कम कर दिया जाता है और यहां तक कि छात्रों के लिए सुबह के यातायात को भी धीमा कर दिया जाता है.
परीक्षा देने वाले छात्र दोपहर बाद स्कूल से बाहर निकलते हुए राहत की सांस लेते हैं और बाहर इंतज़ार कर रहे अपने परिजनों को गले लगाते हैं.
लेकिन ज़रूरी नहीं कि हर कोई इतने समय में ही परीक्षा पूरी करता हो. शाम होने और फिर अंधेरा घिरने के बाद भी कुछ छात्र परीक्षा रूम में मौजूद होते हैं.
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ये ब्लाइंड स्टूडेंट्स हैं, जो आम तौर पर राष्ट्रीय कॉलेज प्रवेश परीक्षा- सुनेउंग के सबसे लंबे संस्करण में 12 घंटे तक परीक्षा देते हैं.
गुरुवार को देश के क़रीब पांच लाख 50 हज़ार छात्र परीक्षा में बैठे. संख्या के लिहाज से यह सात सालों में सबसे बड़ी है. सुनेउंग, दरअसल कोरियन भाषा में कॉलेज स्कॉलिस्टिक एबिलिटी टेस्ट (सीएसएटी) का संक्षिप्त नाम है.
यह परीक्षा न केवल यह तय करती है कि लोग विश्वविद्यालय जा पाएंगे या नहीं, बल्कि यह उनके रोज़गार के अवसरों, आमदनी, रहने की जगह और यहां तक कि भविष्य के रिश्तों को भी प्रभावित कर सकती है.
अपने विषयों के चुनाव के आधार पर, छात्र कोरियाई भाषा, गणित, अंग्रेज़ी, सामाजिक या प्राकृतिक विज्ञान, एक अतिरिक्त विदेशी भाषा और हांजा (कोरियाई में इस्तेमाल किए जाने वाले पारंपरिक चीनी अक्षर) सहित लगभग 200 सवालों के जवाब देते हैं.
सुबह से लेकर रात तक परीक्षा

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अधिकांश छात्रों के लिए यह लगातार आठ घंटे तक चलने वाली परीक्षा होती है. सुनेउंग परीक्षा सुबह 8:40 बजे शुरू होती है और लगभग 17:40 बजे ख़त्म होती है.
हालांकि, जिन छात्रों की आंख की रोशनी में गंभीर समस्या है, उन्हें सामान्य समय की तुलना में 1.7 गुना अधिक समय दिया जाता है.
इसका मतलब है कि अगर वे अतिरिक्त विदेशी भाषा सेक्शन का पेपर देते हैं तो यह परीक्षा क़रीब 13 घंटों में ख़त्म होती है.
इस बीच कोई लंच या डिनर ब्रेक नहीं होता, परीक्षा पूरे समय जारी रहती है.
लेकिन लंबे समय के लिए ब्रेल टेस्ट पेपर का बड़ा बंडल भी एक बड़ी भूमिका निभाता है.
जब हर वाक्य, संकेत और ग्राफ़ को ब्रेल में बदला जाता है तो हर टेस्ट बुकलेट छह से नौ गुना मोटी हो जाती है.
ब्लाइंड स्टूडेंट्स के लिए सियोल हैंबिट स्कूल में पढ़ने वाले 18 साल के हान डोंग-ह्यून भी उन्हीं छात्रों में शामिल हैं जो इस साल का सुनेउंग दे रहे हैं.
शिक्षा मंत्रालय और कोरिया इंस्टीट्यूट फॉर करिकुलम एंड इवैल्यूएशन के आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल पूरे देश में ऐसे 111 छात्रों ने परीक्षा दी थी, जिनमें से 99 कम दृष्टि बाधित और 12 गंभीर दृष्टि-बाधित थे, जैसे कि डोंग-ह्यून.
ब्रेल लिपि की वजह से लंबा होता है प्रश्न पत्र

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डोंग-ह्यून जन्म से पूरी तरह ब्लाइंड हैं और रोशनी महसूस भी नहीं कर सकते.
7 नवंबर को जब बीबीसी ने उनसे उनके स्कूल में मुलाक़ात की, तो उनके हाथ ब्रेल में छपी पुरानी परीक्षा की प्रश्न-पुस्तिकाओं पर तेज़ी से चल रहे थे.
परीक्षा से सिर्फ़ एक हफ़्ते पहले, वह अपनी सहनशक्ति और स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित कर रहे थे. डोंग-ह्यून ब्रेल प्रश्न-पत्रों और स्क्रीन-रीडिंग कंप्यूटर की मदद से परीक्षा देंगे.
उन्होंने कहा, "बहुत लंबा होने की वजह से यह वाक़ई बहुत थकाऊ है. लेकिन कोई और अलग ख़ास तरीक़ा नहीं है. मैं बस अध्ययन के शेड्यूल को फॉलो करता हूं और अपनी स्थिति को संभालता हूं. यही एक रास्ता है."
डोंग-ह्यून ने कहा कि ख़ासतौर पर कोरियन भाषा का सेक्शन उनके लिए कठिन होता है.
इस सेक्शन में कुछ 16 पन्ने होते हैं लेकिन ब्रेल संस्करण क़रीब 100 पन्नों का होता है.
स्क्रीन-रीडिंग सॉफ़्टवेयर के बावजूद, बोली गई जानकारी सुनते ही गायब हो जाती है, जबकि लिखे हुए टेक्स्ट को दोबारा पढ़ा जा सकता है. इसलिए डोंग-ह्यून को सारी जानकारी याद रखनी पड़ती है.
गणित भी उनके लिए आसान नहीं है.
उन्हें सिर्फ उंगलियों के सहारे ब्रेल में बदले गए जटिल ग्राफ़ और टेबल को समझना होता है.
फिर भी, उनका कहना है कि अब स्थिति पहले से बेहतर है. पहले छात्रों को लगभग सारे गणितीय हिसाब-किताब दिमाग़ में ही करने पड़ते थे. लेकिन 2016 से ब्लाइंड स्टूडेंट्स को 'हांसोन' नामक ब्रेल नोटटेकर इस्तेमाल करने की अनुमति मिल गई है.
उन्होंने कहा, "जैसे दृष्टि वाले छात्र पेंसिल से अपने हिसाब लिखते हैं, वैसे ही हम ब्रेल में हांसोन पर उन्हें दर्ज करते हैं ताकि कदम-दर-कदम प्रक्रिया समझ सकें."
इस परीक्षा में भाग लेने वाले हैनबिट स्कूल फॉर द ब्लाइंड के एक अन्य छात्र, 18 साल के ओ जोंग-वोन ने बताया कि दिन का सबसे कठिन समय दोपहर बाद का होता है.
शाम का वक़्त सबसे मुश्किल
जोंग-वोन ने कहा, "दोपहर के खाने तक सब संभालने लायक रहता है. लेकिन शाम 4 या 5 बजे के आसपास, अंग्रेज़ी और कोरियन इतिहास के बीच का समय सबसे मुश्किल होता है."
उन्होंने बताया, "डिनर का कोई ब्रेक नहीं होता. जिस समय हम आम तौर पर खाना खाते हैं, उसी वक्त हम सवाल हल कर रहे होते हैं, इसलिए थकान और बढ़ जाती है. फिर भी मैं आगे बढ़ता हूं क्योंकि पता है कि आख़िर में एक उपलब्धि का एहसास होगा."
जोंग-वोन के लिए थकान इस वजह से भी ज़्यादा होती है कि उन्हें एक साथ अपने हाथों और सुनने की क्षमता पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित रखना पड़ता है.
उन्होंने कहा, "जब मैं उंगलियों से ब्रेल पढ़ता हूं और साथ ही ऑडियो के ज़रिए जानकारी लेता हूं, तो यह दृष्टि वाले छात्रों की तुलना में कहीं ज़्यादा थकाऊ लगता है."
लेकिन छात्रों का कहना है कि लंबी परीक्षा सबसे मुश्किल हिस्सा नहीं हैं. उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती अध्ययन सामग्री तक पहुंच है.
लोकप्रिय पाठ्यपुस्तकें और ऑनलाइन लेक्चर ब्लाइंड छात्रों की पहुंच से बाहर होते हैं.
ब्रेल संस्करण बहुत कम उपलब्ध हैं और सामग्री को ऑडियो में बदलने के लिए टेक्स्ट फ़ाइलों की ज़रूरत होती है, जिन्हें पाना बेहद कठिन है.
कई बार तो किसी को पूरी किताब हाथ से टाइप करनी पड़ती है ताकि उन्हें इस्तेमाल लायक बनाया जा सके.
ऑनलाइन लेक्चर भी चुनौतीपूर्ण हैं, क्योंकि कई शिक्षक स्क्रीन पर विज़ुअल नोट्स, रेखाचित्र और ग्राफ़िक्स का इस्तेमाल करके समझाते हैं, जिन्हें केवल ऑडियो के ज़रिए समझना संभव नहीं होता.
अध्ययन सामग्री मिलने में देरी बड़ी चुनौती

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सबसे बड़ी बाधाओं में से एक है सरकार द्वारा तैयार ईबीएस प्रिपरेशन बुक्स के ब्रेल संस्करण में देरी, जो राष्ट्रीय परीक्षा से सीधे जुड़ी मुख्य अध्ययन सामग्री होती है.
इस देरी के कारण अन्य छात्रों के मुक़ाबले ब्लाइंड छात्रों को कई महीनों बाद सामग्री मिलती है.
जोंग-वोन ने कहा, "अन्य छात्रों को जनवरी से मार्च के बीच ईबीएस की किताबें मिल जाती हैं और वे पूरे साल उनका अध्ययन करते हैं. हमें ब्रेल फ़ाइलें सिर्फ अगस्त या सितंबर में मिलती हैं, जब परीक्षा में कुछ ही महीने बचे होते हैं."
उन्होंने कहा, "परीक्षा से 90 दिन पहले तक ब्रेल सामग्री पूरी नहीं हुई थी. मैं बार-बार सोचता था कि प्रकाशन की प्रक्रिया थोड़ी तेज़ हो सके."
ईबीएस परीक्षा सामग्री के ब्रेल संस्करण तैयार करने वाले राष्ट्रीय विशेष शिक्षा संस्थान ने बीबीसी को बताया कि हर पुस्तक की प्रक्रिया में कम से कम तीन महीने लगते हैं क्योंकि उसे संबंधित दिशानिर्देशों का पालन करना होता है.
संस्थान ने यह भी कहा कि वह "ब्लाइंड छात्रों की पढ़ाई में रुकावट न आए, इसके लिए सामग्री को अलग-अलग खंडों में तैयार कर उपलब्ध कराने जैसे कई प्रयास कर रहा है."
'धैर्य की परीक्षा'

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कोरियन ब्लाइंड यूनियन ने बताया कि वह लंबे समय से इस मुद्दे को अधिकारियों के सामने उठा रही है और सभी पाठ्यपुस्तकों के ब्रेल संस्करण तक बेहतर पहुंच की मांग को लेकर संवैधानिक याचिका दायर करने की योजना बना रही है.
इन छात्रों के लिए सुइनेंग सिर्फ़ कॉलेज में प्रवेश की परीक्षा नहीं है, यह उन सालों की गवाही है जो उन्होंने यहां तक पहुंचने के लिए झेले हैं.
जोंग-वोन ने परीक्षा को 'धैर्य की परीक्षा' बताया.
उन्होंने कहा, "ज़िंदगी में लगभग कुछ भी धैर्य के बिना नहीं किया जा सकता. मुझे लगता है कि यह समय मेरे आत्म-संयम को मज़बूत करने की प्रक्रिया है."
उनके टीचर कांग सियोक-जू हर साल छात्रों को यह परीक्षा देते हुए देखते हैं और कहते हैं कि ब्लाइंड छात्रों का धैर्य "काबिले तारीफ़" है.
उन्होंने बताया, "ब्रेल पढ़ने का मतलब है उंगलियों से उभरे हुए बिंदुओं को छूना. लगातार घर्षण से उनके हाथों में दर्द होने लगता है. लेकिन वे घंटों तक ऐसा करते रहते हैं."
कांग ने अपने छात्रों से कहा कि वे पछताने की बजाय अपनी कोशिश पर गर्व करें.
उन्होंने कहा, "यह परीक्षा वह जगह है जहां आप पहली कक्षा से लेकर अब तक सीखी हर चीज़ एक ही दिन में लगा देते हैं. कई छात्रों को बाद में निराशा होती है, लेकिन मैं चाहता हूं कि वे यह महसूस करते हुए जाएं कि उन्होंने अपनी पूरी कोशिश की."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
















