मोदी कैबिनेट 3.0- मीडिया में किस-किस की है चर्चा, किसको मिलेगी कितनी हिस्सेदारी

नरेंद्र मोदी

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नरेंद्र मोदी आज (रविवार) लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं.

शपथ ग्रहण समारोह से पहले मोदी एनडीए प्रमुख के तौर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को मंत्री परिषद के सदस्यों की सूची सौंप सकते हैं.

मंत्रियों की लिस्ट में किसका नाम होगा और किसे जगह न मिलने की आशंका है, इस पर अटकलों का बाज़ार गर्म है.

मीडिया में एनडीए के घटक दलों के दिग्गजों के नाम चल रहे हैं तो राजनीतिक विश्लेषक गठबंधन सरकार की ज़रूरतों और मजबूरियों के संदर्भ में अलग-अलग नाम पेश कर रहे हैं.

एनडीए की बैठक में घटक दलों और उनके सहयोगियों को तवज्जो दिए जाने के अंदाज़ से भी मंत्रिमंडल में शामिल होने वाले मंत्रियों के नाम का कयास लगाया जा रहा है.

मोदी कैबिनेट 3.0 में एनडीए के घटक दलों के सहयोगियों को जगह तो मिलेगी ही लेकिन बीजेपी के नए चेहरे भी देखने को मिल सकते हैं क्योंकि पिछले मंत्रिमंडल में शामिल 20 मंत्री इस बार चुनाव हार गए हैं.

एनडीए के घटक दलों को कितने मंत्री पद?

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इमेज कैप्शन, नरेंद्र मोदी के साथ पवन कल्याण (फाइल फोटो)

‘इंडियन एक्सप्रेस’ के मुताबिक़ तेलुगू देशम पार्टी के 16 सांसद चुनकर आए हैं. पार्टी को दो मंत्री पद मिल सकते हैं. पवन कल्याण की जन सेना (दो सांसद) को भी एक मंत्री पद मिल सकता है.

जिन नामों की चर्चा चल रही है उनमें श्रीकाकुलम के सांसद के राम मोहन नायुडू, गुंटुर के सांसद चंद्रशेखर पेम्मासानी और चित्तूर के सांसद डी. प्रसाद राव शामिल हैं.

नीतीश कुमार की जनता दल (यूनाइटेड) के तीन सांसदों को भी कैबिनेट में जगह मिल सकती है. चिराग पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति (रामविलास) को एक मंत्री पद मिल सकता है.

एनडीटीवी के मुताबिक़ जेडीयू के पूर्व अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह 'लल्लन' और बिहार के सीएम नीतीश कुमार के विश्वासपात्र संजय झा को कैबिनेट पद के लिए पसंदीदा माना जा रहा है.

यूपी से शामिल हो सकता है कि कोई दलित चेहरा?

योगी आदित्यनाथ

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एनडीटीवी ने लिखा है कि चार दर्जन मंत्री शपथ ले सकते हैं. सूत्रों के मुताबिक़, बीजेपी की तरफ से सहयोगियों से कह दिया गया है कि वह अभी दबाव न बनाएं. मंत्रिमंडल विस्तार के दूसरे चरण में उनकी मांगों का ख्याल रखा जाएगा. इस पर सहमति बनने के बाद किस दल को कितनी हिस्सेदारी मिलेगी यह फाइनल हो गया है.

एनडीटीवी लिखता है कि उत्तर प्रदेश में बीजेपी को मिले झटके की झलक भी मोदी मंत्रिमंडल में दिखाई दे सकती है.

विपक्षी दल जिस तरह से बहुमत मिलने पर संविधान और आरक्षण खत्म करने की बीजेपी की छवि गढ़ने में सफल रहे थे, उसे नई 'टीम मोदी' के ज़रिए जवाब दिया जा सकता है.

बीजेपी इस चीज़ को लेकर बहुत गंभीर है और यूपी के दलित चेहरे की एंट्री मोदी कैबिनेट में हो सकती है.

नीतीश और चिराग को कितनी हिस्सेदारी

चिराग पासवान

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जनता दल यूनाइटेड के 12 सांसद चुन कर आए हैं. पांच सांसद चिराग की पार्टी के हैं.

बिहार में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं इसलिए राज्य के सांसदों को मंत्रिमंडल में ज़्यादा जगह मिल सकती है.

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक़ कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी को भी मंत्री बनाया जा सकता है. अख़बार ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि गुरुवार को एनडीए की मीटिंग में ये फॉर्मूला तय किया गया है.

घटक दलों को हर पांच सीट पर एक मंत्री पद दिया जाएगा. हालांकि कुमारस्वामी के जनता दल (सेक्युलर) को दो ही सीटें मिली हैं और उसे एक राज्य मंत्री का पद मिल सकता है.

लेकिन कुमारस्वामी के राजनीतिक कद को देखते हुए उन्हें कैबिनेट स्तर का मंत्री बनाया जा सकता है. कुमारस्वामी कर्नाटक के मुख्यमंत्री रह चुके हैं.

जीतनराम मांझी, जयंत चौधरी और अनुप्रिया पटेल

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हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा के जीतनराम मांझी, आरएलडी के जयंत चौधरी और अपना दल की अनुप्रिया पटेल को भी मंत्री पद मिलने की उम्मीद है.

हालांकि एनडीए की बैठक में जयंत चौधरी को जिस तरह से पीछे बिठाया गया था उससे उनको लेकर तमाम तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं थीं.

जयंत चौधरी की पार्टी चुनाव से ठीक पहले एनडीए में शामिल हुई थी. यूपी में दो सीटों पर पार्टी के उम्मीदवार उतरे और दोनों ही जगह पर उसे जीत मिली. जयंत पश्चिमी यूपी से आते हैं, उन्‍हें जाट और किसान नेता माना जाता है.

इस बार भाजपा का जाट चेहरा माने जाने वाले केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान चुनाव हार गए हैं. ऐसे में माना जा रहा है कि भाजपा इस समुदाय को साधने के लिए जयंत को मंत्री बना सकती है.

महाराष्ट्र को कितना प्रतिनिधित्व

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इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक़ मंत्रिमंडल में महाराष्ट्र का भी प्रतिनिधित्व दिखेगा क्योंकि वहां भी इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं. महाराष्ट्र में बीजेपी के गठबंधन ने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया है. शिवसेना (शिंदे) को सात सीटें मिली हैं और एनसीपी (अजित पवार) को सिर्फ एक. बीजेपी 12 सीटें ही जीत पाई है.

महाराष्ट्र में इंडिया गठबंधन की वापसी दिख रही है. इसलिए बीजेपी वहां अपने सहयोगियों को कमज़ोर स्थिति में नहीं देखना चाहेगी.

जहां तक बीजेपी की बात है तो पूर्व मुख्यमंत्रियों शिवराज सिंह चौहान, मनोहर लाल खट्टर, बिप्लव कुमार देव और बासवराज बोम्मई को मंत्री पद मिल सकता है.

राजनाथ सिंह, नीतिन गडकरी, जेपी नड्डा और अश्विनी वैष्णव को फिर मौका मिल सकता है.

अख़बार ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि एनडीए अपना विस्तार कर सकता है इसलिए निर्दलियों को भी संदेश भेजे जा रहे हैं. 18वीं लोकसभा में चुनकर आए सात निर्दलियों में से एक सांगली के प्रकाश बाबू पाटिल इंडिया गठबंधन में शामिल हो गए हैं.

बीजेपी के नेता वाईएसआरसीपी के सांसदों से भी संपर्क साधे हुए हैं. पार्टी के चार सांसद जीत कर आए हैं.

शिवराज और खट्टर बीजेपी अध्यक्ष पद की दौड़ में

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कहा जा रहा है कि बीजेपी और आरएसएस के नेता पार्टी अध्यक्ष भी बदल सकते हैं. मौजूदा बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल इस महीने ख़त्म हो रहा है. मध्‍य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के नाम भाजपा अध्यक्ष पद की रेस में होने के भी कयास लग रहे हैं.

इस चुनाव में बीजेपी को 240 सीटें मिली हैं जो बहुमत के आंकड़े से 32 कम हैं. पार्टी को 2019 के चुनावों में 303 सीटों पर जीत हासिल हुई थी. बीजेपी और एनडीए के उसके घटक दलों ने 293 सीटें जीती हैं.

कांग्रेस के नेतृत्व में चुनाव लड़े इंडिया गठबंधन ने इस बार बेहतरीन प्रदर्शन किया और 233 सीटें जीतने में कामयाब रहा.

कांग्रेस को पिछले चुनाव में 52 सीटें मिली थीं लेकिन इस बार इसने 99 सीटें जीती हैं. इंडिया गठबंधन के अन्य दलों में समाजवादी पार्टी ने 37, टीएमसी ने 29, डीएमके ने 22, शिवसेना यूबीटी ने 9, आम आदमी पार्टी ने तीन और झारखंड मुक्ति मोर्चा ने तीन सीटें जीती हैं.

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