यूटीआईः महिलाओं को पेशाब के संक्रमण की समस्या अधिक क्यों होती है?

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    • Author, अंजलि दास
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए

अमेरिका में हर साल पेशाब के संक्रमण के लगभग ढाई लाख मामले सामने आते हैं.

पूरी दुनिया में क़रीब डेढ़ करोड़ लोग इसका इलाज करवाते हैं.

ब्लैडर में सूजन को मेडिकल की भाषा में सिस्टिटिस कहा जाता है. इसे यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फ़ेक्शन यानी यूटीआई कहा जाता है जो अधिकांश मामलों में बैक्टीरिया की वजह से संक्रमण या इन्फ़ेक्शन फैलने से होता है.

यह तब होता है जब पेशाब की थैली (यूरेथ्रा) और इसकी नली (ट्रैक्ट) में संक्रमण हो जाता है.

यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फ़ेक्शन (यूटीआई) एक बहुत ही आम बीमारी है जो किसी भी उम्र के लोगों को हो सकती है.

नवजात शिशु से लेकर बुज़ुर्ग तक इसकी चपेट में आ सकते हैं.

क्या महिलाएं अपनी सेहत का ख्याल नहीं रखती हैं?

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एक शोध के मुताबिक़ किसी महिला के जीवन में यूटीआई संक्रमण होने की 60% संभावना होती है तो पुरुषों में यह केवल 13% है.

43 वर्षीय रेणु (बदला हुआ नाम) एक गृहणी हैं. वे कहती हैं कि अक्सर घर के कामों में व्यस्त होने और ज़िन्दगी की भाग दौड़ में वे सेहत का ख्याल नहीं रख पातीं.

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पति देहरादून में प्रोफ़ेसर हैं और महीने में एक या दो बार ही आ पाते हैं.

रेणु कहती हैं, "मुझे पेट में अक्सर दर्द होता था पर यह ज़्यादा दिनों तक नहीं रहता था, तो मैं डॉक्टर के पास नहीं जाती थी."

"एक दिन पेट दर्द के साथ पेशाब में जलन होने लगी. पेशाब में हल्का ख़ून जैसा भी आया. घबराते हुए मैं तुरंत हॉस्पिटल गई. डॉक्टर ने कुछ टेस्ट करवाने को कहा और दवाइयां दीं.”

दवाइयों से उन्हें बहुत आराम मिला पर कुछ महीने बाद फिर ये लक्षण दिखे. इस बार रेणु (बदला हुआ नाम) ने घरेलू उपचार से ख़ुद को ठीक करने की ठानी और योग, प्राणायाम को अपने जीवन में शामिल कर लिया.

असीमा 37 वर्षीय एक स्कूल टीचर हैं.

वे कहती हैं, "टीचर की जॉब के बिज़ी शेड्यूल में आप कहीं न कहीं अपनी बॉडी को इग्नोर भी कर देते हैं. ऊपर से स्कूल में टॉयलेट की स्थिति कुछ अच्छी नहीं रहती."

एक दिन स्कूल के दौरान ही उन्हें पेट में तेज़ दर्द हुआ.

उस दिन को याद करते हुए वे कहती हैं, "शुरू शुरू में दर्द कम था लेकिन कुछ देर के बाद यह बर्दाश्त के बाहर था. मैं फौरन हाफ़-डे की लीव लेकर डॉक्टर के पास पहुंची. तो पता चला कि मुझे यूटीआई हुआ है. डॉक्टर ने 5 दिनों के लिए एंटीबायोटिक्स दिया. जिससे मुझे आराम मिल गया."

महिलाओं में यूटीआई क्यों अधिक होता है?

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यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फ़ेक्शन यानी यूटीआई तब होता है जब मूत्राशय या पेशाब की थैली और इसकी नली बैक्टीरिया से संक्रमित हो जाती हैं.

यह संक्रमण महिलाओं और पुरुषों दोनों को हो सकता है. हालांकि पुरुषों के मुक़ाबले महिलाओं में यूटीआई अधिक देखने को मिलता है.

शारदा मेडिकल कॉलेज ग्रेटर नोएडा में सीनियर रेज़िटेंड डॉक्टर तनुज लवानिया इसे विस्तार से समझाते हुए कहती हैं, "दरअसल महिलाओं को पुरुषों की तुलना में सिस्टिटिस होने की संभावना अधिक इसलिए होती है क्योंकि उनकी यूरेथ्रा (जहां से पेशाब निकलता है) का साइज पुरुषों (लगभग 20 सेंटीमीटर) के मुक़ाबले बहुत छोटा होता है. वो लगभग 4.8 से 5.1 सेंटीमीटर का होता है."

शारदा मेडिकल कॉलेज ग्रेटर नोएडा में सीनियर रेज़िटेंड डॉक्टर तनुज लवानिया

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वे कहती हैं, "जब वो महिला बैक्टीरिया से संक्रमित होती है. तो बैक्टीरिया के मूत्राशय के भीतर जाने की संभावना बढ़ जाती है. क्योंकि यूरेथ्रा के छोटा होने से उसे वहां पहुंचने में आसानी होती है और यही कारण है कि पुरुषों की तुलना में यूटीआई महिलाओं में अधिक होता है."

डॉक्टर तनुज कहती हैं, "कम से कम 10 प्रतिशत महिलाओं को एक बार सिस्टिटिस होता है. उनमें से आधी महिलाओं को यह दोबारा भी होता देखा गया है."

यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में सेंटर फ़ॉर यूरोलॉजिकल बायोलॉजी की प्रमुख जेनिफ़र रॉन कहती हैं, "यूटीआई को अगर नज़रअंदाज किया, तो यह इन्फ़ेक्शन किडनी तक फैल सकता है. यूटीआई आम तौर पर इ-कोली बैक्टीरिया के संक्रमण से होता है. हालांकि कई अन्य बैक्टीरिया भी इसके लिए ज़िम्मेदार हो सकते हैं."

यूटीआई के लक्षण

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डॉक्टर तनुज कहती हैं कि महिलाओं में इसके कई लक्षण हो सकते हैं.

  • बार-बार पेशाब जाने की इच्छा
  • पेशाब करने में जलन या बहुत दर्द का अहसास
  • पेशाब करते समय वजाइना के स्किन पर जलन पैदा होना
  • पेशाब में ख़ून का आना
  • जो महिलाएं इसे लंबे समय तक नज़रअंदाज करती हैं तो उनमें बहुत तेज़ बुख़ार का आना भी एक लक्षण हो सकता है.

डॉक्टर कौन से टेस्ट करवाती हैं?

डॉक्टर तनुज कहती हैं- ऐसे किसी भी क्लिनिकल पूछताछ में यदि हमें लगता है कि उन्हें यूटीआई हो सकता है तो हम उस महिला को यूरिन टेस्ट करने को कहते हैं. हम यूरिन रूटीन माइक्रोस्कोपी और यूरिन कल्चर सेंसिटिविटी टेस्ट कराते हैं.

डॉक्टर तनुज इसका कारण बताती हैं, "रूटीन माइक्रोस्कोपी से यह देखा जाता है कि ये इन्फेक्शन बैक्टीरिया से हुआ या फंगस से. वहीं कल्चर में यह पता चलता है कि यह कौन से बैक्टीरिया से हुआ है ताकि उससे संबंधित दवाएं दी जा सकें."

किन महिलाओं में संक्रमण की अधिक संभावना?

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डॉक्टर तनुज बताती हैं, "वैसे तो यूटीआई सभी आयु वर्ग में देखने को मिला है लेकिन शादी शुदा महिलाओं में यह अधिक देखने को मिलता है."

वे यह भी कहती हैं, "इसके होने की संभावना कम पानी पीने वाली महिलाओं में ज़्यादा होती है. जो पेशाब को देर तक रोक कर रखती हैं उनमें होती है क्योंकि इससे बैक्टीरिया को इक्ट्ठा होने का मौक़ा मिलता है." वे यूटीआई होने के अन्य कारणों को भी गिनाती हैं.

  • जो टॉयलेट के दौरान जेट का इस्तेमाल ज़्यादा करती हैं.
  • जो सफ़ाई करने के लिए केमिकल प्रॉडक्ट्स का इस्तेमाल करती हैं
  • जो साफ़ सफ़ाई का पूरा ध्यान नहीं रखती हैं.
  • जो अंडरगार्मेंट्स को बार बार बदलती नहीं हैं.
  • जिन महिलाओं को डायबीटिज़ हो उन्हें इस संक्रमण की आशंका बढ़ जाती है.
  • प्रेग्नेंसी के दौरान भी यूटीआई इन्फ़ेक्शन के होने की संभावना बढ़ती है.
  • मेनोपॉज के बाद भी यूटीआई संक्रमण हो सकते हैं क्योंकि तब वजाइना में फ़्रेंड बैक्टीरिया की संख्या कम हो जाते हैं.

अगर यूटीआई संक्रमण बार बार हो रहा है?

किसी महिला को यूटीआई संक्रमण बार बार हो रहा है तो इसके क्या कारण हो सकते हैं?

डॉक्टर तनुज बताती हैं, "जिन महिलाओं को यूटीआई संक्रमण बार बार हो रहा हो उनके अन्य टेस्ट कराने पड़ते हैं. उनका अल्ट्रासाउंड किया जाता है. यह देखा जाता है कि किडनी और किडनी की नली (यूरेटर) ठीक है कि नहीं. गुर्दे में पथरी या यूरेटर में पथरी है और अगर वो पथरी वहां पर फंसी हुई है तो उसकी वजह से भी पेशाब का संक्रमण होता है."

वे कहती हैं कि ऐसी स्थिति में यूरोलॉजिस्ट से भी सलाह लेनी पड़ सकती है.

डॉ. तनुज कहती हैं कि यूटीआई के कोई भी लक्षण दिखें तो महिलाओं को स्त्री रोग विशेषज्ञ यानी गायनाकोलॉजिस्ट के पास आना चाहिए. वे अगर सलाह दें तभी किसी अन्य डॉक्टर के पास जाएं.

बुज़ुर्गों को परेशान करता है यूटीआई

जेनिफ़र रॉन कहती हैं कि यूटीआई हर साल क़रीब डेढ़ करोड़ लोगों को संक्रमित करता है. वे कहती हैं कि पुरुषों में यह बुज़र्गों में ज़्यादातर देखने को मिलता है.

वे कहती हैं, "ढलती उम्र में पेशाब में जलन, बुख़ार, निचले हिस्से में दर्द, पेशाब में बदबू आदि सामान्य तौर पर इसके लक्षण देखने को मिलते हैं."

डॉक्टर तनुज इसका कारण बताते हुए कहती हैं, "पुरुषों के प्रोस्टेट ग्लैंड का आकार अगर बढ़ता है तो पेशाब की थैली पर दबाव पड़ता है. इससे थैली से पेशाब का निकलना कम हो जाता है. ऐसी सूरत में उन्हें यूटीआई होने की संभावना बनती है."

वे कहती हैं, "महिलाओं की तुलना में पुरुषों में यूटीआई अधिक गंभीर होता है. ऐसे पुरुषों को अस्पताल में भर्ती भी होना पड़ सकता है."

बुज़ुर्ग महिलाओं के लिए वे कहती हैं कि जब भी इसके लक्षण दिखें वो बग़ैर डॉक्टरी सलाह के दवाएं न खाएं और जो टेस्ट करवाने कहा जाए वो ज़रूर करवाएं.

यूटीआई से बचाव के लिए क्या करें?

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डॉक्टर तनुज कहती हैं कि बग़ैर किसी डॉक्टरी सलाह के कोई एंटीबायोटिक्स न खाएं. साथ ही इम्यून सिस्टम मजबूत बनाने के लिए वो खान पान पर ध्यान देने की सलाह देती हैं और बताती हैं कि यूटीआई से बचाव के लिए क्या करना चाहिए.

  • पानी खूब पीएं. कम से कम दो से तीन लीटर पानी पिएं.
  • पुरुषों के साथ संबंध बनाते समय कंडोम का इस्तेमाल ज़रूर करें.
  • जो महिलाएं कंडोम का इस्तेमाल नहीं कर पातीं हैं तो संबंध बनाने के तुरंत बाद ज़रूर-ज़रूर पेशाब करें और पानी से अपने प्राइवेट पार्ट को धोएं.
  • वजाइनल हाइजिन प्रॉडक्ट इस्तेमाल करना बंद कर दें.
  • सार्वजनिक शौचालय इस्तेमाल करने से पहले टॉयलेट शीट को नॉर्मल पानी से ज़रूर धोएं.

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