नेपाली कांग्रेस क्या बीजेपी के प्रभाव में हिंदू राष्ट्र की मांग तेज़ कर रही है?

नेपाली कांग्रेस के समर्थक
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    • Author, विष्णु पोखरेल
    • पदनाम, बीबीसी नेपाली सेवा

नेपाली कांग्रेस के कुछ नेताओं ने संकेत दिया है कि अगले सप्ताह होने वाली पार्टी महासमिति की बैठक में नेपाल को 'हिंदू राष्ट्र' बनाने की मांग पहले से अधिक व्यापक रूप से उठाई जा सकती है.

बैठक नज़दीक आते ही 'हिंदू राष्ट्र' की स्थापना के लिए अभियान चला रहे कुछ नेताओं ने अलग से घोषणापत्र जारी करने के कार्यक्रम की घोषणा की है.

राजनीति के जानकार और कांग्रेस को जानने वाले भी कहते हैं कि नेपाली कांग्रेस के भीतर 'हिंदू राष्ट्र' को लेकर राय बढ़ती जा रही है.

उनकी नज़र में इसका एक बड़ा कारण ये भी है कि कुछ नेता ये मानते हैं कि धर्म का इस्तेमाल राजनीति के लिए किया जा सकता है.

कुछ लोग नेपाली कांग्रेस में 'हिंदू राष्ट्र' की मांग बढ़ने को देश में भारत की सत्तारूढ़ पार्टी बीजेपी के बढ़ते प्रभाव के संकेत के रूप में भी देखते हैं.

कांग्रेस में हिंदू राष्ट्र अभियान

शंकर भंडारी और लक्ष्मण घिमिरे

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नेपाल के धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बनने के बाद से नेपाली कांग्रेस के कुछ नेता हिंदू राष्ट्र की बहाली के लिए अभियान चला रहे हैं.

अपनी मृत्यु तक कांग्रेस नेता खुम बहादुर खड़का ऐसे अभियान का नेतृत्व कर रहे थे.

पिछले कुछ सालों से कांग्रेस के केंद्रीय सदस्य और सांसद शंकर भंडारी इस तरह के अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं.

भंडारी 'सनातन हिंदू राष्ट्र नेपाल स्थापना महाभियान' के संयोजक हैं और विभिन्न गतिविधियों के ज़रिए पार्टी नेतृत्व पर दबाव बनाते रहे हैं.

इस अभियान के सह-संयोजक लोकेश ढकाल ने कहा कि रविवार की बैठक में महासमिति की मीटिंग से पहले एक घोषणापत्र जारी करने का निर्णय लिया गया. इसके अलावा कुछ पदाधिकारियों की नियुक्ति की गई.

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नेपाली कांग्रेस की महासमिति की बैठक से पहले नेपाली कांग्रेस का घोषणापत्र जारी करने का कार्यक्रम भी तय किया गया है. इसमें सनातन हिंदू राष्ट्र नेपाल स्थापना अभियान मुख्य एजेंडा है.
लोकोश ढकाल
सह संयोजक, सनातन हिंदू राष्ट्र नेपाल स्थापना महाभियान

उनकी ओर से जारी बयान में कहा गया है, ''नेपाली कांग्रेस की आगामी महासमिति की बैठक से पहले नेपाली कांग्रेस का घोषणापत्र जारी करने का कार्यक्रम भी तय किया गया है. इसमें सनातन हिंदू राष्ट्र नेपाल स्थापना अभियान मुख्य एजेंडा है.''

इसके अलावा, नेपाली कांग्रेस के कई अन्य प्रभावशाली नेताओं ने भी बार-बार हिंदू राष्ट्र के प्रति अपना समर्थन और संघीय शासन प्रणाली के विरोध को व्यक्त किया है.

भंडारी के नेतृत्व में इससे पहले भी हिंदू राष्ट्र के पक्ष में हस्ताक्षर कराए गए और महासमिति की बैठक के सामने पेश किए गए थे.

क्या कहते हैं हिंदू राष्ट्र समर्थक?

सनातन हिंदू राष्ट्र नेपाल स्थापना अभियान की हालिया बैठक में भाग लेने वाले लोग

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कांग्रेस के पूर्व केंद्रीय सदस्य लक्ष्मण प्रसाद घिमिरे संविधान सभा में नेपाली कांग्रेस के मुख्य सचेतक रहे हैं. उन्होंने संविधान निर्माण प्रक्रिया की चर्चा में भाग भी लिया था. वे अभियान की सलाहकार परिषद के संयोजक हैं.

उनका दावा है कि संविधान बनने से पहले ही नेपाल को धर्मनिरपेक्ष घोषित करना एक 'गंभीर ग़लती' थी.

2006-07 के जन आंदोलन के बाद बहाल संसद ने नेपाल को धर्मनिरपेक्ष बना दिया था.

उन्होंने कहा, "उस समय न सिर्फ़ ग़लती हुई, बल्कि कोई चर्चा भी नहीं हुई."

उनका दावा है कि उन्होंने संविधान सभा में बार-बार कहा कि धर्मनिरपेक्षता और संघीय शासन प्रणाली पर जनमत संग्रह होना चाहिए.

उन्होंने कहा कि कांग्रेस को नेपाल की बहुसंख्यक जनता की भावनाओं की कद्र करते हुए हिंदू राष्ट्र के अभियान को आगे बढ़ाना चाहिए.

घिमिरे ने कहा, "मौजूदा संविधान धर्मनिरपेक्षता की बात कहता है, लेकिन ये सनातन धर्म की रक्षा की भी बात करता है. इससे विरोधाभास पैदा हो गया है. इसे ध्यान में रखते हुए और लोगों की भावनाओं की कद्र करने के लिए कांग्रेस को हिंदू राष्ट्र पर विचार करना चाहिए.”

जब उनसे कांग्रेस के भीतर हिंदू राष्ट्र अभियान पर भारत की सत्तारूढ़ बीजेपी के प्रभाव के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, "चलिए भारत के प्रभाव या दुष्प्रभाव को छोड़ दें. ये अवधारणा है कि इस देश को इस देश के बहुसंख्यक लोगों की भावनाओं का सम्मान करते हुए धार्मिक स्वतंत्रता के साथ एक सनातन हिंदू राष्ट्र होना चाहिए.''

उन्होंने कहा कि नेपाल को हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए सबसे पहले पार्टी को उस दिशा में लाना होगा और महासमिति की बैठक में इस पर व्यापक बहस होगी.

धर्मनिरपेक्षता के समर्थक क्या कहते हैं?

नेपाली कांग्रेस का कार्यालय

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कांग्रेस नेता और सांसद प्रदीप पौडेल का मानना ​​है कि चूँकि नेपाली समाज में हिंदू राष्ट्र की मांग है, इसलिए इसका असर उनकी पार्टी पर भी पड़ना स्वाभाविक है.

हालाँकि पौडेल का कहना है कि संविधान को लागू करना 'नेतृत्व वाली पार्टी' के संदर्भ में कांग्रेस की भी ज़िम्मेदारी है.

उन्होंने कहा, ''अगर संविधान बनाते समय वे धर्म के बारे में चुप रहते तो अलग बात होती, लेकिन अब जब यह बन गया है तो इसे लागू करना उचित है. संविधान के किसी भी प्रमुख अनुच्छेद या अवधारणा को बदलना यहीं तक सीमित नहीं है. यह संविधान के कार्यान्वयन की प्रक्रिया को और जटिल बना देगा.”

उन्होंने कहा, ''कांग्रेस के नेतृत्व में जारी संविधान को लागू करना भी हमारी ज़िम्मेदारी है. इसलिए संविधान को तुरंत बदलने का मुद्दा स्वाभाविक नहीं है.''

भंडारी के नेतृत्व वाला समूह, जो हिंदू राष्ट्र की मांग कर रहा है, संघीय शासन व्यवस्था से भी अपनी असहमति व्यक्त करता रहा है.

हालाँकि पौडेल वाले गुट में भी इस तरह की बहस चल रही है. लेकिन पौडेल का मानना है कि पार्टी संविधान के प्रावधानों को बदलने की दिशा में नहीं जाएगी.

धर्म का 'इस्तेमाल' करने का दांव

नेपाल

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राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि हाल के वर्षों में कांग्रेस के भीतर धर्मनिरपेक्षता का विरोध बढ़ता दिख रहा है.

उनके अनुसार इसके दो मुख्य कारण हैं:

  • पहला: कांग्रेस का खोया हुआ जनमत बचाने के लिए धर्म की आड़ लेने का दांव
  • दूसरा: कांग्रेस के भीतर भारत में सत्ताधारी पार्टी बीजेपी का बढ़ता प्रभाव

राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर कृष्णा खनाल कहते हैं, ''अब कांग्रेस पतन की ओर है. राजनेता सोच सकते हैं कि क्या यह (धर्म की राजनीति) मतदाताओं को आकर्षित कर सकती है. दूसरा भारतीय प्रभाव भी है. भारत में बीजेपी का प्रभाव है. नेपाल की राजनीति पर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड का व्यापक प्रभाव है. ख़ासकर नेपाल में योगी आदित्यनाथ का प्रभाव है."

उनके मुताबिक़ अब नेपाली कांग्रेस 'जितनी ताक़त लगाएगी, उतनी राजनीति आगे बढ़ेगी' की राह पर आगे बढ़ती दिख रही है.

'चुप्पी के कई समर्थक'

नेपाली कांग्रेस

प्रोफेसर राजेश गौतम ने नेपाल के लोकतांत्रिक आंदोलन और कांग्रेस के इतिहास पर एक सिरीज़ लिखी है.

वे कहते हैं कि कांग्रेस के अंदर 'हिंदू राष्ट्र' जैसी मांगों को उसकी स्थापना के बाद से ही कभी बढ़ते, तो कभी कम होते देखा गया है.

हालाँकि उनका कहना है कि इस साल कांग्रेस के एक गुट की ओर से उठाई गई 'हिंदू राष्ट्र' की मांग पार्टी के भीतर पहले उठाई गई अन्य मांगों और विवादों से अलग है.

गौतम कहते हैं, ''कांग्रेस की राय हिंदू राष्ट्र न बनाने की नहीं थी, लेकिन उसे देश को गणतंत्र बनाने पर सहमत होने के लिए मजबूर होना पड़ा.''

उन्होंने कहा, ''कांग्रेस के भीतर हिंदू राष्ट्र विरोधी आवाज़ कभी मज़बूत नहीं रही. अब कांग्रेस के अलावा अन्य पार्टियाँ भी सोच रही हैं कि हिंदू राष्ट्र बनाया जाना चाहिए और देखा जा रहा है कि कांग्रेस में भी यह राय बढ़ती जा रही है."

उनके मुताबिक़ हाल के वर्षों में कांग्रेस के भीतर 'हिंदू राष्ट्र' के मूक समर्थक सामने आने लगे हैं.

गौतम कहते हैं, ''बाहर से देखने पर ऐसा लगता है कि केवल एक गुट 'हिंदू राष्ट्र' का प्रतिनिधित्व करता है. दरअसल पार्टी में कई लोग इससे सहमत हैं. नेपाली कांग्रेस धीरे-धीरे उस दृष्टिकोण से आगे बढ़ती दिख रही है. घटते जनमत को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए कांग्रेस हिंदू राष्ट्र की आड़ भी ले सकती है."

दूरगामी प्रभाव

नेपाल में अलग-अलग समूह हिंदू राष्ट्र और राजशाही की बहाली के लिए अभियान चला रहे हैं

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प्रोफ़ेसर खनाल कहते हैं कि राजनीति में धर्म का इस्तेमाल करने की कोशिशों का समाज पर गहरा असर पड़ेगा.

उनका तर्क है कि पहले नेपाल में कांग्रेस धर्म की राजनीति नहीं करती थी, बल्कि राजा ने अपनी वैधता साबित करने के लिए हिंदू राष्ट्र बनाया था.

अब उन्हें लगता है कि हिंदू राष्ट्र की मांग से देश में अशांति फैल सकती है और दूसरे तरह का संघर्ष हो सकता है.

खनाल का कहना है कि नेपाल की राजनीति बीजेपी पर निर्भर करेगी.

लेखक गौतम का यह भी कहना है कि चूंकि धर्म किसी व्यक्ति का निजी मामला है, इसलिए इसे राजनीति में लाने की कोशिश लंबे समय में समाज पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है.

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