बिहार में बाहुबली नेता अशोक महतो की 17 साल की क़ैद के बाद 60 साल में 'सियासी शादी'- प्रेस रिव्यू

अशोक महतो

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बिहार के नवादा ज़िले के नेता अशोक महतो ने 60 साल की उम्र में शादी रचाई है.

इससे पहले उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने दोस्तों और परिचितों से कहा था कि वो उनके लिए एक ‘दुल्हन’ की तलाश करें.

अख़बार टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी एक ख़बर के अनुसार, मंगलवार को महतो ने दिल्ली में रहने वाली लखीसराय की 46 साल की अनीता कुमारी से शादी कर ली है. उनकी शादी में गिने चुने लोग ही शामिल हुए.

अख़बार लिखता है कि अशोक महतो बिहार की मुंगेर लोकसभा सीट से आरजेडी के टिकट पर अपनी किस्मत आज़माना चाहते हैं.

वो जदयू नेता राजीव रंजन उर्फ़ ललन सिंह के मुक़ाबले उतरना चाहते हैं लेकिन हाल में आपराधिक मामले में सज़ा काटने के कारण उन्हें टिकट नहीं मिल सकता.

अशोक महतो 2001 में हुए नवादा जेल ब्रेक कांड में 17 साल की जेल की सज़ा काट चुके हैं.

वो बीते साल ही जेल से बाहर निकले हैं. नियमों के अनुसार, दो साल से अधिक की सज़ा पाया व्यक्ति जेल से निकलने के छह साल तक चुनाव नहीं लड़ सकता.

हालांकि इससे उनके इरादे कमज़ोर नहीं हुए हैं. वो बीते कुछ वक़्त से मुंगेर में रोड शो कर रहे हैं और लोगों से कह रहे हैं कि उन्हें आरजेडी से टिकट मिलने वाला है. हालांकि आरजेडी ने अब तक इसकी पुष्टि नहीं की है.

अख़बार लिखता है कि ख़ुद चुनाव न लड़ पाने की सूरत में वो अपनी पत्नी को मैदान में उतारना चाहते हैं. इसी सिलसिले में मंगलवार को शादी के बाद बुधवार को वो आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनकी पत्नी बिहार की पूर्व सीएम राबड़ी देवी से मिलने पहुंचे.

बाद में महतो ने संवाददाताओं से कहा कि लालू ने उनकी पत्नी के लिए पार्टी टिकट को लेकर उन्हें कोई “आश्वासन“ नहीं दिया है.

अख़बार ने बिहार आरजेडी प्रवक्ता चितरंजन गगन के हवाले से लिखा है कि सीट शेयरिंग को लेकर अब तक इंडिया गठबंधन के साथ बातचीत पूरी नहीं हुई है. ऐसे में अशोक महतो को पत्नी के लिए टिकट को लेकर भी कोई चर्चा नहीं हुई.“

चार अहम नेता कांग्रेस में शामिल

दानिश अली

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लोकसभा चुनावों से ठीक पहले चार प्रभावशाली नेता- चौधरी लाल सिंह, जय प्रकाश पटेल, पप्पू यादव और दानिश अली कांग्रेस में शामिल हो गए हैं.

अख़बार टेलिग्राफ़ में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार इससे जम्मू कश्मीर, झारखंड, बिहार और उत्तर प्रदेश में पार्टी को मज़बूती मिलेगी.

चौधरी लाल सिंह, जम्मू कश्मीर से पूर्व कांग्रेस सांसद रहे हैं जो 2014 में टिकट न मिलने पर बीजेपी में चले गए थे. कश्मीर के लिए कांग्रेस प्रभारी भरत सिंह सोलंकी कहते हैं कि उनके पार्टी से लौटने से जम्मू क्षेत्र में पार्टी को मज़बूती मिलेगी.

जय प्रकाश पटेल पूर्व बीजेपी विधायक हैं और झारखंड के जानेमाने ओबीसी नेता टेकलाल महतो के बेटे हैं. वो प्रदेश विधानसभा में पार्टी व्हिप हुआ करते थे और अपने इलाक़े के बेहद प्रभावशाली नेता माने जाते हैं.

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बिहार के नेता पप्पू यादव ने अपनी जन अधिकार पार्टी का विलय कांग्रेस में कर दिया है और अब कांग्रेस में शामिल हो गए हैं. उत्तर बिहार और सीमांचल के इलाक़े में उन्हें प्रभाव वाले नेता के तौर पर देखा जाता है.

वहीं उत्तर प्रदेश के अमरोहा से बसपा सांसद दानिश अली भी कांग्रेस में शामिल हो गए हैं. वो बीते साल उस वक़्त चर्चा में आए थे जब बीजेपी सांसद रमेश बिधूड़ी ने संसद में उनका का नाम लिए बिना उन पर अमर्यादित टिप्पणियाँ की थीं.

डीएमके मेनिफेस्टो में दावा- सत्ता में आए तो राज्यपाल की ताक़त कम करेंगे

तमिलनाडू सीएम

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लोकसभा चुनावों से पहले तमिलनाडु की सत्ताधारी डीएमके ने अपना चुनावी घोषणापत्र जारी किया है जिसमें पार्टी ने जीतने पर राज्यपाल की नियुक्ति में मुख्यमंत्री की भूमिका बनाने और राज्यपाल की ताक़त कम करने को लेकर वादा किया है.

अख़बार हिन्दुस्तान टाइम्स लिखता है कि भारत के इतिहास में ये अभूतपूर्व है कि किसी पार्टी ने अपने घोषणापत्र में राज्यपाल की ताक़त कम करने के जुड़ा वादा किया है. अख़बार लिखता है कि ये संघीय ढांचे के बिगड़ते जाने का संकेत है.

माना जा रहा है कि राज्यपाल आरएन रवि के साथ बार-बार विवाद होने के कारण पार्टी ने अपने घोषणापत्र में इस वादों को जगह दी है. दोनों के बीच का विवाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच चुका है.

पार्टी का आरोप है कि राज्यपाल बीजेपी के नुमाइंदे के तौर पर काम कर रहे हैं. हालांकि डीएमके के अलावा ग़ैर बीजेपी शासित प्रदेशों की सरकारें भी राज्यपाल पर इसी तरह के आरोप लगाती रही हैं.

पार्टी ने अपने घोषणापत्र में ये भी कहा है कि जीतने पर वो आपराधिक मामले से राज्यपाल का बचाव करने वाले संविधान की धारा 361 में संशोधन करेगी. साथ ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, नागरिकता संशोधन क़ानून और एक देश एक चुनाव के प्रस्ताव को भी खारिज करेगी.

केंद्र का पंजाब सरकार से सिद्धू मूसेवाला की माँ को लेकर सवाल

सिद्धू मूसेवाला के पिता

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इमेज कैप्शन, सिद्धू मूसेवाला के पिता ने नवजात बेटे के साथ ये तस्वीर इंस्टाग्राम पर शेयर की है

पंजाबी पॉप गायक सिद्धू मूसेवाला की मां चरण कौर के आईवीएफ़ के ज़रिए मां बनने के कुछ दिन बाद अब केंद्र सरकार ने पंजाब सरकार से सवाल किया है कि वो 58 साल की उम्र में कैसे मां बनीं.

अख़बार इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक ख़बर के अनुसार, केंद्र सरकार ने कहा है कि इस तरह के असिस्टेड रीप्रोडक्टिव प्रोसिजर (एआरटी) में महिला की उम्र की सीमा 50 साल है, ऐसे में 58 साल की महिला मां कैसे बनी.

अख़बार लिखता है कि स्वास्थ्य मंत्रालय के तहत आने वाले हेल्थ रिसर्च विभाग के निदेशक एकके रंजन ने बच्चे के जन्म से तीन दिन पहले 14 मार्च को पंजाब के स्वास्थ्य सचिव को पत्र लिखा था. इसमें उन्होंने पूछा था कि इस मामले में जांच एआरटी क़ानून 2021 के तहत की जाए और जल्द रिपोर्ट दी जाए.

पत्र में लिखा है कि “एआरटी क़ानून के तहत 21 से 50 साल की महिलाएं एआरटी तकनीक के ज़रिए गर्भवती हो सकती हैं. इस लिहाज़ से इस मामले की जांच कर उठाए गए कदमों के बारे में विभाग को जानकारी दें.”

इसी सप्ताह सिद्धू मूसेवाला की मां चरण कौर और पिता बलकौर सिंह ने कहा था कि उनके घर दूसरे बच्चे का जन्म हुआ है. बच्चे का जन्म बठिंडा के एक निजी अस्पताल में हुआ.

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