थैलेसीमिया पीड़ित पांच बच्चों के शरीर में कैसे पहुँचा एचआईवी

सतना अस्पताल

इमेज स्रोत, Pradeep Kashyap

इमेज कैप्शन, मध्य प्रदेश सरकार ने इस मामले की जांच के लिए अलग-अलग कमेटियां गठित की हैं
    • Author, विष्णुकांत तिवारी
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

"मेरी बेटी पहले से ही थैलेसीमिया से पीड़ित थी. अब उसे एचआईवी हो गया है. यहां की चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है."

यह कहना है मध्य प्रदेश के उस शख़्स का, जिनकी बेटी सतना में एचआईवी से संक्रमित पाए गए बच्चों में शामिल है.

उनकी बेटी उन पांच बच्चों में से एक है, जिनमें नियमित ब्लड ट्रांसफ़्यूज़न के दौरान एचआईवी संक्रमण की पुष्टि हुई है.

मध्य प्रदेश के सतना ज़िले में थैलेसीमिया से पीड़ित पांच बच्चों के एचआईवी पॉजिटिव पाए जाने के बाद सरकारी और निजी अस्पतालों में ब्लड ट्रांसफ़्यूज़न की प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं.

इससे पहले झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम ज़िले के सरकारी सदर अस्पताल में थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों को एचआईवी संक्रमित रक्त चढ़ाए जाने का मामला सामने आया था.

पश्चिमी सिंहभूम के ज़िलाधिकारी चंदन कुमार ने बीबीसी से बात करते हुए आठ साल से कम उम्र के थैलेसीमिया पीड़ित पांच बच्चों के एचआईवी संक्रमित होने की पुष्टि की थी.

मध्य प्रदेश सरकार ने इस मामले की जांच के लिए अलग-अलग स्तर पर समितियां गठित की हैं.

इन मामलों की पहचान जनवरी 2025 से मई 2025 के बीच नियमित जांच के दौरान हुई थी. हालांकि स्थानीय मीडिया में रिपोर्ट आने के बाद यह मामला अब चर्चा में आया है.

सतना के ज़िला कलेक्टर सतीश कुमार एस ने बीबीसी से बातचीत में इसकी इसकी पुष्टि करते हुए कहा, "एचआईवी से संक्रमित बच्चों की संख्या पांच है."

इससे पहले अलग-अलग आंकड़े सामने आए थे.

उन्होंने कहा, "इन बच्चों ने अलग-अलग जगहों पर ब्लड ट्रांसफ़्यूज़न लिया है. इसमें अलग-अलग डोनर शामिल रहे हैं. जिन ब्लड बैंकों से रक्त लिया गया, वहां की टेस्टिंग सुविधा, लैब व्यवस्था और एसओपी का पालन हुआ या नहीं, इसकी जांच की जा रही है."

अधिकारियों के मुताबिक, सभी बच्चे फिलहाल एंटी रेट्रोवायरल थेरेपी के तहत इलाज करा रहे हैं.

थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को ख़तरा ज़्यादा

ज़िला कलेक्टर
छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
कहानी ज़िंदगी की

मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ.

एपिसोड

समाप्त

मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि इन बच्चों ने सतना ज़िला अस्पताल के अलावा निजी अस्पतालों और जबलपुर सहित अन्य जगहों पर भी ब्लड ट्रांसफ़्यूज़न कराया था.

सतना के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनोज शुक्ला ने लिखित स्पष्टीकरण में कहा है कि जिन बच्चों को बार-बार ब्लड ट्रांसफ़्यूज़न की ज़रूरत पड़ती है, वे एचआईवी के हाई रिस्क ग्रुप में आते हैं और उनकी नियमित स्क्रीनिंग की जाती है.

उन्होंने कहा, "एचआईवी की पुष्टि होते ही बच्चों का इलाज तुरंत शुरू कर दिया गया था. फिलहाल सभी बच्चों की स्थिति स्थिर है."

अधिकारियों के अनुसार, पांच मामलों में से तीन वर्षीय एक बच्चे के माता और पिता दोनों एचआईवी पॉजिटिव पाए गए हैं. बाकी चार बच्चों के माता पिता की रिपोर्ट निगेटिव आई है.

कलेक्टर सतीश कुमार एस कहते हैं, "दरअसल, चार बच्चों के माता-पिता एचआईवी पॉजिटिव नहीं हैं, इससे यह साफ़ हो जाता है कि इन चार बच्चों में मां से संक्रमण की संभावना नहीं है. हम यह स्पष्ट तौर पर कह सकते हैं कि चार बच्चों को एचआईवी ब्लड ट्रांसफ़्यूज़न से ही हुआ है. चूक कहां हुई इसकी जांच की जा रही है."

अस्पताल

इमेज स्रोत, Pradeep Kashyap

इमेज कैप्शन, मामले की जांच ज़िला अस्पताल ने तीन सदस्यों की समिति बनाई है

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ शुक्ला ने बताया, "ज़िला अस्पताल के ब्लड बैंक में हर यूनिट ब्लड की जांच सरकारी प्रोटोकॉल के अनुसार की जाती है. हालांकि, कुछ रेयर मामलों में ब्लड डोनेट करने वाले के शरीर में संक्रमण शुरुआती अवस्था में होने के कारण जांच में पकड़ में नहीं आता, जिसे विंडो पीरियड कहा जाता है."

उन्होंने कहा, "स्वास्थ्य विभाग अब उन सभी डोनर्स को ट्रेस करने की कोशिश कर रहा है, जिनका ब्लड इन बच्चों को चढ़ाया गया था. कुछ डोनर्स जांच के लिए सामने आए हैं और उनकी रिपोर्ट एचआईवी निगेटिव पाई गई है. यह प्रक्रिया अभी जारी है."

मामले की जांच के लिए ज़िला अस्पताल स्तर पर तीन सदस्यीय समिति बनाई गई है. इसके साथ ही एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया है.

राज्य सरकार ने भी छह सदस्यीय समिति गठित की है, जिसे सात दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं. इस समिति में ब्लड ट्रांसफ़्यूज़न विशेषज्ञ, ड्रग इंस्पेक्टर और वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी शामिल हैं.

'हमें नहीं पता इंसाफ मिलेगा या नहीं'

सतना ज़िला अस्पताल

इमेज स्रोत, Pradeep Kashyap

इमेज कैप्शन, मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि इन बच्चों ने सतना ज़िला अस्पताल के अलावा निजी अस्पतालों और जबलपुर सहित अन्य जगहों पर भी ब्लड ट्रांसफ़्यूज़न कराया था

हालांकि, प्रभावित परिवार को ये आधिकारिक जांच फिलहाल बहुत राहत नहीं दे पा रही है.

हमने ऊपर जिस एक परिवार से बातचीत का ज़िक्र किया है, उनका कहना है कि उनकी बेटी की तबीयत नौ साल की उम्र से ही बिगड़ने लगी थी.

वो कहते हैं, "डॉक्टरों ने थैलेसीमिया की पुष्टि की और कहा कि उसे ज़िंदगी भर नियमित ब्लड ट्रांसफ़्यूज़न की ज़रूरत होगी. करीब तीन महीने पहले हमें बताया गया कि बच्ची एचआईवी पॉज़िटिव है."

उन्होंने कहा, "ये खबर सुनकर हम लोग सुन्न रह गए थे. शुरुआत में कोई साफ़ जवाब नहीं मिला. बाद में बताया गया कि ब्लड ट्रांसफ़्यूज़न के दौरान एचआईवी हो गया."

शिकायत दर्ज कराने के सवाल पर वो कहते हैं कि उन्हें समझ नहीं आता कि किससे शिकायत करें.

उन्होंने कहा, "किस से शिकायत करें हम लोग? सरकार से या ब्लड बैंक से? जिनकी ज़िम्मेदारी थी, उन्होंने अपना काम सही तरह से नहीं किया. उनकी लापरवाही ने मेरी बेटी की ज़िंदगी और मुश्किल बना दी."

इस मामले में एक दूसरे अभिभावक ने बताया कि उनके बच्चे को एचआईवी की दवाओं के साइड इफेक्ट्स झेलने पड़ रहे हैं, जिनमें उल्टी और लगातार थकान शामिल है.

उन्होंने कहा, "एक पिता के तौर पर अपने बच्चे को इस हालत में देखना बहुत दुख देता है. हम लोग पूरी तरह असहाय हैं. अपने बच्चे की कोई मदद नहीं कर सकते."

उन्होंने कहा, "हमें नहीं पता कि कभी इंसाफ़ मिलेगा या नहीं. लेकिन हमेशा यह बात कचोटती रहेगी कि जो इलाज हमने उसकी जान बचाने के लिए करवाया, उसी ने उसकी ज़िंदगी और कठिन बना दी."

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और व्हॉट्सऐप पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)