जम्मू कश्मीर में 10 साल बाद होंगे विधानसभा चुनाव, विपक्ष ने पूछे सरकार से ये सवाल

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चुनाव आयोग ने शुक्रवार को जम्मू कश्मीर और हरियाणा में विधानसभा चुनाव की तारीख़ों का एलान कर दिया है.
तीन चरणों में ये 18, सितम्बर, 25 सितम्बर और एक अक्तूबर को मतदान होंगे. जम्मू कश्मीर में तीनों चरणों में जबकि हरियाणा में एक चरण में एक अक्तूबर को मतदान होंगे. चार अक्तूबर को मतगणना होगी.
ऐसा माना जा रहा था कि निर्वाचन आयोग जम्मू कश्मीर और हरियाणा समेत चार राज्यों में विधानसभा चुनाव की तारीखों का एलान करेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और महाराष्ट्र और झारखंड में होने वाले विधानसभा चुनाव की तारीख़ें अभी घोषित नहीं की गईं.
हालांकि जम्मू कश्मीर में विधानसभा के चुनाव की घोषणाओं के बाद ही विपक्षी दलों ने राज्य के दर्जे का मुद्दा उठाया है.
नेशनल कॉन्फ़्रेंस और कांग्रेस ने कश्मीर के पूर्ण राज्य का दर्जा दोबारा बहाल किए जाने की मांग की है.
जबकि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने चुनाव के एलान का स्वागत करते हुए कहा, "पिछले 10 वर्षों में सरकार ने कई अथक प्रयासों के माध्यम से जम्मू-कश्मीर में शांति, विकास और लोकतंत्र को मजबूत करने का एक नया युग शुरू किया है. विधानसभा चुनाव लोकतंत्र की जड़ों को और मजबूत करेगा, जिससे क्षेत्र के लिए विकास के एक नए दौर का द्वार खुलेगा."
उन्होंने कहा, "मैं जम्मू-कश्मीर के लोगों से अपील करता हूँ कि वे चुनाव में सक्रिय रूप से भाग लें और बड़ी संख्या में मतदान करके ऐसी सरकार बनाएँ जो शांति और विकास को बनाए रखे और युवाओं के लिए एक उज्जवल भविष्य सुनिश्चित करे."

विपक्षी दलों ने क्या कहा?

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जम्मू कश्मीर में दस साल बाद विधानसभा चुनाव कराए जा रहे हैं, लेकिन राजनीतिक हालात बदल चुके हैं.
पांच अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 को रद्द करते हुए जम्मू कश्मीर के विशेष राज्य का दर्जा हटा दिया गया और दो केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया.
तभी से घाटी के प्रमुख दल राज्य के दर्जे की बहाली की मांग कर रहे हैं.
अब चुनाव की तारीख़ों घोषित हो गई हैं तो कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ़्रेंस ने जम्मू कश्मीर के पूर्ण राज्य का दर्जा दोबारा बहाल किए जाने की मांग फिर से दुहराई है.
नेशनल कॉन्फ़्रेंस के अध्यक्ष फ़ारुक़ अब्दुल्लाह ने कहा, "हम लोग चाहते हैं कि स्टेटहुड आए, न सिर्फ नेशनल कॉन्फ़्रेंस बल्कि जम्मू कश्मीर की सभी पार्टियां चाहती हैं कि ये होना चाहिए. भारत सरकार का ये वादा है स्टेटहुड होगा, पूरा स्टेटहुड होगा."
उन्होंने कहा कि वे इस बार चुनाव नहीं लड़ेंगे. उन्होंने कहा कि 'जब जम्मू कश्मीर को राज्य का दर्जा मिल जाएगा, तब वे सीट छोड़ देंगे और उनकी जगह उमर अब्दुल्ला चुनाव लड़ेंगे.'
उधर, कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा, "जम्मू-कश्मीर को अभी भी पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने का इंतज़ार है. केंद्र सरकार के हालिया कदम ने उप राज्यपाल की शक्तियों को और बढ़ाया है और विधिवत निर्वाचित राज्य सरकार की शक्तियों का मज़ाक उड़ाया जा रहा है."
जबकि कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा, "कल ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'वन नेशन वन इलेक्शन' की बात की, ये लोग एक साथ चार राज्यों में चुनाव नहीं करा पा रहे, सिर्फ दो राज्यों में चुनाव का एलान हुआ है."

महबूबा मुफ़्ती की बेटी ने क्या कहा?

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पीडीपी नेता महबूबा मुफ़्ती की बेटी इल्तिजा मुफ़्ती ने कहा, "हम चुनावों का स्वागत करते हैं पर हमारे कुछ सवाल हैं... हम जानते हैं कि जो रिसायत का सेमी आटोनमस स्टेट्स था, वहां से पिछले पांच साल में हमें केंद्र शासित प्रदेश बना रखा है."
उन्होंने पूछा, "मेरा सवाल है कि जो चुनाव छह साल पहले हो जाने चाहिए थे वो इतनी देर से क्यों हो रहे हैं."
"आर्टिकल 370 के हटने के बाद जम्मू-कश्मीर के हर तबके के लोग तंग हैं क्योंकि यहाँ नौकरशाहों का राज है. यहाँ ऊपर से लाकर लोग बिठाए गए हैं जो वायसराय की तरह काम करते हैं. उनकी कोई राजनीतिक जवाबदेही नहीं है."
"हमारा मानना है कि जिस स्टेट का स्पेशल स्टेट्स वहां चुनाव करवा कर आप ये क्यों जताना चाहते हैं कि आप अहसान कर रहे हैं. आप कोई अहसान नहीं कर रहे हैं. चुनाव किसी भी मज़बूत लोकतंत्र का अभिन्न अंग होते हैं."
घाटी के कुछ राजनीतिक दलों ने चुनाव की तारीख़ों के एलान का स्वागत भी किया है.
पहले कांग्रेस में रहे, डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आज़ाद पार्टी के अध्यक्ष गुलाम नबी आज़ाद ने कहा, "हमें पूरी आशा है कि चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष होंगे."
साथ ही उन्होंने चुनाव के दौरान मतदाताओं की सुरक्षा को लेकर चिंता ज़ाहिर की.
उन्होंने कहा, "हमें पूरी आशा है कि मतदाताओं, नेताओं, उम्मीदवारों और प्रचार करने वाले लोगों की सुरक्षा का ध्यान रखा जाएगा."
पीडीपी नेता मोहम्मद इक़बाल ने कहा, "हमें उम्मीद है जिस तरह से लोकसभा चुनाव में लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, उसी तरह विधानसभा चुनाव में भी लोगों की भागीदारी होगी."

राजनीतिक उठापटक

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जम्मू-कश्मीर में पिछले विधानसभा चुनाव दिसंबर 2014 में हुए थे. हालांकि कोई भी पार्टी राज्य में बहुमत हासिल नहीं कर सकी थी.
पीडीपी ने सबसे ज़्यादा 28 सीटें जीतीं थीं, बीजेपी को 25 सीटें मिलीं थीं जबकि नेशनल कांफ्रेंस ने 15 और कांग्रेस ने 12 सीटें जीतीं थीं.
महबूबा मुफ़्ती ने बीजेपी के साथ गठबंधन करके सरकार तो बना ली लेकिन दोनों दलों में मतभेदों के चलते ये सरकार अपने पांच साल पूरे नहीं कर सकी.
महबूबा मुफ़्ती ने 19 जून 2018 को इस्तीफ़ा दे दिया था. मुफ़्ती के सरकार गिराने के बाद से राज्य में विधानसभा चुनाव नहीं हो सके और उप राज्यपाल का शासन लगा दिया गया.
तब से राज्य में बार-बार राजनीतिक दल चुनावों की मांग तो उठाते रहे, लेकिन चुनावी कार्यक्रम घोषित नहीं किया गया.
बीते पांच सालों में जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक गतिविधियां थम सी गईं थीं और राज्य के राजनीतिक दलों ने सरकार पर उप राज्यपाल शासन को लंबा खींचने के आरोप भी कई बार लगाए.
जम्मू-कश्मीर में इस समय कोई राजनीतिक गठबंधन भी नहीं है, हालांकि नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस राष्ट्रीय स्तर के इंडिया गठभंधन में शामिल हैं.
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा पूर्ण राज्य के दर्जे का मुद्दा

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पांच अगस्त 2019 को विशेष राज्य का दर्जा हटाने के बाद संसद ने राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों: जम्मू और कश्मीर और लद्दाख में बाँटने वाला एक क़ानून पारित किया.
इसके बाद से ही जम्मू-कश्मीर में लॉकडाउन और कर्फ्यू लगा दिया गया था. टेलीफ़ोन नेटवर्क और इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई थीं.
राजनीतिक दलों के नेताओं समेत हज़ारों लोगों को या तो हिरासत में ले लिया गया या गिरफ्तार किया गया या नज़रबंद कर दिया गया.
जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बल के कई लाख जवानों को तैनात किया गया. 2जी इंटरनेट को कुछ महीने बाद जनवरी 2020 में बहाल किया गया जबकि 4जी इंटरनेट को फ़रवरी 2021 में बहाल किया गया.
अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के बाद इसे चुनौती देते हुए कई सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएँ दायर की गईं.
अगस्त 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को पाँच जजों की बेंच के पास भेज दिया था.
दिसंबर 2023 में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पाँच जजों की बेंच ने सर्वसम्मति से फ़ैसला देते हुए जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को ख़त्म करने का फ़ैसला बरक़रार रखा था.
लेकिन साथ ही सर्वोच्च अदालत ने सितंबर 2024 तक जम्मू-कश्मीर में चुनाव कराने के लिए क़दम उठाने को कहा था.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि 'जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा जितनी जल्दी बहाल किया जा सकता है, कर देना चाहिए.'
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