विधानसभा चुनाव 2024: हरियाणा में एक और जम्मू-कश्मीर में तीन चरणों में चुनाव, चार अक्तूबर को होगी मतगणना

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चुनाव आयोग ने शुक्रवार को हरियाणा और जम्मू कश्मीर में होने वाले विधानसभा चुनाव की तारीखों का एलान कर दिया है.
चुनाव आयोग ने बताया कि जम्मू कश्मीर में तीन चरणों में- 18 सितम्बर, 25 सितम्बर और एक अक्तूबर को मतदान होगा.
हरियाणा में एक अक्तूबर को मतदान होगा. दोनों राज्यों में मतगणना चार अक्तूबर को होगी.
हरियाणा विधानसभा का कार्यकाल 3 नवंबर को समाप्त हो रहा है. जबकि सुप्रीम कोर्ट ने 30 सितंबर से पहले जम्मू कश्मीर में चुनाव कराने का आदेश दिया था.
मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार ने बताया कि जम्मू कश्मीर में 90 विधानसभा सीटें होंगी. ये परिसीमन के बाद की सीटें हैं.
चुनाव आयोग ने बताया कि जम्मू कश्मीर विधानसभा में इस बीर 3 सीटें बढ़ाई गई हैं. पिछली बार जम्मू कश्मीर विधानसभा में 87 सीटें थीं.
मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार ने कहा, ''जम्मू कश्मीर की 90 सीटों में से 74 सामान्य हैं. वहीं अनुसूचित जनजाति के 9 और अनुसूचित जाति के लिए 7 सीटें आरक्षित की गई हैं.''
जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया गया था. जम्मू-कश्मीर और लेह-लद्दाख.

चुनाव आयोग ने क्या कहा

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मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार ने जम्मू कश्मीर की तारीख़ों का एलान करते हुए बताया कि यहां कुल 87.09 लाख मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे.
उन्होंने लोकसभा चुनावों के दौरान मतदाताओं के उत्साहपूर्वक अपने मताधिकार के इस्तेमाल का ज़िक्र किया और उम्मीद जताई कि मतदाता इस बार भी ऐसा करेंगे.
उन्होंने कहा, "19 अगस्त को अमरनाथ यात्रा जैसे ही ख़त्म होगी 20 अगस्त को मतदाता सूची प्रकाशित कर दी जाएगी. हमने मौसम और सुरक्षा का ध्यान रखते हुए ऐसा किया है."
राजीव कुमार ने जम्मू कश्मीर के युवाओं के लिए अपनी लिखी एक कविता भी पढ़ी, "लंबी कतारों में छिपी है बदलते सूरते हाल, रोशन उम्मीदें अब खुद करेंगी गोया अपनी तकदीरे बयानी, जम्हूरियत के जश्न में आपकी शिरकत दुनिया देखेगी नापाक इरादों के शिकस्त की कहानी."
उधर हरियाणा एक अक्तूबर को मतदान होगा.
आयोग के अनुसार, हरियाणा में 10,321 मतदाता सौ वर्ष से ऊपर के हैं. जबकि 2.5 लाख मतदाताओं की उम्र 85 वर्ष से ऊपर है. इन मतदाताओं को विशेष सुविधा देते हुए उन्हें घर से मतदान की अनुमति दी जाएगी.
जब भी 85 वर्ष से अधिक मतदाता का घर से मतदान होता है तो राजनीतिक पार्टी के एजेंट वहां मौजूद रह सकते हैं और इसकी वीडियोग्राफ़ी भी होती रहेगी.
हरियाणा के 22 ज़िलों की 90 विधानसभा सीटों में 73 सामान्य और अनुसूचित जन जाति आरक्षित 17 सीटों पर चुनाव होंगे. यहां कुल 2.01 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे.
हरियाणा का मतदाता सूची 27 अगस्त को जारी हो जाएगी.
राजीव कुमार ने कहा कि मतदाता सूची को अंतिम रूप दिया जा चुका है, बावजूद हरियाणा और जम्मू कश्मीर में नामांकन से पहले अगर कोई व्यक्ति छूट गया कोई व्यक्ति अपना पंजीकरण करा सकता है.
चुनाव आयोग के अनुसार, पहले चरण की अधिसूचना 28 अगस्त को, दूसरे चरण का 29 अगस्त को और तीसरे चरण का 5 सितम्बर को अधिसूचना जारी होगी.
इसी तरह पहले चरण के लिए 27 अगस्त, दूसरे चरण के लिए पांच सितम्बर और तीसरे चरण के लिए 12 सितम्बर को नामांकन की तारीख़ है.
जबकि नामांकन वापसी की तारीख़ पहले चरण के लिए 30 अगस्त, दूसरे चरण के लिए 9 सितम्बर और तीसरे चरण के लिए 17 सितम्बर है.
मतदान की तारीख़ पहले चरण की 18 सितम्बर, दूसरे चरण की 25 सितम्बर और तीसरे चरण की एक अक्टूबर को घोषित की गई है.
हरियाणा

दिल्ली से सटे हरियाणा में 2019 विधानसभा चुनावों में कोई भी दल स्पष्ट बहुमत हासिल नहीं कर सका था.
कुल 90 सीटों में से बीजेपी को 40, कांग्रेस को 31, जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) को 10, निर्लदलीय पांच, इंडियन नेशनल लोकदल, हरियाणा जनहित कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल को एक-एक सीट मिली थी.
स्पष्ट बहुमत ना मिलने के बावजूद बीजेपी ने निवर्तमान मुख्यमंत्री मननोहर लाल खट्टर के नेतृत्व में जेजेपी के गठबंधन में सरकार बनाई.
हालांकि, 2024 में लोकसभा चुनावों से पहले बीजेपी ने मनोहर लाल खट्टर को मुख्यमंत्री पद से हटार नायाब सैनी को सीएम बना दिया था.
इस बदलाव के बावजूद 2019 में हरियाणा में दस लोकसभा सीटों में से दसों सीटें जीतने वाली बीजेपी को 2024 लोकसभा चुनावों में पांच सीटें गंवानी पड़ीं.
जेजेपी और बीजेपी गठबंधन में भी दरार पड़ गई और दुष्यंत चौटाला के अलग होने के बाद बीजेपी ने निर्दलयों के साथ मिलकर राज्य में सरकार बनाईं.
आगामी विधानसभा चुनावों में हरियाणा में बीजेपी और कांग्रेस के बीच दिलचस्प मुक़ाबला हो सकता है.
बीते दस सालों से राज्य में बीजेपी की सरकार है, ऐसे में पार्टी को सरकार विरोधी लहर का सामना भी करना पड़ सकता है.
जम्मू कश्मीरः विशेष दर्जा ख़त्म होने के बाद पहला चुनाव

5 अगस्त 2019 को भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर को मिला विशेष राज्य का संवैधानिक दर्जा समाप्त कर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया था.
जम्मू-कश्मीर में पिछले विधानसभा चुनाव दिसंबर 2014 में हुए थे. हालांकि कोई भी पार्टी राज्य में बहुमत हासिल नहीं कर सकी थी.
पीडीपी ने सबसे ज़्यादा 28 सीटें जीतीं थीं, बीजेपी को 25 सीटें मिलीं थीं जबकि नेशनल कांफ्रेंस ने 15 और कांग्रेस ने 12 सीटें जीतीं थीं.
महबूबा मुफ़्ती ने बीजेपी के साथ गठबंधन करके सरकार तो बना ली थीं लेकिन दोनों दलों में मतभेदों के चलते ये सरकार अपने पांच साल पूरे नहीं कर सकी.
महबूबा मुफ़्ती ने 19 जून 2018 को इस्तीफ़ा दे दिया था. मुफ़्ती के सरकार गिराने के बाद से राज्य में विधानसभा चुनाव नहीं हो सके और गवर्नर का शासन लगा दिया गया.
केंद्र सरकार ने जब अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा समाप्त कर इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटा तब राज्य में गवर्नर शासन ही लागू था.
तब से राज्य में बार-बार राजनीतिक दल चुनावों की मांग तो उठाते रहे, लेकिन चुनावी कार्यक्रम घोषित नहीं किया गया.
अब लोकसभा चुनाव हो जाने के बाद, जम्मू-कश्मीर में विधानसभा के लिए चुनावों की घोषणा की जा रही है.
हालांकि, बीते पांच सालों में जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक गतिविधियां थम सी गईं थीं और राज्य के राजनीतिक दलों ने सरकार पर गवर्नर शासन को लंबा खींचने के आरोप भी कई बार लगाए.
जम्मू-कश्मीर में इस समय कोई राजनीतिक गठबंधन भी नहीं हैं, हालांकि नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस राष्ट्रीय स्तर के इंडिया गठभंधन में शामिल हैं.
(बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित)
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