जम्मू कश्मीर के कठुआ में चरमपंथी हमले में मारे गए पांच भारतीय सैनिक, अब तक क्या कुछ पता है?

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जम्मू कश्मीर के कठुआ में आठ जुलाई की रात को हुए चरमपंथी हमले में पांच भारतीय सैनिक मारे गए हैं और पांच सैनिक घायल हुए हैं.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पोस्ट करते हुए घटना के बारे में दुख ज़ाहिर किया है और घायल सैनिकों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की.
राजनाथ सिंह के एक्स अकाउंट से लिखा गया, "कठुआ के बदनोटा में एक आतंकवादी हमले में हमारे पाँच बहादुर सैनिकों की मौत पर मुझे गहरा दुख है. शोक संतप्त परिवारों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं. इस कठिन समय में देश उनके साथ मज़बूती से खड़ा है. आतंकवाद विरोधी अभियान चलाए जा रहे हैं और हमारे सैनिक क्षेत्र में शांति और व्यवस्था कायम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं."
ख़बर लिखे जाने तक इस हमले के बारे में सेना की ओर से आधिकारिक बयान नहीं आया है और न ही इस हमले की ज़िम्मेदारी किसी चरमपंथी संगठन ने ली है.
इस रिपोर्ट में पढ़िए कि कठुआ हमले के बारे में अब तक क्या बातें पता हैं.
'घात लगाकर किया गया हमला'

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श्रीनगर में बीबीसी के स्थानीय पत्रकार माजिद जहांगीर के मुताबिक़, चरमपंथियों ने घात लगाकर सेना की गाड़ी पर हमला किया था. ये हमला सोमवार शाम क़रीब चार बजे का बताया जा रहा है.
जम्मू में सेना के प्रवक्ता सुनील बर्थवाल ने बताया कि आधिकारिक रूप से कठुआ घटना पर अभी तक हम कुछ भी नहीं कह सकते हैं.
एक अधिकारी ने बताया कि सोमवार को हमले के बाद पूरे इलाक़े में सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया है, जो अभी तक जारी है.
कठुआ में जिस जगह पर हमला हुआ, वो इलाक़ा जंगल से घिरा है. हमले वाली जगह बदनोटा कठुआ शहर से क़रीब 150 किलोमीटर दूर है.
बीते चार हफ़्तों में कठुआ चरमपंथियों को लेकर दूसरी बार चर्चा में है.
11 जून को कठुआ के एक गांव में हुई मुठभेड़ में एक सीआरपीएफ जवान और दो चरमपंथी मारे गए थे.

बुरहान वानी की बरसी पर हमला

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कठुआ में ये ताज़ा हमला आठ जुलाई को हुआ है.
ये वही तारीख़ है, जब 2016 में चरमपंथी बुरहान वानी की सुरक्षाबलों से हुई मुठभेड़ में मौत हो गई थी.
बुरहान वानी हिज़्बुल मुजाहिदीन कमांडर थे. बुरहान के मारे जाने के बाद घाटी में हिंसक झड़पें हुई थीं.
इन झड़पों में कई लोग मारे गए थे.
बुरहान के मारे जाने के बाद कश्मीर में बड़ी संख्या में विरोध प्रदर्शन हुए थे.
पीएम नरेंद्र मोदी की सरकार 370 हटाए जाने के बाद से कश्मीर में चरमपंथी हमलों और पत्थरबाज़ी की घटनाओं पर काबू पाने के दावे करती रही है.
हालांकि विपक्षी दल इस दावे पर सवाल उठाते रहे हैं.
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कठुआ हमले पर नेताओं की प्रतिक्रियाएं

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जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्लाह ने कठुआ में हुए हमले पर आठ जुलाई की रात को दुख जताया है.
उमर ने सोशल मीडिया पर लिखा, ''कठुआ से भयावह ख़बर. ये बहुत बुरा दिन है, जब आप ड्यूटी पर तैनात चार बहादुर सैनिकों को खो देते हैं. मैं इस हमले की निंदा करता हूं और पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदनाएं व्यक्त करता हूं. मैं उम्मीद करता हूं कि घायल जल्द पूरी तरह से ठीक हों.''
जम्मू-कश्मीर की सीएम रह चुकीं महबूबा मुफ़्ती ने कहा, ''कठुआ में हुए आतंकवादी हमले की निंदा करती हूं, जिसमें हमारे चार सैनिक मारे गए. ये देखना दुखद और हैरान करने वाला है कि जहां 2019 से पहले मिलिटेंसी ना के बराबर थी, अब वहां भी सैनिक अपनी जान गँवा रहे हैं. ये आपको जम्मू कश्मीर की मौजूदा सुरक्षा हालात को भी बताता है. पीड़ित परिवारों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं.''
जम्मू कश्मीर के उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा के दफ़्तर की ओर से ख़बर लिखे जाने तक कोई बयान नहीं आया है.
जब तीर्थयात्रियों की बस पर हुआ था हमला

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नौ जून को जम्मू कश्मीर के रियासी में श्रद्धालुओं से भरी बस पर चरमपंथियों ने हमला किया था.
पुलिस के मुताबिक़, हमले में नौ लोग मारे गए थे और 30 से ज़्यादा लोग घायल हुए.
गृह मंत्री अमित शाह ने तब कहा था- दोषियों को बख़्शा नहीं जाएगा.
इस हमले के बारे में रियासी एसएसपी मोहिता शर्मा ने बताया था, ''मिलिटेंट्स घात लगाए बैठे थे और उन्होंने उस बस पर फायर किया, जो शिवखोरी से निकली थी और कटरा जा रही थी."
पुलिस ने बताया था कि हमले की वजह से ड्राइवर का संतुलन बिगड़ा और बस खाई में चली गई.
इस बस में सवार ज़्यादातर यात्री उत्तर प्रदेश से थे.
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