क्या जनता ने एनसीपी और शिवसेना की विरासत का फ़ैसला कर दिया है, आंकड़े क्या कहते हैं?

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- Author, जैस्मिन निहलानी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी यानी एनसीपी और शिवसेना में विभाजन के बाद पहले विधानसभा चुनाव में शरद पवार और उद्धव ठाकरे, दोनों बेअसर साबित हुए हैं.
इन विधानसभा चुनावों में 75 सीटों पर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच सीधा मुक़ाबला था.
इन सभी सीटों पर कांग्रेस का प्रदर्शन निराशाजनक रहा और वो केवल 11 सीटें जीत पाईं.
64 सीटें बीजेपी के खाते में गई. जिन सीटों पर दोनों पार्टियों का सीधा मुक़ाबला था उनमें से 35 विदर्भ की थीं और 12 कोंकण की थीं.

महाराष्ट्र में कांग्रेस प्रमुख नाना पटोले साकोली सीट पर मुश्किल से ही चुनाव जीत पाए.
उनके मुक़ाबले में खड़े बीजेपी के अविनाश ब्राह्मणकर को महज़ 208 वोट कम मिले.
एक अन्य नजदीकी मुक़ाबला अकोला सीट पर देखने को मिला, जहां कांग्रेस के उम्मीदवार साजिद ख़ान पठान सिर्फ 0.62 फ़ीसदी मतों के अंतर से जीत पाए.

शिवसेना के दोनों गुटों के बीच कैसी रही टक्कर?

प्रतिद्वंद्वी दलों के बीच नज़दीकी मुक़ाबले और जीत का अंतर दिखाने के लिए हमने चार्ट का इस्तेमाल किया है.
चार्ट में दिख रहा हर वर्ग एक सीट को दिखा रहा है. वर्ग का रंग विजेता पार्टी को दिखा रहा, वहीं वर्ग का आकार जीत के अंतर को प्रतिशत में दिखा रहा है.
महाराष्ट्र के इस विधानसभा चुनाव में 53 सीटों पर एकनाथ शिंदे की शिवसेना और उद्धव ठाकरे की शिवसेना के बीच सीधी टक्कर थी.
यहां भी शिंदे की शिवसेना ने 70 फ़ीसदी यानी 37 सीटें जीतीं, जबकि उद्धव ठाकरे की शिवसेना सिर्फ 14 सीटें ही जीत पाई.
दोनों के बीच सीधा मुक़ाबले वाली ज्यादातर सीटें कोंकण में थीं. यहां इन सीटों की संख्या 27 थी. जबकि मराठवाड़ा में 11.
दोनों के बीच बुलढाणा और सिलोड में सबसे नज़दीकी मुक़ाबला रहा.
यहां शिवसेना के प्रत्याशी संजय गायकवाड़ और अब्दुल सत्तार अपने प्रतिद्वंद्वियों शिवसेना (उद्धव ठाकरे) के उम्मीदवारों से एक फ़ीसदी से ही कम वोटों से जीत सके.

कोपरी-पाचपाखाडी सीट पर खुद शिवसेना के शिंदे गुट के सुप्रीमो एकनाथ शिंदे खड़े थे. ये सीट उन्होंने 60 फ़ीसदी वोट के मार्जिन से जीती.
शिंदे को 78 फ़ीसदी वोट मिले और वहीं केदार प्रकाश दिघे सिर्फ 18 फ़ीसदी वोट ही हासिल कर सके.
भतीजे की एनसीपी चाचा की पार्टी पर भारी

राज्य की 41 सीटों पर अजित पवार की अगुआई वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) का उनके चाचा शरद पवार की अगुआई वाली एनसीपी से मुक़ाबला था.
एनसीपी (पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह पर अब अजित पवार के गुट का कब्जा है) ने इन सीटों में से 70 फ़ीसदी सीटों यानी 29 सीटों पर जीत हासिल की.

सीधे मुक़ाबले वाली सीटों में से सिर्फ़ सात सीटें ही शरद पवार की अगुआई वाली एनसीपी को मिल सकी. दोनों पार्टियों के बीच ज्यादातर सीधा मुक़ाबला पश्चिम महाराष्ट्र में था. यहां ऐसी 16 सीटें हैं. ख़ानदेश और मराठवाड़ा में ऐसी सात सीटें थीं.
कुछ नजदीकी मुक़ाबले इस तरह से थे- एनसीपी के काशीनाथ महाडू दाते सिर्फ 0.62 फ़ीसदी यानी 1526 वोटों से ही जीत पाए.
एनसीपी को सबसे बड़े अंतर से जीत कोपरगांव सीट पर मिली. यहां पार्टी उम्मीदवार को लगभग 60 फ़ीसदी वोटों के अंतर से जीत मिली.
पवार परिवार के गढ़ बारामती में अजित पवार ने युगेंद्र पवार को आसानी से हरा दिया. वो 37 फ़ीसदी वोटों के अंतर से क़रीब एक लाख से अधिक वोटों से जीते.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित















