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चैंपियंस ट्रॉफ़ी के महामुक़ाबले से पहले भारत के लिए ये पांच बातें हो सकती हैं चिंता का सबब
- Author, विमल कुमार
- पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, दुबई क्रिकेट स्टेडियम से
चैंपियंस ट्रॉफ़ी में अब तक एक भी मैच नहीं हारने वाली टीम इंडिया को न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ फ़ाइनल मुक़ाबला जीतने का प्रबल दावेदार माना जा रहा है.
चाहे बल्लेबाज़ी क्रम हो या गेंदबाज़ी क्रम, कप्तान रोहित शर्मा के पास मौजूदा टीम में विकल्पों की कोई कमी नहीं है. लेकिन, क्या ऐसा माना जा सकता है कि टीम इंडिया के लिए फ़ाइनल से पहले किसी तरह की चिंता नहीं है?
क्रिकेट के बारे में अक्सर सबसे पुरानी कहावत यही जोड़ी जाती है कि ये अनिश्चितताओं का खेल है लेकिन यहां पर न्यूज़ीलैंड अपनी काबिलियत के ज़रिए टीम इंडिया को पूरी तरह से चौंकाने की काबिलियत रखती है.
अगर आप कीवी कैंप में हैं या फिर टीम इंडिया को आलोचक की नज़रों से देखते हैं तो आपको फ़ाइनल से पहले ये 5 बातें चिंता में डाल सकती हैं.
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टॉप ऑर्डर की चौकड़ी से भरपूर उम्मीदें
शुभमन गिल, विराट कोहली, रोहित शर्मा और श्रेयस अय्यर की चौकड़ी मौजूदा समय में आईसीसी वनडे रैंकिंग में टॉप 8 में शामिल है.
कीवी टीम ने 2019 वर्ल्ड कप की ही तरह पिछले लीग मैच में रोहित-कोहली समेत टॉप थ्री को सस्ते में ही पवेलियन लौटा दिया जिसमें तेज़ गेंदबाज़ मैट हेनरी का अहम योगदान था.
अगर कीवी टीम एक बार फिर से टॉप ऑर्डर के तीन की बजाए दो बल्लेबाज़ भी जल्दी-जल्दी आउट करने में कामयाब होती है तो दबाव टीम इंडिया पर आ सकता है.
कोहली और अय्यर लगातार हर मैच में रन बनाते आये हैं और ऐसे में अगर औसत का नियम अगर फ़ाइनल में अपनी मौजूदगी दर्ज कराता है तो न्यूज़ीलैंड के लिए भी 25 साल बाद फिर से वनडे में एक ग्लोबल ट्रॉफ़ी जीतने का मौका मिल सकता है.
सिर्फ़ एक तेज़ गेंदबाज़ का इलेवन में होना
टीम इंडिया के लिए अब तक दुबई की पिच पर उनकी स्पिन चौकड़ी का बोलबाला रहा है लेकिन हर मैच में और वो भी ख़ासतौर पर फ़ाइनल मैच में सिर्फ़ एक तेंज़ गेंदबाज़ यानी मोहम्मद शमी के साथ जाना क्या महंगा सौदा साबित हो सकता है?
ये तर्क ज़रूर दिया जा सकता है कि दूसरे तेज़ गेंदबाज़ के तौर पर हार्दिक पंड्या भी टीम में हैं लेकिन पिछले मैच में हार्दिक ने अपने 10 ओवर नहीं डाले थे.
ऐसे में न्यूज़ीलैंड की टीम जो बहुत ज़्यादा मैच-अप और डेटा ऐनालिटिक्स में यकीन करती है, निश्चित तौर पर टीम इंडिया की इस कमी का फ़ायदा उठाने की कोशिश करेगी.
न्यूज़ीलैड की असाधारण फ़ील्डिंग
अगर किसी एक डिपार्टमेंट में कीवी टीम रोहित शर्मा की टीम पर निश्चित रूप से भारी पड़ती है तो वो उनकी असाधारण फ़ील्डिंग यूनिट होगी.
पिछले मैच में जिस तरह से ग्लेन फिलिप ने हैरतअंगेज़ कैच पकड़ा उसको देखते हुए विराट कोहली भी हक्के-बक्के रह गये थे.
अगर कीवी टीम ने 2-3 कैच ऐसे पकड़ लिए तो गेंद या बल्ले की बजाए न्यूज़ीलैंड अपनी फील्डिंग से भी मैच का रुख़ मोड़ सकती है.
बड़े मैचों में भारत के ख़िलाफ़ न्यूज़ीलैंड का अतीत
इतिहास गवाह है कि साल 2000 में वनडे क्रिकेट में पहली बार आईसीसी ट्रॉफ़ी न्यूज़ीलैंड ने जीती थी तो उनकी विरोधी टीम इंडिया थी.
2019 में टीम इंडिया वर्ल्ड कप के सेमीफ़ाइनल में कीवी टीम से ही हारकर टूर्नामेंट से बाहर हो गयी थी.
2021 में टेस्ट क्रिकेट में पहली बार वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फ़ाइनल भी न्यूज़ीलैंड ने पहली बार जब जीता तो उस समय हारने वाली टीम इंडिया ही थी.
कहीं ना कहीं, इस बात का थोड़ा असर सकारात्मक और नकारात्मक तरीके से दोनों टीमों पर पड़ सकता है.
रोहित शर्मा की टीम खुद को ये तर्क दे सकती है कि 2023 वनडे वर्ल्ड कप के दौरान उन्होंने कीवी टीम को हराया था.
लेफ्ट आर्म चुनौती
न्यूज़ीलैंड के आक्रमण में जहां मिचेल सेंटनर शानदार लेफ्ट आर्म स्पिनर हैं वहीं तेज़ गेंदबाज़ी के फ्रंट पर विल ओ रुर्क भी लेफ्ट आर्म ऐंगल से कहर बरपा सकते हैं. अहम टूर्नामेंट में टीम इंडिया को कई मौकों पर इस बात से परेशानी हुई है.
बहरहाल, इस बात से कतई इनकार नहीं किया जा सकता है कि मौजूदा टीम इंडिया में इन पिचों के लिए कोई स्वाभाविक कमज़ोरी नहीं है. उनके पास एक से बढ़कर एक धाकड़ बल्लेबाज़ हैं तो एक से बढ़कर एक शानदार गेंदबाज़.
उप-कप्तान शुभमन गिल ने मैच से पहले प्रेस कांफ्रेस में इस लेखक के एक सवाल के जवाब में ये भी कह दिया कि उन्होंने इससे बेहतर बल्लेबाज़ी क्रम के साथ कभी क्रिकेट नहीं खेली थी.
गेंदबाज़ी में भी इस टीम के पास वरुण चक्रवर्ती जैसा एक शानदार हथियार है तो कुलदीप यादव भी मध्य क्रम में एक तगड़े मैच विनर हैं. इतना ही नहीं रवींद्र जडेजा और अक्षर पटेल के तौर पर ना सिर्फ़ अलग-अलग किस्म वाले दो बायें हाथ के स्पिनर हैं बल्कि उम्दा बल्लेबाज़ी करने वाले खिलाड़ी भी हैं.
अक्षर पटेल तो इस टीम में अब 5वें नंबर पर बल्लेबाज़ी कर रहे हैं.
टॉप ऑर्डर की चौकड़ी के बीच में केएल राहुल और हार्दिक पंड्या की बल्लेबाज़ी पर अब तक किसी का ध्यान ही नहीं गया था जब तक ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ सेमीफ़ाइनल में इन दोनों ने आख़िरी मौके पर दबाव को बेहद सहजता से झेलते हुए छक्के पर छक्का मारते हुए मैच जिता दिया.
कुल मिलाकर देखा जाए तो 2023 वनडे वर्ल्ड कप की ही तरह मौजूदा टीम भी देश के इतिहास की सबसे शानदार और काबिल वनडे टीमों में से एक है.
लेकिन, रोहित शर्मा की टीम 19 नवंबर 2023 को अहमदाबाद में उम्मीदों के दबाव के आगे बिखर गयी थी.
क्या 2025 में चैंपियंस ट्रॉफी फाइनल में भी ऐसा मुमकिन दिखता है?
शायद नहीं और इसकी वजह है कि 2024 जून में बारबाडोस में रोहित शर्मा ने सफेद गेंद की क्रिकेट में 11 साल बाद ट्रॉफी नहीं जीतने के सूखे को ख़त्म कर दिया था. इसलिए, न्यूज़ीलैंड के लिए जीत चौंकाने वाला नतीजे के तौर पर देखी जा सकती है जबकि टीम इंडिया के लिए ये परंपरा का एक और स्वर्णिम पड़ाव होगी.
ख़ासतौर पर कोहली-रोहित और जडेजा की तिकड़ी के लिए जिन्होंने 2013 में भी चैंपियंस ट्रॉफ़ी में टीम इंडिया को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभायी थी.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित