कैसरगंजः बृजभूषण शरण सिंह की जगह उनके बेटे को टिकट देकर कितनी मज़बूत स्थिति में है बीजेपी?

- Author, असद रिज़वी
- पदनाम, बीबीसी हिन्दी के लिए
उत्तर प्रदेश की कैसरगंज लोकसभा सीट पर सांसद बृजभूषण शरण सिंह की लोकप्रियता और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की प्रतिष्ठा दोनों दांव पर है.
यौन उत्पीड़न मामले में अभियुक्त बृजभूषण की जगह अब उनके बेटे करण भूषण शरण सिंह को बीजेपी ने टिकट दिया है.
विपक्षी इंडिया गठबंधन बीजेपी पर “परिवारवाद” का आरोप लगा रहा है और बृजभूषण पर लगे गंभीर आरोपों को चर्चा में बनाये रखने का प्रयास कर रहा है.
एक तरफ़ लोकसभा चुनाव का प्रचार अपने चरम पर है और दूसरी तरफ़ भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण की परेशानियां बढ़ती जा रही हैं.
पहले बीजेपी ने उनका टिकट काटा और बाद में दिल्ली की एक अदालत ने महिला खिलाड़ियों के साथ यौन उत्पीड़न के मामले में उन पर आरोप तय कर दिए. लेकिन इससे मौजूदा लोकसभा चुनावों में उनके सक्रिय होने पर कोई फ़र्क़ नहीं पड़ा है.
अपने पिता के नाम पर वोट मांग रहे हैं करण भूषण
कैसरगंज लोकसभा सीट पर गाड़ियों के लंबे-लंबे क़ाफ़िलों के साथ बृजभूषण शरण और उनके बेटे करण सिंह दोनों एक गांव से दूसरे गांव प्रचार करने जाते दिखाई दे रहे हैं. बृजभूषण अपने बेटे के लिए वोट मांग रहे हैं, लेकिन भाषणों में अक्सर टिकट न मिलने का दर्द भी झलक जाता है.
वहीं, करण भूषण अपने पिता के नाम पर वोट मांग रहे हैं. वो राजनीति में नया और युवा चेहरा हैं और नकारात्मक परिस्थिति में चुनाव मैदान में उतरे हैं.
वह ऐसे समय में राजनीति में प्रवेश कर रहे हैं, जब 2014 या 2019 के तरह बीजेपी को लेकर कोई भारी लहर नज़र नहीं आती है. साथ ही उनके पिता पर यौन उत्पीड़न के आरोप की चर्चा देशभर में है.

टिकट नहीं मिलने का दर्द झलकता है
बृजभूषण भी गांव-गांव जाकर अपने बेटे के लिए वोट मांग रहे हैं. बृजभूषण के भाषणों में उनके चुनाव न लड़ने और टिकट नहीं मिलने का दर्द झलकता है.
लोखड़ियनपुरवा गांव में एक नुक्कड़ सभा को संबोधित करते हुए बृजभूषण कहते हैं कि जैसे भगवान राम के राजतिलक की तैयारी के समय उनको कैकेई ने वनवास करा दिया था, वैसे ही उनके सांसद बनते समय कुछ लोगों ने उनका भाग्य बदल दिया.
उन्होंने कहा कि वह संसद जा रहे थे और जनता उनको संसद भेजना भी चाहती थी, लेकिन 500 किलोमीटर दूर बैठे लोगों ने उनके भाग्य में कुछ और लिख दिया.
बृजभूषण जनता से करण भूषण को जिताने की अपील करते हुए कहते हैं कि ''जब मैं पहली बार संसद गया तो युवा था और अब आप युवा करण भूषण को जिताकर संसद भेजिए.''

कैसरगंज के लोग क्या कह रहे हैं?
महिला खिलाड़ियों से यौन उत्पीड़न के जिस मामले की चर्चा देशभर में है, उस पर कैसरगंज में कोई ख़ास चर्चा नहीं हो रही है.
कैसरगंज के कई लोग आज भी बृजभूषण को अपने सुख-दुख का साथी मानते हैं और करण में वह लोग उनके पिता बृजभूषण का ही चेहरा देख रहे हैं. यहां लोगों का मानना है की बीजेपी ने स्थानीय लोगों के दबाव में आकर बृजभूषण के बेटे को टिकट दिया है.
महिला खिलाड़ियों के आरोपों से जुड़े सवाल पर ज़्यादातर कैसरगंज के लोग ख़ामोश रहना पसंद करते हैं. उनका कहना है कि इसका चुनाव पर कोई ख़ास असर नहीं पड़ेगा जबकि कुछ लोग कहते हैं कि कोर्ट आरोपों के ग़लत और सही होने का फ़ैसला करेगी. लेकिन बृजभूषण का समर्थक वर्ग महिला खिलाड़ियों के आरोपों को बेबुनियाद मानता है.
करण भूषण का क़ाफ़िला 13 मई को परसपुर के दुबाई पहुंचा. यहां करण भूषण अपने पिता बृजभूषण और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर वोट मांगते दिखाई दिए.
हालांकि, जनसंपर्क स्थल से कुछ दूरी पर बैठी एक महिला सुप्रिया दुबे कहती हैं कि “बीजेपी की लहर है, करण राजनीति में नया है, लेकिन राजनीतिक परिवार से है, इसलिए चुनाव में उसका पलड़ा भारी है. ”
लेकिन वो आगे कहती हैं कि यह सबको पता है कि बृजभूषण पर महिला खिलाड़ियों के आरोप गंभीर हैं और इसका चुनाव के नतीजे पर असर पड़ सकता है.
कैसरगंज मार्केट में आयुर्वेदिक दवाओं के विक्रेता उमेश सिंह जैन कहते हैं कि वोट नरेंद्र मोदी के नाम पर पड़ेगा. वो ये भी कहते हैं कि महिला खिलाड़ियों के आरोपों को ना तो पूरी तरह नकारा जा सकता है और ना ही आरोप की वास्तविकता पर कुछ कहा जा सकता है. उमेश के मुताबिक़, कैसरगंज की जनता को इन आरोपों पर विश्वास भी नहीं हो रहा है.
कपड़े की दुकान पर ख़रीदारी करने आये मोहम्मद अमान मानते हैं कि बृजभूषण जाति या धर्म से ऊपर उठकर राजनीति करते हैं, इसलिए उनकी छवि का लाभ उनके बेटे करण को मिलेगा. अदालत के आरोप तय किये जाने के सवाल पर अमान ख़ामोश हो जाते हैं.
महिला खिलाड़ियों के आरोपों पर कैसरगंज के रहने वाले राजपाल जायसवाल मानते हैं कि ये जांच का विषय है कि आरोप सत्य है या असत्य है, इससे जनता का कोई लेना देना नहीं है.

'महिला खिलाड़ियों के आरोपों के बारे में लोगों को बहुत कुछ नहीं पता'
क़ानून के जानकार शिवम सिंह कहते है, ''अदालत ने आरोप तय किये हैं, सज़ा नहीं सुनाई है, अभी बृजभूषण के पास इसको चुनौती देने के लिए बहुत सारे विकल्प हैं.''
शिवम दावा करते हैं कि आरोपों का असर चुनाव पर नहीं पड़ेगा क्योंकि जनता को मालूम है किसी के बहकावे में आकर बृजभूषण पर आरोप लगाये गए हैं.
शिवम का मानना है कि बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व को ये पता था कि अगर बृजभूषण या उनके परिवार के अलावा कोई चुनाव लड़ने आएगा तो सीट का नुक़सान हो सकता है.
वहीं एक स्कूल के संचालक तौहीद अहमद उर्फ़ अमीर मास्टर कहते हैं, ''कैसरगंज की जनता के एक बड़े हिस्से को अभी भी महिला खिलाड़ियों के आरोपों के बारे में स्पष्ट नहीं मालूम है.'' तौहिद कहते हैं कि भले ही समाजवादी पार्टी ने भगतराम मिश्र के नाम की घोषणा में देरी की हो लेकिन इस बात में संदेह नहीं है कि कैसरगंज में एसपी भी मज़बूत स्थिति में है.
उनका मानना है कि एसपी ने जातिगत समीकरण को देखते हुए सही टिकट दिया है. यहां ब्राह्मण आबादी अधिक है और एसपी उम्मीदवार भी ब्राह्मण हैं. हालांकि, वो ये भी कहते हैं कि ब्राह्मण यहां परंपरागत ढंग से बीजेपी का वोटर है, ऐसे में देखना होगा कि भगतराम मिश्र अपने साथ कितना ब्राह्मण वोट जुटा पाते हैं.
शायर अहमद रज़ा के अनुसार, बृजभूषण को समाज के सभी जतियों और धर्मों का समर्थन है क्योंकि वह भेदभाव नहीं करते हैं. उनका कहना है कि अगर बृजभूषण या उनके परिवार में किसी को टिकट नहीं मिलता तो इसका असर गोंडा और श्रावस्ती में भी दिखाई देता.
'करण भूषण की राह इतनी आसान भी नहीं'
वहीं, कुछ महिलाएं बृजभूषण शरण सिंह के बेटे करण सिंह को टिकट दिए जाने का विरोध कर रही हैं.
अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति की राष्ट्रीय संयुक्त सचिव मधु गर्ग कहना है, ''बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, बीजेपी का एक चुनावी जुमला साबित हुआ है.''
उनका कहना है कि बीजेपी के लिए चुनावी जीत “महिला अस्मिता” से अधिक महत्वपूर्ण है. मधु आगे कहती हैं कि ऐसा लगता है कि बीजेपी ने यौन उत्पीड़न के आरोपी के आगे आत्मसमर्पण कर दिया है.
कैसरगंज के रहने वाले पेशे से वकील धीरेंद्र सिंह मानते हैं कि करण भूषण की राह यहां इतनी आसान भी नहीं है. वो कहते हैं कि यहां जनता दो भागों में बंटी है या तो मोदी के समर्थन में है या मोदी के विरोध में है. बृजभूषण या करण भूषण से जनता को कोई ख़ास फ़र्क़ नहीं पड़ता.
धीरेंद्र कहते हैं कैसरगंज में एसपी समर्थक भी हैं, उनके पास एक विधानसभा सीट भी है इसलिए बृजभूषण के बेटे की राह आसन नहीं है, मुक़ाबला दिलचस्प होगा.
यहीं के रहने वाले संदीप कुमार सोनी कहते हैं कि समाजवादी पार्टी ने अपना प्रत्याशी देरी से उतारा है लेकिन मुक़ाबला सख़्त होगा, क्योंकि यहां ब्राह्मण मतदाता बड़ी तादाद में हैं और और एसपी उम्मीदवार भी इसी समाज से हैं.

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समाजवादी पार्टी का क्या कहना है?
समाजवादी पार्टी ने यहां से भगतराम मिश्र को उम्मीदवार बनाया है. वो भी सियासी परिवार से आते हैं. एसपी ने यहां काफ़ी देर से उम्मीदवार उतारा, पार्टी ये देखना चाहती थी कि आख़िर बीजेपी किसको अपना उम्मीदवार बना रही है.
अब एसपी परिवारवाद के ख़िलाफ़ बोलने वाली बीजेपी को निशाना बना रही है. इंडिया गठबंधन के नेता पूछ रहे हैं कि पिता के बदले बेटे को टिकट देना परिवारवाद नहीं है तो क्या है? समाजवादी पार्टी के नेता मनोज “काका” का कहना है कि इंडिया गठबंधन आम जनता के बुनयादी सवालों पर चुनाव लड़ रहा है और बीजेपी परिवारवाद को प्राथमिकता दे रही है. “काका'' दावा करते हैं कि एसपी को पिछड़ों के साथ दलितों समेत हर वर्ग का समर्थन भी मिल रहा है.
समाजवादी पार्टी की नेता पूजा शुक्ला का मानना है कि बृजभूषण शरण सिंह के बेटे को टिकट देना दरअसल महिला पहलवानों के साथ अन्याय है. पूजा शुक्ला के अनुसार कठुआ कांड से लेकर हाथरस तक हर मामले में बीजेपी ने महिला अस्मिता के साथ खिलवाड़ करने वालों का समर्थन किया है.
वे आगे कहती है, ''जिस व्यक्ति (बृजभूषण) को पार्टी से निष्कासित करके उस पर क़ानूनी कार्रवाई करना चाहिए थी, उसके बेटे को टिकट देकर बीजेपी ने पूरे महिला समाज का अपमान किया है.''
संयुक्त किसान मोर्चा, बीजेपी के ख़िलाफ़ सक्रिय

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किसान आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने “डिजिटल पोस्टर” में बीजेपी को “बेनक़ाब कर दण्डित” करने की बात कही है.
किसान नेता डॉक्टर आशीष मित्तल का कहना है कि ऐसे में जब बृजभूषण शरण पर महिला पहलवानों के साथ यौन उत्पीड़न का आरोप है और अदालत ने आरोप भी तय कर दिए हैं, ऐसे में उनकी जगह उनके बेटे को टिकट देना “अनैतिक” है और देश की महिलाओं का “अपमान” है.
वो कहते हैं, “यह निर्णय आपराधिक गिरोहों के दबाव को झेलने में एक राजनीतिक दल के रूप में बीजेपी की कमज़ोरी को उजागर करता है और चुनावी प्रक्रिया के खुले अपराधीकरण का उदाहरण है.”
विश्लेषक कैसे देख रहे हैं?
वरिष्ठ पत्रकार और द टाइम्स ऑफ़ इंडिया के पूर्व संपादक अतुल चंद्रा कहते हैं कि बीजेपी के लिए प्रत्येक सीट महत्वपूर्ण है, इसलिए उसके शीर्ष नेतृत्व ने यौन उत्पीड़न के आरोपी के बेटे को टिकट देने में भी परहेज़ नहीं किया.
वो कहते हैं, ''अगर नैतिकता के आधार पर फ़ैसला किया जाता तो जिस वक़्ता बृजभूषण पर आरोप लगे थे, उसी वक़्त उनको पार्टी से निकालकर कार्रवाई करनी चाहिए थी.''
अतुल चंद्रा का मानना है कि बीजेपी की नीति इससे साफ़ है कि एक तरफ़ यौन उत्पीड़न के आरोपी को टिकट नहीं दिया, दूसरी तरफ़ उन्हीं के बेटे को टिकट देकर उन्हें ख़ुश भी कर दिया ताकि राजनीतिक तौर पर कोई नुक़सान न हो.

कैसरगंज लोकसभा क्षेत्र का समीकरण
बता दें कि कैसरगंज लोकसभा क्षेत्र गोंडा की तीन विधानसभाओं तरबगंज, करनैलगंज, कटरा और बहराइच ज़िले की दो विधानसभा कैसरगंज और पयागपुर से मिलकर बना है.
पिछले तीन बार से लगातर बृजभूषण शरण सिंह यहां से सांसद निर्वाचित हुए हैं. 2009 में समाजवादी पार्टी से जीते उसके बाद 2014 और 2019 में बीजेपी प्रत्याशी के तौर पर जीत दर्ज की थी.
मौजूदा समय में कैसरगंज लोकसभा की पांच विधानसभाओं में से चार विधानसभा तरबगंज, करनैलगंज, कटरा और पयागपुर पर बीजेपी का क़ब्ज़ा है जबकि कैसरगंज विधानसभा एसपी के पास है यहां से आनंद यादव विधायक हैं.
यहां एसपी की स्थिति भी ठीक ठाक रही है. 1996,1998, 1999 और 2004 चार बार लगातार एसपी से बेनी प्रसाद वर्मा कैसरगंज से सांसद रहे.
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