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क्या मार्वल सिनेमैटिक यूनिवर्स ख़त्म होने जा रहा है? - दुनिया जहान
फ़रवरी 2023, स्कॉटलैंड, पृथ्वी....एक ज़ोरदार हमला हो रहा है और दुनिया को विलेन से बचाने वाला ऐंटमैन, जो जैसा चाहे अपना आकार बदल सकता है....अब ख़तरे में है.
ऐंटमैन ही नहीं बल्कि उसके दूसरे कई सुपरहीरो साथी भी ख़तरे में हैं और हम उन्हें बचाने कि लिए कुछ नहीं कर सकते. क्योंकि इस बार उन पर यह हमला हो रहा है फ़िल्म समीक्षकों और उनके फ़ैन्स की तरफ़ से.
वो फ़िल्म समीक्षक जो कभी स्पाइडर-मैन, कैप्टन अमेरिका और आयरन मैन जैसे सुपरहीरो वाले किरदारों की फ़िल्मों की तारीफ़ों के पुल बांधते थे और वो फ़ैंस जो शिद्दत से इन फ़िल्मों का इंतजार करते थे. अब इन सुपरहीरोज से निराश हो गए हैं या उकता गए हैं.
यह वो सुपरहीरो हैं जिनके बल पर मार्वल सिनेमैटिक यूनिवर्स की दुनिया ना सिर्फ़ टिकी हुई थी बल्कि फल-फूल रही थी.
तो इस हफ़्ते दुनिया जहान में हम यह समझने की कोशिश करेंगे कि क्या मार्वल सिनेमैटिक यूनिवर्स की दुनिया ख़त्म होने जा रही है?
हममें से कई लोगों ने सुपरहीरो के किरदारों पर आधारित यह फ़िल्में देखी होंगी जिसमें दुनिया अक्सर बुरे लोगों के निशाने पर होती है. अच्छाई और बुराई के बीच जंग होती है.
लेकिन तब फिर एंट्री होती है तमाम शक्तियों से लैस सुपरहीरो की, जो विलेन से लोहा लेने के लिए मैदान में उतर आते हैं और फ़िल्म के अंत में विलेन के बुरे मंसूबों को मिट्टी में मिला देते हैं.
आपको शायद पता होगा कि अत्यंत सफल रही और कई किस्तों में बनी इन फ़िल्मों के यह सुपरहीरो दरअसल कॉमिक बुक के किरदार हैं जिन्हें फ़िल्मों में साकार किया जाता रहा है.
जब भी यह फ़िल्में रिलीज़ होतीं थीं, दर्शक इन्हें हाथों हाथ लेते थे. आपको यह भी पता होगा कि चार साल पहले रिलीज़ हुई एवेंजर्स एंडगेम पूरी दुनिया के साथ-साथ भारत में भी बॉक्स-ऑफ़िस पर तहलका मचा चुकी है.
शुरुआत सुपरमैन से
वर्जीनिया के रेडफ़र्ड यूनिवर्सिटी में ह्यूमैनिटीज़ विभाग के प्रमुख मैथ्यू स्मिथ कहते हैं कि फ़िल्मों में सुपरहीरो के किरदारों की शुरुआत सुपरमैन से हुई थी.
मैथ्यू स्मिथ कॉमिक बुक के शौकीन हैं. वे कहते हैं, “पहला सुपरहीरो तो सुपरमैन ही है. सुपरहीरो के किरदार की रचना 1938 में जेरी सीगल और जो शूस्टर नाम के दो अमेरिकी लड़कों ने की थी. यह डिज्नी कॉमिक पत्रिकाओं में प्रकाशित हुआ. कॉमिक बुक्स और कॉमिक पत्रिकाओं में आते ही वो बेहद लोकप्रिय किरदार बन गया.”
सुपरमैन की लोकप्रियता से प्रेरित हो कर, सुपरहीरो के किरदारों वाली और भी कई कॉमिक पत्रिकाएं आना शुरू हुईं.
मैथ्यू स्मिथ कहते हैं 1939 में मार्टिन गुडमैन ने मार्वल कॉमिक्स प्रकाशित करना शुरु किया.
इस बारे में मैथ्यू स्मिथ कहते हैं, “मार्वल कॉमिक्स में दो सुपरहीरो किरदार आए, वो थे ह्यूमन टॉर्च और सबमरीनर. यह दरअसल एंटी हीरो किरदार थे. यानी ऐसे हीरो जिनमें अवगुण भी थे और खामियां भी. उसके बाद कैप्टन अमेरिका के किरदार को गढ़ा गया, जो मार्वल कॉमिक्स का एक बहुत ही लोकप्रिय किरदार बना.”
उसके बाद जैक कर्बी और स्टेन ली की जोड़ी ने ‘फ़ैंटेस्टिक फ़ोर’ और डेयर डेविल और ‘एक्समेन’ की रचना की. इस तरह से मार्वल कॉमिक्स सुपरहीरो ने एक नए किस्म की दुनिया को सामने रखा.
मैथ्यू स्मिथ का मानना है, “अगर आप सुपरमैन को देखें तो वो रूप और गुणों में एक परफेक्ट या आदर्श किरदार है. देखने में उनकी छवि ग्रीक देवता ओडोनिस जैसी आकर्षक लगती है. ऐसी छवि जिसे देख कर लोग ख़ुद वैसा दिखना चाहें. इसी के आधार पर मार्वल कॉमिक बुक्स में भी स्पाइडर मैन जैसे सुपरहीरो आना शुरू हुए.”
मैथ्यू स्मिथ आगे कहते हैं, “मार्वल के सुपरहीरो दरअसल जवानी की दहलीज़ पर कदम रखने वाले लड़कों के किरदार हैं, जिनमें करिश्माई ताकतें होती हैं. लेकिन सुपरमैन के विपरीत यह सुपरहीरो उस तरह परफेक्ट नहीं होते.”
“उनके किरदारो में इंसानी ख़ामियां भी होती हैं. इसलिए लोग आसानी से उनके प्रति आकर्षित होते रहे हैं.”
कॉमिक बुक्स ने एक मार्वल यूनिवर्स बनाया यानी ऐसी दुनिया जिसमें कई सुपरहीरो, एक समय, एक ही दुनिया में एक साथ आने लगे.
मगर इन किरदारों पर फ़िल्में बनाने के लिए पैसों की ज़रूरत थी. दूसरे फ़िल्म निर्माण स्टूडियोज़ को मार्वल ने इन किरदारों का इस्तेमाल करने के लाइसेंस बेचने शुरू कर दिये और इस तरह मार्वल कॉमिक्स डिज़्नी से अधिक लोकप्रिय बन गया.
उन्होंने टेलीविजन के लिए मार्वल सुपरहीरो के किरदारों पर आधारित फ़िल्में बनाना शुरू किया. लेकिन उम्मीदों के मुताबिक़ कामयाबी नहीं मिल पाई.
मैथ्यू स्मिथ के अनुसार इसका कारण यह था कि टीवी फ़िल्मों के निर्माता मार्वल के किरदारों को ठीक से समझ नहीं पाए.
वो कहते हैं, “अगर आप 1970 में स्पाइडरमैन के टीवी रूपांतरण को देखें तो उसमें स्पाइडरमैन लगातार बोलता जाता है जबकि मूल किरदार बहुत कम बोलने वाला था. तो स्पाइडरमैन की ड्रेस में लगातार बोलने वाला किरदार, लोगों को कम गंभीर और भौंड़ा और मज़ाकिया लगा.”
अब अगर फ़ास्ट फॉरवर्ड करके वर्तमान समय में आएं, तो मार्वल अभी भी नए सुपरहीरो किरदार बना रहा है और उन्हें पसंद करने वाले अनगिनत फैंस भी बढ़ते जा रहे हैं.
एमसीयू - मार्वल सिनेमैटिक यूनिवर्स
एमसीयू यानी मार्वल सिनेमैटिक यूनिवर्स. ये उस फ्रैंचाइज़ी का नाम है जिसके तहत मार्वल स्टूडियोज़ ने 15 फ़िल्में बनाई हैं.
ये फ़िल्में, कहानी या किरदारों के ज़रिए से एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं.
इस बारे में हमने बात की लीसा लेमन से, जो ‘दी स्पूल’ और ‘कोलायडर’ जैसी मनोरंजन से जुड़ी वेबसाइट के लिए फ़िल्मों की समीक्षा करती हैं.
वो कहती हैं दस साल पहले जब मार्वल स्टूडियोज़ की पहली सबसे सफल फ़िल्म ‘आयरन मैन’ रिलीज़ हुई तो उसमें काफ़ी कुछ नया था.
लीसा लेमन बताती हैं, “मुझे लगा यह बहुत नया है क्योंकि इसमें हास्य था, पूरी तरह काल्पनिक दुनिया के बजाय इसकी कहानी आधुनिक दुनिया और उसके सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों से जुड़ी हुई थी. इसकी कहानी बैटमैन के काल्पनिक शहर गोथम के बजाय इराक़ में घटती है. कई बातें बिल्कुल नयी थीं.”
पिछले साल फ़िल्मों के इतिहास में सबसे ज़्यादा पैसे कमाने वाली दस फ़िल्मों में से पांच फ़िल्में मार्वल के किरदारों पर आधारित थीं.
लेमन कहती हैं कि ‘आयरन मैन’ से ‘अवेंजर्स एंड गेम’ बनने तक ग्यारह साल का समय मार्वल स्टूडियोज़ का स्वर्णिम काल था. इस दौरान ‘ब्लैक पैंथर’, ‘डॉक्टर स्ट्रेंज’ जैसी सफल फ़िल्में आयीं. मगर इन सब में अवेंजर्स सिरीज़ की फ़िल्मों ने सबसे ज्यादा पैसे कमाए.
लेमन आगे कहती हैं कि ब्लैक पैंथर पहली बार 1960 के दशक में बनी थी लेकिन उसे जब दोबारा 2018 में बनाया गया तो उसने एक अरब डॉलर से ज्यादा पैसे कमाए और दुनिया की सबसे सफल सुपरहीरो फ़िल्मों में एक साबित हुई.
‘ब्लैक पैंथर’ के महत्व के बारे में लीसा लेमन कहती है, “तब तक मार्वल स्टूडियोज़ की फ़िल्मों में नस्लीय विविधता का प्रतिनिधित्व दिखाई नहीं देता था. कहानियों में काले किरदार कम होते थे और ना ही कहानियों में काले लोगों का नज़रिया दिखता था. ब्लैक पैंथर ने इस कमी को कुछ हद तक पूरा करने की कोशिश की.”
“दर्शकों को भी एहसास हुआ कि इस नज़रिए से कहानी कहने की कितनी सख़्त ज़रूरत थी. इससे इस बात पर भी ध्यान गया कि एक सुपरहीरो को कैसा दिखना चाहिए? यह ज़रूरी नहीं है कि सुपरहीरो हमेशा कोई गोरा व्यक्ति ही हो.”
सुपरहीरो पर आधारित फ़िल्में बनाने में मार्वल स्टूडियोज़ सबसे आगे है. लेकिन डीसी स्टूडियोज भी ऐसी फ़िल्में बना रहा है.
लीसा लेमन कहती हैं कि 2013 में आई डीसी स्टूडियोज़ की मार्वल सुपरहीरो किरदार पर आधारित फ़िल्म ‘मैन ऑफ़ स्टील’ भी बॉक्स ऑफ़िस पर काफ़ी सफल रही. लेकिन वह ‘अवेंजर्स’ फ़िल्मों जैसी सफलता प्राप्त नहीं कर पाई क्योंकि फ़िल्म की क्वालिटी ‘अवेंजर्स’ फ़िल्मों के टक्कर की नहीं थी.
“मगर डीसी की फ़िल्म ‘वंडर वुमन’ और ‘शज़ैम’ काफ़ी कामयाब रहीं क्योंकि उनमें मानवीय जीवन और भावनाओं की झलक थी जिससे दर्शक जुड़ पाए लेकिन यह बात डीसी की ‘बैटमैन वर्सेज सुुपर मैन’ फ़िल्म में नहीं थी इसलिए वो इतनी सफल नहीं हुईं.”
मार्वल स्टूडियोज़ की सुपरहीरो फ़िल्मों की आलोचना पहले भी होती रही है, लेकिन आलोचना के तीव्र होते जाने की वजह क्या है?
इस पर लीसा लेमन का कहना है, “इस बार आलोचना कुछ अलग लग रही है. इसकी एक वजह यह भी हो सकती है कि मार्वल फ़िल्में बड़ी तादाद में बन रही हैं. मार्वल अब वो सबक सीख रहा है जो डीसी ने कुछ साल पहले सीखा था, कि सिर्फ़ कई सारे सुपरहीरो को एक साथ एक फ़िल्म में लाने से फ़िल्म हिट नहीं हो जाएगी. दर्शक कहानी में गहराई देखना चाहते हैं.”
डिज़्नी और मार्वल का मिलन
डिज़्नी ने 2009 में मार्वल स्टूडियोज़ को ख़रीद लिया था. प्रोफ़ेसर स्पेंसर हैरिसन मानते हैं कि डिज्नी के लिए यह बड़ा अच्छा सौदा साबित हुआ.
प्रोफ़ेसर स्पेंसर हैरिसन कई देशों में स्थित इनसीड बिज़नेस मैनेजमेंट स्कूल में मानवीय व्यवहार संबंधी विषय के प्रोफ़ेसर हैं और उद्योग जगत में रचनात्मकता की भूमिका पर शोध करने के लिए उन्होंने मार्वल स्टूडियोज़ के बिज़नेस मॉडल और फ़िल्म निर्माण के तरीके का भी अध्ययन किया ताकि उसकी सफलता का रहस्य समझा जा सके.
प्रोफ़ेसर स्पेंसर हैरिसन अपने अध्ययन के बारे में कहते हैं, “हमने पाया कि एक फ़िल्म निर्देशक को मार्वल की पहली इक्कीस फ़िल्मों के लिए औसतन 18 करोड़ डॉलर का बजट मिलता था जबकि मार्वल स्टूडियो में आने से पहले उन्होंने जो फ़िल्में बनायी थीं उनका बजट प्रति फ़िल्म औसतन ढाई करोड़ डॉलर होता था. मार्वल ने ऐसे निर्देशक चुने जो बिल्कुल दूसरी शैली की फ़िल्में बनाते थे. इसके पीछे यह सोच थी की यह निर्देशक एक नयी सोच और संवेदना सुपरहीरो वाली फ़िल्मों में लाएंगे.”
2009 में वॉल्ट डिज़्नी ने मार्वल एंटरटेनमेंट कंपनी को चार अरब डॉलर में ख़रीद लिया. तब से लेकर अब तक उसने 32 अरब डॉलर का मुनाफ़ा कमा लिया है.
प्रोफ़ेसर स्पेंसर हैरिसन के मुताबिक़ इससे डिज़्नी के फ़िल्म उद्योग को फ़ायदा हुआ और उसकी प्रतिष्ठा भी बढ़ गयी.
साल 2019 में ओटीटी प्लेटफ़ार्म यानी सबस्क्रिप्शन टीवी सेवा ‘डिज़्नी प्लस’ की शुरुआत हुई. यह कोविड महामारी फै़लने के कुछ समय पहले ही शुरू हुई थी और लॉकडाउन के दौर में इसके ग्राहक काफ़ी बढ़ गए.
प्रोफ़ेसर स्पेंसर हैरिसन ने कहा कि, “ग्राहकों की बढ़ती संख्या के साथ कंटेंट की मांग भी बढ़ी. यानी मार्वल ने कम समय में ज़्यादा कंटेंट बनाना शुरू कर दिया. इससे उसकी फ़िल्मों और टीवी धारावाहिकों की क्वालिटी भी गिरी और ग़लतियां होने लगी.”
उनका मानना है कि डिज़्नी प्लस ने जब ‘द फाल्कन एंड द विंटर सोल्जर’ बनायी तो उसकी सोच थी कि यह कैप्टन अमेरिका की जगह ले पाएगा. मगर यह प्रयोग सफल नहीं हुआ. यानी, ज्यादा कंटेंट बनाने के चक्कर में क्वालिटी के साथ समझौता हुआ. मगर आप सोच रहे होंगे कि डिज़्नी प्लस से जुड़ कर मार्वल को क्या फ़ायदा हुआ?
प्रोफ़ेसर स्पेंसर हैरिसन कहते हैं, “मार्वल को टेलीविजन फ़ॉरमैट में अपनी उन कहानियों को आज़माने का मौका मिला जो शायद फ़िल्म के फ़ॉरमैट के अनुकूल नहीं थीं और धारावाहिकों में कहानियां बनाने का मौका मिला. साथ ही मार्वल ने यह भी समझ लिया कि कंटेंट बनाने की सीमा कहां तक हो सकती है और कहां उसे रफ़्तार कम करनी होगी.”
अनंत संभावनाएं
फ़िल्म पत्रकार और समीक्षक जोनाथन सिम का भी मानना है कि टीवी फ़ॉर्मेट में मार्वल बहुत अधिक कंटेंट बना रहा है और दर्शक इससे कुछ हद तक उकता गए हैं.
मार्वल की फ़िल्में कई चरणों में बनती थीं और कहानी के अंत होने पर वो चरण समाप्त हो जाता था. पहला चरण 2008 में शुरू हुआ और 2012 तक चला, जिस दौरान छह फ़िल्में रिलीज़ हुईं.
जोनाथन सिम ने बीबीसी को बताया, “दूसरा चरण 2021 में शुरू हुआ और 2022 तक चला, जिस दौरान पहले चरण के मुक़ाबले दोगुना कंटेंट बनाया गया. लगभग हर महीने एक नया शो आ रहा था. मेरे जैसे मार्वल फ़ैन के लिए तो यह समस्या नहीं है लेकिन कई दर्शक इससे उकताने लगे हैं. दूसरी बात यह भी है कि मार्वल के प्रोडक्शन की गुणवत्ता गिर रही है. उसे अपने कटेंट को कम करने के बारे में सोचना चाहिए.”
कम समय में ज्यादा कंटेंट बनाने की होड़ में फ़िल्म के पोस्ट प्रोडक्शन यानी विजुअल और ग्राफ़िक इफ़ेक्ट पर से ध्यान कम हुआ और उसे कम समय दिया गया.
यह वो बातें हैं जो दर्शकों को सबसे अधिक प्रभावित करती थीं और मार्वल की सुपरहीरो फ़िल्मों की जान होती थीं.
जोनाथन सिम का कहना है, “दर्शकों को लगा कि ‘थॉर लव एंड थंडर’, ‘शी- हल्क अटॉर्नी एट लॉ’ यह मार्वल के दो ऐसे नए प्रोजेक्ट थे जिनके विजुअल इफ़ेक्ट्स बहुत कमज़ोर थे. ‘शी हल्क एटर्नी एट लॉ’ नौ एपिसोड की एक मिनी सीरिज़ थी जिसके मुख़्य किरदार को सीजीआय यानी कंप्यूटर ग्राफ़िक इमेज के ज़रिए बनाया गया था. वो इतना कमज़ोर काम था कि यह किरदार दर्शकों को बिल्कुल नकली लगा.”
दुनिया में मार्वल के करोड़ों फैंस है और इनमें मार्वल की फ़िल्मों के प्रति ऐसा जुनून है कि वो फ़िल्म को हिट बना सकते हैं और फ़्लॉप भी कर सकते हैं.
जोनाथन सिम का मानना है कि मार्वल इतना कंटेंट बना रहा है कि लोगों में अब उसे लेकर पहले जैसी उत्सुकता या उत्साह नहीं है. वहीं मार्वल चाहेगा कि नई पीढ़ी के दर्शक भी उसकी फ़िल्मों की ओर आकर्षित हों और फैन्स की एक नयी पीढ़ी उससे जुड़े.
जोनाथन सिम कहते हैं, “ मार्वल की ‘हॉक आय’ और मिस मार्वल जैसी सीरीजों में अब युवा सुपरहीरो किरदार दिखाई देने लगे हैं.”
“युवा किरदार ‘अवेंजर्स’ में भी आने लगे हैं ताकि युवा दर्शकों को आकर्षित किया जा सके. भविष्य में यह भी हो सकता है कि मार्वल सुपरहीरो फ़िल्मों के अलावा दूसरी शैली की फ़िल्में बनाना शुरू कर दे.”
जोनाथन सिम यह भी मानते हैं कि आने वाले समय में मार्वल को डीसी स्टूडियो से भी बड़ी चुनौती मिल सकती है.
डीसी स्टूडियो ने मार्वल के पूर्व डायरेक्टर और ‘गार्डियन्स ऑफ़ गैलेक्सी’ के लेखक जेम्स गन को अपना को-सीईओ बना लिया है और हो सकता है कि सुपरमैन और बैटमैन का किरदार निभाने के लिए अब नए कलाकारों को लाया जाए.
तो अब लौटते हैं अपने प्रमुख प्रश्न की तरफ़- क्या मार्वल सिनेमैटिक यूनिवर्स ख़त्म होने जा रहा है?
जवाब है कि नज़दीकी भविष्य में तो ऐसा होने की संभावना कम है. उसकी पिछली फ़िल्म ‘गार्डियन ऑफ़ दी गैलेक्सी वॉल्यूम तीन’ हिट रही है और मार्वल फ्रैंचाइज़ी अभी भी काफ़ी सफल है. उसके तरकश में अभी काफ़ी तीर हैं.
अगले साल मार्वल की नई फ़िल्में ‘कैप्टन अमेरिका : ब्रेव न्यू वर्ल्ड’ और ‘ब्लैड’ रिलीज़ होने वाली हैं. मगर यह भी सच है कि कम समय में ज़रूरत से ज़्यादा फ़िल्में बनाने से, विजुअल इफ़ेक्ट की गुणवत्ता में आई गिरावट और फ़िल्मों की कमज़ोर कहानियों से उसकी आलोचना तेज़ हुई है. अपनी प्रतिष्ठा और वर्चस्व को बनाए रखने के लिए मार्वल को इस बारे में गंभीरता से सोचना होगा.
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