हल्द्वानी के बनभूलपुरा में बंदूक़ों के साए में शांति, क्या कह रहे हैं लोग

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    • Author, राजेश डोबरियाल
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए

हल्द्वानी के बनभूलपुरा में बवाल के एक दिन बाद शुक्रवार को बंदूकों के साए में शांति रही और हल्द्वानी सरकारी अमले के गतिविधियों का केंद्र बना रहा.

मुख्यमंत्री और प्रशासन, पुलिस के शीर्ष अधिकारी हल्द्वानी पहुंचे और स्थिति का जायज़ा लिया, बनभूलपुरा में घायल लोगों का हाल-चाल पूछा.

इस बीच गुरुवार को भड़की हिंसा में पांच लोगों के मौत की पुष्टि हो गई.

गुरुवार रात से हल्द्वानी में कर्फ़्यू लगा हुआ था जिसमें शनिवार की सुबह ढील दी गई है और अब कर्फ़्यू को बनभूलपुरा और इसके आसपास के इलाक़ों तक सीमित कर दिया गया है.

देहरादून समेत मिश्रित आबादी वाले सभी क्षेत्रों में पुलिस अलर्ट पर है.

मदरसा तोड़ने पर हुआ था बवाल

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उत्तराखंड के हल्द्वानी के बनभूलपुरा में कथित तौर पर ग़ैर-क़ानूनी तरीके से बने एक मदरसे को तोड़ने की कार्रवाई के दौरान तभी स्थानीय लोगों ने पत्थरबाज़ी शुरू कर दी थी.

इसके बाद आगज़नी भी की गई. मदरसे को हटाने के काम में नगरपालिका के कर्मचारी और पुलिसकर्मी शामिल थे.

उनके अलावा इस घटनाक्रम को कवर करने गए कुछ पत्रकार भी घायल हो गए थे.

ऐसे ही एक पत्रकार ने बीबीसी से बातचीत में कहा था कि गुरुवार को किसी तरह उनकी जान बच सकी.

नैनीताल की ज़िलाधिकारी वंदना सिंह ने बताया, "भीड़ ने कई वाहन जला दिए, जिनमें ज़्यादा दोपहिया हैं. इनकी सही संख्या अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाई है."

बनभूलपुरा का हाल...

गुरुवार को बनभूलपुरा में मदरसा तोड़े जाने के दौरान स्थानीय लोगों और पुलिस के बीच तनाव बढ़ा था.

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गुरुवार को भड़की हिंसा के दो दिन बीत जाने के बाद हल्द्वानी में कर्फ़्यू लगा हुआ है और देखते ही गोली मारने के आदेश हैं. इंटरनेट कनेक्शन बंद हैं और बाहर क्या हो रहा है, लोगों को कुछ पता नहीं चल रहा है.

एक स्थानीय शख़्स ने नाम ज़ाहिर न करने की शर्त पर कहा कि बनभूलपुरा के लोग ख़ौफ़ के साए में जी रहे हैं.

वह कहते हैं कि 'अगर खिड़की या दरवाज़े का पल्ला भी खोलकर बाहर झांको तो पुलिसकर्मी बंदूक़ से इशारा करके कह रहे हैं कि अंदर जाओ.'

बनभूलपुरा के एक दूसरे निवासी बताते हैं कि उस दिन बवाल तीन जगह हुआ था. पहली जगह थी मलिक का बगीचा, दूसरी जगह गांधीनगर और तीसरी जगह बनभूलपुरा थाना. वह दावा करते हैं कि तीनों जगह भीड़ अलग-अलग थी.

मलिक का बगीचा में मदरसा तोड़ने पर भीड़ आक्रामक हो गई थी. वहां पत्थरबाज़ी और आगज़नी हुई थी.

वह बताते हैं कि गांधीनगर में जहां बवाल हुआ, वह मुस्लिम और हिंदू आबादी का बॉर्डर माना जा सकता है. एक तरफ़ मुस्लिम आबादी है और दूसरी तरफ़ हिंदू आबादी. वहां भी पत्थरबाज़ी हुई और चार घरों को आग लगा दी गई. बताया जा रहा है कि एक शख़्स की मौत यहां हुई.

इसके बाद बनभूलपुरा थाने में पत्थरबाज़ी और आगज़नी के बाद हुई गोलीबारी में चार लोगों की मौत हुई है.

बनभूलपुरा के स्थानीय लोगों ने बताया कि मृतकों को सुपुर्दे ख़ाक किए जाने का इंतज़ाम प्रशासन ने ही किया है. शवों को पोस्टमार्टम के बाद सीधे कब्रिस्तान भेज दिया गया और सिर्फ़ पंचनामा भरने वाले चार-पांच लोगों को ही उन्हें दफ़नाने के लिए जाने की इजाज़त मिल रही है.

उपद्रवियों को चिन्हित कर कार्रवाई होगीः धामी

धामी

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शुक्रवार को दोपहर बाद हल्द्वानी पहुंचे और बनभूलपुरा में हुए उपद्रव में घायल महिला पुलिस दल समेत अन्य पुलिसकर्मियों, प्रशासन, नगर निगम कर्मचारियों और पत्रकारों का हाल-चाल पूछा.

उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने क़ानून तोड़ा है और सरकारी संपत्ति को नुक़सान पहुंचाया है उनके सारे वीडियो फुटेज और फुटप्रिंट उपलब्ध हैं. सभी उपद्रवियों को चिन्हित कर, उन पर विधिसम्मत कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है.

मुख्यमंत्री ने एडीजी कानून और व्यवस्था एपी अंशुमान को बनभूलपुरा में शांति और कानून व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए प्रभावित क्षेत्र में कैंप करने के निर्देश दिए हैं.

इससे पहले शुक्रवार सुबह राज्य की मुख्य सचिव राधा रतूड़ी और डीजीपी अभिनव कुमार ने हल्द्वानी पहुंचकर स्थिति का जायज़ा लिया था. मुख्य सचिव ने कहा कि पहले पूरी स्थिति को अच्छे से अध्ययन करेंगे और फिर उसके क्या कानूनी बिंदुओं को देखेंगे.

मिश्रित आबादी वाले क्षेत्रों में अलर्ट

उत्तराखंड पुलिस के प्रवक्ता आईजी नीलेश भरणे ने शुक्रवार शाम बीबीसी को बताया कि राज्य में मिश्रित आबादी वाले क्षेत्रों में पुलिस अलर्ट पर है. उन्होंने कहा, "पांच लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई है, जिनकी पहचान कर ली गई है. सभी बनभूलपुरा क्षेत्र के ही लोग हैं."

इलाके में बड़ी संख्या में सुरक्षाबल तैनात हैं. आईजी नीलेश भरणे ने बताया कि चार कंपनी उत्तराखंड पुलिस पीएसी की और दो कंपनी पैरा मिलिट्री की तैनात हैं.

उन्होंने यह भी बताया कि राज्य भर में जो मिश्रित आबादी के क्षेत्र हैं उनमें पुलिस अलर्ट पर है. देहरादून समेत काशीपुर, रुद्रपुर, रामनगर, कोटद्वार जैसी जगहों पर पुलिस अलर्ट मोड पर है ताकि तनाव न भड़के.

यह कहा जा सकता है कि स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में है.

हल्द्वानी में आगज़नी और हिंसा की घटना पर पूर्व सीएम हरीश रावत ने चिंता व्यक्त की है. हरीश रावत ने कहा कि हल्द्वानी हमेशा से प्रेम, भाईचारे और सौहार्द का प्रतीक रहा है, वहां पर ऐसी घटना का होना दुर्भाग्यपूर्ण है.

दूसरी ओर बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट बनभूलपुरा में हुई घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए असामाजिक तत्वों का दुस्साहस बताया है. उन्होंने कहा कि 'इस तरह के कब्ज़े राज्य का माहौल खराब करने और डेमोग्राफी बदलने की साज़िश का हिस्सा हैं.'

प्रशासनिक लापरवाही का आरोप

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शुक्रवार को कई मुस्लिम संगठनों ने गृह सचिव से मुलाक़ात की और बनभूलपुरा की घटना को प्रशासन की नाकामी बताते हुए ज़िम्मेदार अधिकारियों को निलंबित करने की मांग की.

इन संगठनों की ओर से कहा गया है, "हल्द्वानी में मलिक का बाग़ इलाक़े में प्रशासन द्वारा एक मस्जिद और मदरसे को अन्यायपूर्वक कार्यवाही करते हुए बलपूर्वक तोड़ दिया गया. जिसका विरोध कर रही स्थानीय महिलाओं पर पुलिस द्वारा लाठी चार्ज किया गया जिसके उपरांत माहौल उग्र हो गया. इस प्रकरण से हल्द्वानी में रह रहे मुस्लिम डरे हुए हैं जो चिंता का विषय है."

प्रतिनिधिमंडल ने मांग की है कि मुस्लिम समुदाय के एक प्रतिनिधिमंडल को दंगाग्रस्त इलाके का दौरा करने की अनुमति प्रदान की जाए ताकि शांति की अपील हो सके तथा उनकी परेशानियों को समझकर शासन को अवगत कराया जा सके, किसी भी निर्दोष व्यक्ति की गिरफ़्तारी न की जाए और न ही उन्हें परेशान किया जाए.

इधर उत्तराखंड के जन संगठनों, बुद्धिजीवियों, एवं नागरिकों की ओर से भी एक संयुक्त बयान जारी किया गया है. शांति की अपील के साथ ही इसमें प्रशासन पर लापरवाही, जल्दबाज़ी और पक्षपातपूर्ण दृष्टिकोण अपनाने का आरोप लगाया गया.

इन संगठनों की ओर से सवाल किया गया है कि कथित तौर पर अवैध बनी मस्जिद और मदरसा सील कर प्रशासन के कब्ज़े में थे और इस मामले की सुनवाई 14 फ़रवरी को न्यायालय में होनी थी तो जल्दबाज़ी में बगैर तैयारी के ध्वस्तीकरण की क्या ज़रूरत थी?

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