हल्द्वानी में मदरसा हटाने के दौरान भड़की हिंसा में अब तक क्या-क्या हुआ

हल्द्वानी

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    • Author, राजेश डोबरियाल
    • पदनाम, बीबीसी हिन्दी के लिए

उत्तराखंड के हल्द्वानी के बनभूलपुरा में गुरुवार शाम हिंसा भड़क उठी.

नैनीताल पुलिस का कहना है कि हल्द्वानी थाना क्षेत्र के बनभूलपुरा में पहले से चिह्नित स्थल पर अतिक्रमण हटाने का काम हो रहा था, तभी पथराव शुरू हो गया.

पुलिस ने अपने बयान में कहा है कि एक विशेष समुदाय के पथराव और आगज़नी के कारण क़ानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ गई और आम लोगों के साथ-साथ सरकारी संपत्ति का भी नुक़सान हुआ.

प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि दंगाइयों को देखते ही गोली मारने का आदेश दिया गया है.

धामी ने पूरे मामले पर शुक्रवार की सुबह भी अधिकारियों के साथ बैठक की है और सख़्ती से निपटने का आदेश दिया है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, बनभूलपुरा में पुलिस कथित रूप से ग़ैरक़ानूनी तरीके से बने एक मदरसे को तोड़ने का काम करवा रही थी तभी स्थानीय लोगों ने आगज़नी शुरू कर दी और पत्थर फेंके.

मदरसे को हटाने के काम में नगरपालिका के कर्मचारी और पुलिसकर्मी शामिल थे. पीटीआई के अनुसार, बनभूलपुरा इलाक़े में भड़की हिंसा में कम से कम 60 लोग ज़ख़्मी हुए हैं.

नैनीताल की डीएम वंदना सिंह ने कहा हिंसा में दो लोगों की मौत हुई है. उन्होंने कहा कि हल्द्वानी में कर्फ्यू लगा दिया गया है, जो अगले आदेश तक जारी रहेगा.

उन्होंने कहा कि हिंसक भीड़ ने कई वाहन जला दिए हैं, जिनमें ज़्यादा दोपहिया हैं. इनकी संख्या के बारे में फ़िलहाल स्पष्ट रूप से कुछ कहा नहीं जा सकता है.

हिंसा में एक दर्जन पत्रकारों समेत कई पुलिसकर्मी और नागरिक प्रशासन के लोग भी घायल हुए हैं.

सुरक्षा स्थिति को देखते हुए केंद्रीय सुरक्षाबलों की चार बटालियन समेत आस-पास के ज़िलों से पुलिस बल को गुरुवार शाम को ही हल्द्वानी बुला लिया गया था.

इलाक़े के एसएसपी प्रह्लाद मीणा ने कहा है कि मदरसा सरकारी ज़मीन पर अवैध रूप से बना था और इसे तोड़ने का नोटिस पहले ही दिया जा चुका था.

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सीएम ने क्या कहा?

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है गुरुवार को दंगाइयों को देखते ही गोली मारने का आदेश दिया गया है.

मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है, "सीएम ने हल्द्वानी के बनभूलपुरा में अवैध निर्माण को हटाए जाने के दौरान पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों और कार्मियों पर हुए हमले तथा क्षेत्र में अशांति फैलाने की घटना को गंभीरता से लिया है."

"सीएम ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रदेश में किसी को भी क़ानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने की छूट नहीं दी जानी चाहिए. प्रशासनिक अधिकारी निरंतर क्षेत्र में क़ानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए कोशिश कर रहे हैं."

मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है, "जिलाधिकारी ने फ़ोन पर मुख्यमंत्री को बताया है कि अशांति वाले क्षेत्र बनभूलपुरा में कर्फ्यू लगाया गया है और स्थिति को सामान्य बनाए रखने के लिए दंगाइयों को देखते ही गोली मारने के आदेश दिए गए हैं."

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क्या है मामला?

हल्द्वानी के बनभूलपुरा इलाक़े में रेलवे की ज़मीन पर हुए अतिक्रमण को हटाने के लिए प्रशासन अभियान चला रहा है. यह घनी आबादी वाला इलाक़ा है, जहाँ अल्पसंख्यकों की संख्या अधिक है.

गुरुवार शाम जैसे ही मदरसे को तोड़ने का काम शुरू किया गया, बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर आ गए और धक्का-मुक्की शुरू हो गई. इसके बाद पत्थरबाज़ी शुरू हो गई जिसके जवाब में पुलिस ने भी कार्रवाई की.

प्रशासन का कहना है कि नाराज़ भीड़ ने बनभूलपुरा थाने पर भी हमला बोल दिया और पुलिस की कई गाड़ियों में आग लगा दी.

पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस की गोले छोड़े.

बीजेपी नेता नेहा जोशी ने इस हिंसा को प्रदेश में लागू हुए समान नागरिक संहिता से जोड़ा है.

सोशल मीडिया साइट एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने लिखा, "यह मात्र संयोग नहीं हो सकता. यूसीसी पारित होने के 24 घंटे के भीतर ही हल्द्वानी में हिंसा भड़क उठी. पुलिस और मीडियाकर्मियों पर हमला हुआ, आगज़नी की गई."

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नैनीताल की डीएम का क्या है कहना?

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नैनीताल की डीएम वंदना सिंह ने कहा है, "ये कोई अलग घटना नहीं है, जिसमें जानबूझकर किसी एक संपत्ति को निशाना बनाया गया हो."

उन्होंने बताया, "बीते 15-20 दिनों से हल्द्वानी के अलग-अलग क्षेत्रों में नगर निगम की परिसंपत्तियों से अतिक्रमण हटाने के लिए मुहिम चलाई जा रही थी और उससे पहले हाई कोर्ट के आदेश के बाद अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई की जा रही थी."

मीडिया से बात करते हुए उन्होंने ये भी ज़िक्र किया कि अन्य राज्यों में भी अवैध अतिक्रमण को हटाने के लिए जिला स्तर पर टास्क फोर्स का गठन किया गया है, सरकारी संपत्तियों की मैपिंग की जा रही है और उनकी सुरक्षा के लिए दिशानिर्देश दिए गए हैं.

उन्होंने कहा, "इसके साथ-साथ शहर के चौराहे को चौड़ा करने का काम भी चल रहा है. इसके लिए क़ानून के तहत पूरी प्रक्रिया का पालन करते हुए सभी जगह नोटिस दिए गए और सभी को सुनवाई के अवसर दिए गए. सुनवाई समिति के सामने एक-एक कर सभी की सुनवाई भी हुई है और समिति ने मामलों का निस्तारण किया. कुछ लोगों ने हाई कार्ट का रुख़ किया."

उन्होंने इस संपत्ति को लेकर कहा, "ये एक ख़ाली संपत्ति है, जिस पर दो ढांचे बने हुए हैं. ये न तो कहीं पर किसी धार्मिक संरचना के रूप में रजिस्टर है और न ही मान्यता प्राप्त है. इस ढांचों को कोई मदरसा कहते हैं, वहीं कुछ लोग उसे पूर्व नमाज़ स्थल कहते हैं. दस्तावेज़ों में वैध रूप से इनका कोई अस्तित्व नहीं है."

"इस इलाक़े को मलिक का बगीचा कहा जाता है लेकिन दस्तावेज़ों में ये जगह मलिक का बगीचा नाम से दर्ज नहीं है बल्कि नगर निगम की नज़ूल भूमि के रूप में दर्ज है."

"इन ढांचों पर नोटिस चस्पा कर दिया गया, जिसमें कहा गया कि वो ख़ुद से अतिक्रमण हटा लें. उनसे दस्तावेज़ पेश करने को कहा गया और कहा गया कि ऐसा न हुआ तो नगर निगम अतिक्रमण हटाएगी."

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उन्होंने हिंसा में दो लोगों की मौत की पुष्टि की और कहा कि पहले चार लोगों की मौत की ख़बर आई थी.

उन्होंने कहा, "हमें कृष्णा अस्पताल से दो लोगों की मौत की ख़बर मिली थी और एसटीएच अस्पताल से दो की मौत की ख़बर मिली थी. बाद में पता चला कि कृष्णा अस्पताल में जिन लोगों को लाया गया था, उन्हें मृत अवस्था में लाया गया था और अस्पताल ने उन्हें भर्ती नहीं किया था. इन्हीं को बाद में एसटीएच लाया गया. इस कारण मौतों के आंकड़े में थोड़ा कन्फ्यूजन हुआ."

इलाक़े में भड़की हिंसा को लेकर डीएम ने कहा, "पुलिस और प्रशासन ने न तो किसी को भड़काया, न किसी को मारा और न ही किसी को किसी भी प्रकार से कोई नुक़सान पहुँचाने की कोशिश की."

उन्होंने कहा, "पेट्रोल बम फेंकने और आगज़नी के बाद भीड़ में शामिल अराजक तत्वों ने बनभूलपुरा पुलिस स्टेशन का घेराव कर लिया. उस वक़्त पुलिस स्टेशन में पुलिसकर्मी मौजूद थे. आगज़नी के कारण पुलिस स्टेशन के भीतर धुंआ भर गया और लोगों का दम फूलने लगा."

"भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पहले भीड़ से वहाँ से हटने की अपील की गई. उसके बाद वहीं आग बुझाने के लिए पानी की बौछार का इस्तेमाल किया गया, पर भीड़ यहां से नहीं हटी. इसी बीच भीड़ के भीतर से गोलियां चलाने की ख़बर आई. इसके जवाब में पुलिस ने हवा में लोगी चलाई. इसकी जांच की जाएगी कि लोगों की मौत जिस गोली से हुई है वो भीड़ ने चलाई थी या फिर पुलिस ने."

उन्होंने कहा, "केंद्रीय सुरक्षाबलों को इलाक़े में तैनात कर दिया गया है और सुरक्षाबल यहां जल्द पहुंचने वाले हैं. क़ानून व्यवस्था पर नियंत्रण के लिए आस-पास के ज़िलों से अतिरिक्त पुलिसबल को भी यहां तैनात किया गया है."

घायल पुलिसकर्मी

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यहां के लोगों का क्या कहना है?

कहा जा रहा है कि जिस मदरसे को हटाने की कोशिश की जा रही थी वो नज़ूल ज़मीन पर थी.

नज़ूल ज़मीन सरकारी ज़मीन ही होती है लेकिन राजस्व के दस्तावेज़ों में आधिकारिक तौर पर इसका ज़िक्र नहीं होता.

बनभूलपुरा के रहने वाले ज़फ़र सिद्दीक़ी ने अख़बार इंडियन एक्सप्रेस को बताया है कि ये मस्जिद अब्दुल मलिक नाम के एक व्यक्ति ने बनाई थी. उन्होंने ये ज़मीन जिस व्यक्ति से ख़रीदी थी उन्होंने इसे पट्टे पर लिया था.

वो कहते हैं, "बीते चार-पांच दिनों से पुलिस इस इलाक़े में आ रही थी और वो बता रहे थे कि मदरसा और मस्जिद को हटा दिया जाएगा. गुरुवार को सवेरे प्रशासन के लोग यहां जेसीबी मशीन के साथ पहुंचे. मैं शाम को क़रीब 5-6 बजे यहाँ पहुंचा था. मुझे पता चला कि यहाँ पत्थरबाज़ी हुई है और कुछ गाड़ियों को आग लगाई गई है."

"कुछ लोगों ने पुलिस थाने जाकर वहां भी तोड़फोड़ की है. ये पूरी घटना 30 से 40 मिनट तक चलती रही थी. फिलहाल जो स्थिति है, इलाक़े में कर्फ्यू लगाया गया है और हम लोगों ने अपने घर बंद कर लिए हैं."

वहीं मस्जिद से क़रीब 500 मीटर की दूरी पर सिराज ख़ान एक फास्ट फूड सेंटर चलाते हैं. उन्होंने कहा कि जब उन्होंने कई पुलिस की गाड़ियों को इधर आते देखा तब उन्हें पता चला कि यहां हिंसा हुई है.

वो कहते हैं कि उन्होंने जल्दी-जल्दी अपनी दुकान बंद की और खुद अपने परिवार के साथ घर में बंद हो गए.

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