अक्षय कुमार ने जब ये बताया- क्यों ली थी कनाडा की नागरिकता

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फ़िल्म अभिनेता अक्षय कुमार ने मंगलवार को ये घोषणा की कि वे एक बार फिर से भारतीय नागरिक बन गए हैं.
उन्होंने ये जानकारी स्वतंत्रता दिवस के दिन अपने फैंस के साथ ट्विटर पर शेयर की है.
कनाडाई नागरिकता को लेकर अक्सर ही आलोचनाओं का सामना करने वाले अक्षय कुमार ने अपना सिटिजनशिप सर्टिफिकेट ट्विटर पर शेयर किया है.
55 वर्षीय अक्षय कुमार ने इस एलान के साथ एक मैसेज भी पोस्ट किया है.
उन्होंने लिखा है, "दिल और नागरिकता दोनों हिंदुस्तानी. स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं! जय हिंद!"
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क्यों ली थी कनाडा की नागरिकता
अक्षय कुमार ने अतीत में ये कहा था कि नब्बे के दशक में एक वक़्त ऐसा भी आया जब उनका करियर बुरे दौर से गुजर रहा था.
समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, उस दौर में उनकी लगातार 15 फ़िल्में फ़्लॉप हो गई थीं.
अक्षय कुमार ने कहा था कि तब हालात ऐसे बने जिसकी वजह से उन्होंने कनाडा की नागरिकता के लिए आवेदन किया था.
साल 2019 के लोकसभा चुनाव में जब उन्होंने मतदान में हिस्सा नहीं लिया तो उनकी नागरिकता को लेकर सोशल मीडिया पर हंगामे की सूरत पैदा हो गई थी.

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पीएम मोदी का इंटरव्यू
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ़िल्म अभिनेता अक्षय कुमार को एक इंटरव्यू दिया था जो 24 अप्रैल, 2019 को जारी किया गया. देश के ज़्यादातर समाचार चैनलों पर 67 मिनट का यह इंटरव्यू प्रसारित हुआ.
प्रधानमंत्री आवास पर हुए इस इंटरव्यू में अक्षय ने नरेंद्र मोदी से उनकी दिनचर्या, खान-पान की आदतों, पसंद और बचपने के क़िस्सों पर सवाल पूछे थे.
अक्षय कुमार ने इसे ग़ैर-राजनीतिक इंटरव्यू बताया था. इस पर प्रधानमंत्री ने भी इंटरव्यू के दौरान ही ख़ुशी ज़ाहिर करते हुए कहा कि उन्हें खुशी है कि चुनावी समय में वो एक ग़ैर-राजनीतिक साक्षात्कार दे रहे हैं.
सोशल मीडिया पर ये इंटरव्यू ट्रेंड टॉप ट्रेंड में रहा था.
लेकिन इसके साथ उस वक़्त भी अक्षय कुमार की नागरिकता को लेकर सवाल उठे थे और ये कहा गया कि पीएम मोदी ने बॉलीवुड में काम करने वाले भारतीय मूल के एक कनाडाई नागरिक को ये इंटरव्यू दिया.

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भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन
साल 2019 में एक इवेंट के दौरान अक्षय कुमार ने सार्वजनिक तौर पर ये बात शेयर की कि उन्होंने भारतीय पासपोर्ट के लिए आवेदन किया है.
हिंदुस्तान टाइम्स लीडरशिप सम्मिट के दौरान अक्षय कुमार ने कहा कि उन्होंने कभी सोचा नहीं था कि अपनी भारतीयता साबित करने के लिए उन्हें किसी डॉक्युमेंट की ज़रूरत पड़ेगी.
तब उन्होंने कहा था, "14 फ़िल्मों की नाकामयाबी के बाद मैंने सोचा कि मुझे कुछ और आजमाना पड़ सकता है. कनाडा में रहने वाले मेरे एक करीबी दोस्त ने मुझे वहां आने के लिए कहा. उसने कहा कि हम किसी चीज़ पर मिलकर साथ काम करेंगे."
"वो भी भारतीय है और वहीं रहता है. मैंने वहां का पासपोर्ट ले लिया क्योंकि मुझे लगा था कि यहां मेरा करियर ख़त्म हो गया है. लेकिन तभी मेरी 15वीं फ़िल्म हिट हो गई और उसके बाद मैंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. मैं आगे बढ़ता रहा. लेकिन मुझे कभी ऐसा नहीं लगा कि मुझे अपना पासपोर्ट बदल लेना चाहिए."

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लेकिन नागरिकता पर विवाद होने के बाद उन्होंने भारतीय पासपोर्ट के लिए आवेदन करने का फ़ैसला किया.
अक्षय ने उसी इवेंट में बताया, "मैंने इसके लिए आवेदन कर दिया है क्योंकि मुझे लगता है कि लोगों ने इस बात को मुद्दा बना लिया है कि मुझे अपनी भारतीयता को साबित करने के लिए अपना पासपोर्ट दिखाना होगा. ये बात मुझे तकलीफ़ देती है. इसलिए मैं किसी को मौका नहीं देना चाहता हूं. इसलिए मैंने भारतीय पासपोर्ट के लिए आवेदन कर दिया है."
"मेरी पत्नी भारतीय नागरिक हैं और मेरा बेटा भी भारतीय है. मेरे परिवार में हरेक व्यक्ति भारतीय है. मैं अपने टैक्स यहां भरता हूं. मेरी ज़िंदगी यहां है लेकिन कुछ लोग कुछ और कहना चाहते हैं."

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'हीरो' अक्षय की शुरुआती कहानी
कश्मीरी मां और पंजाबी पिता के घर 9 सितंबर, 1967 को पैदा हुए राजीव भाटिया ने कभी पिता के डांटने पर कहा था कि पढ़ूंगा नहीं तो हीरो बन जाऊंगा.
राजीव भाटिया ने आने वाले सालों में ग़ुस्से में कही अक्षय कुमार बनकर सच साबित कर दी. राजीव के पिता हरि ओम भाटिया पहले आर्मी में थे. फिर अकाउंटेंट की नौकरी करने लगे.
कुछ वक़्त बाद भाटिया परिवार दिल्ली से मुंबई शिफ्ट हो गया. राजीव का दाख़िला माटूंगा के डॉन बॉस्को स्कूल में करवाया गया.
राजीव भाटिया का खेल-कूद में ख़ूब मन लगता था. पड़ोस के लड़के को कराटे करते देख दिलचस्पी पैदा हुई. 10वीं क्लास की पढ़ाई पूरा करते ही पिता से ज़िद करके राजीव मार्शल आर्ट सीखने बैंकॉक चले गए.
ब्लैक बेल्ट हासिल की. पांच साल बाद कोलकाता-ढाका में ट्रैवल एजेंट, होटल का काम करते हुए वे दिल्ली पहुंचे. कुछ वक़्त लाजपत राय मार्केट से कुंदन की ज्वैलरी ख़रीदकर मुंबई में बेची.

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राजीव भाटिया के अक्षय कुमार बनने की कहानी
लेकिन मन फिर मार्शल आर्ट्स की ओर ले गया. लिहाज़ा बच्चों को मार्शल आर्ट सिखाना शुरू किया. उस ज़माने में महीने की कमाई होती थी- क़रीब चार हज़ार रुपये.
राज्यसभा टीवी को दिए इंटरव्यू के मुताबिक़, किसी की सलाह पर राजीव भाटिया मॉडलिंग की राह चल पड़े. फ़र्नीचर की दुकान पर हुए पहले फ़ोटोशूट के लिए राजीव भाटिया को 21 हज़ार रुपये का चेक मिला. राजीव को इस काम से मिला चेक तो भाया लेकिन उस पर लिखा नाम कम जचा. फिर राजीव भाटिया ने अपना नाम बस यूं ही बदलकर अक्षय कुमार कर लिया.
इत्तेफ़ाक़ समझिए कि नाम बदलने के अगले ही दिन अक्षय को बतौर मुख्य हीरो अपनी पहली फ़िल्म मिल गई. ये फ़िल्म थी 1991 में आई 'सौगंध'.
हालांकि इससे पहले वो एक फ़िल्म 'आज' में भी छोटा रोल कर चुके थे.
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