ट्रंप ने पीएम मोदी के सामने जिस रेसिप्रोकल टैरिफ की बात कही, उससे भारत पर क्या असर होगा?

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- Author, सुरभि गुप्ता
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के लगभग 2 घंटे पहले सभी देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने की घोषणा की.
ट्रंप ने गुरुवार 13 फरवरी को एक ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया, जिसमें रेसिप्रोकल टैरिफ के लिए योजना बनाने का आदेश दिया गया है.
व्हाइट हाउस की ओर से कहा गया, "राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने निष्पक्ष, मुक्त, पारस्परिक व्यापार के लिए एक योजना की घोषणा की है. उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका अब दूसरे देश की ओर से बहुत ज्यादा कीमत वसूले जाने को बर्दाश्त नहीं करेगा. अमेरिका दुनिया की सबसे खुली अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, फिर भी हमारे व्यापारिक साझेदार अपने बाजारों को अमेरिकी निर्यात के लिए बंद रखते हैं."
व्हाइट हाउस की ओर से कहा गया कि रेसिप्रोकल ट्रेड यानी पारस्परिक व्यापार इस असंतुलन को ठीक कर देगा.
वहीं भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता में भी ट्रंप ने रेसिप्रोकल टैरिफ की बात कही. उन्होंने कहा कि भारत बहुत ज़्यादा टैरिफ लगाता है.

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क्या है ट्रंप का रेसिप्रोकल टैरिफ?

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टैरिफ किसी देश से आयात किए जाने वाले उत्पादों पर लगने वाला कर है. इसका भुगतान सामान आयात करने वाली कंपनी अपने देश की सरकार को करती है. देश आमतौर पर कुछ क्षेत्रों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाने के लिए टैरिफ लगाते हैं.
ट्रंप कहते आए हैं कि अगर कोई देश अमेरिकी सामानों पर ज़्यादा आयात शुल्क लगाता है, तो अमेरिका भी उस देश से आने वाली चीजों पर ज़्यादा आयात शुल्क यानी टैरिफ लगाएगा. इसे ही ट्रंप रेसिप्रोकल टैरिफ कह रहे हैं.
व्यापार मामलों के विशेषज्ञ बिस्वजीत धर बताते हैं, "रेसिप्रोकल टैरिफ का मतलब ये है कि जो टैरिफ दो देश अपने आपस के व्यापार पर लगाते हैं, जैसे भारत जितना टैरिफ लगाता है अमेरिका से आई चीजों पर और अमेरिका जो टैरिफ लगाता है भारत से आई चीजों पर, दोनों बराबर होना चाहिए."
बिस्वजीत धर व्हाइट हाउस की ओर से रेसिप्रोकल टैरिफ पर जारी एक फैक्ट शीट का ज़िक्र करते हैं.
इस फैक्ट शीट में लिखा गया है, "अमेरिका जिन देशों को मोस्ट फेवर्ड नेशन (एमएफएन) का दर्जा देता है, उनके कृषि उत्पादों पर औसतन 5 फ़ीसदी टैरिफ लगाता है. लेकिन भारत जिन देशों को मोस्ट फेवर्ड नेशन (एमएफएन) का दर्जा देता है, उनके कृषि उत्पादों पर 39 फ़ीसदी टैरिफ लगाता है. भारत अमेरिकी मोटरसाइकिलों पर भी 100 फीसदी टैरिफ लगाता है, जबकि अमेरिका भारतीय मोटरसाइकिलों पर केवल 2.4 फ़ीसदी टैरिफ लगाता है."
रिसर्च ग्रुप ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनीशिएटिव (जीटीआरआई) के फाउंडर अजय श्रीवास्तव इस फैक्ट शीट में की गई तुलना को असंगत बताते हैं.
वो कहते हैं, "इस तरह की तुलना करना सही नहीं है क्योंकि अमेरिका के कृषि उत्पादों पर भारत का असल टैरिफ उत्पाद के अनुसार अलग-अलग होता है. वहीं मोटरसाइकिलों के मामले में इस फैक्ट शीट में पूरे ऑटो सेक्टर की तुलना करने की बजाय सिर्फ एक उत्पाद की तुलना की गई है."
अजय श्रीवास्तव इस बात पर भी ध्यान देने को कहते हैं कि भारत ने इस बार के बजट में मोटरसाइकिलों पर आयात शुल्क में कटौती की है. 1600 सीसी से ज़्यादा इंजन वाली हैवीवेट बाइकों पर टैरिफ 50 फ़ीसदी से घटाकर 30 फ़ीसदी और छोटी बाइकों पर टैरिफ़ को 50 से घटाकर 40 फ़ीसदी किया गया है. वो कहते हैं कि इस तरह फैक्ट शीट में मोटरसाइकिलों पर जो 100 फ़ीसदी टैरिफ की बात कही गई है, वो भी गलत है.
रेसिप्रोकल टैरिफ पर ट्रंप की प्रेस कॉन्फ्रेंस

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रेसिप्रोकल टैरिफ पर अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने भारत पर बहुत ज्यादा टैरिफ लगाने का आरोप लगाया.
दरअसल, प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ट्रंप से सवाल किया गया था कि वो भारत के साथ किस तरह का व्यापार और टैरिफ संबंध रखना चाहेंगे. इस सवाल के जवाब में ट्रंप ने भारत को सबसे अधिक टैरिफ वाला देश बताया. उन्होंने कहा कि भारत किसी भी अन्य देश की तुलना में अधिक टैरिफ वसूलता है.
ट्रंप ने आगे कहा, "कुछ छोटे देश हैं, जो इससे भी ज्यादा टैरिफ लगाते हैं, लेकिन भारत का टैरिफ बहुत अधिक है. भारत बहुत ज़्यादा टैरिफ वसूलता है. मुझे याद है जब हार्ले-डेविडसन भारत में अपनी मोटरबाइक नहीं बेच पा रहा था क्योंकि भारत में टैक्स बहुत ज़्यादा था. टैरिफ बहुत ज्यादा था और मुझे लगता है कि हार्ले ने टैरिफ का भुगतान करने से बचने के लिए भारत में एक फैक्ट्री बनाई."
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका में भी यही किया जा सकता है. उन्होंने कहा, "दूसरे देश अमेरिका में फैक्ट्री या कोई प्लांट लगा सकते हैं. अगर आप यहां (अमेरिका में) निर्माण करते हैं, तो आपको कोई भी टैरिफ नहीं देना होगा. मुझे लगता है कि यही होने वाला है, इससे अमेरिका में नौकरियां बढ़ेंगी."
ट्रंप ने मोदी के सामने क्या कहा?

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस दौरान भी उन्होंने टैरिफ का मुद्दा उठाया.
ट्रंप ने कहा, "हम अपने व्यापारिक संबंधों में बेहतर पारस्परिकता लाएंगे. प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में भारत के अनुचित, बहुत मजबूत टैरिफ में कटौती की घोषणा की है. भारत की ओर से लगाया जाने वाला टैरिफ भारतीय बाजार में हमारी पहुंच को सीमित करता है. यह एक बड़ी समस्या है. भारत कई चीजों पर 30 फ़ीसदी से लेकर 60 फ़ीसदी और यहां तक कि 70 फ़ीसदी टैरिफ लगाता है, कुछ मामलों में तो इससे भी कहीं अधिक टैरिफ लगाता है."
ट्रंप ने भारत के साथ अमेरिका के व्यापार घाटे का ज़िक्र करते हुए कहा, "भारत में आने वाली अमेरिकी कारों पर 70% टैरिफ है, जो उन कारों को बेचना लगभग असंभव बना देता है. आज भारत के साथ अमेरिका का व्यापार घाटा लगभग 100 अरब डॉलर है. प्रधानमंत्री मोदी और मैंने इस बात पर सहमति जताई है कि हम लंबे समय से चली आ रही असमानताओं को दूर करने के लिए बातचीत शुरू करेंगे."
इस दौरान ट्रंप से पूछा गया कि क्या वो भारत को रेसिप्रोकल टैरिफ में रियायत देने को तैयार हैं.
इस पर ट्रंप का जवाब था, "भारत दुनिया में सबसे ज़्यादा टैरिफ वाला देश है. इसके लिए मैं उन्हें दोष नहीं देता, लेकिन यह व्यापार करने का एक अलग तरीका है. बहुत सख्त टैरिफ के कारण भारत में सामान बेचना बहुत मुश्किल है. अब हम एक रेसिप्रोकल नेशन हैं. कोई भी देश जो भी शुल्क लगाएगा, हम भी वही शुल्क लगाएंगे. मुझे लगता है कि ये सही भी है."
भारत पर क्या असर पड़ सकता है?

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बिस्वजीत धर कहते हैं व्हाइट हाउस ने रेसिप्रोकल ट्रेड को लेकर अपनी फैक्ट शीट में कृषि का उदाहरण दिया है.
वह कहते हैं, "ट्रंप दोनों तरफ से बराबर टैरिफ चाहते हैं. इसका ये मतलब हो सकता है कि या तो अमेरिका भारतीय कृषि उत्पादों पर टैरिफ बढ़ाएगा या फिर भारत को अमेरिकी कृषि उत्पादों पर टैरिफ घटाने के लिए कहेगा. भारत ने कृषि उत्पादों पर ज़्यादा टैरिफ इसीलिए लगाया है क्योंकि भारत में 50 फ़ीसदी से ज्यादा लोग कृषि पर निर्भर हैं. ज़्यादातर छोटे किसान हैं. वहीं अमेरिका जैसे देशों में बड़ी-बड़ी कंपनियां हैं, जो इस व्यवसाय में लगी हैं. ऐसे में अगर एक छोटे किसान की किसी बड़ी कंपनी से प्रतिस्पर्धा हो, तो छोटे किसान को नुकसान होगा."
वहीं अजय श्रीवास्तव कहते हैं कि भारत पर इसका असर अभी स्पष्ट नहीं है. ये भी साफ नहीं हुआ है कि यह टैरिफ विशिष्ट उत्पादों पर लागू होंगे या पूरे सेक्टर पर.
अजय श्रीवास्तव कहते हैं, "अगर वो प्रोडक्ट के ऊपर रेसिप्रोकल टैरिफ लगाएंगे, तो भारत पर अधिक असर नहीं पड़ेगा क्योंकि अमेरिका जो प्रोडक्ट भारत भेजता है, वो प्रोडक्ट भारत अमेरिका नहीं भेजता है. भारत अमेरिका को दूसरे उत्पाद निर्यात करता है. लेकिन अगर अमेरिका सेक्टर के तहत टैरिफ लगाता है, तो हो सकता है कि भारत को कुछ उत्पादों के निर्यात में मुश्किल हो."
इसके उलट, दिल्ली के फ़ोर स्कूल ऑफ़ मैनेजमेंट में प्रोफ़ेसर और ट्रेड मामलों के जानकार प्रोफ़ेसर फ़ैसल अहमद कहते हैं कि अमेरिका के रेसिप्रोकल टैक्स से काफी असर पड़ सकता है.
वह कहते हैं, "बहुत सारे उत्पाद जैसे टेक्सटाइल और कृषि उत्पादों में भारत का आयात शुल्क ज़्यादा है. अगर अमेरिका भी वैसे आयात शुल्क उन्हीं सेक्टर के अलग-अलग प्रोडक्ट में लगाने लगे, तो भारत के लिए काफी मुश्किल हो जाएगी. रेसिप्रोकल टैरिफ से भारत का निर्यात प्रभावित होगा."
प्रोफ़ेसर फ़ैसल अहमद के मुताबिक भारत को इस बारे में अमेरिका से बात करनी चाहिए क्योंकि भारत अमेरिका से आयात बढ़ाने के लिए तैयार है. उनके मुताबिक भारत को अमेरिका से कहना चाहिए कि वो रेसिप्रोकल टैरिफ पर दोबारा विचार करे.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित
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