अदानी ग्रुप श्रीलंका के इस अहम प्रोजेक्ट से पीछे क्यों हट गया?

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अदानी समूह की कंपनी अदानी ग्रीन एनर्जी ने श्रीलंका में अपने एक अरब डॉलर के विंड एनर्जी प्रोजेक्ट्स से हटने का फ़ैसला किया है.
गुरुवार को कंपनी ने अपने एक बयान में कहा, "कई ज़रूरी मंज़ूरियां मिलने के बावजूद कंपनी इसलिए इन प्रोजेक्ट्स से पीछे हट रही है क्योंकि कुछ पर्यावरणीय क्लीयरेंस मिलने में देरी हो रही है.साथ ही श्रीलंका के सुप्रीम कोर्ट में एक लंबित मामले की वजह से उसे ऐसा करना पड़ रहा है."
बयान के अनुसार, "हम श्रीलंका की संप्रभुता और उसके फ़ैसलों का सम्मान करते हैं, इसलिए हम इस प्रोजेक्ट से सम्मानपूर्वक हट रहे हैं."
यह परियोजना श्रीलंका के मन्नार और पुनेरिन में 484 मेगावाट की पवन ऊर्जा परियोजना स्थापित करने के साथ-साथ 220 केवी और 400 केवी ट्रांसमिशन नेटवर्क के विस्तार पर केंद्रित थी.

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पिछले साल श्रीलंका में अनुरा कुमारा दिसानायके के राष्ट्रपति चुने जाने के बाद अदानी का पवन ऊर्जा प्रोजेक्ट जांच के घेरे में आ गया था.
दिसानायके ने अपने चुनावी अभियान के दौरान इस प्रोजेक्ट पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए कहा था कि सत्ता में आने पर वो इसे रद्द कर देंगे .
अदानी ग्रुप की कंपनी ग्रीन एनर्जी का क्या कहना है?

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अदानी ग्रीन एनर्जी ने श्रीलंका के बोर्ड ऑफ़ इनवेस्टमेंट के चेयरमैन अर्जुना हेराथ को 12 फ़रवरी 2025 को एक चिट्ठी लिखी.
इसमें लिखा गया है, "हमारे अधिकारियों ने हाल ही में कोलंबो में सीलोन इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड (सीईबी) और मंत्रालय के अधिकारियों से बातचीत की थी. पता चला कि प्रोजेक्ट प्रस्ताव पर फिर से वार्ता करने के लिए कैबिनेट की ओर से नेगोसिएशन और प्रोजेक्ट कमेटी बनाई गई है."
"इस बात की जानकारी हमारी कंपनी के बोर्ड को दी गई और यह तय किया गया कि कंपनी श्रीलंका की संप्रभुता और इसके चुनाव के अधिकार का सम्मान करते हुए सम्मानपूर्वक इस प्रोजेक्ट से बाहर हो जाएगी."
अदानी ग्रीन एनर्जी का कहना है कि मन्नार और पुनेरिन में 484 मेगावाट का रिन्यूएबल एनर्जी विंड फ़ॉर्म लगाने के लिए पिछले दो सालों से बातचीत चल रही थी.
इसके साथ ही श्रीलंका के दक्षिणी हिस्से में 220 केवी और 400 केवी की ट्रांसमिशन लाइनों के विस्तार पर भी बात हो रही थी.

कंपनी की ओर से कहा गया कि सरकार द्वारा नियुक्त कमेटी के साथ 14 दौर की बातचीत के बाद 20 साल के लिए बिजली ख़रीद को लेकर टैरिफ़ पर सहमति बनी थी.
कंपनी ने कहा है कि उसने प्रोजेक्ट की तैयारियों के लिए अब तक 50 लाख डॉलर खर्च किए हैं.
इस प्रोजेक्ट को लेकर 2022 में तत्कालीन राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे के समय में समझौता हुआ था.
श्रीलंका में इस मुद्दे को गोटाबाया सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोपों के सबूत के तौर पर देखा गया और लोगों में भारी नाराज़गी देखी गई.
गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे श्रीलंका में 12 जुलाई 2022 को आम बग़ावत हो गई थी और जनता ने राष्ट्रपति आवास समेत कई सरकारी इमारतों पर कब्ज़ा कर लिया था. आख़िरकार गोटाबाया को देश छोड़कर भागना पड़ा.
प्रोजेक्ट को लेकर विवाद

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दोनों पक्षों के बीच 12 मार्च 2022 को पवन ऊर्जा परियोजना के समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे लेकिन इसकी शर्तें सार्वजनिक नहीं की गई थीं.
अदानी ग्रीन एनर्जी के इस प्रोजेक्ट को लेकर विवाद तब और तेज़ हो गया जब 10 जून 2022 को सीलोन इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड (सीईबी) के तत्कालीन चेयरमैन एम.एम.सी फ़र्डिनांडो ने एक संसदीय समिति के सामने गोटाबाया राजपक्षे पर दबाव में आने का बयान दिया.
बयान के अनुसार, "मन्नार ज़िले में एक विंड पावर प्लांट का टेंडर भारत के अदानी समूह को दिया गया. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से श्रीलंकाई राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे पर ये सौदा अदानी समूह को देने के लिए दबाव बनाया गया था."
हालांकि बाद में उन्होंने अपना बयान ये कहते हुए वापस ले लिया कि उन्होंने यह भावुकता में आकर कह दिया था.
ये समझौता उस समय हुआ जब संकटग्रस्त श्रीलंका को भारत सरकार ने आर्थिक मदद देनी शुरू की थी. इस समझौते पर पारदर्शिता न होने को लेकर श्रीलंका में बड़े स्तर पर इसकी आलोचना हुई थी.
श्रीलंका के मौजूदा राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने इस समझौते की तीखी आलोचना की थी. राष्ट्रपति चुने जाने से पहले उन्होंने इस प्रोजेक्ट को 'श्रीलंका के ऊर्जा क्षेत्र की संप्रभुता के लिए ख़तरा' बताया था.
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इस समझौते में बिजली बिक्री की दर 0.0826 डॉलर प्रति किलोवाट तय की गई जोकि स्थानीय कंपनियों की बोली से अधिक थी.
उर्जा मामलों के कई जानकारों ने कहा कि यह $0.005 डॉलर होना चाहिए.
इसके अलावा स्थानीय मीडिया रिपोर्टों में ये भी कहा गया कि मन्नार के निवासियों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने एक प्रमुख पक्षी कॉरिडोर को नुक़सान पहुंचने की आशंका जताई थी और यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा.
हालांकि अदानी ग्रीन एनर्जी के प्रवक्ता ने उस समय एक बयान जारी कर कहा था कि कंपनी का इरादा "पड़ोसी मुल्क की ज़रूरतों को पूरा करने की कोशिश है."
अदानी की बढ़ती मुश्किलें

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दुनिया के सबसे अमीर लोगों में से एक गौतम अदानी की मुश्किलें हाल के सालों में बढ़ी हैं.
पिछले साल जब बांग्लादेश में शेख़ हसीना सरकार का तख़्तापलट हुआ तो उसके बाद अदानी पावर की बिजली आपूर्ति परियोजना पर भी असर पड़ा.
बांग्लादेश में अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने बिजली को लेकर हुए समझौते की समीक्षा की बात कही थी.
अदानी पावर भारत में मौजूद 1600 मेगावाट के बिजली संयंत्र के ज़रिए बांग्लादेश में बिजली की आपूर्ति करता है जो कि बांग्लादेश की कुल बिजली खपत का 10 फ़ीसदी है.
नवंबर 2024 में भुगतान को लेकर देरी के कारण अदानी पावर ने बिजली आपूर्ति आधी कर दी थी.
नवंबर 2024 में ही अदानी ग्रुप को एक और बड़ा झटका तब लगा जब कीनिया में एक एयरपोर्ट को विकसित करने और बिजली ट्रांसमिशन से जुड़े दो ठेकों को रद्द कर दिया गया.
समझौते के तहत देश और क्षेत्र के सबसे बड़े एयरपोर्ट जोमो केन्याटा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेकेआईए) के 30 साल तक संचालन का ठेका अदानी ग्रुप को दिया गया था.
इस समझौते को लेकर भ्रष्टाचार के आरोप लगे और जेकेआईए एयरपोर्ट के कर्मचारियों ने इस सौदे को रद्द करने की मांग करते हुए हड़ताल शुरू कर दी.
अमेरिका में अदानी पर आरोप तय किए जाने के बाद कीनिया की सरकार ने ये कदम उठाया था.
हालांकि अदानी समूह ने तब एक बयान जारी कर कहा था कि किसी भी कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर नहीं किए गए क्योंकि "बाध्यकारी समझौते पर चर्चा आगे नहीं बढ़ी."
पिछले दिनों गौतम अदानी, उनके भतीजे सागर अदानी समेत आठ लोगों के ख़िलाफ़ अमेरिका में धोखाधड़ी के आरोप तय किए गए थे.
गौतम अदानी ग्रुप पर अमेरिका में अपनी एक कंपनी को कॉन्ट्रैक्ट दिलाने के लिए 25 करोड़ डॉलर की रिश्वत देने का आरोप लगा.
जनवरी 2023 में अमेरिकी शॉर्ट सेलर कंपनी हिंडनबर्ग रिसर्च ने एक रिपोर्ट प्रकाशित किया था,जिसमें अदानी ग्रुप पर वित्तीय धोखाधड़ी और शेयरों में हेरफेर के आरोप लगाए गए जिसके बाद ग्रुप से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई थी.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित
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