गौतम अदानी पर अमेरिका में लगे आरोप समूह के अंतरराष्ट्रीय निवेश पर कितने भारी पड़ेंगे?

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गौतम अदानी भारत के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति हैं. गौतम अदानी समूह का कारोबार पोर्ट्स से लेकर पावर सेक्टर तक फैला है.
अदानी अब अमेरिका में बुरी तरह से घिर गए हैं. अमेरिका में अदानी पर अपनी एक कंपनी को कॉन्ट्रैक्ट दिलाने के लिए 25 करोड़ डॉलर की रिश्वत देने और इस मामले को छिपाने का आरोप लगा है.
हालाँकि अदानी समूह ने गुरुवार दोपहर एक बयान जारी कर इन आरोपों का खंडन किया है और कहा है कि सभी आरोप बेबुनियाद हैं.
अदानी पहले भारतीय कारोबारी हैं, जिन पर अमेरिका में इस तरह के गंभीर आरोप लगे हैं.
अदानी पर अमेरिका में जोड़-तोड़ करने का आरोप पहली बार लगा है, लेकिन भारत के भीतर उन पर इस तरह के कई आरोप पहले लग चुके हैं.
कहा जा रहा है कि अमेरिका में अदानी के घिरने के बाद उनकी वैश्विक महत्वाकांक्षा को झटका लग सकता है.
अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप को बधाई देते हुए गौतम अदानी ने अमेरिका के ऊर्जा और इन्फ़्रास्ट्रक्चर सेक्टर में 10 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई थी.
अमेरिका में अदानी के इस निवेश की प्रतिबद्धता भी अधर में लटक सकती है.
अपने ऊपर लगे आरोपों का खंडन करते हुए अदानी ग्रुप ने गुरुवार को जारी बयान में कहा, "अमेरिका के जस्टिस डिपार्टमेंट और एक्सचेंज कमीशन द्वारा अदानी ग्रीन के निदेशकों के ख़िलाफ़ लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं और हम उनका खंडन करते हैं."
कंपनी ने कहा है कि वे हर तरह के कानूनी विकल्प तलाशेंगे.
कंपनी ने बयान में कहा, "हम अपने सहयोगियों और कर्मचारियों को भरोसा देना चाहते हैं कि हम कानून को मानने वाली कंपनी हैं जो सभी कानूनों का पालन करती है."

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कितना बड़ा झटका
अमेरिका में तय हुए आरोपों के बाद अदानी समूह से जुड़ी कई कंपनियों के शेयर 20 प्रतिशत तक गिर गए.
रेटिंग्स एजेंसी मूडीज़ के एक बयान के मुताबिक़ अमेरिका में अदानी समूह के चेयरमैन गौतम अदानी और अन्य सीनियर अधिकारियों के ख़िलाफ़ धोखाधड़ी के आरोप तय होने के बाद इस समूह की कंपनियों की रेटिंग पर नकारात्मक असर पड़ सकता है.
पिछले साल ही अमेरिकी फॉरेंसिक फ़ाइनेंशियल (शॉर्टसेलिंग) कंपनी हिंडनबर्ग ने अदानी समूह पर अनियमितता के कई गंभीर आरोप लगाए थे. हिंडनबर्ग के आरोपों के बाद अदानी समूह की मार्केट वैल्यू में 150 अरब डॉलर से ज़्यादा की गिरावट आई थी.
अदानी पर लगे आरोपों को अमेरिका और भारत के संबंधों से भी जोड़कर देखा जा रहा है. अदानी और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबंधों को लेकर विपक्ष सवाल उठाता रहा है. हालांकि अदानी और बीजेपी दोनों एक-दूसरे से फ़ायदा उठाने के आरोपों को ख़ारिज करते रहे हैं.
अमेरिका और भारत के संबंधों में पहले से ही तनाव है. अमेरिका ने अदानी से पहले भारत पर आरोप लगाया था कि भारत सरकार के एक कर्मचारी ने न्यूयॉर्क में अमेरिकी नागरिक और सिख अलगाववादी नेता गुरपतवंत सिंह पन्नू को मारने की साज़िश रची थी.
अभी तक स्पष्ट नहीं है कि आने वाली ट्रंप सरकार का इन मामलों पर क्या रुख़ होगा. ट्रंप और मोदी के बीच अच्छे संबंध हैं और दोनों एक दूसरे को दोस्त कहते हैं. लेकिन ट्रंप अमेरिकी सामानों पर भारत के टैरिफ लगाने को पसंद नहीं करते हैं.

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पूरा मामला क्या है?
ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट ऑफ़ न्यूयॉर्क के अमेरिकी अटॉर्नी के कार्यालय ने अपने बयान में कहा है कि गौतम अदानी और उनके भतीजे सागर के अलावा छह अन्य लोगों पर एक सोलर एनर्जी सप्लाई का कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के लिए भारत सरकार के अधिकारियों को 25 करोड़ डॉलर रिश्वत देने का आरोप तय हुआ है.
अदानी ग्रीन एनर्जी ने सोलर एनर्जी कोऑपरेशन ऑफ़ इंडिया से आठ गीगावॉट सोलर पावर सप्लाई करने का एक टेंडर हासिल किया था. अज़ुर पावर को भी इसी तरह चार गीगावॉट का टेंडर मिला था. अज़ुर पावर में इन्वेस्टर रहे कनाडाई पब्लिक पेंशन फंड मैनेजर का भी इस मामले में नाम है.
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक़ सोलर एनर्जी कोऑपरेशन ऑफ इंडिया (एसईसीआई) को अदानी और अज़ुर पावर ने सोलर पावर बेचने जो क़ीमत दी, उस क़ीमत पर कोई ख़रीदार नहीं मिला था.
यूएस अटॉर्नी ऑफिस के अनुसार, आरोप है कि 2021 और 2022 में अदानी और अन्य लोगों ने भारत में अधिकारियों से कई बार मुलाक़ात की और रिश्वत की पेशकश की ताकि पावर सेल समझौता हो सके. आरोप है कि रिश्वत देने के बाद ओडिशा, जम्मू-कश्मीर, तमिलनाडु और छत्तीसगढ़ में बिजली वितरण कंपनियां एसईसीआई के समझौते में आ गईं.
आरोप है कि 22.8 करोड़ डॉलर का भुगतान आंध्र प्रदेश के अधिकारी को किया गया और इसके बदले आंध्र प्रदेश एसईसीआई से सात गीगावॉट बिजली ख़रीदने के लिए तैयार हुआ था.
अमेरिकी दस्तावेज़ में सागर अदानी को लेकर विस्तार से बताया है. आरोप है कि सागर अदानी ने रिश्वत की पेशकश की डिटेल जानने के लिए अपने मोबाइल फ़ोन का इस्तेमाल किया जबकि अदानी ग्रीन एनर्जी के सीईओ विनीत जैन पर आरोप है कि उन्होंने अपने फोन से अज़ुर पावर की रिश्वत में हिस्सेदारी के दस्तावेज़ की तस्वीर रखी थी. यह रिश्वत की रकम आठ करोड़ डॉलर थी.

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कई देशों में विवाद
यह भी आरोप है कि गौतम अदानी ने अज़ुर पावर से रिश्वत की रक़म के भुगतान के लिए उसके अधिकारियों से एक बैठक की थी.
अमेरिकी अटॉर्नी ब्रेओन पीस ने अपने बयान में कहा है कि गौतम अदानी, सागर अदानी और विनीत जैन ने रिश्वत स्कीम को लेकर झूठ बोला कि वे अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय बाज़ार से पूंजी जुटाना चाहते हैं.
अदानी कई देशों में विवादित रहे हैं. 2017 में ऑस्ट्रेलिया में अदानी एन्टरप्राइजेज को लेकर काफ़ी विवाद हुआ था. अदानी एन्टरप्राइजेज को ऑस्ट्रेलिया में क्वीन्सलैंड के कारमाइकल कोल माइन का कॉन्ट्रैक्ट मिलना था. यह ऑस्ट्रेलिया की सबसे बड़ी कोयला खदान है.
लेकिन आदानी को इसका कॉन्ट्रैक्ट देने को लेकर काफ़ी विवाद हुआ और लोग सड़कों पर उतर गए थे. क्वीन्सलैंड में 45 दिनों तक 'स्टॉप अदानी' आंदोलन चला था. ऑस्ट्रेलिया में अदानी समूह को लेकर आरोप था कि पर्यावरण से जुड़े नियमों की अनदेखी की गई थी.
जून 2022 में श्रीलंका के सीलोन इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड (सीईबी) के अध्यक्ष ने संसदीय समिति के सामने ये बयान दिया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पड़ोसी देश में एक बिजली परियोजना अदानी समूह को दिलवाने के लिए राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे पर 'दबाव' बनाया था.
सीईबी चेयरमैन एम.एम.सी फ़र्डिनांडो ने शुक्रवार यानी 10 जून को सार्वजनिक उद्यमों पर संसद की समिति को बताया कि मन्नार ज़िले में एक विंड पावर प्लांट का टेंडर भारत के अदानी समूह को दिया गया. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से श्रीलंकाई राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे पर ये सौदा अदानी समूह को देने के लिए दबाव बनाया गया था.

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श्रीलंका, कीनिया से लेकर म्यांमार तक में विवाद
फ़र्डिनांडो ने संसदीय समिति को बताया कि राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे ने उन्हें कहा था कि ये टेंडर अदानी समूह को दिया गया है क्योंकि ऐसा करने के लिए भारत सरकार की ओर से दबाव है.
संसदीय समिति के सामने फ़र्डिनांडो को ये कहते सुना जा सकता है, "राजपक्षे ने मुझे बताया था कि वो मोदी के दबाव में हैं."
हालाँकि इसके एक दिन बाद यानी 11 जून की शाम को राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे ने इन आरोपों को सिरे से ख़ारिज कर दिया था. इस मामले पर तब अदानी कंपनी के प्रवक्ता ने एक बयान जारी कर कहा था, "श्रीलंका में निवेश का हमारा इरादा पड़ोसी मुल्क की ज़रूरतों को पूरा करने की कोशिश है. एक ज़िम्मेदार कंपनी की तरह इसे हम दोनों मुल्कों के बीच साझेदारी के अहम हिस्से के तौर पर देखते हैं."
भारत के अंग्रेज़ी बिज़नेस दैनिक बिज़नेस स्टैंडर्ड के मुताबिक़ हाल ही में बांग्लादेश के हाई कोर्ट ने अदानी समूह के इलेक्ट्रिसिटी से जुड़े सभी समझौते की समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया था.
2007 में अदानी पावर ने झारखंड के गोड्डा में एक पावर प्लांट बनाया था और यहाँ से बांग्लादेश बिजली की आपूर्ति के समझौता हुआ था. अदानी के इस समझौते को लेकर बांग्लादेश और झारखंड की सरकारों कई तरह की आपत्ति जताई थी.
2021 में अदानी पोर्ट्स ने म्यांमार के यांगून में एक कॉन्टेनर टर्मिनल बनाने की योजना बनाई थी. अदानी की यह योजना भी जाँच के दायरे में आ गई थी क्योंकि म्यांमार की सेना से लीज़ पर ज़मीन ली गई थी. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी आलोचना होने लगी थी कि म्यांमार की सेना मानवाधिकारों का उल्लंघन कर रही है और अदानी उससे समझौते कर रहे हैं.
सिंतबर 2024 में कीनिया के नैरोबी एयरपोर्ट पर वहाँ के सैकड़ों कामगारों ने कीनिया एयरपोर्ट अथॉरिटी और अदानी ग्रुप में हुए समझौते का विरोध किया था. अदानी ग्रुप को नैरोबी एयरपोर्ट 30 साल के लिए संचालन की ज़िम्मेदारी मिलनी थी. नैरोबी में कामगारों की चिंता थी कि अदानी को ज़िम्मेदारी मिलने के बाद कहीं उनकी नौकरी ना चली जाए.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
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