मोहम्मद अमान: कोविड काल में मां और फिर ट्रक ड्राइवर पिता को खोया, अब संभालेंगे भारत की अंडर 19 क्रिकेट टीम की कमान

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- Author, अदिति शर्मा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
18 साल के मोहम्मद अमान भारतीय अंडर 19 वनडे क्रिकेट टीम के कप्तान बनाए गए हैं. इस महीने पुडुचेरी में 21 से 26 सितंबर के बीच भारतीय अंडर 19 टीम और ऑस्ट्रेलिया की अंडर 19 टीम के बीच वनडे सिरीज़ खेली जानी है.
अमान आगामी सीरीज़ के बारे में कहते हैं, “अभी मेरा पूरा फ़ोकस अगले महीने ऑस्ट्रेलिया के साथ होने वाली इस सिरीज़ पर है. इसके लिए दोगुनी मेहनत करूँगा.”
लेकिन अमान की कहानी किसी फ़िल्म की पटकथा से कम नहीं है.
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर की गलियों से भारतीय अंडर 19 क्रिकेट टीम की कप्तानी तक का सफ़र अमान के लिए किसी ख़्वाब के सच होने जैसा है.

कप्तान बनाए जाने पर क्या थी प्रतिक्रिया ?

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कप्तान बनाए जाने पर राइट हैंड बैट्समैन अमान ने बीबीसी से कहा, ''एक दिन पहले रात में मैच था. अगले दिन देर तक सो रहा था जब दोस्तों ने बताया कि मुझे कैप्टन बनाया गया है. उठा तो देखा सबके बधाई वाले मैसेज थे. विश्वास नहीं हुआ, फिर बीसीसीआई की ऐप पर टीम देखी. वाक़ई मैं बहुत खुशकिस्मत हूँ.''
ये ख़बर मिलने पर अमान ने सबसे पहला कॉल अपने कोच को किया. अमान इस सफलता का श्रेय अपने कोच राजीव गोयल को देते हैं. वो कहते हैं, ''शुरू से उन्होंने ही सब सिखाया है.''
राजीव गोयल ने बीबीसी को बताया, ''अमान का कॉल आया, ये बताते हुए वो रो दिया. हम सभी बहुत ख़ुश हैं, बहुत मुश्किलों के बाद वो यहाँ तक पहुँचा है.''
अमान कहते हैं, ''आज मुझसे ज़्यादा मेरे भाई-बहन खुश हैं. उन्होंने ऐसी ज़िंदगी देखी ही नहीं कभी. उन्हें लग रहा है कि क्या वाक़ई ऐसा भी हो सकता है!''
अमान के लिए पिछला सीज़न शानदार रहा. वीनू मांकड़ ट्रॉफ़ी में अमान ने यूपी अंडर 19 टीम के लिए खेलते हुए आठ इनिंग्स में 363 रन बनाए.
वहीं अंडर 19 चैलेंजर सिरीज़ में 98 के एवरेज से 294 रन बनाए. उनके बेहतरीन खेल की बदौलत उन्होंने अंडर 19 एशिया कप के लिए भारतीय टीम में अपनी जगह बनाई.
अमान इसी साल साउथ अफ्रीका में हुए अंडर 19 वर्ल्ड कप के लिए स्टैंडबाय भी रहे.
सहारनपुर की गलियों से टीम की कप्तानी तक का सफ़र

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मोहम्मद अमान का जुड़ाव इस खेल से कब हुआ, कैसे हुआ, ये पूछे जाने पर उन्होंने दिलचस्प क़िस्सा बताया.
2011 में जब वे महज़ पांच साल के थे, तब भारतीय क्रिकेट टीम ने अपने घरेलू मैदान पर वर्ल्ड कप जीता था. लेकिन वर्ल्ड कप जीतने से पहले सेमीफ़ाइनल में भारत ने अपने चिर प्रतिद्वंदी पाकिस्तान को हराया था.
ये 30 मार्च, 2011 की रात थी. अमान के मुताबिक़, ''सहारनपुर के ख़ान आलमपुरा में देहरादून चौक के पास की गली में ढोल बज रहे थे. मैं तो छोटा बच्चा था, घर से बाहर निकला तो देखा कि पड़ोसी भारत की जीत में ख़ुशी में ढोल बजवा रहे थे.''
क्रिकेट का शौक कैसे लगा, इस पर अमान उस रात को याद करते हुए कहते हैं, ''पता लगा कि भारत फ़ाइनल में पहुँच गया है. फिर भारत-श्रीलंका फ़ाइनल मैंने उन्हीं पड़ोस वाले अंकल के घर बैठकर देखा. उसी रात से क्रिकेट का चस्का चढ़ गया.''
अमान आगे कहते हैं, ''मैं फिर दिन-रात क्रिकेट के फुटेज देखता रहता था. मोबाइल पर, टीवी पर, हर जगह. मैं शुरुआती दो-तीन साल घर की गली में, या पास वाले पार्क में ही खेलता था. जो शॉट्स वो लोग टीवी पर दिखाते थे, जैसे कवर ड्राइव मार दिया, या खिलाड़ी ने ऐसे बल्ला घुमाया. मैं ठीक वैसे ही ऐक्शन करने की कोशिश करता था. काफ़ी मज़ा आता था. फिर 2014 से शहर के आंबेडकर स्टेडियम में खेलने लगा.''
'जब पापा को खो दिया तो लगा कि अब क्रिकेट छोड़ दूंगा'

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मोहम्मद अमान सहारनपुर के एक बेहद सामान्य घर से आते हैं. उनकी माँ गृहिणी थीं और पिता ट्रक ड्राइवर.
कोविड के दौरान 2020 में अमान ने अपनी माँ को खो दिया. 2021 में उत्तर प्रदेश की अंडर 19 टीम के लिए कानपुर में ट्रायल मैच था, पर अमान का सिलेक्शन नहीं हुआ.
उनके पिता की तबीयत भी ख़राब रहने लगी थी और कमाई का कोई ज़रिया नहीं था. 2022 में जब अमान 16 साल के थे, उनके पिता भी गुज़र गए.
अमान थोड़ा रुकते हैं, फिर उस दौर को याद करते हुए कहते हैं, ''मैं तब पूरी तरह टूट गया था. सच में ऐसा लगा जैसे मैं एक ही दिन में, एकदम से बड़ा हो गया. पापा जब तक थे घर की ज़िम्मेदारियों का कुछ पता ही नहीं था. मेरे तीन भाई-बहन हैं, मैं सबसे बड़ा हूँ. अब मुझे सोचना था कि घर कैसे चलेगा और कुछ समझ नहीं आ रहा था.”
वो आगे बताते हैं, ''पिता की मौत के 3-4 दिन बाद ही उन्हें अंडर 19 वीनू मांकड़ ट्रॉफी के लिए यूपी कैंप के लिए कॉल आया. सबने तब कहा कि जा, वहाँ अच्छा खेल, तब कुछ ठीक हो सकता है.''
लेकिन अमान उसमें अच्छा परफॉर्म नहीं कर पाए.
अमान आगे कहते हैं, ''वापस आया तो वही सब देखा. भाई-बहन हैं, घर में खाना भी बनना है. सोच लिया कि अब क्रिकेट छोड़ दूँगा. घर चलाना है तो पैसे कमाने होंगे. लेकिन तब मेरे कोच राजीव गोयल ने, बड़े भाई अकरम सैफ़ी ने हर तरह से मेरी मदद की.”
अमान के कोच राजीव गोयल बीबीसी से बातचीत में बताते हैं, ''अपने पिता की मौत के बाद अमान बिल्कुल बदल गया, बहुत चुप रहने लगा. एक दिन मेरे पास आया और बोला- ‘आपकी जान पहचान है शहर में, मेरी कहीं नौकरी लगवा दो. अब क्रिकेट छोड़ना है.’'
''इतना होनहार खिलाड़ी पैसे की तंगी के कारण क्रिकेट छोड़ दे. अजीब लग रहा था. हमने उसे स्टेडियम में ही छोटे बच्चों को ट्रेनिंग देने का काम दे दिया.''
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
















