एल्ड्रिच एम्स कैसे बने अमेरिकी इतिहास के सबसे ख़तरनाक डबल एजेंट

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- Author, मायेल्स बर्क
एल्ड्रिच एम्स अमेरिकी एजेंसी सीआईए के एक आला अधिकारी थे. एम्स ने करीब दस साल तक सोवियत संघ को गुप्त जानकारी बेची थी.
इससे पश्चिमी देशों के 100 से ज्यादा गुप्त ऑपरेशन फेल हुए थे. एम्स की मुख़बिरी की वजह से कम से कम 10 जासूसों की मौत हो हुई.
28 अप्रैल 1994 को इस डबल एजेंट को उम्र कैद की सजा मिली. एम्स को इस बात का दुख था कि वह पकड़ा गया, लेकिन उसे जासूसी करने का मलाल कभी नहीं हुआ.
एम्स ने अपने और अपनी पत्नी के महंगे शौक पूरे करने के लिए जासूसी का रास्ता चुना था, उसे बाकी आधिकारियों की तरह रूसी एजेंसी केजीबी ने कभी ब्लैकमेल नहीं किया.
दरअसल, साल 1985 में सीआईए के लिए काम करने वाले सोवियत एजेंट एक-एक करके गायब होने लगे थे. इन्हें सोवियत संघ की खु़फ़िया एजेंसी केजीबी पकड़ती, पूछताछ करती और फिर मार देती.
एल्ड्रिच एम्स की दी गई सूचना के आधार पर ही इनका पता लगाया जाता था.
एम्स ने ऐसे एजेंट्स की जानकारी लीक की थी, जो आधिकारिक तौर पर तो सोवियत संघ के लिए काम करते थे, लेकिन गुप्त तरीकों से पश्चिमी एजेंसियों को सूचना पहुंचा रहे थे.
एम्स ने लीक की जानकारी, लेकिन बाल-बाल बच गया

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ओलेग गोर्डिएवस्की भी इन्हीं एजेंट्स में से एक थे, लेकिन वे पकड़े नहीं गए. वह केजीबी कर्नल थे और लंदन में केजीबी के स्टेशन प्रमुख के रूप में काम करते थे, लेकिन अंदरूनी तौर पर ब्रिटेन की फ़ॉरेन इंटेलिजेंस सर्विस एमआई6 के लिए जासूसी कर रहे थे.
एक दिन उन्होंने खुद को मॉस्को में पाया. उन्हें नशा दिया गया था, पांच घंटे की पूछताछ के बाद वे थक चुके थे और उन्हें गोली मारी जानी थी. लेकिन ऐन मौके पर एमआई6 ने उन्हें एक कार की डिक्की में डालकर सोवियत संघ से बाहर निकाला और उनकी जान बाल-बाल बच गई.
इस घटना के बाद ओलेग यह पता लगाने में जुट गए कि उन्हें किसने उन्हें धोखा दिया.
28 फरवरी 1994 को बीबीसी के टॉम मैंगोल्ड को उन्होंने बताया, "लगभग नौ साल तक मैं अनुमान लगाता रहा कि वह कौन था जिसने मुझे पकड़वाया, लेकिन मैं उस शख़्स का नाम पता नहीं कर पाया."
दो महीने बाद उन्हें जवाब मिल गया जब सीआईए के अधिकारी रह चुके एल्ड्रिच एम्स ने अमेरिकी अदालत में कबूल किया कि उसने सीआईए और अन्य देशों के लगभग सभी सोवियत जासूसों के नाम केजीबी को बताए थे.
केजीबी ने एल्ड्रिच एम्स को एक कोड नेम दिया था, कोलोकॉल यानी घंटी. एम्स की लीक की गई जानकारी की वजह से ही सीआईए के बड़े एसेट जनरल दमित्री पोल्याकोव भी मारे गए थे.
पोल्याकोव सोवियत सेना के बड़े अधिकारी थे और 20 साल से ज्यादा समय तक पश्चिमी देशों को जानकारी दे रहे थे.
शराब के नशे में धुत रहता था एम्स

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एल्ड्रिच एम्स सीआईए के सोवियत काउंटरइंटेलिजेंस विभाग का प्रमुख था, इसलिए उसके पास सीआईए के जासूसों की इतनी सारी जानकारी थी, जिसे साझा करने से अमेरिका को बड़ा नुकसान हुआ.
एम्स की पोस्ट इतनी ऊंची थी कि वह पश्चिम की बाकी एजेंसियों के पूछताछ सेशन में भी मौजूद रह सकता था.
ओलेग गोर्डिएवस्की ने बताया, "अमेरिकी पूछताछ में बहुत अच्छे थे. मुझे अमेरिकी पसंद थे. मैं अपनी जानकारी उन्हें देना चाहता था, लेकिन फिर पता चला कि एम्स वहां बैठा था. इसका मतलब है कि मेरी सारी जानकारी उसने ही केजीबी के हाथों में दी."
एल्ड्रिच एम्स बचपन से ही जासूसी की दुनिया से वाक़िफ हो चुका था. उसके लिए सीआईए-केजीबी जैसे नाम नए नहीं थे.
एम्स के पिता सीआईए में एनालिस्ट थे और उन्होंने ही एम्स को कॉलेज के बाद नौकरी दिलवाई थी. शुरुआती करियर में एम्स की गिनती अच्छे अधिकारियों में होती थी.
1960 के आखिर में एम्स अपनी पत्नी नैंसी के साथ तुर्की चला गया था, यहाँ उन्होंने विदेशी एजेंट भर्ती करने शुरू किए.
लेकिन 1972 तक उसके बॉस को लगने लगा कि वह फील्ड वर्क के लिए ठीक नहीं हैं और उसे वापस हेडक्वार्टर बुला लिया गया. अमेरिका में उसने रूसी भाषा सीखी और सोवियत अधिकारियों के खिलाफ ऑपरेशन प्लान करने लगा.
एम्स ने अपने करियर में वही गलती की, जो उनके पिता ने की थी. वह शराब का आदि हो चुका था. 1972 में एक सीआईए की एक महिला कर्मचारी के साथ नशे में आपत्तिजनक स्थिति में पकड़ा गया था.
1976 में शराब नशे में धुत एम्स ने सीक्रेट दस्तावेजों से भरा बैग सबवे में ही छोड़ दिया था.
करियर में ऊंचाई पाने के लिए एम्स 1981 में मेक्सिको सिटी चला गया, लेकिन पत्नी न्यूयॉर्क में रहीं. यहाँ भी एम्स की स्थिति कमोबेश वैसी ही रही, शराब और अपने खराब व्यवहार की वजह से वे वहां भी अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सका.
एक कार एक्सीडेंट के मामले में पुलिस ने एम्स से बात करनी चाही तो वह नहीं कर पाया क्योंकि नशे में था.
एक पार्टी में क्यूबा के एक अधिकारी से उसने गाली-गलौज भी की. तमाम शिकायतों के बाद एम्स के बॉस ने उसे सुझाव दिया कि अमेरिका लौटकर शराब की लत का इलाज करवाए.
पत्नी के महंगे शौक, पैसों की जरूरत

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अपनी शादी के बाहर भी एल्ड्रिच एम्स के कई संबंध थे. 1982 के अंत में कोलंबियाई अधिकारी मारिया डेल रोसारियो से संबंध बने, जो सीआईए के लिए काम कर रही थीं.
एम्स ने पत्नी से तलाक लिया और रोसारियो से शादी कर ली. इसके बाद वह अमेरिका लौट आया.
रोसारियो महंगी चीजों की शौकीन थीं. वह खूब खरीदारी करती थीं और कोलंबिया में परिवार को फोन करती थीं, जो उस जमाने में महंगा पड़ता था.
एम्स की आर्थिक स्थिति खराब होने लगी थी, क्योंकि उसे अपनी पहली पत्नी को भी भरण-पोषण का ख़र्चा देना पड़ता था.
एम्स ने खुद बताया कि इस दौरान उस पर इतना कर्ज़ हो गया था कि उसने डबल एजेंट बनने की ठान ली थी.
एफबीआई अधिकारी लेस्ली जी वाइजर ने 2015 में बीबीसी को बताया, "एम्स ने पैसे पाने के लिए केजीबी के लिए जासूसी की. उसने कभी नहीं कहा कि इससे इतर कोई वजह थी."
देश को धोखा

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16 अप्रैल 1985 को एल्ड्रिच एम्स शराब पीकर सीधे वॉशिंगटन में रूसी दूतावास चला गया.
वहां रिसेप्शन पर लिफाफा दिया जिसमें कुछ डबल एजेंट्स के नाम, खुद के सीआईए से जुड़े होने के दस्तावेज और एक नोट था. नोट में 50 हजार डॉलर मांगे गए थे
एम्स को लगा कि वह ऐसा सिर्फ़ एक बार करेगा लेकिन यह ऐसा दलदल था जिसमें वह धंसता चला गया. अगले नौ साल तक एम्स केजीबी को जानकारी देता रहा और उसे पैसा मिलता रहा.
वह सीक्रेट डॉक्युमेंट्स पन्नी में लपेटकर सीआईए के दफ्तर से बाहर ले जाता. रूसी राजनयिकों से आधिकारिक मीटिंग की आड़ में हैंडलर से मिलता और दस्तावेज सौंप देता.
कभी पहले से तय हो चुकी जगहों पर दस्तावेज छोड़ देता था.
एफबीआई अधिकारी वाइजर ने बताया, "एम्स दस्तावेज ड्रॉप करने से पहले मेलबॉक्स पर चॉक से निशान लगाता. सोवियत एजेंट देखकर समझ जाते कि दस्तावेज रख दिए गए हैं. वे दस्तावेज़ लेने के बाद निशान मिटा देते थे. एम्स को पता चल जाता था कि काम हो गया."
एम्स की वजह से केजीबी को सीआईए के लगभग सभी सोवियत जासूस पता चल गए और अमेरिका के गुप्त ऑपरेशन बंद हो गए.
वाइजर ने कहा, "मुझे कोई दूसरा डबल एजेंट याद नहीं जिसकी वजह से इतनी जानें गई हों."
कई जासूसों की गुमशुदगी से सवाल उठने लगे, 1986 में सीआईए ने जांच शुरू की, लेकिन नौ साल तक एम्स बचता रहा. उसे सोवियत संघ से लगभग 25 लाख डॉलर मिले. एम्स अपनी कमाई छिपाता भी नहीं था. वह विलासिता की ज़िंदगी जीने लगा था.
सीआईए की नौकरी में उसकी सालाना सैलरी 70,000 डॉलर से ज्यादा नहीं थी फिर भी उसने 5.4 लाख डॉलर का घर खरीदा. घर के रिनोवेशन पर हजारों खर्च किए और एक कीमती कार भी ख़रीदी.
एम्स को यही दिखावा महंगा पड़ गया और उसके ख़िलाफ़ जांच शुरू हुई, आख़िरकार 1994 में एफबीआई ने उसे गिरफ़्तार कर लिया.
गिरफ़्तारी के बाद एम्स ने जांच और पूछताछ में सहयोग किया, ताकि पत्नी रोसारियो को कम सजा मिले.
रोसारियो को पांच साल बाद छोड़ दिया गया. जबकि एम्स अपनी मौत तक उम्र कैद की सजा काटते रहे. एफबीआई अधिकारी वाइजर ने कहा, "उसे खुद पर बहुत घमंड था. वह इस बात से तो दुखी जरूर था कि पकड़ा गया, लेकिन इसका उसे कोई अफसोस नहीं था कि उसने जासूसी की."
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