व्हाट्सऐप से भारतीय पत्रकारों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की जासूसी

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- Author, अभिजीत कांबले
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
मैसेजिंग ऐप, व्हाट्सऐप के मुताबिक इसराइल में बने स्पाईवेयर से दुनियाभर के जिन 14,00 लोगों को निशाना बनाया गया उनमें भारतीय पत्रकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता भी शामिल हैं.
जिन भारतीयों को निशाना बनाया गया उनमें भीमा कोरेगांव मामले में कई अभियुक्तों का प्रतिनिधित्व कर रहे मानवाधिकार वकील निहालसिंह राठौड़ भी हैं.

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उनके साथ ही कई अन्य मानवाधिकार कार्यकर्ता और सामाजिक कार्यकर्ता जैसे बेला भाटिया, वकील डिग्री प्रसाद चौहान, आनंद तेलतुंबड़े और पत्रकार सिद्धांत सिब्बल हैं.
प्रोफेसर व लेखक आनंद तेलतुंबड़े और नागपुर के मानवाधिकार कार्यकर्ता निहालसिंह राठौड़ ने दावा किया है कि उनकी जासूसी की जा रही थी.
दोनों ने बीबीसी को बताया कि सिटिज़न लैब के रिसर्चर्स ने उनसे संपर्क किया था.

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भारत व्हाट्सऐप का सबसे बड़ा बाज़ार
भारत के संचार, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने एक बयान में कहा कि सरकार व्हाट्सऐप पर नागरिकों की निजता के उल्लंघन को लेकर चिंतित है. उन्होंने कहा कि सरकार, सभी भारतीय नागरिकों की निजता की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है.
व्हाट्सऐप ने बुधवार को एनएसओ समूह के ख़िलाफ़ यह मामला दर्ज कराया कि ये समूह अप्रैल और मई में हुए उस साइबर हमले के पीछे है. हालांकि निगरानी के लिए सॉफ्टवेयर बनाने वाली इस इसराइली कंपनी ने आरोपों को पूरी तरह से ख़ारिज कर दिया है.
भारत में व्हाट्सऐप के 40 करोड़ यूज़र्स हैं, लिहाजा भारत उनके लिए सबसे बड़ा बाज़ार है.
मैसेजिंग ऐप की एक बड़ी खामी का फ़ायदा उठाकर हैकर्स ने फ़ोन और दूसरे उपकरणों में दूर बैठकर ही ये निगरानी सॉफ्टवेयर डाल दिया.
व्हाट्सऐप ने एक बयान में कहा, "हमे लगता है कि इस हमले में कम से कम सिविल सोसाइटी के 100 सदस्यों को निशाना बनाया गया है ,जो पहले नहीं देखा गया है."
मई में साइबर अटैक का पता लगने के बाद, व्हाट्सऐप ने अपनी खामी को ठीक करने के लिए तुरंत कदम उठाया और उनके सिस्टम में "नए प्रोटेक्शन" और अपडटे्स जारी किए.
टोरेंटो स्थित वॉचडॉग सिटिज़न लैब के साइबर एक्सपर्ट ने मामलों की पहचान करने में व्हाट्सऐप की मदद की, जिसमें पता चला की जिन लोगों को निशाना बनाया गया है, उनमें मानवाधिकारों की वकालत करने वाले लोग या पत्रकार शामिल हैं.
सिटिज़न लैब ने कहा कि, "उसने 100 ऐसे मामलों की पहचान की है, जिसमें दुनियाभर के कम से कम 20 देशों के मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और पत्रकारों को निशाना बनाया गया. ये अफ्रीका, एशिया, यूरोप, मध्य पूर्व और उत्तरी अमरीका के रहने वाले हैं."

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आनंद तेलतुंबड़े का दावा
आनंद तेलतुंबड़े ने बीबीसी से कहा कि उन्हें आठ दिन पहले सिटिज़न लैब से फ़ोन आया था. फ़ोन पर बताया गया कि उनकी प्रोफाइल की निगरानी की जा रही है.
तेलतुंबड़े ने कहा, "इस जासूसी के पीछे सरकार है और इसमें कोई शक नहीं है, क्योंकि एनएसओ कपंनी सिर्फ सरकारों को अपनी सेवा देती है. सबको पता है कि ये मेरे साथ क्यों किया गया."
भीमा-कोरोगांव हिंसा मामले में आनंद तेलतुंबड़े के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की गई है और फिलहाल वो ज़मानत पर हैं.

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निहालसिंह राठौड़ का दावा
ख़बर आने के बाद निहालसिंह राठौड़ ने दावा किया कि उन्हें सिटिज़न लैब से संपर्क किया गया था. उनसे कहा गया कि वीडियो कॉलिंग के ज़रिए उनके फ़ोन में मालवेयर इंस्टॉल किया गया.
निहालसिंह ने बीबीसी से कहा कि उन्हें पिछले दो साल से ऐसे फ़ोन आ रहे हैं और उन्होंने इस बारे में व्हाट्सऐप से भी शिकायत की थी.
उन्होंने कहा, "मुझे 2017 से फ़ोन आ रहे थे. एक के बाद एक कई फ़ोन आते थे लेकिन जब भी मैं जवाब देने की कोशिश करता तो वो डिस्कनेक्ट हो जाता था. मैंने व्हाट्सऐप से शिकायत की, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ. इसलिए मैंने उन नंबरों को ब्लॉक कर दिया."

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भारत सरकार ने मांगा जवाब
न्यूज़ एजेंसी पीटीआई के मुताबिक भारत सरकार ने इस मामले पर व्हाट्सऐप से सोमवार तक जवाब मांगा है.
आरोप लग रहा है कि पत्रकारों और कार्यकर्ताओं की मई में उस वक्त जासूसी की गई, जब आम चुनाव चल रहे थे.
एनएसओ कंपनी पर मुकदमा करने के ठीक पहले मंगलवार को यूज़र्स को इस बारे में बताया गया. जिसमें आरोप लगाया गया कि कंपनी ने व्हाट्सऐप के सर्वर्स के ज़रिए 20 देशों के 1,400 यूज़र्स के डिवाइस पर मालवेयर फैलाया.

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पत्रकार सिद्धांत सिब्बल ने ट्वीटर पर बताया कि व्हाट्सऐप ने उनसे संपर्क किया है.
उन्होंने लिखा, "अच्छी बात ये है कि व्हाट्सऐप ने हैकिंग के बारे में जानकारी दी और तुरंत कदम उठाया- तकनीकी और क़ानूनी. उन्होंने मुझसे संपर्क किया, और ऑनलाइन सुरक्षित रहने के तरीके सुझाए."
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साथ ही उन्होंने लिखा कि "बुरी ख़बर ये है कि अगर आपके पास एक मोबाइल है तो आपकी जासूसी की जा सकती है."
वहीं बेला भाटिया ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा ,"सिंतबर के आखिर में मुझसे सिटिज़न लैब ने संपर्क किया, उन्होंने बताया कि व्हाट्सऐप ने उन्हें एक लिस्ट दी है, जिसमें मेरा भी नाम है. उन्होंने मुझे बताया कि इस स्पाइवेयर के ज़रिए मेरे फ़ोन की सारी जानकारी एक्सेस की जा सकती है. अगर आपका फ़ोन किसी कमरे में रखा है तो वहां हो रही सभी चीज़ों का पता इस सपाइवेयर के ज़रिए लगाया जा सकता है. सिटिज़न लैब के संपर्क करने के कुछ दिनों बाद व्हाट्सऐप से मुझे संपर्क किया गया."
कार्यकर्ता बेला भाटिया ने कहा, "सिटिज़न लैब से जिस व्यक्ति ने मुझे फ़ोन किया, उन्होंने साफ़ तौर पर मुझसे कहा कि अपने अध्ययन और विश्लेषण के आधार पर वो स्पष्ट तौर पर ये कह सकते हैं कि आपकी अपनी सरकार ने ये सब किया है."
व्हाट्सऐप का बयान
व्हाट्सऐप के प्रवक्ता कार्ल वूग ने द इंडियन एक्सप्रेस अख़बार को बताया, "भारतीय पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की निगरानी की जा रही थी और मैं उनकी पहचान ज़ाहिर नहीं कर सकता हूं. मैं ये कह सकता हूं कि इन लोगों की संख्या कम नहीं है."
वूग ने बताया कि कंपनी ने निशाना बनाए गए हर व्यक्ति से संपर्क किया है और उन्हें साइबर हमले के बारे में बताया है.
व्हाट्सऐप ने खुद को एक "सुरक्षित" कम्युनिकेशन ऐप बताया है, क्योंकि यहां मैसेज एंड टू एंड इंक्रिप्टेड होते हैं. इसका मतलब इसे सिर्फ संदेश भेजने वाले और पाने वाले के उपकरण पर ही देखा जा सकता है.
फ़ेसबुक के स्वामित्व वाले व्हाट्सऐप ने कहा है कि ये पहला मौका है जब किसी इंक्रिप्टेड मैसेजिंग प्रोवाइडर ने इस तरह का क़ानूनी कदम उठाया है.
इसराइल के एनएसओ समूह का कहना है कि वो आरोपों के ख़िलाफ़ लड़ेगा.
कंपनी ने बीबीसी को दिए एक बयान में कहा, "हम इन आरोपों का कड़े शब्दों में खंडन करते हैं और सख्ती से इनके ख़िलाफ़ लड़ाई करेंगे."
कंपनी के मुताबिक, "एनएसओ, लाइसेंस प्राप्त सरकारी ख़ुफ़िया और क़ानून प्रवर्तन एजेंसियों को तकनीकी सहायता देता है, जिससे वो आतंकवाद और गंभीर अपराधों से निबट सकें."
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