'ओबामा को फ़ोन जासूसी के बारे में नहीं बताया था'

अमरीकी अधिकारियों ने कहा है कि अमरीकी सुरक्षा एजेंसी एनएसए ने अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को जर्मन चांसलर एंगेला मर्केल की जासूसी के बारे में कोई जानकारी नहीं दी थी.
एनएसए प्रवक्ता के अनुसार जनरल कीथ एलेक्ज़ेंडर ने चांसलर मर्केल की ख़ुफ़िया निगरानी संबंधी किसी <link type="page"><caption> ख़ुफिया ऑपरेशन</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/10/131025_us_spying_germany_sm.shtml" platform="highweb"/></link> की जानकारी नहीं दी है.
एनएसए ने यह सफ़ाई जर्मन मीडिया में आई उन ख़बरों के मद्देनज़र दी है, जिनमें कहा गया था कि वह वर्ष 2002 से ही चांसलर मर्केल के फ़ोन की जासूसी कर रही थी और राष्ट्रपति ओबामा को 2010 में इसके बारे में बताया गया था.
मीडिया में इन ख़बरों के आने के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक रिश्ते तल्ख़ हो गए हैं.
जर्मन टैबलॉयड बिल्ड एम सोनटैग ने दावा किया था कि जनरल एलेक्ज़ेंडर ने ख़ुद ओबामा को इसके बारे में जानकारी दी थी.
'जासूसी जारी'
टैबलॉयड के अनुसार एनएसए से जुड़े एक सूत्र ने उसे जानकारी दी है कि अभी भी मर्केल की जासूसी किया जाना बंद नहीं हुआ है क्योंकि वे मानते हैं कि "उन पर विश्वास नहीं किया जा सकता."

नेशनल सिक्योरिटी एजेंसी ने रविवार को बिल्ड में प्रकाशित ख़बरों का खंडन करते हुए एक बयान जारी किया.
एनएसए प्रवक्ता वैनी वाइन ने कहा, "जनरल एलेक्ज़ेंडर ने राष्ट्रपति ओबामा से साल 2010 में जर्मन चांसलर एंगेला मर्केल की निगरानी करने वाले किसी कथित विदेशी ख़ुफिया ऑपरेशन के बारे में कोई बात नहीं की थी. उन्होंने कभी ऐसी कोई बात नहीं की थी. "
हालाँकि इस बयान में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि क्या अमरीकी राष्ट्रपति को किसी और माध्यम से ख़ुफिया ऑपरेशन की जानकारी दी गई थी या नहीं.
ख़बरों के अनुसार ओबामा ने जर्मन चांसलर से कहा है कि उन दोनों की बातचीत से पहले उन्हें ऐसे किसी ख़ुफिया ऑपरेशन के बारे में कोई जानकारी नहीं थी.
ख़बर से आक्रोश

<link type="page"><caption> </caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/10/131025_us_spying_germany_sm.shtml" platform="highweb"/></link>इन ख़बरों से उभरे आक्रोश के बाद जर्मनी अपने इंटेलीजेंस प्रमुख को अमरीका भेज रहा है, ताकि वे जासूसी के आरोपों की जाँच के लिए "ज़ोर डाल सकें".
गुप्त रूप से जारी दस्तावेज़ों पर आधारित डेर स्पीगल की रिपोर्ट में कहा गया था कि ख़ुफिया तौर पर फ़ोन सुनने वाली इकाई बर्लिन स्थित दूतावास में है और दुनिया भर में ऐसे 80 ऑपरेशन चल रहे हैं.
जर्मनी के गृहमंत्री के अनुसार जर्मनी में किसी का फ़ोन सुनना ग़ैरक़ानूनी है.
डेर स्पीगल के अनुसार, एनएसए के दस्तावेज़ों से पता चलता है कि एंगेला मर्केल के फ़ोन को उनके चांसलर बनने से तीन साल पहले 2002 से ही सुना जा रहा था.
स्पीगल के अनुसार इन दस्तावेज़ों से यह स्पष्ट नहीं था कि चासंलर के फ़ोन पर <link type="page"><caption> ख़ुफिया निगरानी</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/10/131025_eu_us_spying_sm.shtml" platform="highweb"/></link> का चरित्र क्या था? यह स्पष्ट नहीं है कि उनके फ़ोन को टैप किया जा रहा था या बस सुना जा रहा था?
इस ख़बर के प्रकाशित होने के बाद बुधवार को जर्मन चांसलर मर्केल ने ओबामा को फ़ोन किया था. स्पीगल के अनुसार ओबामा ने मर्केल से खेद जताया.
बर्लिन में मौजूद बीबीसी संवाददाता स्टीफेन इवांस के अनुसार इससे यह मतलब भी निकाला जा सकता है कि जर्मनी में व्यापक स्तर पर प्रमुख लोगों के फ़ोन की जासूसी की जा रही है.
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