अमरीका पर मर्केल के फ़ोन कॉलों की जासूसी का आरोप

अमरीकी खु़फ़िया संस्थाओं द्वारा जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्कल के मोबाइल फ़ोन कॉल की जासूसी के आरोपों के सिलसिले में जर्मनी के विदेश मंत्रालय ने अमरीकी राजदूत को तलब किया है.
अमरीकी राजदूत जॉन इमरसन जर्मनी के विदेश मंत्री गुइडो वेस्टरवेले से मिलेंगे. इन दो क़रीबी सहयोगियों के बीच इस मुलाक़ात को एक असाधारण कदम के तौर पर देखा जा रहा है.
एंगेला मर्केल ने इन दावों के बारे में "पूरी सफ़ाई" मांगी है. बुधवार को एंगेला मर्केल ने जासूसी के दावों के बारे में अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से बात की थी और उनसे कहा था कि ये कदम 'विश्वासघात के बराबर' है.
व्हाइट हाउस के मुताबिक राष्ट्रपति ओबामा ने जर्मन चांसलर को बताया कि अमरीका उनके फ़ोन कॉल की जासूसी नहीं कर रहा था और न ही कभी भविष्य में ऐसा करेगा.
लेकिन इससे ये स्पष्ट नहीं होता कि क्या अतीत में मर्केल की फ़ोन कॉल्स सुनी गई थीं या नहीं.
'अस्वीकार्य कदम'
इंटरनेट मार्केट ऐंड सर्विसेज़ के यूरोपीय आयुक्त मिकेल बार्नियर ने सुझाव दिया है कि यूरोप को नए डिजिटल उपकरण और तरीके बनाने चाहिए जो अमरीकी निगरानी के दायरे से बाहर हों.
ब्रसेल्स में बुधवार को होने वाली एक यूरोपीय बैठक में एंगेला मर्केल के फोन कॉलों की जासूसी के आरोपों पर चर्चा हो सकती है. इस बैठक में यूरोप की डिजिटल अर्थव्यवस्था, आर्थिक बहाली और आप्रवासन के मुद्दों पर चर्चा होनी है.
फ्रांस में भी लाखों फ़ोन कॉलों की निगरानी की ख़बरें सामने आने के बाद राष्ट्रपति फ़्रांसुआ ओलांद पहले ही इस मुद्दे को यूरोपीय बैठक के कार्यक्रम में शामिल करने की बात कह चुके हैं.
बीबीसी के यूरोपीय मामलों के संपादक गेविन ह्युइट का कहना है कि अमरीका की राष्ट्रीय सुरक्षा संस्था, एनएसए, की यूरोप में गतिविधियों के बारे में कई और यूरोपीय नेता भी अमरीका से स्पष्टीकरण मांग सकते हैं.
सरकार द्वारा फ़ोन कॉलों की निगरानी का जर्मनी में ख़ास महत्व है. एंगेला मर्केल पूर्व जर्मनी में पली-बढ़ी हैं जहां फ़ोन टैपिंग बड़े पैमाने पर होती थी.
'विस्तृत जानकारी'

मर्केल के प्रवक्ता ने कहा जर्मन नेता के लिए इस तरह की गतिविधियाँ 'पूरी तरह से अस्वीकार्य' हैं और उन्होंने इनकी 'पूरी और विस्तृत जानकारी' मांगी है.
स्टेफ़न सेबर्ट ने एक वक्तव्य में कहा, "जिस तरह से जर्मनी और अमरीका दशकों से क़रीबी दोस्त और सहयोगी रहे हैं, ऐसे में किसी राज्याध्यक्ष की बातचीत की इस तरह से निगरानी नहीं होनी चाहिए."
जुलाई में जर्मनी के मीडिया ने एडवर्ड स्नोडन की वो टिप्पणियाँ छापी थीं जिनमें स्नोडन ने इशारा किया था कि अमरीका की एनएसए, जर्मनी और कई और पश्चिमी देशों के साथ 'कोई प्रश्न नहीं पूछे जाने' की नीति के आधार पर काम कर रही थी. इसमें जर्मनी में इंटरनेट ट्रैफ़िक, ईमेल और फ़ोन कॉलों की निगरानी करना शामिल था.
लेकिन एंगेला मर्केल ने ऐसे किसी भी सहयोग की जानकारी से इंकार किया था.
इससे पहले जून में अमरीकी राष्ट्रपति ओबामा ने चांसलर मर्केल को भरोसा दिलाया था कि जर्मन नागरिकों की लगातार जासूसी नहीं हो रही है. उस वक्त और ज़्यादा संदेह नहीं करने के लिए जर्मन विपक्ष ने एंगेला मर्केल की आलोचना की थी.
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