हनी ट्रैप: किस लालच में फंस जाते हैं बड़े बड़े अधिकारी

- Author, नितिन श्रीवास्तव
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
पाँच मई को ख़बर आई कि महाराष्ट्र के एंटी-टेररिज़्म स्क्वॉड (एटीएस) ने डिफ़ेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइज़ेशन (DRDO) के एक वैज्ञानिक को गिरफ़्तार कर लिया है.
उन पर पाकिस्तान के लिए कथित तौर पर जासूसी करने का आरोप लगाते हुए एटीएस ने बताया, "ये मामला 'हनी ट्रैप' का है और प्रदीप कुरुलकर नाम के वरिष्ठ वैज्ञानिक जो पुणे में काम करते थे वे एक पाकिस्तानी एजेंट से व्हाट्सएप और वीडियो कॉल्ज़ के ज़रिए सम्पर्क में थे".
मामले में जाँच जारी है लेकिन उसके पहले 'हनी ट्रैप' से जुड़े कुछ अहम सवालों के जवाब ढूँढना ज़रूरी है.
ज़रूरी इसलिए भी क्योंकि इस तरह का मामला कोई पहली बार नहीं हुआ है.
कुछ महीने पहले यानी नवंबर, 2022 में दिल्ली पुलिस ने भारतीय विदेश मंत्रालय के लिए काम करने वाले एक ड्राइवर को कथित तौर पर गिरफ़्तार इसलिए किया था क्योंकि सुरक्षा एजेंसियों ने पुलिस को अलर्ट किया था कि संभवतः ये ड्राइवर 'हनी ट्रैप' किए जाने के बाद पाकिस्तान में किसी को ख़ुफ़िया जानकारी प्रदान कर रहा था".

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क्या होता है 'हनी ट्रैप'
जासूसी के इतिहास में शायद अब तक की सबसे मशहूर 'हनी ट्रैप' जासूस माता हारी को बताया जाता है जो पहले विश्व युद्ध के बाद बेहद लोकप्रिय हुई थीं.
नीदरलैंड्स की मार्गरेट मैकलियोड 'आकर्षक' डांस करने की कला में माहिर थीं जिन्हें बाद में इस बात पर फ़्रांस के एक फायरिंग स्क्वॉड ने गोली से उड़ा दिया था क्योंकि वे कथित तौर पर जर्मन सेनाओं के लिए जासूसी करती थीं और फ़्रेंच-ब्रितानी अफ़सरों के क़रीब आकर जानकारी जुटा लेती थीं.
मशहूर उपन्यासकार पॉलो कोएल्हो की 'द स्पाई' नाम की नॉवल में माता हारी प्रमुख किरदार हैं और वे लिखते हैं, "माता हारी जब पेरिस पहुँची थी तो उनके पास एक भी पैसा नहीं था लेकिन जल्द ही वे पेरिस के समाज की सबसे फ़ैशनेबल और आकर्षित महिला बन चुकी थीं. ज़्यादातर अधिकारी या फ़ौजी अफ़सर उनसे अपनी दोस्ती की कहानियाँ सुनाते नहीं थकते थे".
हालांकि इतिहास के मुताबिक़ माता हारी पर 'हनी ट्रैप' करने के आरोप कभी पूरी तरह साबित नहीं किए जा सके लेकिन फिर भी उन्हें फ़्रांसीसी सरकार ने सज़ा दी क्योंकि मामला कथित तौर पर बेहद गोपनीय दस्तावेज़ों का दुश्मन तक पहुँचने का था.
दरअसल, 'हनी ट्रैप' किए जाने की प्रक्रिया का अभिप्राय एक रोमांटिक या यौन-सम्बंधी ताल्लुकात बना कर अमुक टार्गेट से ख़ुफ़िया जानकारी निकलवाने का होता है. इस जानकारी का इस्तेमाल या तो किसी बड़ी रक़म के लेन-देन के लिए किया जाता है या फिर राजनीतिक कारणों के लिए इसमें जासूसी शामिल है.
पिछले दो दशक में भारत समेत कई देशों में 'हनी ट्रैप' के कई मामले ऐसे भी दर्ज किए गए हैं जहां ग़ैर-क़ानूनी वसूली या ब्लैकमेल को भी अंजाम दिया गया है.
कैम्ब्रिज डिक्शनरी के मुताबिक़, "हनी ट्रैप कोई मोहक चीज़ होती है जिससे लोगों को लुभाया जा सकता है. हनी ट्रैप का इस्तेमाल जासूसी के लिए भी किया जाता है".

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जासूसी के लिए'हनी ट्रैप'
विदेशों से पहले बात भारत और 'हनी ट्रैप' के मामलों की.
एक बेहद मशहूर कहानी का इशारा बी रमण की क़िताब, 'द काओ बॉएज़ ऑफ़ रॉ: डाउन मेमोरी लेन', में मिलता है जिसके मुताबिक़ मॉस्को में पोस्टेड एक युवा भारतीय डिप्लोमैट का इश्क़ एक रूसी डांसर से हो गया था.
जब रूस की ख़ुफ़िया एजेंसी, केजीबी ने उस डांसर के ज़रिए उस डिप्लोमैट से कुछ जानकारी लेनी चाहिए तो उन्होंने साफ़ मना कर दिया और दिल्ली आकर प्रधानमंत्री नेहरू को सारी बात बता दी.
डिप्लोमैट को तो आगे सतर्क रहने की चेतावनी देकर माफ़ कर दिया गया लेकिन तब से भारतीय विदेश सेवा के सभी अफ़सरों को "दूसरे देशों में इस तरह के किसी भी प्रलोभन से दूर रहने की हिदायत दी जाने लगी, जो आज भी जारी है".
ब्रितानी इतिहासकार रिचर्ड डेकन अपनी क़िताब 'स्पाइक्लोपीडिया' में लिखते हैं, "कोल्ड वॉर के दौरान रूस की केजीबी ख़ुफ़िया एजेंसी 'मोज़नो' कोडवर्ड नाम की महिला जासूसों का इस्तेमाल विदेशी अधिकारियों के क़रीब आने, उनसे सीक्रेट रिश्ते क़ायम करने और फिर ख़ुफ़िया दस्तावेज़ों को हासिल करने के लिए करती थीं".
साल 2009 और 2010 के बीच अमेरिका और ब्रिटेन में विदेशी जासूसों को लेकर हाहाकर मच गया था.
प्रतिष्ठित फ़ॉरेन पॉलिसी जर्नल ने लिखा, "MI5 (ब्रिटेन की ख़ुफ़िया एजेंसी) सेक्स को लेकर चिंतित है. उसने पिछले एक साल में 'द थ्रेट फ़्राम चाइनीज़ एस्पीयोनाज' नाम का 14 पन्नों वाला एक दस्तावेज़ ब्रितानी बैंकों, बड़े व्यापारों और वित्तीय संस्थानों में ये कहते हुए बाँटा है कि चीन के जासूसों का निशाना पश्चिमी देशों के व्यापारियों पर हो सकता है जिनसे यौन-सम्बंध स्थापित कर उन्हें ब्लैकमेल करने की कोशिश की जा सकती है".
इस बारे में एक विस्तृत रिपोर्ट अमेरिकी सरकार ने भी तैयार की थी जिसमें इस बात का ज़िक्र साफ़ मिलता है.

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भारत में 'हनी ट्रैप'
1980 के दशक में भारत में कथित 'हनी ट्रैप' का मामला ख़ूब सुर्ख़ियों में रहा था जब रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के एक अफ़सर केवी उन्नीकृष्णन पर अमेरिका की ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए की एक जासूस के ज़रिए 'हनी ट्रैप' होने का आरोप लगा था.
खबरों के मुताबिक़ ये महिला जासूस पैनऐम एयरवेज़ में एयर होस्टेस थी.
केवी उन्नीकृष्णन, उन दिनों चेन्नई के रॉ ब्रांच में पोस्टेड थे और कथित तौर पर एलटीटीई की गतिविधियों पर नज़र बनाए हुए थे.
भारत और श्रीलंका के बीच 1987 में हुए शांति-समझौते के कुछ समय पहले ही केवी उन्नीकृष्णन को हिरासत में ले लिया गया था.
सिंगापुर यूनिवर्सिटी में अंतरराष्ट्रीय संबंधों और डिप्लोमेसी के प्रोफ़ेसर केपी बाजपेई के मुताबिक़, "सैटलाइट के ज़रिए जानकारी जुटाने, इन्फ़ोरमेशन टेक्नोलोजी और आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के दौर से पहले स्पाइंग तो इंसानों के ज़रिए ही हो सकती थी. क्योंकि विदेशी पोस्टिंग्स पर कम लोग ही जाया करते थे तो उनकी प्रोफ़ाइल वग़ैरह पर दूसरे देश अच्छी तैयारी कर के रखते थे".
पिछले दशकों की बात हो तो पाकिस्तान के इस्लामाबाद में पोस्टेड भारतीय विदेश सेवा की प्रेस-इंफ़ोरमेशन सचिव माधुरी गुप्ता का मामला ख़ासा बड़ा हो गया था जब 2010 में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने उन्हें, "पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी, आईएसआई, को संवेदनशील जानकरी मुहैया कराने", के आरोप में गिरफ़्तार किया था.
साल 2018 में एक निचली अदालत ने उन्हें तीन साल की सज़ा सुनाई थी लेकिन साथ ही ज़मानत पर रिहा कर दिया था.
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था, "माधुरी गुप्ता ने रक्षा मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के अफ़सरों की पोस्टिंग और उनके परिवारवालों की जानकारी पाकिस्तानी जासूसों को दी थी".
हालांकि, 2021 में 64 वर्षीय माधुरी गुप्ता की मौत हो जाने के बाद ये मामला भी ख़त्म हो गया. वैसे भारत ने कई दफ़ा 'हनी ट्रैप' के बढ़ते मामलों पर ज़्यादा चौकन्ना रहने की बात दोहराई है.
मिसाल के तौर पर साल 2019 में राज्यसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए रक्षा राज्य मंत्री श्रीपद नायक ने कहा था, "पाकिस्तान की आईएसआई एजेंसी भारतीय सेनाओं के अफ़सरों को 'हनी ट्रैप' करने की कोशिशों को बढ़ा रही है. सभी को ज़्यादा अलर्ट रहने की ज़रूरत है".
ग़ौरतलब है कि इसके चंद महीने बाद ही भारतीय सेना ने अपने कर्मचारियों को अपने मोबाइल फ़ोन से 89 ऐप डिलीट करने की हिदायत थी थी जिसमें फ़ेसबुक, टिकटॉक, ट्रूकॉलर और इंस्टाग्राम भी शामिल थे.
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