उत्तर प्रदेश: जिस व्यक्ति पर आईएसआई के लिए जासूसी करने का आरोप लगा उसके परिवार ने क्या कहा?

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- Author, सैयद मोज़िज़ इमाम
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
होली के दिन, यानी शुक्रवार को उत्तर प्रदेश एटीएस (आतंकरोधी दस्ते) ने पाकिस्तान की आईएसआई के लिए जासूसी करने के आरोप में रविंद्र कुमार नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है. ये व्यक्ति फिरोज़ाबाद आर्डिनेंस फैक्ट्री में बतौर चार्जमैन काम कर रहे थे.
एटीएस के एडिशनल डायरेक्टर जनरल नीलाब्जा चौधरी ने कहा कि रविंदर कुमार, नेहा नाम की एक महिला के संपर्क में थे, जो आईएसआई हैंडलर थीं और हनी ट्रैप के ज़रिए लोगों को फंसाकर संवेदनशील जानकारी निकालते थे.
एटीएस के मुताबिक रविंद्र ने अपने आईएसआई हैंडलर के साथ गोपनीय जानकारी साझा की है और गगनयान के बारे में भी ख़ुफिया जानकारी उन्हें दी है.
हालांकि रविंद्र की पत्नी आरती का कहना है कि उनके पति को साजिश के तहत फंसाया गया है.

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रविंद्र की पत्नी ने कहा?

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एटीएस का कहना है कि इस मामले में वो अभी पूछताछ कर रही है.
इससे पहले 12 मार्च को आगरा में रविन्द्र से पूछताछ की गई थी.
आगरा के बिंदू कटरा मोहल्ले में रविंद्र कुमार का पैतृक घर है, जहां उनकी गिरफ्तारी के बाद से सन्नाटा है.
घर पर रविंद्र की बूढ़ी मां, उनकी पत्नी आरती और दो बच्चे हैं.
आरती ने मीडिया से कहा कि उन्हें गिरफ्तारी की ख़बर पर यक़ीन नहीं हो रहा है. उनका कहना है कि उनके पति को फंसाया गया है.
आरती ने कहा, "मेरे पति को हनी ट्रैप में फंसाया गया है. वो एक बेहद साधारण व्यक्ति हैं मुझे कभी उन पर कोई संदेह नहीं हुआ है. मुझे लगता है कि उनके साथ कोई बड़ी साजिश हुई है."
उनका दावा है, "एटीएस के अधिकारी जब घर पर आए थे तो उन्होंने कहा था कि उन्हें फ़ोन चेक करना है. लेकिन बाद में उन्होंने इतना बड़ा मामला बना दिया. एटीएस ने मरे पति से मेरी बात भी नहीं कराई है."
आरती ने कहा कि अब वो अपने वकील की राय से ही आगे बातचीत करेंगी.
मोहल्ले में रविंद्र के पड़ोस के रहने वाले सुधांशु गुप्ता का कहना है, "70 साल से हम यहां रह रहे हैं, कभी ऐसी बात नहीं सुनी."
वो बताते हैं, "वो सुबह आठ बजे चले जाते थे और रात में 10 बजे आते थे तो उनके साथ कोई ऐसा मेल-मिलाप नहीं था. लेकिन उनके बाप दादा भी यहीं रहते थे. हम लोगों को मीडिया से पता चला कि ऐसा कुछ हुआ है."
रविंद्र कुमार आगरा के बिंदू कटरा मोहल्ले के रहते हैं और मिली जानकारी के मुताबिक़ वो रोज़ना फिरोज़ाबाद आते-जाते थे.
यूपी एटीएस ने क्या कहा?

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इस मामले पर एडीजी नीलाब्जा चौधरी ने बताया कि एटीएस यूपी और सहयोगी एजेंसियों को जानकारी मिली थी कि रविंद्र कुमार नाम का एक शख्स अपने पाकिस्तानी हैंडलर के साथ गोपनीय और संवेदनशील जानकारी साझा कर रहा है.
उन्होंने बताया, "इस पर हमारी आगरा इकाई ने रविंद्र कुमार से प्रारंभिक पूछताछ की. विस्तृत पूछताछ के लिए उन्हें एटीएस मुख्यालय बुलाया गया, जहां यह साबित हुआ कि उन्होंने नेहा नामक एक हैंडलर के माध्यम से बहुत संवेदनशील जानकारी साझा की थी."
नीलाब्जा चौधरी ने दावा किया कि यह आईएसआई मॉड्यूल लंबे समय से चल रहा है.
इसके बादे में उन्होंने बताया कि ये लोगों को फंसाते हैं और उनसे ऐसी जानकारियां निकालते हैं जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ख़तरा हो सकती है.
उन्होंने कहा, "रविंद्र कुमार से पूछताछ करने पर हमें पता चला कि वह समय-समय पर अपने हैंडलर के साथ जानकारी साझा करता था. इसमें ऑर्डिनेंस फैक्ट्री (जहां वो काम करते थे) की दैनिक उत्पादन रिपोर्ट और स्टोर की रसीद, सामान लाने-ले जाने से जुड़े अन्य दस्तावेज, आने वाला स्टॉक, उत्पादन की मांग जैसे सभी जानकारी शामिल थी."
एडीजी नीलाब्जा चौधरी ने कहा एटीएस इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है और अन्य संदिग्ध लोगों की भी तलाश कर रही है.
हालांकि एटीएस के रविंद्र कुमार के पास सिर्फ 6220 रूपए, एक बैंक का डेबिट कार्ड, पोस्ट ऑफिस के डेबिट कार्ड और पैन और आधार कार्ड बरामद हुआ है.
एटीएस ने भारत न्याय संहिता की धारा 148 (देश के ख़िलाफ़ साजिश रचने) और ऑफ़िशियल सीक्रेट्स एक्ट की धारा 3, 4 और 5 में एफ़आईआर की गई है.
कौन हैं रविंद्र कुमार?

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रविंद्र कुमार फिरोज़ाबाद में सेना के इस्तेमाल के लिए सामान बनाने वाली आर्डिनेंस फैक्ट्री में चार्जमैन के पद पर कार्यरत हैं.
एटीएस के मुताबिक़ सोशल मीडिया के माध्यम से वो आईएसआई हैंडलर के संपर्क में आए थे.
एटीएस ने बताया कि नेहा का नंबर उनके फ़ोन पर चंदन कुमार स्टोर कीपर के नाम से सेव किया गया था. इस फ़ोन के माध्यम से ही व्हाट्सऐप के ज़रिए डाक्यूमेंट भेजे जा रहे थे.
हालांकि अभियुक्त का कहना है कि घर वाले नेहा के बारे में न जान पाएं इसलिए दूसरे के नाम से उन्होंने नंबर सेव किया था.

एटीएस के मुताबिक रविंद्र के एक सहयोगी को भी हिरासत में लिया गया है.
एटीएस से मिली जानकारी के मुताबिक़ गोपनीय दस्तावेज़ भेजने के एवज में उन्हें पैसे मिल रहे थे.
हालांकि अभी ये पता नहीं चला है कि उन्हें इसके लिए कितना पैसा मिला है. लेकिन एटीएस का कहना है कि ये पूरा मामला 2024 से चल रहा था.
जासूसी के आरोप

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इससे पहले एटीएस ने सिंतबर 2023 में लखनऊ से शैलेश कुमार चौहान नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था.
चौहान अरुणाचल प्रदेश में आर्डिनेंस फैक्टरी में पूर्व में सविंदा पर काम करते थे. उन पर भी आईएसआई के लिए जासूसी का आरोप लगा था.
इसी तरह के एक और मामले में 2002 में कानपुर में गिरफ्तार के गए प्रदीप कुमार को कोर्ट ने बरी कर दिया था.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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