कुंभ में नहाती महिलाओं के बेचे गए वीडियो, क्या है पूरा मामला और क्या कहता है क़ानून?

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- Author, कीर्ति रावत
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
प्रयागराज में महाकुंभ के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने संगम में स्नान किया है. इनमें महिलाओं की भी अच्छी ख़ासी संख्या है.
पिछले दिनों लड़कियों और महिलाओं के स्नान करते और कपड़े बदलने की तस्वीरें और वीडियो कई सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स पर शेयर किए गए.
ऐसे वीडियो फ़ेसबुक, एक्स और यूट्यूब पर मौजूद थे. यही नहीं, कई टेलीग्राम चैनल्स पर इन वीडियो को बेचा जा रहा था.
मीडिया रिपोर्ट्स में यह बात जब सामने आई, तो पुलिस ने इस पर कार्रवाई की. कुछ लोग गिरफ़्तार किए गए. इस पूरे मामले ने एक बार फिर ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म्स पर महिलाओं की निजता और उनकी सुरक्षा का मुद्दा उठा दिया है. 27 फ़रवरी यानी गुरुवार को भी पुलिस कमिश्नरेट प्रयागराज ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर जानकारी दी कि इस संबंध में पश्चिम बंगाल के हुगली ज़िले के रहने वाले 27 साल के अमित कुमार झा को ग़िरफ़्तार कर लिया गया है.

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इन सबके बीच गुजरात से भी एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है.
गुजरात के राजकोट में एक मैटरनिटी क्लीनिक से महिलाओं के वीडियो बनाकर उन्हें टेलीग्राम चैनल्स पर बेचा जा रहा था.
बीबीसी के पास भी टेलीग्राम के दो ग्रुप्स के स्क्रीनशॉट्स हैं, जिनमें सीसीटीवी से ली गईं महिलाओं की तस्वीरों को शेयर किया गया है.
इन तस्वीरों को शेयर करते हुए पूरा वीडियो किससे ख़रीदा जा सकता है, उसके बारे में भी बताया गया है.
उन टेलीग्राम चैनलों में सिर्फ़ महाकुंभ ही नहीं बल्कि कई अन्य धार्मिक उत्सवों के दौरान महिलाओं के स्नान के वीडियो और फ़ोटो डाली गई थीं.
पुलिस को क्या पता चला

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पुलिस के मुताबिक़, सोशल मीडिया ऐप टेलीग्राम पर महाकुंभ में महिलाओं के स्नान के वीडियो बेचे जा रहे थे.
फ़ेसबुक पर ये वीडियोज़ महाकुंभ गंगा स्नान प्रयागराज कैप्शन के साथ अपलोड किए गए थे.
वहीं कुछ पोस्ट पर #mahakumbh2025, #gangasnan और #prayagrajkumbh जैसे हैशटैग इस्तेमाल किए गए थे.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ इन वीडियोज़ को दो हज़ार से तीन हज़ार रुपये में बेचा जा रहा था.
महिलाओं के वीडियो बेचे जाने की रिपोर्ट सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई की है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, यूपी पुलिस ने बताया कि इस मामले में उन्होंने इंस्टाग्राम अकाउंट और कुछ टेलीग्राम चैनल्स के ख़िलाफ़ कार्रवाई की है.
यूपी पुलिस ने कहा, "यह कार्रवाई तब की गई जब सोशल मीडिया निगरानी टीम को पता चला कि कुछ प्लेटफ़ॉर्म्स पर महाकुंभ में महिलाओं के स्नान और कपड़े बदलने के वीडियो अपलोड किए जा रहे हैं. जो उनकी गोपनीयता और गरिमा का उल्लंघन है."
17 फ़रवरी को उत्तर प्रदेश पुलिस ने महिला श्रद्धालुओं के वीडियो पोस्ट करने के आरोप में इंस्टाग्राम अकाउंट के ख़िलाफ़ भी मामला दर्ज किया. वहीं एक अन्य मामले में 19 फ़रवरी को कुछ टेलीग्राम चैनल्स के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया गया है.
दोनों ही मामले प्रयागराज के कोतवाली कुंभ मेला थाना में दर्ज किए गए हैं.
उत्तर प्रदेश पुलिस ने इस मामले में एक्स पर पोस्ट लिखा, "महाकुंभ में महिला श्रद्धालुओं के स्नान करने के अमर्यादित वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स पर अपलोड करने और ऐसे वीडियो को सोशल मीडिया के माध्यम से बेचने की सूचना प्राप्त होने पर तत्काल ऐसे 17 सोशल मीडिया अकाउंट्स को चिह्नित कर कुंभ मेला पुलिस की ओर से उनके ख़िलाफ़ अभियोग पंजीकृत करते हुए वैधानिक कार्यवाही की जा रही है."
बीबीसी ने कुंभ में गई एक महिला से भी बात की है.
नाम न छापने की शर्त पर उन्होंने बताया कि जब उन्हें पता चला कि कुंभ में महिलाओं के स्नान करते हुए तस्वीरों को बेचा जा रहा है, तो उन्हें बहुत बुरा लगा.
उन्होंने कहा, "यह एक औरत की इज़्ज़त का सवाल है. नहाते वक़्त अगर ऐसी तस्वीरें बाज़ार में बेची जाएँगी, तो इससे औरतों की बदनामी होगी. ऐसे धार्मिक आयोजनों में यह सब नहीं होना चाहिए. अगर इन जगहों पर भी महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं, तो बाक़ी जगहों के बारे में हम क्या ही कह सकते हैं."
गुजरात के राजकोट का क्या है मामला?

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गुजरात में राजकोट के एक क्लीनिक में चेकअप कराने गई महिला मरीज़ों के वीडियो लीक किए जा रहे थे. इन वीडियोज़ को यूट्यूब पर अपलोड किया गया था और टेलीग्राम पर बेचा जा रहा था.
गुजरात पुलिस में साइबर क्राइम के सहायक पुलिस आयुक्त हार्दिक मकाडिया ने बीबीसी से कहा, "एक मैटरनिटी होम की सीसीटीवी को हैक करके इन वीडियोज़ को यूट्यूब चैनल पर अपलोड किया गया था. इन वीडियोज़ के डिस्क्रिप्शन में एक टेलीग्राम चैनल का लिंक डाला गया था."
हार्दिक मकाडिया ने यह भी बताया कि किसी ने उनके सोशल मीडिया अकाउंट को एक्स पर टैग करके उस अकाउंट की जांच किए जाने की अपील की थी.
उन्होंने जब उस वीडियो की जांच की तो उन्होंने वीडियो में मरीज़ और डॉक्टर को गुजराती में बात करते हुए देखा जिसके बाद उनकी टीम ने सारी जानकारियां जुटानी शुरू कीं.
उन्होंने आगे कहा, "इस मामले में छह लोगों को गिरफ़्तार किया गया है और एक व्यक्ति की तलाश अभी भी जारी है. ये सभी टेलीग्राम चैनल्स के ज़रिए एक-दूसरे से जुड़े हुए थे. हैकिंग के माध्यम से इन्होंने सारे वीडियोज़ का नेक्सस बनाया था."
उन्होंने ये भी बताया कि इस मामले में दो हैकर्स को गिरफ़्तार किया गया है.
यह पहली बार नहीं है, इससे पहले भी मुस्लिम महिलाओं से जुड़ी ऑनलाइन नीलामी जैसी घटनाएँ सामने आ चुकी हैं.
पहले भी सामने आए हैं ऐसे मामले

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जुलाई 2021 में 'सुल्ली डील्स' और 2022 में 'बुल्ली बाई' नाम से ऑनलाइन बोली की घटनाओं पर काफ़ी हंगामा मचा. यह बोली ओपन सोर्स ऐप गिटहब में हो रही थी.
इस ऐप पर मुस्लिम महिलाओं की तस्वीरों को बिना अनुमति के मॉर्फ़ (तस्वीर को अपने हिसाब से बदलना) करके ऑनलाइन डाला जा रहा था.
'सुल्ली डील्स' के मामले में दिल्ली पुलिस ने मध्य प्रदेश के इंदौर से 25 साल के वेब डिज़ाइनर ओंकारेश्वर ठाकुर को गिरफ़्तार किया था.
द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक़, उस समय ओंकारेश्वर ठाकुर ने यह स्वीकार किया था कि उन्होंने यह ऐप मुस्लिम महिलाओं को प्रताड़ित करने के लिए बनाया था. ठाकुर ने यह भी बताया था कि वो एक्स (उस समय पर ट्विटर) पर एक ग्रुप का हिस्सा थे, जो मुस्लिम महिलाओं को ट्रोल करता था.
जबकि बुल्ली बाई ऐप मामले में मुंबई पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ़्तार किया था. इनमें से दो लोग उत्तराखंड से थे और एक युवक बेंगलुरु से हिरासत में लिया गया था.
लेकिन मार्च 2022 में दिल्ली की एक अदालत से इन दोनों मामलों के अभियुक्तों को मानवीय आधार पर ज़मानत मिल गई थी.
मानसिकता पर सवाल

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महाकुंभ और गुजरात की घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं.
वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉक्टर निमेश जी. देसाई ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "समय के साथ-साथ जेंडर रोल्स समाज में अपनी जड़ें और मज़बूती से फैला रहे हैं जिसकी वजह से पुरुषों की महिलाओं पर हावी होने की सोच को बढ़ावा मिल रहा हैं."
"वहीं आधुनिक तकनीक की मदद से वह अपनी इस सोच को आसानी से अंजाम दे पा रहे हैं और कहीं ना कहीं इस तरह की घटनाओं के पीछे का कारण सिर्फ़ पैसा कमाना भी है."
डॉक्टर देसाई ने यह भी कहा कि इस तरह के अपराध के लिए कड़े क़ानून नहीं हैं, जिसकी वजह से लोगों के अंदर डर नहीं है.
इस मामले पर साइकोलॉजिस्ट करिश्मा मेहरा ने कहा, "समाज में जेंडर रोल्स अहम भूमिका निभाते हैं. जिसकी वजह से महिला को एक ऑब्जेक्ट की तरह देखा जाता है. इस मानसिकता के साथ पुरुष महिला के साथ अपने बर्ताव को सही मानते हैं और पुरुषों के इस बर्ताव को समाज में ग़लत भी नहीं माना जाता है."
"कई बार पुरुषों की हरकतों के लिए महिलाओं को दोष दिया जाता है, जिसकी वजह से पुरुषों के अंदर महिलाओं के लिए संवेदनशीलता पैदा ही नहीं हो पाती है."
टेलीग्राम पर संदिग्ध गतिविधियों का क्या है कारण

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अन्य सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म के मुक़ाबले टेलीग्राम पर ऐसी ग़ैर क़ानूनी गतिविधियाँ क्यों अधिक हैं?
इस सवाल पर साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट शुभम सिंह कहते हैं, "टेलीग्राम में एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन है जिसकी वजह से सरकार के लिए अवैध गतिविधियों को ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है. व्हाट्सऐप और फ़ेसबुक जैसे अन्य प्लेटफ़ॉर्म्स की तुलना में, टेलीग्राम पर बड़े ग्रुप्स को कम निगरानी में आसानी से चलाने की अनुमति है."
"टेलीग्राम में यूज़र्स के लिए अकाउंट बनाना बहुत आसान है और इसे आसानी से डिलीट किया जा सकता है. जिससे क़ानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए अपराधियों को ट्रैक करना कठिन हो जाता है. इसमें कई अवैध बाज़ार, धोखाधड़ी नेटवर्क और उग्रवादी समूह सक्रिय हैं."
शुभम सिंह ने यह भी बताया कि टेलीग्राम सरकार के साथ बहुत सीमित रूप में सहयोग करता है और यूज़र्स की प्राइवेसी का हवाला देकर डेटा साझा करने के अनुरोधों का अक्सर विरोध करता है.
शुभम कहते हैं, "ग़ैर क़ानूनी कंटेंट के ख़िलाफ़ मज़बूत क़ानून होने चाहिए. इन्हीं चीज़ों से बचाने के लिए जागरुकता अभियान चलाए जाने चाहिए. टेलीग्राम को भी इसे रोकने के लिए बेहतर तरीक़े से मॉनिटरिंग करनी चाहिए. टेलीग्राम दुबई से काम करता है, जिसकी वजह से इस ऐप पर यूरोपीय संघ या अमेरिका की नीतियाँ लागू नहीं होती हैं. इसके अलावा टेलीग्राम पर लाखों ग्रुप्स और चैनल्स हैं, जिन्हें मॉनिटर करना लगभग असंभव सा है."
क़ानून में क्या हैं प्रावधान?

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वकील राधिका थापर ने बीबीसी से कहा, "भारतीय न्याय संहिता में धारा 509 है. उसके अधीन किसी महिला की निजता भंग करने के इरादे से किए गए अपराध में तीन साल तक की सज़ा हो सकती है. धारा 509 के मुताबिक़ अगर किसी महिला को आप ऑब्जेक्टीफाई करते हैं, तो वो अपराध की श्रेणी में आता है. चूँकि सोशल मीडिया ज़्यादा इस्तेमाल हो रहा है तो आईटी एक्ट का भी एक रोल है."
उन्होंने बताया, "अगर कोई अश्लील सामग्री प्रकाशित करता है या प्रसारित करता है, तो आईटी एक्ट के सेक्शन 67 के तहत दंड का प्रावधान है. सेक्शन 67 और 67 ए दो सेक्शन हैं, जिसके चलते ऐसी सामग्री को प्रकाशित नहीं किया जा सकता. ये सिर्फ़ महिलाओं के मामले में ही नहीं, बल्कि बच्चों और दूसरे मामलों में भी है."
क्या ये क़ानून महिलाओं से जुड़े अपराधों को रोकने के लिए काफ़ी हैं?
राधिका कहती हैं, "तकनीक आगे बढ़ती जा रही है. हमारे पास ऐसा प्रावधान है जिसके तहत कोई कार्रवाई हो सकती है. महांकुभ जैसे आयोजन जहाँ होते हैं, वहाँ महिलाओं की सुरक्षा को लेकर अलग से इंतज़ाम करने की ज़रूरत भी है."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

















