नई दिल्ली रेलवे स्टेशन: शनिवार रात 15 मिनट के दौरान क्या हुआ, भगदड़ कैसे मची

इमेज स्रोत, Getty Images
- Author, चंदन कुमार जजवाड़े
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
शनिवार रात को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर मची भगदड़ में अब तक 18 लोगों की मौत हो चुकी है और 13 अन्य घायल हैं.
इस हादसे का शिकार महिलाएं और बच्चे भी हुए हैं. रेलवे के मुताबिक़ कुंभ स्नान के लिए प्रयागराज जाने वालों की भारी भीड़ की वजह से यह भगदड़ हुई है.
यह हादसा ऐसे समय में हुआ है, जब रेलवे की तरफ से लगातार स्पेशल ट्रेनें चलाने और कुंभ मेले की भीड़ पर वॉर रूम (मॉनिटरिंग रूम) के ज़रिए नज़र रखने का दावा किया जा रहा है.
तो आख़िर शनिवार को नई दिल्ली स्टेशन पर क्या हो गया, जिसे संभाल पाने में रेल विभाग नाकाम रहा और लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी? इस रिपोर्ट में हम नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर शनिवार रात के उस 15 मिनट पर गौर करेंगे, जिस दौरान हादसा हुआ.

बीबीसी हिंदी के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

रेलवे सुरक्षा बल के पूर्व महानिदेशक अरुण कुमार का कहना है, "इस मामले में पूरी तरह से समन्यवय का अभाव दिखाई दिया है. आरपीएफ़ हर वक्त सीसीटीवी पर भीड़ की मॉनिटरिंग करता है और ज़रूरी सूचना भेजता है."
"अगर स्टेशन के किसी प्लेटफॉर्म पर भारी भीड़ जमा थी तो अगली ट्रेन को किसी और प्लेटफॉर्म पर आने को कहना चाहिए था, एक ही जगह के आसपास सारी ट्रेनें लगाना बड़ी गड़बड़ी थी. हम लोग छठ के समय पर होल्ड-अप एरिया बनाते हैं ताकि अतिरिक्त भीड़ को वहां रोक सकें. इस बार कुंभ में रेलवे ने ऐसी कोई तैयारी नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर नहीं की थी."
अरुण कुमार मानते हैं कि नई दिल्ली स्टेशन पर वही ग़लती की गई है, जिसके बारे में पहले से पता होना चाहिए था.
वो कहते हैं कि रेलवे की तरफ से चूक हुई है और वो शाम से छह बजे से रात दस बजे तक बढ़ती भीड़ को व्यवस्थित नहीं कर पाए.
इसी दौरान रात के क़रीब साढ़े नौ से पौने दस के बीच दो प्लेटफॉर्म पर हालात बेकाबू हो गए. लोग एक प्लेटफॉर्म से दूसरे प्लेटफॉर्म की तरफ भागने लगे. इस कारण मची भगदड़ में लोग एकदूसरे पर गिरने लगे. हादसे में अब तक 18 लोगों की जान गई है और कई घायल हुए हैं.
एक तरफ जाने वाली कई ट्रेनों की भीड़

इमेज स्रोत, Getty Images
शनिवार को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर शाम के 7 बजे के क़रीब अचानक मुसाफ़िरों की संख्या बढ़ने लगी.
इस स्टेशन से प्लेटफॉर्म नंबर 12 से शिवगंगा एक्सप्रेस शाम के आठ बजे रवाना हुई.
इस समय तक स्टेशन पर मुसाफिरों की भीड़ इतनी बढ़ चुकी थी, कई लोग इस ट्रेन का टिकट होने के बाद भी ट्रेन में सवार नहीं हो सके.
इसी प्लेटफॉर्म नंबर 12 पर रात के पौने नौ बजे यानी 20:45 पर नई दिल्ली से सुबेदारगंज (प्रयागराज) के लिए स्पेशल ट्रेन लगाई गई, जिसका नंबर 04404 था.
इसी ट्रेन के लगने के थोड़ी देर बाद स्टेशन पर ऐसा कुछ हुआ, जिसकी न तो मुसाफ़िरों ने कल्पना की थी और न ही जिसके लिए रेलवे तैयार था.
शनिवार को प्लेटफ़ॉर्म नंबर 14 पर रात क़रीब साढ़े नौ बजे प्रयागराज एक्सप्रेस ट्रेन लगाई गई, जो रात सवा दस बजे रवाना हुई. यानी इसके मुसाफ़िर इस प्लेटफॉर्म पर जमा थे.
इससे पहले यहां बिहार की तरफ जाने वाली मगध एक्सप्रेस की भीड़ भी खड़ी थी.
प्लेटफॉर्म नंबर 13 पर बिहार की तरफ जाने वाली स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस के मुसाफिर इकट्ठा थे, जो तीन घंटे की देरी से रात बारह बजे के बाद रवाना हुई है.
यानी कुछ ही समय से अंतराल में नई दिल्ली से पूर्वी भारत की तरफ जाने वाली कई भारी मांग वाली ट्रेनें रवाना हो रही थीं और ये प्लेटफॉर्म नंबर 12, 13 और 14 की ट्रेनें थीं.
यही वो वक्त था जिस समय भगदड़ ने पहली दस्तक दी. हालांकि रेलवे अधिकारी हादसे का समय और वजह जानने के लिए जांच पूरी होने तक का इंतज़ार कर रहे हैं.
स्पेशल ट्रेन के लगते ही भगदड़ के हालात

जिस वक़्त प्लेटफॉर्म नंबर 12 पर कुंभ स्पेशल ट्रेन के लगाने की घोषणा की गई, उस वक़्त प्लेटफ़ार्म नंबर 14 पर मुसाफ़िरों की भारी भीड़ 'प्रयागराज एक्सप्रेस' ट्रेन का इंतज़ार कर रही थी.
प्रयागराज एक्सप्रेस एक नियमित ट्रेन है और नई दिल्ली के प्रयागराज जाने के लिए सबसे लोकप्रिय ट्रेनों में से एक है.
उत्तर रेलवे के प्रवक्ता हिमांशु उपाध्याय ने बीबीसी को बताया, "प्लेटफॉर्म नंबर 14 पर प्रयागराज एक्सप्रेस आने वाली थी, लोग उसका इंतज़ार कर रहे थे. इसी बीच भीड़ को देखते हुए प्लेटफॉर्म नंबर 12 पर एक ट्रेन लगाई गई और लोग प्लेटफॉर्म नंबर 14 से प्लेटफॉर्म नंबर 12 की तरफ जाने लगे."
"इसी में लोग एक दूसरे को क्रास करने लगे, कोई फिसल गया, कोई गिरा और ये दुःखद घटना हुई."
इस दौरान स्टेशन पर मौजूद एक चश्मदीद का कहना है कि रात के क़रीब साढ़े नौ बजे तक भीड़ बहुत ज़्यादा बढ़ चुकी थी, लेकिन भगदड़ शुरू नहीं हुई थी.
हालांकि उनका कहना है कि जितनी बड़ी संख्या में भीड़ थी, उस हिसाब से सुरक्षाकर्मी नज़र नहीं आ रहे थे.

इस मामले में रेलवे स्टेशन पर काम करने वाले कुछ लोगों ने नाम न ज़ाहिर करने की शर्त पर हमें बताया कि स्पेशल ट्रेन की घोषणा के बाद मुसाफ़िर कन्फ्यूज़ हो गए कि क्या करें. उनके सामने अचानक दो विकल्प आ गए, तो प्लेटफ़ॉर्म नंबर 12 वाले प्लेटफ़ॉर्म नंबर 14 की तरफ भागने लगे और 14 वाले 12 की तरफ भागने लगे. इसी में भगदड़ हो गई.
उनका कहना है लोगों को समझ में नहीं आ रहा था कि किस ट्रेन से जाएं, एक ही समय में दोनों ट्रेनों की घोषणा की वजह से यह सब हुआ है.
लोग एक प्लेटफ़ॉर्म से दूसरे प्लेटफॉर्म की तरफ भागने लगे, जिस कारण भगदड़ हुई. ये प्लेटफॉर्म नंबर 14 और इसके साथ के फुट ओवर ब्रिज (एफ़ओबी) पर हुई. यह घटना रात क़रीब साढ़े नौ और पौने दस के बीच हुई है.
कई चश्मदीदों ने भी मीडिया को बताया कि ट्रेन की घोषणा के बाद ही प्लेटफॉर्म पर भगदड़ शुरू हुई थी.
रेल अधिकारी इस बात से इनकार कर रहे हैं कि किसी ट्रेन के नियमित प्लेटफ़ॉर्म को बदला गया था.
दूसरी तरफ कुछ मुसाफिरों और चश्मदीदों ने आरोप लगाए हैं कि रेलवे ने अंतिम समय में प्लेटफॉर्म बदले की घोषणा कर दी, जिसकी वजह से यह भगदड़ हुई.

इमेज स्रोत, NTES
रेलवे आमतौर पर अपनी वेबसाइट एनटीईएस पर हर ट्रेन के आगमन और प्रस्थान से जुड़ी सामान्य जानकारी अपडेट करता है. हमने जब इस वेबसाइट पर जाकर '04404 कुंभ स्पेशल' ट्रेन की जानकारी जुटानी चाही तो यहां शनिवार रात को केवल इस ट्रेन के 31 मिनट की देरी से रवाना होने की जानकारी दी गई है.
एनटीईएस पर इस स्पेशल ट्रेन से जुड़े प्लेटफॉर्म की जानकारी नहीं दी गई है, जो अन्य ट्रेनों के लिए दी गई है.
अभी इस सवाल का जवाब भी नहीं मिल पाया है कि हादसे के वक़्त 16 नंबर प्लेटफॉर्म की तस्वीर क्या थी? अगर यहां कोई ट्रेन खड़ी नहीं थी तो स्पेशल ट्रेन को पहले से ही इसी प्लेटफॉर्म पर क्यों नहीं लाया गया.
हादसा हो जाने के बाद रेलवे ने घोषणा की है कि नई दिल्ली स्टेशन से कुंभ स्पेशल ट्रेनें प्लेटफॉर्म नंबर 16 से चलाई जाएंगीं. दरअसल अजमेरी गेट की तरफ से यह पहला प्लेटफॉर्म है जहां पहुंचने के लिए सीढ़ियों की ज़रूरत नहीं पड़ती है.
ट्रेन की देरी कितनी बड़ी वजह

इमेज स्रोत, NTES
माना जा रहा है कि स्टेशन पर लगने वाली इस भीड़ में कुछ ट्रेनों का लेट हो जाना भी एक वजह है.
इनमें से एक ट्रेन है 12562 स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस, जो अपने निर्धारित समय यानी रात सवा नौ बजे की जगह तीन घंटे की देरी से रवाना हुई.
यह ट्रेन प्लेटफ़ॉर्म नंबर 13 से रवाना हुई, जिसकी वजह से इस प्लेटफॉर्म पर घटना के वक़्त बड़ी भीड़ जमा थी.
अरुण कुमार कहते हैं, "जब एक या दो ट्रेनें लेट हो रही हैं तो उसे किसी अन्य प्लेटफॉर्म से रवाना करने की घोषणा कर, लोगों को दूर के प्लेटफॉर्म पर भेजकर भीड़ को कम किया जा सकता था."
रेलवे ने इस घटना के लिए रात में ही एक उच्च स्तरीट कमेटी का गठन किया है, जिसके एक सदस्य आरपीएफ़ अधिकारी पंकज गंगवार भी हैं. पंकज गंगवार प्रिंसीपल चीफ़ सेफ़्टी कमीश्नर हैं.
पंकज गंगवार रविवार सुबह नई दिल्ली स्टेशन पर घटनास्थल की जांच के लिए पहुंचे.
हमने उनसे कई सवाल पूछे- भीड़ को देखते हुए स्टेशन पर कितने सुरक्षाकर्मी तैनात थे? जांच से पहले ही घटनास्थल को साफ कर दिया गया, क्या इसका कोई असर जांच पर पड़ सकता है? इस घटना के पीछे शुरुआती वजह क्या नज़र आती है?
उन्होंने ऐसे हर सवाल के जवाब में जांच पूरी होने तक इंतज़ार करने को कहा.

एक तरफ रेलवे के अधिकारी शनिवार की भीड़ को अप्रत्याशित भीड़ बता रहे हैं, वहीं उत्तर प्रदेश सरकार प्रयागराज में रिकॉर्ड संख्या में कुंभ स्नान करने वालों के पहुंचने की बात कर रही है.
रेलवे की तरफ से आमतौर पर छठ जैसे त्योहार के दौरान बड़ी तैयारी की जाती है और भीड़ को अलग-अलग जगहों में बांटकर रखा जाता है, ताकि उन्हें स्पेशल ट्रेन के चलने के समय पर प्लेटफॉर्म की तरफ भेजा जाए और अतिरिक्त भीड़ की व्यवस्थित किया जा सके.
प्रयागराज और उसके आसपास के स्टेशन और सड़कों पर लोगों की भारी भीड़ और ट्रैफ़िक जाम की ख़बरें कई दिनों से सुर्खियों में हैं और रेलवे की तरफ से भी नई दिल्ली स्टेशन से प्रयागराज के लिए शनिवार को शाम के समय दो स्पेशल ट्रेनें चलाई गईं थीं.
रेल मंत्रालय के एक्ज़ीक्यूटिव डायरेक्टर इन्फ़ोर्मेशन पब्लिसिटी दिलीप कुमार ने बीबीसी से कहा, "शाम में ज़्यादा भीड़ हो गई, प्लेटफॉर्म नंबर 14 और 15 पर काफ़ी भीड़ हो गई. इससे पहले सबकुछ सही था. हमने कुछ स्पेशल ट्रेनें भी चलाई थीं जो सही तरीके से निकल गईं."
"लोगों को रात में लगा कि ये आख़िरी ट्रेन है और इसी वजह से शायद धक्का-मुक्की या भगदड़ जैसी स्थिति हो गई. शायद लोग सीढ़ियों पर लोग गिर गए और फिर ये घटना हो गई."

रेलवे स्टेशन पर आमतौर पर कई बार ऐसी तस्वीर देखने को मिलती है, जब लोग प्लेटफ़ॉर्म के साथ ही एफ़ओबी और सीढ़ियों पर बैठकर ट्रेनों का इंतज़ार करते हैं.
ऐसे लोग ट्रेन को देखकर संबंधित प्लेटफ़ॉर्म की तरफ चल पड़ते हैं. इसका मक़सद होता है कि उन्हें सामान लेकर सीढ़ियां न चढ़नी पड़ें या ज़्यादा न चलना पड़े.
शनिवार रात को भी नई दिल्ली स्टेशन पर हालात ऐसे ही थे.
ऑल इंडिया रेलवे मेन्स फ़ेडरेशन के महामंत्री शिव गोपाल मिश्रा कहते हैं, "रेलवे से चूक तो हुई है कि वो इस भीड़ को संभाल नहीं पाए, भीड़ के सामने अंतिम समय की घोषणा की वजह से ऐसा हुआ है. लेकिन यह व्यवस्था लोगों के सहयोग के बिना संभव नहीं है, लोगों को भी समझना होगा कि वो जहां-तहां न बैठें ताकि लोगों का आना-जाना प्रभावित हो और ऐसा हादसा हो जाए."
सप्ताहांत होने की वजह से प्रयागराज जाने वालों की भीड़ को देखते हुए नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से पहले शाम पांच बजकर बीस मिनट पर फाफा मऊ के लिए एक स्पेशल ट्रेन चलाई गई.
इसी रूट पर दूसरी ट्रेन शाम सात बजकर पंद्रह मिनट पर चलाई गई.
ऐसी ट्रेनों को 'ट्रेन ऑन डिमांड' कहते हैं जो भीड़ को देखकर अंतिम समय में चलाई जाती है.
भीड़ तो देखते हुए ही शनिवार को नई दिल्ली से पहले शाम पांच बजकर बीस मिनट पर और फिर शाम सवा सात बजे फाफा मऊ (प्रयागराज) के लिए ट्रेन रवाना की गई थी. लेकिन भारी भीड़ के बाद भी अगली स्पेशल ट्रेन रात दस बजे के बाद रवाना की गई.
इसी दौरान स्टेशन पर वह हादसा हुआ है, जिसके कई सवालों के जवाब मिलने अभी बाक़ी हैं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

















