संगम नोज क्या है, जहाँ योगी आदित्यनाथ ने नहीं जाने को कहा

संगम नोज़

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इमेज कैप्शन, कुंभ मेले में अमृत स्नान (जिसे शाही स्नान कहा जाता रहा है) को सबसे भव्य और पवित्र अनुष्ठान माना जाता है.

प्रयागराज में कुंभ में मौनी अमावस्या (29 जनवरी) की रात संगम नोज़ पर भगदड़ मचने से 30 लोगों की मौत हुई है और लगभग 60 घायलों का अस्पतालों में इलाज चल रहा है.

भगदड़ मचने के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रद्धालुओं से संगम नोज न जाने की अपील की है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि वो यहाँ पहुंचने की कोशिश ना करें और जिस घाट पर हैं, वहीं स्नान करें.

लाल लकीर

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कुंभ की शुरुआत 13 जनवरी को पौष पूर्णिमा के पहले स्नान के साथ हुई थी. दूसरे दिन यानी 14 जनवरी को मकर संक्रांति पर कुंभ का दूसरा और अखाड़ों का पहला अमृत स्नान था.

कुंभ में अमृत स्नान का ख़ास महत्व है. अमृत स्नान को 'राजयोग स्नान' भी कहा जाता है. महाकुंभ मेला सबसे प्रमुख धार्मिक अनुष्ठान है.

इस दौरान संगम के एक बड़े हिस्से को अखाड़ों के लिए रिजर्व कर दिया गया था. लकड़ी की बल्लियों से नागा साधुओं के लिए संगम घाट पहुंचने के लिए रास्ते बनाए गए थे.

क्या है संगम नोज

संगम नोज़

संगम नोज़ वह जगह है, जहाँ गंगा और यमुना नदी का मिलन होता है. यही वजह है कि यहां श्रद्धालुओं की सबसे अधिक भीड़ होती है.

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यहां दोनों नदियों का पानी अलग-अलग रंग में दिखाई देता है. यमुना का पानी जहाँ हल्का नीला होता है, वहीं गंगा का पानी हल्का मटमैला दिखाई देता है.

यहां आकर यमुना नदी समाप्त हो जाती है और गंगा में मिल जाती है. कुंभ में इस क्षेत्र को संगम घाट के तौर पर चिह्नित किया गया है.

बीबीसी से बातचीत में प्रयागराज के ज्योतिषाचार्य पंडित रमेश पाण्डेय बताते हैं, "प्रयागराज में जब गंगा और यमुना जी का संगम होता है, तो त्रिकोण बनता है. ये नोक यानी नाक की तरह दिखाई देता है. यही वजह है कि अंग्रेजी में इसके लिए नोज़ शब्द का इस्तेमाल किया गया है."

वे कहते हैं, "दोनों नदियों के मिलने से एक कोण बनाता है. एक कोण से गंगा जी आती हैं, एक कोण से यमुना जी आती हैं. जब दोनों मिलती हैं तो एक नोक की तरह दिखने वाला कोण बनता है. इसके बाद यमुना जी गंगा में मिलकर बनारस की तरफ प्रस्थान कर जाती हैं."

रमेश पांण्डेय कहते हैं, "माघ मेले में संगम में न सिर्फ मनुष्य स्नान करते हैं, बल्कि मान्यता है कि देवता और दानव भी यहां स्नान करने के लिए आते हैं. खुद वेणी माधव संगम में विराजमान होते हैं, इसलिए संगम का महत्व बहुत अधिक माना जाता है. यहां स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है"

वे कहते हैं, "संगम नोज़ वो जगह है, जहां अलग-अलग अखाड़ों के संत अपने धार्मिक अनुष्ठान और अमृत स्नान करते हैं. अमृत स्नान के दिन संगम घाट पहुंचने के लिए अखाड़ों के लिए अलग-अलग रास्ते बनाए जाते हैं."

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक सिंचाई विभाग के 'मैकेनिकल बैराज मैकेनिकल सेक्शन मेंटेनेंस' यूनिट ने शास्त्री ब्रिज और संगम नोज के बीच 26 हेक्टेयर ज़मीन को बढ़ाने का काम किया है.

अधिकारियों के मुताबिक कुंभ को देखते हुए 85 दिनों के अंदर तीन शिफ्टों में काम कर अकेले संगम नोज पर दो हेक्टेयर ज़मीन को बढ़ाने का काम किया गया.

एजेंसी ने अधिकारियों के हवाले से बताया कि श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए 1650 मीटर के एरिया में रेत की बोरियां बिछाकर संगम घाट के क्षेत्र को बढ़ाया गया.

ऐसा करने के लिए टीम ने चार बड़ी ड्रेजिंग मशीनों का इस्तेमाल किया, जिसकी मदद से संगम घाट पर स्नान के लिए एक बड़े एरिया का निर्माण किया गया.

अधिकारियों के मुताबिक़ ऐसा करने के बाद संगम नोज पर स्नान क्षेत्र की क्षमता में तीन गुणा का इजाफा हुआ.

अधिकारियों का कहना है कि साल 2019 में संगम नोज पर एक घंटे में 50 हजार श्रद्धालु स्नान कर सकते थे, लेकिन अब हर घंटे दो लाख से ज्यादा श्रद्धालु स्नान कर सकते हैं.

प्रयागराज में संगम नोज

संगम नोज पहुँचने की होड़

कुंभ

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प्रयागराज का कुंभ 13 जनवरी शुरू होकर 26 फ़रवरी तक चलेगा. इससे पहले साल 2019 में अर्धकुंभ और साल 2013 में पूर्णकुंभ का आयोजन प्रयागराज में किया गया था.

हर 12 साल में चार बार क्रमिक रूप से हरिद्वार, उज्जैन, नासिक और प्रयागराज में कुंभ का आयोजन होता है.

प्रयागराज का कुंभ मेला क्षेत्र क़रीब 4 हज़ार हेक्टेयर ज़मीन पर फैला है. इसे 25 सेक्टरों में बाँटा गया है.

उत्तर प्रदेश सरकार ने कुंभ मेला क्षेत्र को राज्य का 76 वां ज़िला घोषित किया है. मेला क्षेत्र में प्रशासन ने कुल 41 घाट तैयार किए हैं.

इनमें 10 पक्के घाट हैं जबकि 31 अस्थायी घाट हैं. इन घाटों पर पहुंचने के लिए 14 प्रमुख मार्ग समेत 30 से मार्ग हैं.

अमृत स्नान के दिन अलग अलग रास्तों से प्रयागराज पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को नज़दीकी घाट पर रोका जाता है ताकि संगम घाट पर भीड़ ज्यादा ना हो.

अमृत स्नान के अलावा अन्य दिनों में लोग अरैल घाट से नाव में बैठकर संगम नोज पहुंचते हैं और स्नान करते हैं.

लेकिन अमृत स्नान के दिन घाटों पर नावों को बंद कर दिया जाता है ताकि श्रद्धालु नाव लेकर संगम ना पहुंच पाए और श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित किया जा सके.

पहले अमृत स्नान के दिन कई श्रद्धालुओं ने बीबीसी से बातचीत करते हुए शिकायत की थी कि वे संगम घाट नहीं पहुंच पा रहे हैं क्योंकि अन्य घाटों से प्रशासन ने नावों को बंद कर दिया था.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

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