सीबीआई ने एक साल बाद खोला महंत नरेंद्र गिरि का बेडरूम, क्या-क्या मिला? - प्रेस रिव्यू

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अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध मौत की जांच कर रही सीबीआई की टीम गुरुवार को प्रयागराज के बाघंबरी मठ पहुंची.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया की ख़बर के मुताबिक, पुलिस और मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में महंत नरेंद्र गिरि के सील किए गए बेडरूम को खोला गया.
दावा किया जा रहा है कि कमरे से करीब ढाई से तीन करोड़ रुपये नकद, एक वसीयत, 13 कारतूस, करोड़ों रुपयों के जेवर और 10 क्विंटल देसी घी बरामद मिला है. साथ ही ज़मीनों के कागज़ात भी मिले हैं.
तीन करोड़ रुपये की गड्डियों से भरे दो बैग उस पलंग में बने दराज में पाए गए हैं, जिस पर महंत नरेंद्र गिरि सोते थे. ये वही कमरा है जिसे उनकी मौत के चार दिन दिन बाद सीबीआई ने पांच लोगों की मौजूदगी में सील किया था.
मठ के वर्तमान उत्तराधिकारी बलबीर गिरि ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर कर महंत नरेंद्र गिरि के कमरे को खुलवाने की अपील की थी. उन्होंने अपनी अपील में कहा था कि मठ में मौजूद सारी संपत्ति और नकद, केस का हिस्सा नहीं है इसलिए वो सब मठ को लौटाया जाए.
कोर्ट ने सीबीआई को आदेश दिया था जिसके बाद कमरा खोला गया. इस दौरान सीबीआई के साथ बैंक के अधिकारी भी थे. जाँच के बाद कमरे से मिला सामान मठ को सौंप दिया गया है.
हालांकि अमर उजाला के मुताबिक महंत बलबीर गिरि ने महंत नरेंद्र गिरि के कमरे से करोड़ों रुपये मिलने की बात से इनकार किया है.
यह सवाल भी उठ रहे हैं कि करीब चार दिन तक महंत नरेंद्र गिरि के करीबियों की निगरानी में रहे इस कमरे में असल में कितने रुपये और क्या सामान था, यह जांच का विषय है.
उठ रहे हैं सवाल
अमर उजाला के मुताबिक सीबीआई ने नरेंद्र गिरि की मौत के चार दिन बाद जिन चश्मदीदों की मौजूदगी में कमरा सील किया था उनमें से दो लोग कमरे का ताला खोलते वक़्त वहां नहीं थे.
सीबीआई ने महंत के कमरे को पांच लोगों की मौजूदगी में सील किया था. इनमें सीबीआई के दो अधिकारी, अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और निरंजनी अखाड़े के सचिव महंत रवींद्र पुरी, बड़े हनुमान मंदिर के व्यवस्थापक अमर गिरि और बाघम्बरी मठ के मौजूदा पीठाधीश्वर बलबीर गिरि के नाम शामिल हैं.
लेकिन गुरुवार को जब कमरे की सील खोली गई तो वहां अमर गिरि और रवींद्र पुरी मौजूद नहीं थे. इसे लेकर भविष्य में सवाल खड़े हो सकते हैं.

क्या है पूरा मामला?
सितंबर 2021 में यूपी के प्रयागराज में बाघंबरी मठ में महंत नरेंद्र गिरि का शव पंखे से लटका मिला था. उनके एक शिष्य ने फोन पर पुलिस को इसकी सूचना दी थी.
पुलिस को महंत के कमरे से सुसाइड नोट भी मिला था जिसमें उन्होंने अपने एक शिष्य पर गंभीर आरोप लगाए थे. पुलिस ने सुसाइड नोट को फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया था.
जांच पड़ताल में पता चला था कि महंत नरेंद्र गिरि लगातार तनाव में रह रहे थे और अपने शिष्य आनंद गिरि से उनका पुराना विवाद भी चल रहा था. महंत नरेंद्र गिरि और उनके शिष्य आनंद गिरि के बीच विवादों का सिलसिला एक लंबे समय से चलता आ रहा था.
महंत नरेंद्र गिरि की मौत के मामले में आनंद गिरि को पुलिस ने गिरफ़्तार किया था.
आनंद गिरि के अलावा प्रयागराज के बड़े हनुमान मंदिर के मुख्य पुजारी आद्या तिवारी और उनके पुत्र संदीप तिवारी को भी गिरफ़्तार किया गया था. इन दोनों लोगों का भी ज़िक्र महंत नरेंद्र गिरि के कथित सुसाइड नोट में किया गया था.
ये तीनों फिलहाल जेल में हैं.
सीसीटीवी किसने बंद किए?
महंत नरेंद्र गिरि की मौत की गुत्थी अब तक नहीं सुलझी है.
20 सितंबर 2021 को उनके कमरे से लेकर आगंतुक कक्ष और इसके आसपास बाघम्बरी मठ परिसर के 15 कैमरे बंद पाए गए थे.
इन कैमरों का मॉनिटर कंट्रोल नरेंद्र गिरि के कमरे में ही था.

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पतंजलि ग्रुप की चार कंपनियों का आईपीओ आएगा
पतंजलि ग्रुप अपनी चार कंपनियों को अगले पांच सालों में शेयर माक्रेट में लिस्ट करने की योजना बना रहा है.
बिज़नेस स्टैंडर्ड की एक ख़बर के मुताबिक, पतंजलि आयुर्वेद, पतंजलि वेलनेस, पतंजलि लाइफ़ स्टाइल और पतंजलि मेडिसिन को अगले पांच साल में शेयर मार्केट में लिस्ट करने की योजना है.
पतंजलि ग्रुप की एक कंपनी पतंजलि फूड्स को पहले से ही शेयर बाज़ार में है. पहले यह कंपनी रुचि सोया इंडस्ट्रीज़ के नाम से जानी जाती थी.
हाल ही में पतंजति आयुर्वेद के बोर्ड ने फ़ैसला लिया है कि फूड बिज़नेस को रुचि सोया इंडस्ट्रीज़ में ट्रांसफर कर दिया जाए.
बाबा रामदेव नई दिल्ली में शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे, जिसमें वो इस संबंध में और अधिक जानकारी साझा कर सकते हैं.

वेदांता ग्रुप को महाराष्ट्र के सीएम शिंदे की चिट्ठी में क्या था?
महाराष्ट्र से गुजरात में अपने सेमीकंडक्टर प्लांट शिफ्ट करने के वेदांता ग्रुप के फैसले को लेकर उठे विवाद में एक और मोड़ आ गया है.
इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के अनुसार, 1.5 लाख करोड़ के इस प्रोजेक्ट को गुजरात ले जाने से पहले वेदांता ग्रुप ने महाराष्ट्र सरकार के सामने दो मांगें रखी थीं- केंद्र सरकार से तालमेल बनाना और कैबिनेट की मंज़ूरी.
वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल को 26 जुलाई को लिखे पत्र में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा था, 'आपकी दो महत्वपूर्ण मांगों- केंद्र सरकार से तालमेल बनाना और कैबिनेट की मंज़ूरी, मैं बताना चाहता हूं कि इन दोनों को लेकर राज्य एडवांस स्तर पर है और बेहद तेज़ी से आगे बढ़ रहा है.'
शिंदे ने 30 जून को शपथ ली थी. 29 जुलाई को एक एमओयू पर हस्ताक्षर के लिए अनिल अग्रवाल और फॉक्सकॉन के लिए आमंत्रित करके हुए सीएम शिंदे ने बताया था कि इस प्रोजेक्ट के लिए कैबिनेट की मंजूरी मिल जाएगी.
हालांकि प्रोजेक्ट गुजरात शिफ़्ट होने को लेकर अब विपक्ष सीएम शिंदे और बीजेपी को निशाने पर ले रहा है.
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