मधुमिता शुक्ला हत्याकांड: अमरमणि त्रिपाठी और उनकी पत्नी के जेल जाने की कहानी

अमरमणि त्रिपाठी और मधुमिता शुक्ला

इमेज स्रोत, Nidhi Shukla

    • Author, चंदन जजवाड़े
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

नौ मई, 2003 को लखनऊ के तक़रीबन सभी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी एक ख़ास बैठक में व्यस्त थे. शाम के चार बजे से चल रही इस बैठक में अगले दिन यानी 10 मई को शहर में होने वाले चुप ताज़िया के जुलूस की तैयारियों पर चर्चा हो रही थी.

मोहर्रम के दौरान निकलने वाले हज़ारों लोगों के इस जुलूस की सुरक्षा व्यवस्था लखनऊ पुलिस के लिए हमेशा से चुनौती रही थी.

तभी लखनऊ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अनिल अग्रवाल ने ज़िले के एसपी (क्राइम) राजेश पांडेय और एसपी ट्रांस-गोमती सत्येंद्रवीर सिंह को इशारे से बुलाया.

अनिल अग्रवाल ने दोनों ही अधिकारियों को निशातगंज जाने को कहा. वहां की पेपर मिल कॉलोनी के मकान नंबर सी-33/6 में एक महिला की हत्या की सूचना आई थी.

यह महिला थी मधुमिता शुक्ला, जिसके बारे में शुरू में पुलिस को कोई जानकारी नहीं थी.

ऊपर दी गई जानकारी इस केस को करीब से देख चुके आईपीएस राजेश पांडेय से मिली है.

पांडेय बताते हैं कि इस हत्या को पुलिस लूट की वजह से हुई हत्या के तौर पर देख रही थी, इसलिए एसपी क्राइम से कहा गया कि वो अपने ऑफ़िस में मौजूद उस एलबम को साथ लेकर जाएं जिसमें इलाक़े के लुटेरों की तस्वीरें हैं, ताकि चश्मदीदों से हत्यारे की पहचान कराई जा सके.

मकान के पहले ही कमरे में फ़र्श पर पड़ी युवा महिला की लाश देखते ही पुलिस को लगा कि इनको बिल्कुल क़रीब से गोली मारी गई है. पेपर मिल कॉलोनी के दो कमरों के छोटे से मकान में हुई यह हत्या अगले कुछ घंटों में लखनऊ से लेकर दिल्ली तक भूचाल मचाने वाली थी.

हत्या के दिन क्या हुआ?

मधुमिता शुक्ला और उनकी जुड़वां बहन निधि शुक्ला

इमेज स्रोत, Nidhi Shukla

इमेज कैप्शन, मधुमिता शुक्ला और उनकी जुड़वां बहन निधि शुक्ला
छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
कहानी ज़िंदगी की

मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ.

एपिसोड

समाप्त

जब पुलिस इस मकान में पहुंची तो घर में दो लोग मौजूद थे.

एक थीं मृतक की जुड़वां बहन निधि शुक्ला और दूसरा था घर में काम करने वाला देशराज. पुलिस के मुताबिक़ हत्या से पहले मधुमिता के जानने वाले दो लोग इस घर में आए थे, उन्होंने दोनों को घर के अंदर बुलाया और देशराज को चाय बनाने को कहा.

पूर्व आईपीएस अधिकारी राजेश पांडेय बताते हैं, "देशराज चाय बना ही रहा था कि उसे घर में गोली चलने की आवाज़ सुनाई दी. वो जल्दी से चूल्हे की आंच को बंद कर रसोई से बाहर आया तो देखा कि दीदी यानी मधुमिता शुक्ला के कमरे का दरवाज़ा बाहर से बंद था और उधर घर आए दोनों लोग मोटरसाइकिल से भाग रहे थे."

पुलिस ने मधुमिता शुक्ला के कमरे से उनका मोबाइल फ़ोन और एक डायरी ज़ब्त की. निधि शुक्ला ने पुलिस को बताया कि उनकी बहन एक कवियत्री थीं. अब तक पुलिस इस हत्या को अपराध की एक घटना की तरह ही ले रही थी.

जब पुलिस ने मधुमिता शुक्ला के मोबाइल फ़ोन में मौजूद नंबर देखे और मैसेज पर पुलिस की नज़र गई तो उन्हें समझ में आने लगा कि ये सामान्य कवियत्री नहीं हैं. फ़ोन में कई बड़ी राजनीतिक हस्तियों, मंत्रियों, सांसदों और विधायकों का नंबर सेव था.

इसके क़रीब एक घंटे बाद लखनऊ के एसएसपी अनिल अग्रवाल ख़ुद मौक़े पर पहुंचे. मधुमिता शुक्ला की बहन निधि शुक्ला ने अनिल अग्रवाल से कहा कि वो अकेले में उनसे कुछ बात करना चाहती हैं.

दरअसल निधि शुक्ला चार बजे शाम अपनी बहन के घर पहुंच गई थीं, लेकिन उन्होंने स्थानीय पुलिस को हत्या की सूचना सात बजे शाम को दी थी. निधि के बार- बार कहने पर पत्रकारों और सिपाहियों को एसएसपी ने उस जगह से दूर जाने को कहा.

फिर वरिष्ठ अधिकारियों को निधि शुक्ला ने बताया कि उनकी बहन यानि मधुमिता शुक्ला गर्भवती थीं और उसके गर्भ में उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री अमरमणि त्रिपाठी का बच्चा था.

पूरी सावधानी बरतने के बाद भी यह ख़बर मीडिया तक पहुंच गई और अगले दिन के अख़बारों की सुर्खियों में थी.

कौन हैं अमरमणि त्रिपाठी?

आईपीएस अधिकारी रहे राजेश पांडेय ने मधुमिता शुक्ला हत्याकांड की जांच को क़रीब से देखा है.

इमेज स्रोत, UP Police/Twitter

इमेज कैप्शन, आईपीएस अधिकारी रहे राजेश पांडेय ने मधुमिता शुक्ला हत्याकांड की जांच को क़रीब से देखा है.

उस वक़्त अमरमणि त्रिपाठी उत्तर प्रदेश की मायावती सरकार में कद्दावर मंत्री थे. इससे पहले वो साल 1997 से 2000 के बीच उत्तर प्रदेश में बीजेपी के शासन के दौरान कल्याण सिंह, राम प्रकाश गुप्ता और राजनाथ सिंह की सरकार में भी मंत्री रह चुके थे.

यूपी एसटीएफ़ में रह चुके और मधुमिता शुक्ला की हत्या के समय लखनऊ के एसपी क्राइम रहे राजेश पांडेय के मुताबिक़, “अमरमणि त्रिपाठी मूल रूप से पूर्वी उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के रहने वाले थे. पहले वो हरिशंकर तिवारी के साथ थे और उत्तर प्रदेश पुलिस में उनका नाम एक अपराधी के तौर पर कई जगहों पर दर्ज था.”

अमरमणि पूर्वी उत्तर प्रदेश के एक कद्दावर ब्राहम्ण नेता के तौर पर पहचान बच चुकी थी. वो साल 1989, 1996 और फिर 2002 में महाराजगंज की लक्ष्मीपुर सीट से विधानसभा का चुनाव जीत चुके हैं. मधुमिता की हत्या के अभियोग के बाद भी साल 2007 में वो नौतनवा सीट से विधान सभा का चुनाव जीतने में सफल रहे थे.

उस समय मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव और अब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पीएल पुनिया याद करते हैं, “मायावती शुरू में अमरमणि त्रिपाठी को मानती बहुत थीं. अमरमणि बोलते बहुत कम थे, लेकिन उन्हें अपनी बात रखनी आती थी. उन्होंने इस मामले में अधिकारियों पर दबाव बनाने की भी खूब कोशिश की थी.”

हत्या के अगले दिन शव का पोस्टमॉर्टम कराया गया और अमरमणि पूरे समय के लिए अपने कई लोगों के साथ पोस्टमॉर्टम हाउस में मौजूद थे. राजेश पांडेय के मुताबिक़ पोस्टमॉर्टम के बाद अमरमणि ने शव को मधुमिता शुक्ला के घर लखीमपुर खीरी के लिए रवाना करा दिया और उसके भ्रूण का नमूना तक नहीं लेने दिया ताकि इसकी डीएनए जांच न हो सके.

पोस्टमॉर्टम हाउस में मौजूद एक पत्रकार ने इसकी सूचना तत्कालीन एसएसपी अनिल अग्रवाल को दी. अनिल अग्रवाल के आदेश पर लखीमपुर खीरी से शव को दोबारा लखनऊ लाया गया. भ्रूण का डीएनए सैंपल लेकर उसी सुरक्षा की पूरी व्यवस्था की गई.

मधुमिता की बहन निधि शुक्ला याद करती हैं, “हम लोगों ने लखनऊ से 110 कि.मी. का सफर कर लिया था और हरगांव पहुंच चुके थे. हमारा घर महज़ 25 किलोमीटर दूर था और हमें वापस लखनऊ जाने का कहा गया. शुरू में तो हमे संदेह हो रहा था कि ऐसा क्यों किया जा रहा है.”

इसी दौरान अमरमणि त्रिपाठी ने इस मामले में ख़ुद को फ़ंसाने का आरोप लगाया और सरकार ने लखनऊ के एसपी क्राइम राजेश पांडेय का तबादला जालौन कर दिया गया. उन्हें तत्काल बार्डर पुलिस जॉइन करने का आदेश दिया गया.

उसके बाद इस मामले की जांच सीआईडी को दे दी गई. लेकिन सीआईडी के दो अधिकारी पूछताछ के लिए अमरमणि त्रिपाठी के घर पहुंच गए तो उन्हें भी राज्य सरकार ने निलंबित कर दिया.

राज्य सरकार की इस तरह की कार्रवाई बताती है कि उस वक़्त अमरमणि त्रिपाठी का राजनीतिक क़द कितना बड़ा था. सरकार के ऐसे फ़ैसले से यह मामला न्यूज़ चैनलों और अख़बारों की बड़ी ख़बर बन गया था.

‘वाजपेयी के कहने पर सीबीआई की जांच’

मंच पर मधुमिता शुक्ला की कवितातों पर खूब तालिया बजती थीं.

इमेज स्रोत, Nidhi Shukla

इस दबाव और मधुमिता शुक्ला की बहन निधि शुक्ला की मांग पर एक हफ़्ते बाद ही इस मामले को सीबीआई को सौंप दिया गया. उसके बाद 17 मई साल 2003 को सीबीआई की टीम ने इसकी जांच भी शुरू कर दी. सीबीआई ने यह जांच अपने एक अधिकारी राजा बालाजी को सौंपी थी.

निधि शुक्ला का दावा है कि यह मामला सीबीआई को उस समय के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कहने पर सौंपा गया था.

निधि शुक्ला कहती हैं, “मधु को इंसाफ़ दिलाने के लिए मैंने पिछले 20 साल से कई दरवाज़ों पर दस्तक दी है. कई लोगों को पत्र लिखे, मेल किया है. इसी सिललिले में प्रधानमंत्री रह चुके अटल जी से उनके दिल्ली के आवास 6 कृष्णा मेनन मार्ग पर मिलने गई थी.”

निधि शुक्ला के मुताबिक़ अटल बिहारी वाजपेयी ने उनको बताया था कि मधु की हत्या के समय वो विदेश दौरे पर थे और किसी विदेशी अधिकारी ने अख़बारों में इस ख़बर को देख कर उनसे पूछा था कि आपके देश में ये क्या हो रहा है?”

निधि का दावा है कि अटल जी को यह बहुत बुरा लगा था और उसके बाद अटल जी ने भारत में एक वरिष्ठ नेता को फ़ोन कर कहा था कि मेरे देश लौटने तक यह मामला सीबीआई के पास होना चाहिए.

इधर मामले की गंभीरता को देखते हुए मायावती ने अमरमणि को अपने मंत्रिमंडल से बरखास्त कर दिया.

पीएल पुलिया बताते हैं, “अमरमणि त्रिपाठी इन आरोपों के बाद इस्तीफ़ा देना चाहते थे, लेकिन मुख्यमंत्री ने उनका इस्तीफ़ा नहीं लिया बल्कि ख़ुद मंत्री पद से हटाया था.”

अमरमणि और मधुमिता का संपर्क

अमरमणि त्रिपाठी

इमेज स्रोत, Nidhi Shukla

इमेज कैप्शन, अमरमणि त्रिपाठी अपनी बात को रखने और मनवाने में माहिर नेता माते जाते रहे हैं.

मधुमिता शुक्ला मूल रूप से लखनऊ के पास लखीमपुर खीरी की रहने वाली थीं. स्कूल के समय से ही मंच पर कविता, तीखे व्यंग्य और राजनीतिक टिप्पणी की वजह से लोग उन्हें खूब पसंद करने लगे थे.

इसी दौरान साल 2000 के आस पास दिल्ली में एक कवि सम्मेलन में मधुमिता की मुलाक़ात अमरमणि त्रिपाठी की मां सावित्री मणि त्रिपाठी और उनकी दो बेटियों से हुई. निधि शुक्ला के मुताबिक़ सभी लखनऊ और इसके पास के थे, इसलिए उसी समय से मधु और उनमें काफ़ी अच्छे संबंध हो गए.

बाद में सावित्री मणि कई बार मधुमिता से मिलने उसके घर भी आई थीं. एक बार मधुमिता भी उनके घर गईं तभी अमरमणि त्रिपाठी से उनकी मुलाक़ात हुई. अमरमणि ने मधुमिता से अपने भाषणों के लिए कुछ पंक्तियां लिखने को कहा और दोनों के बीच संपर्क शुरू हो गया.

उसके बाद दोनों के बीच लगातार मुलाक़ात होने लगी और वो एक-दूसरे के काफ़ी क़रीब आ गए. इसकी सूचना अमरमणि त्रिपाठी की पत्नी मधुमणि त्रिपाठी को भी मिली. ज़ाहिर है इसके बाद उनकी अपने पति यानी अमरमणि त्रिपाठी से भी बहस और झगड़ा होने लगा.

लखनऊ के एसपी क्राइम राजेश पांडेय के मुताबिक़ सीबीआई ने अपनी जांच में पाया था कि एक बार मधुमणि त्रिपाठी किसी से जानकारी मिलने के बाद मधुमिता के घर पहुंच गई थीं और दोनों के बीच काफ़ी झगड़ा भी हुआ था.

हत्या की योजना

मधुमिता शुक्ला

इमेज स्रोत, Nidhi Shukla

इमेज कैप्शन, मधुमिता शुक्ला हत्याकांड देशभर में बड़ी सुर्खियों में था.

मधुमिता शुक्ला और मधुमणि त्रिपाठी के बीच कई बार फ़ोन पर भी झगड़ा हुआ था.

यहां तक कि मधुमिता शुक्ला ने उन्हें यह भी बताया था कि अमरमणि त्रिपाठी की वजह से वो दो बार गर्भवती हो चुकी हैं और दोनों बार उसे अबोर्शन कराना पड़ा.

पुलिस के मुताब़िक जब मधुमिता शुक्ला तीसरी बार गर्भवती हो गई तब मधुमणि त्रिपाठी भी अपने क़रीबियों के ज़रिए मधुमिता की हत्या की योजना बनाने लगी, क्योंकि मधुमिता तीसरी बार गर्भ गिराने को तैयार नहीं थी.

क़रीबियों ने बाद में इस साज़िश की सूचना अमरमणि त्रिपाठी को भी दे दी. राजेश पांडेय के मुताबिक़ उसके बाद अमरमणि त्रिपाठी भी इस साज़िश में शामिल हो गए.

निधि शुक्ला कहती हैं, “जिस दिन मधु की हत्या हुई उस दिन उसकी उम्र 19 साल 1 महीना और 6 दिन की थी. अमरमणि के इतिहास और चरित्र के बारे में सब जानते थे. उसने मधु की मासूमियत का फ़ायदा उठाकर उसे मूर्ख बनाया और फंसाने की कोशिश की. वो समझ नहीं पा रही थी.”

इस मामले में यह भी साबित करने की कोशिश हुई थी कि मधुमिता शुक्ला की शादी आईआईटी कानपुर के एक छात्र से नवंबर 2002 में हो गई थी. इसके लिए कॉलेज हॉस्टल के एक छात्र का अपहरण कर उसे गवाह बनाने तक की कोशिश हुई.

इसे साबित करने के लिए मधुमिता शुक्ला का फ़र्ज़ी कॉल डिटेल भी सीबीआई को सौंपने की कोशिश की गई. दरअसल आईआईटी में एक कवि सम्मेलन के आयोजन के सिलसिले में एक छात्र की मधुमिता से कई बार बात हुई थी.

यही नहीं, इसके लिए शादी कराने वाला एक पंडित और एक नाई तक को तैयार कर उन्हें गवाह बनाने की कोशिश की गई. राजेश पांडेय ने इस केस के हर पहलू पर किस्सागोई नाम के अपने यूट्यूब चैनल पर इसका ज़िक्र किया है.

राजेश पांडेय ने बीबीसी को बताया है कि अमरमणि त्रिपाठी कुछ भी मैनेज करने में माहिर आदमी थे. बाद में आईआईटी कानपुर के निदेशक ने अपनी जांच में अपने छात्र को बेक़सूर पाया और इसकी शिकायत उस समय के प्रधानमंत्री और लखनऊ के सांसद अटल बिहारी वाजपेयी तक से की थी.

डीएनए जांच के बाद सीबीआई ने इस मामले में सितंबर 2003 में अमरमणि को गिरफ़्ता कर लिया था. लेकिन गिरफ़्तारी कुछ हफ़्तों के बाद ही अमरमणि को इलाहाबाद हाई कोर्ट से ज़मानत मिल गई.

निधि शुक्ला आरोप लगाती हैं, “हमारे गवाहों को डराया धमकाया जाने लगा. हमारे तीन गवाह टूट गए. यहां तक कि गवाहों के कहा कि इतनी धमकी मिल रही है तो आप ज़िंदा कैसे हैं. मैं बात समझ गई और केस को दूसरे राज्य में ट्रांसफ़र कराने सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई.”

सुप्रीम कोर्ट ने बाद में अमरमणि की जमानत रदद् कर दी थी और सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर यह यह केस उत्तराखंड में ट्रांसफ़र कर दिया गया था.

देहरादून के सीबीआई कोर्ट ने 24 अक्टूबर 2007 को अमरमणि त्रिपाठी, मधुमणि त्रिपाठी, रोहित चतुर्वेदी और संजय राय समेत छह अभियुक्तों को दोषी पाया. कोर्ट ने हत्या में शामिल अमरमणि त्रिपाठी, मधुमणि को भी उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई थी.

गोरखपुर वापसी से रिहाई तक

अमरमणि त्रिपाठी

इमेज स्रोत, Getty Images

उत्तराखंड में उम्र क़ैद की सज़ा काट रहे अमरमणि त्रिपाठी और उनकी पत्नी को साल 2012 में गोरखपुर के जेल में ट्रांसफ़र कर दिया गया.

साल 2013 में अमरमणि गोरखपुर के ही बीआरडी कॉलेज हॉस्पिटल पहुंच गए. इससे पहले उनकी पत्नी भी इलाज के लिए इसी हॉस्पिटल में आ चुकी थीं.

निधि शुक्ला का आरोप है कि अमरमणि और उनकी पत्नी को हरिद्वार के रोशनाबाद जेल में होना चाहिए था. लेकिन बीते दस साल से वो लोग गोरखपुर के बीआरडी अस्पताल में हैं. गोरखपुर उनका घर है और उन्हें ऐसी क्या बीमारी है जिसका इलाज़ देहरादून या किसी अन्य जगह पर नहीं हो सकता.

साल 2013 में भी अमरमणि त्रिपाठी ने उत्तर प्रदेश सरकार से अपनी रिहाई के लिए अपील की थी. लेकिन उस वक़्त की अखिलेश यादव सरकार ने यह कहते हुए इस मांग को नामंज़ूर कर दिया था कि अमरमणि को सज़ा दूसरे राज्य में हुई है इसलिए यूपी सरकार रिहाई नहीं दे सकती.

निधि शुक्ला ने अमरमणि और उनकी पत्नी को गोरखपुर में रखने की वजह से सुप्रीम कोर्ट में कोर्ट की अवमानना का एक मामला भी दर्ज कराया है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ही इस मामले को उत्तर प्रदेश के उत्तराखंड भेजा गया था.

इसी महीने की 25 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई हुई है. कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को इसपर 8 हफ़्ते के अंदर जवाब देने को कहा है.

निधि शुक्ला का दावा है कि ऐसी ख़बर पूरी तरह ग़लत है कि सुप्रीम कोर्ट ने अमरमणि की रिहाई पर रोक लगाने से मना कर दिया है, क्योंकि हमने ऐसी कोई याचिका डाली ही नहीं थी.

उन्होंने बताया कि कोर्ट ने इसके लिए हमसे अलग से अपील करने को कहा है.

छोड़िए X पोस्ट
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

पोस्ट X समाप्त

सुप्रीम कोर्ट

इमेज स्रोत, ANI

इमेज कैप्शन, अमरमणि त्रिपाठी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को 8 हफ़्ते में जवाब देने को कहा है.

निधि शुक्ला बताती हैं, “मुझे किसी ने बता दिया था कि राज्य सरकार अमरमणि त्रिपाठी को छोड़ने की योजना बना रही है. इसलिए मैं सुप्रीम कोर्ट गई थी. लेकिन मैंने इसकी तारीख़ बता दी और यहीं मुझसे ग़लती हो गई. राज्य सरकार ने एक दिन पहले ही 24 अगस्त को ही अमरमणि को रिहा करने का फ़ैसला कर लिया.”

दरअसल राज्य सरकार के पास यह अधिकार है कि उम्र क़ैद पाए हुए क़ैदियों ने अगर कम से कम 14 साल क़ैद की सज़ा काट ली हो और इस दौरान उसका आचरण अच्छा हो तो, जांच और रिपोर्ट के आधार पर ऐसे क़ैदी को रिहाई दी जा सकती है.

राज्य सरकार के फ़ैसले के बाद बीते शुक्रवार को अमरमणि और उनकी पत्नी को मधुमिता शुक्ला हत्याकांड के मामले में रिहाई हो गई है.

निधि शुक्ला का मानना है कि बीते 11 साल से अमरमणि त्रिपाठी और उनकी पत्नी ज़्यादातर समय इलाज के नाम पर हॉस्पिटल में हैं, जेल में नहीं.

इसके अलावा वो चाहती हैं कि इस मामले में अमरमणि त्रिपाठी के आचरण को अच्छा बताने वाले अधिकारियों की भी जांच हो.

निधि शुक्ला का दावा है कि उन्होंने सरकार के इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ राज्यपाल को भी चिट्ठी लिखी है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)