मधुमिता हत्याकांड: अमरमणि की उम्रकैद बरकरार

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उत्तराखंड हाई कोर्ट ने कवियत्री मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी और उनकी पत्नी समेत चार लोगों की उम्रकैद को बरकरार रखा है जबकि पहले बरी किए गए पांचवे अभियुक्त को भी उम्रकैद की सजा सुनाई है.
मुख्य न्यायाधीश न्यायामूर्ति बरीन घोष और न्यायामूर्ति यूसी ध्यानी की खंडपीठ ने त्रिपाठी और दोषी करार दिए गए तीन अन्य लोगों की उस याचिका को खारिज दिया जिसमें निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी गई थी.
अदालत ने सीबीआई की इस याचिका को भी स्वीकार कर लिया कि प्रकाश चंद्र पांडेय उर्फ पप्पू को भी उम्रकैद दी जानी चाहिए जिन्हें देहरादून की अदालत ने बरी कर दिया था.
अदालत ने पुलिस को निर्देष दिया है कि पांडेय को तुरंत हिरासत में लिया जाए.
'कोई राहत नहीं'
मधुमिता की बहन निधि शुक्ला के वकील वीरेंद्र सिंह अधिकारी ने बताया कि दोषियों की याचिका को खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि त्रिपाठी या अन्य लोगों को कोई राहत नहीं दी जा सकती है क्योंकि सीबीआई हत्याकांड में उनकी भूमिका को साबित कर चुकी है.
त्रिपाठी, उनकी पत्नी मधुमणि और दो अन्य लोगों रोहित चतुर्वेदी और संतोष कुमार राय को 2007 में देहरादून की एक अदालत ने 2003 में लखनऊ में मधुमिता की हत्या की साजिश रचने और हत्या करने का दोषी ठहराया और उम्रकैद की सजा सुनाई.
छह माह की गर्भवती मधुमिता शुक्ला की 9 मई 2003 को लखनऊ में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. डीएनए टेस्ट से साबित हुआ कि मधुमिता शुक्ला हत्या के समय अमरमणि त्रिपाठी के बच्चे की मां बनने वाली थी.
सीबीआई प्रवक्ता के अनुसार मधुमिता की हत्या के बाद त्रिपाठी ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए जांच में बाधा पहुंचाने की भी कोशिश की.












