पीएम मोदी के यूक्रेन दौरे पर कैसे समझौते हुए, क्या कह रहा है वहां का मीडिया

यूक्रेन के मीडिया के मुताबिक़ भारत रूस और यूक्रेन के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाना चाहता है

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यूक्रेन यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच चार समझौते हुए हैं.

दोनों देश कृषि, फूड इंडस्ट्री, मेडिकल प्रोडक्ट्स रेगुलेशन, बेहद असरदार सामुदायिक सहायता परियोजनाओं और संस्कृति के क्षेत्र में मिलकर काम करेंगे.

ज़ेंलेस्की से मुलाक़ात के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें भीष्म (भारत हेल्थ इनिशिएटिव फॉर सहयोग, हित एंड मैत्री) क्यूब दिए. भारत ने कहा है कि ये क्यूब घायलों के तुरंत इलाज और लोगों की जान बचाने में मदद करेंगे.

भारत के विदेश मंत्रालय के मुताबिक़, हर भीष्म क्यूब सभी तरह की चोट और मेडिकल परिस्थिति से निपटने के लिए शुरुआती दवाएं और मेडिकल औजार से लैस होगा.

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इसमें बेसिक ऑपरेशन रूम के लिए ज़रूरी सर्जिकल औज़ार मौजूद होंगे. इसमें एक दिन में दस से पंद्रह सर्जरी की जा सकेगी.

इस क्यूब में जलने, फ्रैक्चर या खून बहने जैसी आपातकालीन परिस्थितियों में 200 केस निपटाने की क्षमता है.

इसमें अपनी बिजली और ऑक्सीजन पैदा करने की क्षमता होगी.

ज़ेलेंस्की को भीष्म क्यूब सौंपते पीएम मोदी

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यूक्रेन के मीडिया ने पुतिन-मोदी की मुलाक़ात याद दिलाई

मॉस्को में नरेंद्र मोदी रूस के राष्ट्रपति के साथ

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इमेज कैप्शन, मॉस्को में नरेंद्र मोदी रूस के राष्ट्रपति के साथ (फ़ाइल फ़ोटो)

यूक्रेन के मीडिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा को काफ़ी कवरेज दी है.

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‘कीएव इंडिपेंडेंट’ ने भारत और यूक्रेन के बीच समझौतों का ज़िक्र करते हुए संयुक्त बयान में ज़ेलेंस्की का हवाला दिया है.

ज़ेलेंस्की ने कहा है कि भारत और यूक्रेन के बीच ये सहयोग मज़बूत होना चाहिए.

नरेंद्र मोदी युद्ध में मारे गए बच्चों पर मल्टीमीडिया प्रदर्शनी देखने राष्ट्रीय संग्रहालय गए.

प्रधानमंत्री ने बच्चों की मौत पर दुख व्यक्त किया और उनके सम्मान के तौर पर उनकी याद में वहां एक खिलौना रखा.

‘कीएव इंडिपेंडेट’ ने इस दौरे का ज़िक्र करते हुए लिखा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले दिनों जब रूस की यात्रा के दौरान व्लादिमीर पुतिन को गले लगाया था तो ज़ेलेंस्की ने इसकी ये कहकर आलोचना की थी कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के नेता के दुनिया के सबसे ख़ूनी अपराधी से मॉस्को में गले लगाना शांति स्थापित करने की कोशिशों के लिए बड़ी निराशा की बात है.

दरअसल जिस दिन मोदी रूस पहुंचे थे उसी दिन यूक्रेन में रूस के हमले में 37 लोग मारे गए. इसमें तीन बच्चे भी शामिल थे. रूस ने यूक्रेन में बच्चों के सबसे बड़े अस्पताल पर हमला किया था.

'यूकेआर इन्फॉर्म' ने लिखा है कि भारत ने बातचीत और कूटनीति के ज़रिये सैन्य संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान पर अपने रुख़ को फिर दोहराया है.

यूक्रेन का शांति सम्मेलन और भारत का रुख़

रूस-यूक्रेन

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यूक्रेन ने भी कहा है कि शांति सम्मेलन बातचीत, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय कानून के आधार पर शांति को बढ़ावा देने की आगे की कोशिशों के लिए बुनियाद के तौर पर काम कर सकता है.

भारत यूक्रेन में शांति के लिए स्विट्ज़रलैंड में जून 2024 में आयोजित पीस समिट में हिस्सा ले चुका है.

यूक्रेन ऐसा ही एक और शांति सम्मेलन आयोजित करा रहा है.

यूकेआर इन्फॉर्म ने नरेंद्र मोदी के उस बयान का भी ज़िक्र किया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्होंने पुतिन से मुलाकात के दौरान उनकी आंखों में देखकर और मीडिया के सामने कहा था कि इस समस्या का हल सिर्फ बातचीत और कूटनीति ही है, इसलिए बगैर वक़्त बरबाद किए इस ओर बढ़ना ज़रूरी है.

एनवी यानी द न्यू वॉयस ऑफ यूक्रेन ने भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर के उस बयान को प्रमुखता से छापा है, जिसमें उन्होंने कहा है कि 2024 के अंत में होने वाले ग्लोबल पीस समिट के लिए यूक्रेन ही तय करेगा कि रूस को बुलाना है या नहीं.

जयशंकर ने कहा था कि शांति सम्मेलन यूक्रेन की पहल थी, जिसमें हमने हिस्सा लिया था.

उन्होंने कहा था, ''शांति सम्मेलन के मामले में अगला क़दम क्या होगा? वास्तव में कौन आएगा? रूस आएगा या नहीं. ये सब एक खुला प्रश्न है. ये हमारे फ़ैसले का सवाल नहीं है.''

अख़बार ने लिखा कि जयशंकर ने यूक्रेन और रूस के बीच समझौता कराने के लिए चीन की प्रस्तावित "शांति योजना" पर टिप्पणी करने से परहेज़ ही किया.

उन्होंने कहा कि ये सीधे तौर पर रूस और यूक्रेन के बीच का मामला है.

यूक्रेन

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इसने लिखा है कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 अगस्त को कीएव में राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की से मुलाकात की.

1991 में यूक्रेन की आज़ादी के बाद पहली बार किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने यूक्रेन का दौरा किया है.

स्विट्ज़रलैंड के विदेश मंत्रालय ने 16 जून को एलान किया था यूक्रेन में शांति के लिए अगला शांति सम्मेलन नवंबर में अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव से पहले आयोजित किया जा सकता है.

‘कीएव पोस्ट’ ने एक विश्लेषण में लिखा है कि पोलैंड की यात्रा के बाद नरेंद्र मोदी यूक्रेन पहुंचे हैं.

भारत पश्चिमी देशों और रूस दोनों से अच्छे संबंध बनाए हुए है और बातचीत के ज़रिये यूक्रेन समस्या के समाधान की वकालत कर रहा है.

इससे ये अटकलें तेज़ हो गई हैं कि मोदी रूस और यूक्रेन के बीच मध्यस्थता की भूमिका निभाने के इच्छुक हैं.

कीएव पोस्ट

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'कीएव पोस्ट' ने विश्लेषकों के हवाले से लिखा है कि यूक्रेन की यात्रा पर मोदी ये साबित करना चाहते हैं कि वो इस मामले में सभी अहम पक्षों से बात करन के लिए तैयार हैं.

'कीएव पोस्ट' लिखता है, ''यूक्रेन की यात्रा करके, मोदी दिखा रहे हैं कि वह सभी महत्वपूर्ण पक्षों से बात करने के लिए तैयार हैं. मोदी सिर्फ खुद को मध्यस्थ की भूमिका में नहीं दिखाना चाहते बल्कि वो काम कर रहे हैं जो उनके देश के हित में है. इसमें मध्य और पूर्वी यूरोप के देशों के साथ भारत का संबंध मज़बूत करना शामिल है.''

"दरअसल चीन के साथ ताक़त और प्रभाव की प्रतिस्पर्द्धा में उन्हें पश्चिमी देशों की मदद की ज़रूरत है.

भारत इतना बड़ा और ताकतवर देश है कि उसकी आवाज़ का एक महत्व है.

ये देश वैश्वक राजनीति के ऊपरी स्तर पर आने की कोशिश कर रहा है. भले ही उसके सामने कई दिक्कतें हैं.

यूक्रेन की यह यात्रा पश्चिम और पश्चिम के बाहर के देशों को भारत की रणनीति दिखाने का हिस्सा है.

इसका मतलब यह नहीं है कि भारतीय रातों-रात यूक्रेन समर्थक बन जाएगा बल्कि इसका मतलब ये है कि कोई भी देश उनके साथ बात कर सकता है."

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

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