कनाडा ने दिया भारत को 'झटका', क्या ये रिश्तों में नई गिरावट है?

    • Author, दीपक मंडल
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

कनाडा और भारत के रिश्तों में तनाव चरम पर पहुंचता दिख रहा है.

जी-20 सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत आए कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो निजी विमान ख़राब होने की वजह से पिछले दो दिनों से यहीं फंसे हुए थे.

लेकिन उनके स्वदेश पहुंचते ही ख़बर आई कि कनाडा ने भारत के साथ ट्रेड मिशन को रोक दिया है.

कनाडाई वाणिज्य मंत्री मैरी एनजी के प्रवक्ता ने शुक्रवार को बताया कि कनाडा ने द्विपक्षीय मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत रोक दी है.

जी-20 सम्मेलन के दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो में कथित तौर पर तल्ख़ बातचीत हुई थी.

भारतीय प्रधानमंत्री कनाडा में सिख अलगाववादियों के 'आंदोलन' और भारतीय राजनयिकों के ख़िलाफ़ हिंसा को उकसाने वाली घटनाओं को लेकर नाराज़ थे. जबकि जस्टिन ट्रूडो का कहना था कि भारत कनाडा की घरेलू राजनीति में दख़ल दे रहा है.

अलगाववादी आंदोलन से बिगड़ते रिश्ते

दरअसल पिछले कुछ समय से कनाडा में 'ख़ालिस्तान' समर्थक संगठनों की गतिविधियों की वजह से भारत के साथ उसके रिश्तों में तनाव दिख रहा है.

इस साल जुलाई में कनाडा में ‘ख़ालिस्तान’ समर्थक संगठनों ने कुछ भारतीय राजनयिकों के पोस्टर लगा कर उन्हें निशाना बनाए जाने की अपील की थी.

इसके बाद भारत ने कनाडा के राजदूत को बुला कर उनके देश में ‘ख़ालिस्तान’ समर्थक गतिविधियों पर कड़ी आपत्ति जताई थी.

जून 2023 में 'ख़ालिस्तानी' नेता हरदीप सिंह निज्जर की कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया में सरेबाज़ार हत्या कर दी गई थी.

इसके बाद सिख अलगाववादियों और भारत सरकार के बीच बढ़े तनाव के मंज़र कई देशों में दिखे.

ख़ालिस्तान समर्थकों ने निज्जर की हत्या के ख़िलाफ़ कनाडा के टोरंटो के अलावा लंदन, मेलबर्न और सैन फ्रांसिस्को समेत कई शहरों में प्रदर्शन किए.

निज्जर से पहले भारत सरकार की ओर से चरमपंथी घोषित किए गए परमजीत सिंह पंजवाड़ की भी मई में लाहौर में हत्या कर दी गई थी.

ख़ालिस्तान समर्थक नेताओं की मौत और भारत पर आरोप

जून में ब्रिटेन में अवतार सिंह खांडा की रहस्यमयी हालात में मौत हो गई थी. वो 'ख़ालिस्तान लिबरेशन फोर्स’ के चीफ़ बताए जाते थे.

सिख अलगाववादियों का आरोप था कि उन्हें ज़हर देकर मारा गया.

अलगाववादी सिख संगठनों ने इसे टारगेट किलिंग कहा था. उनका आरोप था कि भारत सरकार सिख अलगाववादी नेताओं को मरवा रही है.

हालांकि भारत सरकार ने आरोपों पर अब तक कुछ नहीं कहा है.

भारत में सिखों की आबादी दो फीसदी है. कुछ सिख अलगाववादी सिखों के लिए अलग देश 'ख़ालिस्तान' बनाने की मांग करते रहे हैं.

भारत का आरोप है कि कनाडा में सक्रिय सिख अलगाववादियों पर ट्रूडो सरकार नकेल कसने में नाकाम रही है.

भारत सरकार का कहना कि ये अलगाववादी कनाडा, ब्रिटेन और अमेरिका में भारत विरोधी गतिविधियां चला रहे हैं.

फिलहाल भारत और कनाडा के रिश्तों में जो तनाव दिख रहा है उसकी एक बड़ी वजह है कनाडा में सिख अलगाववादियों की सक्रियता.

कनाडा में 'ख़ालिस्तान' समर्थक आंदोलन इतना मुखर है कि सिखों के लिए अलग ख़ालिस्तान देश को लेकर जनमत संग्रह तक हो चुके हैं.

इस बार भी जब जी-20 सम्मेलन के दौरान नई दिल्ली में जिस दिन ट्रूडो और मोदी के बीच संक्षिप्त मुलाकात हुई उस दिन भी कनाडा के बैंकुवर में सिख अलगाववादियों ने भारत से पंजाब को अलग करने के लिए एक जनमत संग्रह कराया.

जी-20 सम्मेलन दौरान रिश्तों में दिखी दरार

भारत और कनाडा के रिश्तों में कड़वाहट तब और बढ़ गई जब जी-20 सम्मेलन के दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिख अलगाववादियों की गतिविधियों पर खुल कर नाराज़गी जताई .

सम्मेलन के दौरान आधिकारिक अभिवादन के दौरान ट्रूडो नरेंद्र मोदी से हाथ मिलाते हुए उस जगह से तेज़ी से निकलते हुए दिखे.

इस तस्वीर को दोनों देशों के रिश्तों के बीच 'तनाव' के तौर पर देखा गया.

इसके बाद ट्रूडो से बातचीत के दौरान नरेंद्र मोदी की ओर से कनाडा में ख़ालिस्तान समर्थक तत्वों और संगठनों की गतिविधियों का मुद्दा उठाया गया.

मीडिया की ख़बरों में कहा गया कि पीएम मोदी ने इसे लेकर नाराज़गी जताई.

मीडिया में आई ख़बरों के मुताबिक़ उन्होंने कहा कि ख़ालिस्तानी समर्थक तत्व भारतीय राजनयिकों पर हमले करने के लिए उकसा रहे हैं. वो भारतीय दूतावासों पर भी हमले के लिए लोगों को भड़का रहे हैं. लेकिन कनाडा इन्हें रोक पाने में नाकाम रहा है.

हालांकि ऐसी ख़बरें भी हैं कि जस्टिन ट्रूडो ने कहा कि कनाडा हमेशा ही अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण प्रदर्शनों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करेगा.

उनके मुताबिक ये ऐसी चीज़ है जो कनाडा के लिए बहुत अहम है. कनाडा उस समय हिंसा को रोकने, नफ़रत को कम करने के लिए भी हमेशा उपलब्ध हैं.

ट्रूडो ने कहा, ‘'ये भी याद रखा जाना चाहिए कि कुछ लोगों की गतिविधियां समूचे कनाडाई समाज का प्रतिनिधित्व नहीं करती हैं.''

क्या ट्रूडो बैकफुट पर हैं?

ट्रूडो का बयान भारत सरकार को रास नहीं आया और दोनों देशों के बीच रिश्तों की कड़वाहट कम होती नहीं दिखी.

उल्टे ट्रूडो ने भारत पर वहां की घरेलू राजनीति को प्रभावित करने का आरोप लगाया.

भारतीय थिंक टैंक ऑब्ज़र्वर रिसर्च फाउंडेशन के वाइस प्रेसिडेंट और अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार हर्ष वी पंत से हमने पूछा कि क्या कनाडा की ओर से द्विपक्षीय मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत रोकना दोनों के रिश्तों में आई नई गिरावट है या हालात इससे भी ख़राब हो सकते हैं?

इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, ''ट्रूडो जब तक सरकार में हैं तब तक तो हालात ठीक होते नहीं दिखते. मुझे लगता है कि ट्रूडो ने इसे पर्सनल मुद्दा बना लिया है. उन्हें लगता है कि उन पर निजी तौर पर हमले हो रहे हैं.''

उन्होंने कहा, ''भारत ख़ालिस्तान मामले में अपनी बात मुखरता से रख ही रहा था और कारोबार पर बातें भी हो रही थीं. लेकिन ट्रूडो के नए रुख से लगता है कि वो खुद को बैकफुट पर पा रहे हैं. लिहाज़ा वो भी भारत के साथ तनाव को लेकर मुखर हो गए हैं.''

क्या एफटीए सचमुच खटाई में पड़ गया है?

कनाडा और भारत के रिश्तों में आई खटास के बीच कनाडा सरकार की ओर से एफटीए पर भी बातचीत खटाई में पड़ती दिख रही है.

लगभग एक दशक के बाद दोनों के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर बात आगे बढ़ी थी. दोनों देशों के बीच इस समझौते को लेकर छह दौर की बातचीत हो चुकी है.

मार्च 2022 में दोनों देशों ने ईपीटी (व्यापार समझौते को लेकर बाचीत में शुरुआती प्रगति) पर अंतरिम समझौते में बातचीत दोबारा शुरू की गई थी.

इस तरह के समझौतों के तहत दो देश आपसी कारोबार के ज्यादा आइटमों पर ड्यूटी काफी कम कर देते हैं या खत्म कर देते हैं.

भारतीय कंपनियां कनाडा के बाजारों में अपने टेक्सटाइल और लेदर के सामानों की ड्यूटी फ्री पहुंच की मांग कर रही हैं.

इसके साथ भारत की ओर से कनाडा में पेशेवरों के लिए वीजा नियमों को सरल करने की मांग भी की जा रही है.

दूसरी ओर कनाडा अपने डेयरी और कृषि उत्पादों के लिए भारतीय बाजार खोलने की मांग कर रहा है.

कितना बड़ा है भारत-कनाडा द्विपक्षीय व्यापार

साल 2022 में भारत कनाडा का दसवां बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर था. 2022-23 में भारत ने कनाडा को 4.10 अरब डॉलर का सामान निर्यात किया था. 2021-22 में यह आंकड़ा 3.76 अरब डॉलर का था.

वहीं कनाडा ने भारत को 2022-23 में 4.05 अरब डॉलर का सामान निर्यात किया. 2021-22 में ये आंकड़ा 3.13 अरब डॉलर का था.

जहां तक सर्विस ट्रेड की बात है तो कनाडाई पेंशन फंडों ने भारत में 55 अरब डॉलर का निवेश किया है. कनाडा ने 2000 से लेकर अब तक भारत में 4.07 अरब डॉलर का सीधे निवेश किया है.

भारत में कम से कम 600 कनाडाई कंपनियां काम कर रही हैं. जबकि 1000 और कंपनियां यहां अपना कारोबारी अवसर तलाश रही हैं.

दूसरी ओर भारतीय कंपनियां कनाडा में आईटी, सॉफ्टवेयर, नेचुरल रिसोर्सेज और बैंकिंग सेक्टर में सक्रिय हैं.

भारत की ओर से कनाडा को निर्यात किए जाने वाले प्रमुख आइटमों में आभूषण, बेशकीमती पत्थर, फार्मा प्रोडक्ट, रेडिमेड गारमेंट, ऑर्गेनिक केमिकल्स, लाइट इंजीनियरिंग सामान, आयरन एंड स्टील प्रोडक्ट शामिल हैं.

जबकि भारत कनाडा से दालें, न्यूज़प्रिंट, वुड पल्प, एस्बेस्टस, पोटाश, आयरन स्क्रैप, खनिज, इंडस्ट्रियल केमिकल मंगाता है.

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