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भारत के वो 'वांटेड', जिन्हें विदेश में गोली मार दी गई
अंशुल सिंह
बीबीसी संवाददाता
बीते रविवार 45 वर्षीय ख़ालिस्तान समर्थक हरदीप सिंह निज्जर की कनाडा में हत्या कर दी गई.
ये घटना कनाडा में ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत के सरे शहर में गुरू नानक सिख गुरुद्वारा साहिब की पार्किंग में हुई.
पुलिस ने हत्या की पुष्टि करते हुए कहा कि निज्जर की दो अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी है.
निज्जर सरे के गुरु नानक सिख गुरुद्वारा साहिब के अध्यक्ष थे और भारत सरकार की 'वांटेड' लिस्ट में शामिल थे.
शिरोमणि अकाली दल के पूर्व विधायक और पार्टी के प्रवक्ता विरसा सिंह वल्टोहा ने इस हत्या पर दुख जताया है.
अपनी फ़ेसबुक पोस्ट में उन्होंने लिखा, ''निज्जर एक समुदाय के धार्मिक सदस्य और एक गुरुद्वारे के अध्यक्ष थे. हम यह पता लगाने के लिए साक्ष्य जुटा रहे हैं कि यह घटना कैसे और क्यों हुई."
हरदीप सिंह निज्जर कौन थे?
हरदीप सिंह निज्जर का ताल्लुक पंजाब के जालंधर में भार सिंह पुरा गाँव से था.
भारत सरकार के मुताबिक़, निज्जर खालिस्तान टाइगर फ़ोर्स के सदस्य थे.
वे खालिस्तान टाइगर फ़ोर्स के संचालन, नेटवर्किंग, प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता प्रदान करने में सक्रिय रूप से शामिल थे.
पंजाब सरकार के अनुसार, ''निज्जर के पैतृक गाँव भरा सिंह पुरा में उनकी ज़मीनें राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) ने जब्त की थीं. निज्जर 2020 में एक अलग खालिस्तान राष्ट्र के लिए ऑनलाइन अभियान 'सिख रेफ़रेंडम 2020' में शामिल थे. ये अभियान भारत में प्रतिबंधित संगठन 'सिख फ़ॉर जस्टिस' की तरफ़ से चलाया गया था.''
1997 में निज्जर कनाडा पहुँचे थे. शुरुआती दिनों में निज्जर कनाडा में एक प्लंबर के रूप में काम करते थे.
कोविड लॉकडाउन से पहले उनके माता-पिता वापस गाँव आ गए थे.
भारतीय जाँच एजेंसी एनआईए के मुताबिक़, 2013-14 में निज्जर कथित तौर पर पाकिस्तान गए थे और यहाँ उनकी मुलाक़ात खालिस्तान टाइगर फ़ोर्स के प्रमुख जगत सिंह तारा से हुई थी.
इस बीच वो लगातार भारत सरकार की रडार पर थे.
हरदीप सिंह निज्जर ऐसे पहले व्यक्ति नहीं हैं जो भारत की वांटेड लिस्ट में हों और उनकी विदेश में हत्या हो गई हो.
निज्जर से लेकर ज़हूर मिस्त्री तक ऐसे लोगों की एक लंबी लिस्ट है.
परमजीत सिंह पंजवड़
साल 2020 के जुलाई महीने में भारत सरकार की तरफ से एक अधिसूचना जारी की गई थी.
इस अधिसूचना में ग़ैर-क़ानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत नौ 'आतंकवादियों' के बारे में जानकारी दी थी.
अधिसूचना में एक नाम था परमजीत सिंह उर्फ़ पंजवड़.
पंजाब के तरन तारन में जन्मे परमजीत सिंह भारत सरकार की ओर से बैन किए 'आतंकवादी संगठन' 'ख़ालिस्तान कमांडो फ़ोर्स' के प्रमुख नेता थे.
गृह मंत्रालय की तरफ़ से इन 'आतंकवादी हमलों' में परमजीत सिंह और ख़ालिस्तान कमांडो फ़ोर्स के शामिल होने की बात कही गई है.
- जून, 1988 में कुछ राजनेताओं की हत्या.
- फिरोज़पुर में 10 राय सिखों की हत्या.
- 1988 और 1999 के बम धमाके.
लाहौर में हत्या
इसी साल मई में पाकिस्तान के लाहौर में परमजीत सिंह पंजवड़ की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.
मई की एक सुबह पंजवड़ टहलने निकलने थे और इस दौरान उन्हें अज्ञात हमलावरों ने गोली मार दी थी.
पाकिस्तान की पंजाब पुलिस के मुताबिक़, ''बंदूकधारी हमलावर ने पंजवार सिंह के सिर पर गोली मारी और अस्पताल पहुँचने पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया.''
पुलिस का कहना था कि हमले में उनका गार्ड भी घायल हुआ था और बाद में उसने दम तोड़ दिया था.
सैयद ख़ालिद रज़ा
चरमपंथी संगठन अल बद्र मुजाहिदीन के प्रमुख और भारत प्रशासित कश्मीर में सक्रिय रहे सैयद ख़ालिद रज़ा की इस साल फ़रवरी के महीने में हत्या हुई थी.
कराची के वरिष्ठ पत्रकार फ़ैज़ुल्लाह ख़ान के अनुसार सैयद ख़ालिद रज़ा का संबंध कराची की बिहारी बिरादरी से था.
फै़जुल्लाह ख़ान कहते हैं, ''90 के दशक के शुरू में ख़ालिद रज़ा अफ़ग़ानिस्तान में अल बद्र संगठन के ट्रेनिंग कैंपों से प्रशिक्षण लेने के बाद भारत प्रशासित कश्मीर में भारतीय सैनिकों के विरुद्ध लड़ाई में शामिल रहे, लेकिन 1993 में पाकिस्तान वापसी के बाद उनको पेशावर में उस संगठन का पदाधिकारी बनाया गया था.''
अल बद्र मुजाहिदीन जमात-ए-इस्लामी की एक सहयोगी हथियारबंद विंग थी और 80 के दशक की शुरुआत से अफ़ग़ानिस्तान और फिर भारत प्रशासित कश्मीर में सक्रिय रही है.
कुछ आंतरिक मतभेदों के कारण अल बद्र मुजाहिदीन 90 के दशक के अंत में जमात-ए-इस्लामी से अलग हो गई.
फैज़ुल्लाह ख़ान के अनुसार 90 के दशक के अंत में जब सैयद ख़ालिद रज़ा को कराची डिवीज़न के लिए अल बद्र का प्रमुख घोषित किया गया, तो वह पूरे राज्य में संगठन के सबसे प्रभावी नेता थे.
9/11 के बाद पाकिस्तान में जिहादी संगठनों पर पाबंदी लगी और सैकड़ों लोगों को गिरफ़्तार किया गया था.
इनमें सैयद ख़ालिद रज़ा भी शामिल थे. फिर कुछ साल जेल में रहने के बाद चरमपंथी गतिविधियों से अलग होकर शिक्षा के क्षेत्र से जुड़ गए थे.
कराची में हत्या
तारीख़: 26 फ़रवरी, 2023. जगह: पाकिस्तान का कराची, गुलिस्तां जौहर.
55 वर्षीय पूर्व कश्मीरी जिहादी कमांडर सैयद ख़ालिद रज़ा को घर के दरवाज़े पर जानलेवा हमले में मार दिया गया
सैयद ख़ालिद रज़ा के क़त्ल की ज़िम्मेदारी सरकार विरोधी और अलगाववादी हथियारबंद संगठन सिंधु देश आर्मी ने ली थी.
बशीर अहमद पीर
इसी साल 20 फ़रवरी को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद से सटे रावलपिंडी शहर में कश्मीरी कमांडर बशीर अहमद पीर उर्फ़ इम्तियाज़ आलम मग़रिब (सूर्यास्त) की नमाज़ के बाद घर जा रहे थे.
इस दौरान अज्ञात हथियारबंद मोटरसाइकिल सवारों ने उन्हें गोली मार दी और फ़रार हो गए.
60 वर्षीय बशीर अहमद भारत प्रशासित कश्मीर के श्रीनगर ज़िले से ताल्लुक़ रखते थे और 80 के दशक के आख़िर से वे कश्मीरी जिहादी संगठन हिज़्बुल मुजाहिदीन से जुड़े थे.
90 के दशक की शुरुआत में बशीर परिवार समेत पाकिस्तान चले आए और गुज़रते वक़्त के साथ हिज़्बुल मुजाहिदीन के प्रभावशाली कमांडर बन गए थे.
भारत सरकार की तरफ से बशीर अहमद पीर उर्फ इम्तियाज़ आलम को यूएपीए क़ानून के तहत आतंकवादी बताया गया है.
इसको लेकर भारत सरकार ने अक्तूबर, 2022 में एक अधिसूचना जारी की थी.
रिपुदमन सिंह मलिक
1985 के एयर इंडिया बम धमाके में अभियुक्त रहे रिपुदमन सिंह मलिक की पिछले साल कनाडा में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.
साल 2022 में कनाडा में ब्रिटिश कोलंबिया के सरे शहर में कार के अंदर रिपुदमन सिंह को गोली मारी गई थी.
पुलिस को घटनास्थल पर एक जली हुई गाड़ी भी मिली थी.
मलिक को 1985 में हुए कनिष्क विमान विस्फोट में अभियुक्त बनाया गया था.
हालाँकि रिपुदमन सिंह मलिक ने हमले में शामिल होने से इनकार करते रहे.
फिर साल 2005 में मलिक के साथ एक और अभियुक्त अजायब सिंह बागड़ी को बरी कर दिया गया था.
23 जून, 1985 को ख़ालिस्तानी अलगाववादियों ने मान्ट्रियल से मुंबई आ रहे एयर इंडिया के विमान कनिष्क में एक टाइम बम रखा था.
आयरलैंड के तट के पास विमान में विस्फोट हुआ और 329 लोगों की मौत हो गई थी.
रिपुदमन सिंह मलिक 1972 में भारत छोड़कर कनाडा पहुँचे थे और बतौर कैब ड्राइवर काम करने लगे थे.
इसके बाद मलिक एक बड़े बिजनेसमैन बन गए और वैंकूवर के 'खालसा क्रेडिट यूनियन' के अध्यक्ष चुने गए थे.
दो दशक से भी ज़्यादा समय तक रिपुदमन का नाम 'ब्लैकलिस्ट' में था.
मोदी सरकार ने सितंबर 2019 में 35 साल पुरानी ब्लैकलिस्ट से विदेशों में रहने वाले 312 सिखों के नाम हटाए थे.
इसके बाद दिसंबर 2019 में लगभग 25 साल बाद रिपुदमन सिंह मलिक भारत आए थे.
ज़हूर मिस्त्री इब्राहिम
ज़हूर मिस्त्री इब्राहिम साल 1999 में नेपाल से एक भारतीय विमान की हाइजैकिंग में शामिल थे जिसे काबुल ले जाया गया था.
अपहरणकर्ताओं ने भारतीय जेल में बंद जैश-ए-मोहम्मद के संस्थापक अध्यक्ष मौलाना मसूद के साथ दो अन्य कमांडरों मुश्ताक़ ज़रगर और उमर सईद शेख़ को रिहा करवा लिया था.
पिछले साल मार्च में जिहादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सदस्य ज़हूर मिस्त्री की हत्या कर दी गई थी.
पाकिस्तान में कराची की अख़्तर कॉलोनी में दो हथियारबंद मोटरसाइकिल सवारों ने उनको गोली मार दी थी.
स्थानीय पुलिस के मुताबिक़, ''चार लोग फ़र्नीचर की दुकान में घुसे और व्यापारी पर चार-पाँच गोलियाँ चलाईं. मरने वाले व्यक्ति की पहचान ज़ाहिद (44) के रूप में हुई.''
हालाँकि, भारत में अधिकारियों ने कहा कि मारे गए व्यवसायी इब्राहिम थे, जो कई वर्षों से ज़ाहिद अखुंद की झूठी पहचान के साथ रह रहे थे.
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