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इन देशों में ख़ालिस्तान समर्थकों का विरोध प्रदर्शन कैसा रहा?
कनाडा, ब्रिटेन और अमेरिका में शनिवार को ख़ालिस्तान समर्थकों का प्रदर्शन फीका रहा.
प्रदर्शनकारी लंदन में भारतीय दूतावास के बाहर तीन-साढ़े तीन घंटे प्रदर्शन करने के इरादे से आए थे लेकिन ये इससे काफी समय तक चला. वहीं टोरंटो में प्रदर्शनकारियों का छोटा समूह ही दिखा.
टोरंटो में जिस वक़्त खालिस्तान समर्थक प्रदर्शन चल रहा था उसी वक्त सड़क की दूसरी ओर भारतीय समुदाय के लोग भी तिरंगा झंडे लेकर मौजूद थे. भारत के समर्थन में भी नारे लगाए.
एक समय टोरंटो में ख़ालिस्तान समर्थक और भारत समर्थक एक-दूसरे के सामने भी आ गए.
अमेरिका की बात करें तो वहां वॉशिंगटन डीसी में भारतीय दूतावास के बाहर सुरक्षा व्यवस्था के बंदोबस्त थे और भारत के राजदूत तरणजीत सिंह संधू ने सुरक्षा व्यवस्था का ख़ुद जायज़ा लिया.
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि ख़ालिस्तान समर्थक नेता हरदीप सिंह निज्जर की मौत में भारतीय एजेंसियों का हाथ है, जिसके बाद से उन्होंने प्रदर्शन का आह्वान किया था.
लंदन में भारतीय उच्चायोग के बाहर प्रदर्शनकारी भारतीय उच्चायुक्त विक्रम दुरैस्वामी, शशांक विक्रम के पोस्टर लिए हुए थे.
पिछले कुछ दिनों के दौरान ऐसे पोस्टर दिखे थे, जिनमें भारतीय राजनयिकों के ख़िलाफ़ हिंसा की अपील की गई थी.
लंदन में प्रदर्शनकारियों के हाथ में पाकिस्तान और कश्मीर समर्थक पोस्टर भी थे.
प्रदर्शन के दौरान बारिश हो रही थी और सिर्फ तीस-चालीस ही दिखे थे. जबकि इसके पहले के प्रदर्शनों में बड़ी संख्या में लोग आए थे.
ख़ालिस्तान समर्थक इससे पहले ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका में भी प्रदर्शन कर चुके हैं.
लंदन में भारतीय उच्चायोग के बाहर प्रदर्शनकारी भारतीय उच्चायुक्त विक्रम दुरैस्वामी, शशांक विक्रम के पोस्टर लिए हुए थे.
पिछले कुछ दिनों के दौरान ऐसे पोस्टर दिखे थे, जिनमें भारतीय राजनयिकों के ख़िलाफ़ हिंसा की अपील की गई थी.
लंदन में प्रदर्शनकारियों के हाथ में पाकिस्तान और कश्मीर समर्थक पोस्टर भी थे.
प्रदर्शन के दौरान बारिश हो रही थी और सिर्फ तीस-चालीस ही दिखे थे. जबकि इसके पहले के प्रदर्शनों में बड़ी संख्या में लोग आए थे.
ख़ालिस्तान समर्थक इससे पहले ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका में भी प्रदर्शन कर चुके हैं.
भारतीय एजेंसियों पर निज्जर की हत्या के आरोप
लंदन में प्रदर्शन के दौरान पुलिस की अच्छी-खासी मौजूदगी थी. मेट्रोपोलिटन पुलिस के प्रवक्ता ने पहले ही कड़ी सुरक्षा व्यवस्था का एलान कर दिया था
ब्रिटेन के विदेश मंत्री जेम्स क्लेवरली ने इस सप्ताह की शुरुआत में कह दिया था कि भारतीय उच्चायोग पर किसी भी तरह का सीधा हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
इससे पहले के एक प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने भारतीय उच्चायोग के सामने लगे तिरंगे को गिराने की कोशिश की थी और इमारत की एक दीवार तोड़ दी थी.
कनाडा में टोरंटो के प्रदर्शन के दौरान सिख्स फॉर जस्टिस के प्रवक्ता कुलजीत सिंह ने का था, ''अगर भारतीय एजेंसी और सिस्टम अपराध कर रहा है तो उन्हें ज़िम्मेदार ठहराया जाना चाहिए.''
सिंह ने ये बयान ख़ालिस्तान समर्थक नेता हरदीप सिंह निज्जर की मौत के सिलसिले में दिया है. निज्जर की सरे में 18 जून को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.
ख़ालिस्तान समर्थकों का आरोप है कि भारतीय एजेंसियों ने ही निज्जर को मरवाया है.
भारतीय मिशनों पर हमले से हालात पेचीदा
प्रदर्शन में आए वकील हरकीत सिंह ने कहा कि रॉयल केनेडियन माउंटेड पुलिस को इस हत्याकांड की जांच करनी चाहिए. ये राजनीतिक हत्या है.
भारत ने निज्जर पर देश में आतंकवादी हमले करने के आरोप लगाए हैं. केएलएफ़ के नेता अवतार सिंह खांडा की ब्रिटेन में 15 जून को बर्मिंघम के एक अस्पताल में मौत हो गई थी, संदेह है कि उन्हें ज़हर दिया गया था.
दो हथियारबंद लोगों ने ख़ालिस्तान कमांडो फ़ोर्स के प्रमुख परमजीत सिंह पंजवड़ की लाहौर में 6 मई को हत्या कर दी गई थी.
23 जनवरी को केएलएफ़ के मुख्य चेहरों में से एक हरमीत सिंह उर्फ़ हैप्पी पीएचडी को भी लाहौर में एक लोकल गैंग ने मार दिया था.
निज्जर हाई प्रोफ़ाइल ख़ालिस्तानी अलगाववादी नेता थे और उनकी मौत को भारतीय मीडिया में "संदिग्ध अवस्था" में बताया गया है.
ख़ालिस्तान समर्थकों का आरोप है कि इन मौतों के पीछे भारतीय एजेंसियां हैं.
खांडा और पंजवड़ की मौतों के बाद कई देशों में भारत सरकार के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन हुए थे.
लेकिन शनिवार 8 जुलाई का प्रदर्शन ख़ासतौर पर निज्जर की कथित हत्या के विरोध में आयोजित किया गया था.
भारत सरकार की ओर से अलगाववादी अमृतपाल सिंह के ख़िलाफ़ उठाए गए कदमों का भी विरोध हुआ है, जो फ़िलहाल असम की डिब्रूगढ़ जेल में हैं.
भारतीय मीडिया ने अलगाववादी नेताओं की हत्या के लिए किसी सरकारी एजेंसी को ज़िम्मेदार नहीं ठहराया है.
लेकिन कुछ टिप्पणीकारों का कहना है कि भारत विदेशों में ख़ालिस्तानियों के ख़िलाफ कार्रवाई कर रहा है क्योंकि उन्होंने भारतीय मिशनों पर हमला किया है.
कनाडा पर ख़ालिस्तानियों के समर्थन का आरोप
कनाडा में ख़ालिस्तान समर्थकों के विरोध प्रदर्शनों और राजनयिकों के ख़िलाफ़ हिंसा की धमकियों के बाद दोनों देशों के राजनयिक रिश्तों में तल्खी के संकेत मिलने लगे हैं.
हालांकि भारत के ख़िलाफ़ प्रदर्शनों और राजनयिकों को हिंसा का शिकार बनाने की अपील करने वालों से जुड़े सवालों पर कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रुडो ने कहा था कि उनकी सरकार ने हमेशा से हिंसा और धमकियों को बेहद गंभीरता से लिया है.
उनका कहना था कि कनाडा ने हमेशा आतंकवाद के ख़िलाफ़ गंभीर कार्रवाई की है.
ट्रुडो भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर के उस बयान पर टिप्पणी कर रहे थे, जिसमें उन्होंने कहा था कि कनाडा में ख़ालिस्तानियों की हरकतें इसलिए बढ़ रही हैं, क्योंकि वो वोट बैंक की सियासत का हिस्सा था.
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने गुरुवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था, ''ये अभिव्यक्ति की आज़ादी का सवाल नहीं है. इसका इस्तेमाल हिंसा, अलगाववाद और आतंकवाद को सही ठहराने के लिए किया जा रहा है. उन्होंने इसके लिए अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया में ख़ालिस्तान समर्थक तत्वों को दिए जा रहे कथित समर्थन का मुद्दा भी उठाया.''
गुरुवार को ही ब्रिटेन के विदेश मंत्री जेम्स क्लेवरली ने भारत के राजनयिक मिशनों पर हमलों के सिलसिले में सुरक्षा का आश्वासन दिया था.
शनिवार को यहाँ के प्रमुख शहरों में आयोजित हुई ख़ालिस्तान समर्थकों की रैलियों के दौरान भी उन्होंने भारत को सुरक्षा का आश्वासन दिया.
उन्होंने कहा था, "लंदन में भारतीय हाई कमीशन पर कोई भी सीधा हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. हमने हाई कमिश्नर विक्रम दुरैस्वामी और भारत सरकार को साफ़ कहा है कि हाई कमीशन की सुरक्षा सर्वोपरि है.’’
दरअसल भारत सरकार ने कहा था कि ब्रिटेन भारतीय मिशनों की सुरक्षा को लेकर उसकी चिंताओं पर ध्यान नहीं दे रहा है.
भारत ने इसके जवाब में नई दिल्ली में ब्रिटिश हाई कमिश्नर एलेक्स एलिस की सुरक्षा घटा दी थी.
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