बांग्लादेश की आर्मी को लेकर अब भारी विवाद, भारत का भी क्यों आया नाम

बांग्लादेश एक नए विवाद में समाता दिख रहा है. दरअसल गुरुवार को बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस ने कहा था कि सरकार अवामी लीग पर प्रतिबंध नहीं लगाएगी.

मोहम्मद यूनुस की इस टिप्पणी को लेकर बांग्लादेश में विवाद छिड़ गया. कई छात्र समूहों और पिछले साल जुलाई महीने में शेख़ हसीना के ख़िलाफ़ आंदोलन करने वाले नेताओं ने मोहम्मद यूनुस की इस टिप्पणी की आलोचना शुरू कर दी.

बांग्लादेश के नए सियासी दल नेशनल सिटिज़न पार्टी (एनसीपी) ने मोहम्मद यूनुस के बयान की आलोचना की. एनसीपी दक्षिणी इलाक़े के ऑर्गेनाइज़र हसनत अब्दुल्लाह ने शुक्रवार रात मोहम्मद यूनुस की टिप्पणी की आलोचना की थी.

हसनत ने दावा किया कि पाँच अगस्त को अवामी लीग पर प्रतिबंध लगा दिया गया था. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बांग्लादेश का सैन्य नेतृत्व भारत के प्रभाव में अवामी लीग को फिर से मज़बूत करने की कोशिश कर रहा है. हसनत ने एक फ़ेसबुक पोस्ट में लिखा था कि सैन्य नेतृत्व ने 11 मार्च को ढाका कैंटोनमेंट में एक बैठक के दौरान रीफाइंड अवामी लीग का प्रस्ताव रखा था.

अवामी लीग शेख़ हसीना की पार्टी है और जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश समेत कई राजनीतिक धड़े अवामी लीग के चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाने की मांग कर रहे हैं.

हसनत ने अपनी पोस्ट में सैन्य नेतृत्व के साथ बैठक का पूरे डिटेल दिया था. उन्होंने कहा कि एनसीपी के अन्य नेताओं और उनके सामने एक प्रस्ताव पेश किया गया था, जिसमें आगामी चुनाव के लिए सीटों की साझेदारी पर बात थी.

आर्मी ने क्या दिया जवाब

हसनत ने आरोप लगाया कि ऐसे ही प्रस्ताव अन्य राजनीतिक पार्टियों के सामने भी पेश किए गए थे. उन्होंने आरोप लगाया कि भारत इस योजना को गुप्त रूप से अंजाम दे रहा है.

हसनत ने साबेर हुसैन चौधरी, शिरिन शर्मिन चौधरी और फज़्ले नूर तपोश का नाम लेते हुए कहा था कि ये रिफाइंड अवामी लीग की वकालत कर रहे हैं.

हसनत की फ़ेसबुक पोस्ट को लेकर बांग्लादेश में भारी विवाद हो गया है. मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार में यह पहली बार है, जब कोई सियासी पार्टी वहाँ की आर्मी पर सवाल उठ रही है.

इससे पहले यह माना जा रहा था कि अंतरिम सरकार को सेना का समर्थन हासिल है. भारत से मिले होने का आरोप अवामी लीग पर लगता रहा है लेकिन पहली आर्मी को लेकर ऐसी बात कही जा रही है.

हालांकि हसनत की पोस्ट को लेकर अब एनसीपी बैकफुट पर आ गई है. हसनत ने आर्मी को लेकर बाद में स्पष्टीकरण जारी किया. उन्होंने कहा कि एनसीपी का लक्ष्य अवामी लीग के दौरान संस्थानों को हुए नुकसान की भरपाई करना है. उन्होंने कहा कि आर्मी को लेकर उनके मन में पूरा आदर और भरोसा है.

दूसरी तरफ़ एनसीपी के मुख्य समन्वयक नासिरुद्दीन पटवारी ने हसनत की फ़ेसबुक पोस्ट की आलोचना की है. उन्होंने फ़ेसबुक पोस्ट को अनैतिक बताया है और सरकारी संस्थानों से राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं करने की अपील की है. उन्होंने अवामी को लीग को फिर से ज़िंदा करने की कोशिश पर चेतावनी देते हुए कहा कि इसके जवाब में फिर से आंदोलन हो सकता है.

रविवार को बांग्लादेश की सेना ने हसनत के आरोपों को ख़ारिज कर दिया था. आर्मी ने कहा था कि बैठक की पहल हसनत और उनके सहकर्मी सरजिस आलम ने की थी.

बांग्लादेश की न्यूज़ वेबसाइट नेत्रा न्यूज़ ने कहा है कि सेना ने पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है.

एनसीपी में विरोधाभास

बांग्लादेश की सेना ने हसनत के दावों पर नेत्रा न्यूज़ से साझा किए अपने बयान में कहा है, ''यह पूरी तरह से बकवास और अपरिपक्व टिप्पणी है. हसनत और सरजिस आलम लंबे समय से सेना प्रमुख से मिलना चाहते थे. बांग्लादेश के आर्मी चीफ़ जनरल वक़ार-उज़-ज़मां से हसनत और सरजिस की मुलाक़ात 11 मार्च को ढाका कैंटोनमेंट में हुई थी. लेकिन उन्होंने जो दावा किया है, उस पर हँसी आती है. ये लंबे समय से आर्मी प्रमुख से शिष्टाचार मुलाक़ात चाह रहे थे और उनकी मुलाक़ात इसी का नतीजा है.''

सेना के स्पष्टीकरण के बाद एनसीपी के उत्तरी इलाक़े के चीफ़ संगठनकर्ता सरजिस आलम ने फ़ेसबुक पर हसनत की पोस्ट को लेकर सफ़ाई दी. उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा है, ''11 मार्च को हसनत और मेरी मुलाक़ात आर्मी प्रमुख से हुई थी. तीसरा साथी निजी काम के कारण इस मीटिंग में उपलब्ध नहीं था. हमें समन नहीं किया गया था.''

इससे पहले मार्च महीने की शुरुआत में भारत के अंग्रेज़ी अख़बार इकनॉमिक टाइम्स ने बांग्लादेश की सेना में तख़्तापलट की ख़बर चलाई थी. अख़बार ने दावा किया था कि बांग्लादेश आर्मी में पाकिस्तान और जमात-ए-इस्लामी परस्त लेफ़्टिनेंट जनरल फ़ैज़ुर रहमान ने अन्य जनरलों के समर्थन से बांग्लादेश आर्मी के मौजूदा चीफ़ जनरल वक़ार-उज़-ज़मां को हटाने की कोशिश की थी, लेकिन पर्याप्त समर्थन नहीं मिलने से यह नाकाम रहा.

हालांकि बांग्लादेश की आर्मी ने अख़बार की इस रिपोर्ट को बेबुनियाद बताया था. इकनॉमिक टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में लिखा था, ''बांग्लादेश के मौजूदा आर्मी प्रमुख जनरल वक़ार वैचारिक रूप से मध्यमार्गी माने जाते हैं. इन्हें भारत की तरफ़ झुकाव रखने वाला माना जाता है और बांग्लादेश में इस्लामी दबदबे वाली सरकार के विरोधी रहे हैं.''

इकनॉमिक टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में लिखा था, ''जनरल वक़ार ने इस बात को सुनिश्चित किया था कि शेख़ हसीना सुरक्षित भारत पहुँच जाएं. पिछले साल पाँच अगस्त को इस्लामी पार्टियों की अगुआई वाली भीड़ शेख़ हसीना के आवास पर पहुँच गई थी. हाल ही में जनरल वक़ार ने संकेत दिया था कि बांग्लादेश में क़ानून व्यवस्था बनाए रखने में सेना बड़ी भूमिका निभा सकती है.''

इसी साल जनवरी महीने में बांग्लादेश के अख़बार 'प्रथम आलो' को दिए इंटरव्यू में वहाँ जनरल वक़ार-उज़-ज़मां ने भारत को लेकर कई बातें कही थीं.

उन्होंने कहा था, ''भारत एक अहम पड़ोसी देश है. हम कई मामलों में भारत पर निर्भर हैं. दूसरी तरफ़ भारत को भी हमसे कई तरह की सुविधाएं मिलती हैं. भारत के बड़ी संख्या में लोग बांग्लादेश में काम करते हैं. भारत के ये कामगार दिहाड़ी के साथ स्थायी काम भी करते हैं.''

मोहम्मद यूनुस से मिलने को लेकर मोदी अनिच्छुक

मोहम्मद यूनुस के बांग्लादेश की सत्ता में आए क़रीब आठ महीने हो गए हैं लेकिन भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से एक बार भी उनकी मुलाक़ात नहीं हो पाई है. ऐसा तब है, जब बांग्लादेश के लिए भारत एक अहम पड़ोसी है. बांग्लादेश की 94 फ़ीसदी सीमा भारत से लगती है.

दरअसल, पिछले साल अगस्त महीने में शेख़ हसीना के बांग्लादेश छोड़ने के बाद से भारत से संबंधों में आया तनाव अब भी ख़त्म नहीं हुआ है.

बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस के सत्ता में आए क़रीब डेढ़ महीने हुए थे, तभी वह सितंबर के आख़िरी हफ़्ते में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करने न्यूयॉर्क गए थे.

इसी दौरान पीएम मोदी भी 23 सितंबर को न्यूयॉर्क में थे. तब बांग्लादेश से ख़बर आई कि मोहम्मद यूनुस पीएम मोदी से मिलना चाहते हैं लेकिन भारतीय मीडिया में कहा गया कि प्रधानमंत्री मिलने को लेकर अनिच्छुक हैं.

ज़ाहिर है कि यह मुलाक़ात नहीं हुई. तब बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के सलाहकार मोहम्मद तौहीद हुसैन से पूछा गया था कि क्या बांग्लादेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने के लिए अनुरोध किया था?

इसके जवाब में हुसैन ने कहा था, ''इन मामलों में एक प्रक्रिया होती है और हम इसी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेंगे. यह ऐसा नहीं होता है कि हम एक महीना पहले अनुरोध करते हैं कि आपसे मिलना चाहते हैं. हम सामान्य प्रक्रिया का पालन करेंगे. अगर वे हमसे नहीं मिलना चाहते हैं तो हम उन्हें मजबूर नहीं कर सकते हैं.''

अब एक बार फिर से कहा जा रहा है कि बांग्लादेश ने पीएम मोदी से मुलाक़ात के लिए औपचारिक अनुरोध किया है. दरअसल, दो और तीन अप्रैल को थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में बिम्सटेक (बे ऑफ बंगाल इनिशिएटिव फोर मल्टी-सेक्टोरल टेक्निकल एंड इकनॉमिक कोऑपरेशन) समिट होने जा रहा है. इस समिट में मोहम्मद यूनुस शामिल होंगे और उम्मीद है कि पीएम मोदी भी जा सकते हैं.

न्यूयॉर्क की तरह बैंकॉक में भी मुलाक़ात नहीं?

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक संसदीय पैनल की बैठक में कहा कि बांग्लादेश ने बिम्सटेक समिट में पीएम मोदी से मोहम्मद यूनुस की मुलाक़ात के लिए अनुरोध किया है लेकिन यह अभी विचाराधीन है. पीटीआई ने ये ख़बर सूत्रों के हवाले से दी है.

पीटीआई के अनुसार, एस जयशंकर ने संकेत दिया कि थाईलैंड में पीएम मोदी बिम्सटेक समिट में हिस्सा ले सकते हैं. इसके साथ ही जयशंकर ने ये भी कहा कि पीएम मोदी अगले महीने श्रीलंका जाएंगे.

अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार को संसदीय पैनल की दो घंटे की बैठक में कई सांसदों ने जयशंकर के सामने बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिन्दुओं पर कथित हमले का भी मुद्दा उठाया.

अख़बार का कहना है कि जयशंकर ने सांसदों को बताया कि बांग्लादेश हिन्दुओं पर हमले को राजनीतिक रूप से प्रेरित बता रहा है. बांग्लादेश के अंग्रेज़ी अख़बार द डेली स्टार ने दो दिन पहले ख़बर प्रकाशित की थी कि बांग्लादेश ने पीएम मोदी से मुलाक़ात के लिए भारत से संपर्क किया था.

हालांकि बाद में डेली स्टार ने इस स्टोरी की हेडलाइन बदल दी थी. पहले हेडलाइन थी- बिम्सटेस:बांग्लादेश ने मोहम्मद यूनुस और मोदी की मुलाक़ात के लिए भारत से संपर्क किया. बदली हुई हेडलाइन थी- बिम्सटेक 2025: मोदी और मोहम्मद यूनुस की मुलाक़ात शायद ना हो

पिछले हफ़्ते शुक्रवार को भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से पीएम मोदी और मोहम्मद यूनुस की मुलाक़ात को लेकर पूछा गया था तो उन्होंने कहा था, ''अभी इस मामले में कुछ कहने के लिए हमलोग के पास कोई जानकारी नहीं है.''

16 फ़रवरी को ओमान में आठवीं हिन्द महासागर कॉन्फ़्रेंस से अलग एस जयशंकर और तौहीद हुसैन की मुलाक़ात हुई थी. द डेली स्टार ने लिखा है कि शेख़ हसीना के सत्ता से बेदख़ल होने के बाद से भारत ने बांग्लादेश के नागरिकों को वीज़ा देने में भारी कटौती की है. इसके अलावा बांग्लादेश भारत से शेख़ हसीना के प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है लेकिन मोदी सरकार ने कोई ठोस जवाब नहीं दिया है.