ईरान से लौटे स्टूडेंट्स ने सुनाई आपबीती, 'मेरे कमरे के ऊपर से मिसाइल गुज़री और फिर...'

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"मैंने वहां बहुत कुछ देखा. मिसाइल हमले देखे. रात में तेज़ आवाज़ें सुनीं. मैं भारत पहुंचकर ख़ुश हूं. जब हालात ठीक हो जाएंगे, तब हम फिर से ईरान जाएंगे."
यासिर गफ़्फ़ार ईरान में पढ़ाई करने गए थे और इसराइल-ईरान संघर्ष के बीच वहां फंस गए थे. अब भारत लौटने के बाद उन्होंने राहत की सांस ली है.
यासिर उन 110 भारतीय स्टूडेंट्स में से एक हैं जो गुरुवार तड़के ईरान से दिल्ली पहुंचे.
विदेश मंत्रालय के मुताबिक़, इसराइल और ईरान के बीच तेज़ होते संघर्ष के कारण भारत ने 'ऑपरेशन सिंधु' की शुरुआत की है.
इस ऑपरेशन का मक़सद ईरान से भारतीयों को सुरक्षित वापस लाना है.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 18 जून को बताया था कि 17 जून को ईरान के उत्तरी हिस्से से 110 छात्र-छात्राओं को सुरक्षित निकाला गया.
'मिसाइल कमरे के ऊपर से निकली तो खिड़की हिल गई'

मरियम रोज़ भी उन 110 स्टूडेंट्स में से एक हैं जिन्हें भारत सरकार ने सुरक्षित तरीके़ से ईरान से निकाला है.
ईरान में संघर्ष के बारे में बताते हुए मरियम समाचार एजेंसी एएनआई से कहती हैं, "उर्मिया में हमें डॉरमेट्री के सामने से मिसाइलें जाती हुई दिखती थीं. एक घटना मुझे अच्छे से याद है. रात के तीन बजे हमारी डॉरमेट्री के ऊपर से एक मिसाइल गुज़री थी, तब मेरे कमरे की पूरी खिड़की हिल गई थी."
इन छात्रों को पहले उर्मिया से सड़क मार्ग से आर्मीनिया लाया गया. इसके बाद वे आर्मीनिया से फ़्लाइट के ज़रिए नई दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचे.
दिल्ली के रहने वाले अमान नज़र कुछ साल पहले ईरान पढ़ाई के लिए गए थे. उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था कि उन्हें इतनी मुश्किल परिस्थितियों में वापस लौटना पड़ेगा.
मीडिया से बातचीत में अमान नज़र बताते हैं, "बहुत ख़ुश हूं. अपने घरवालों को देखने की ख़ुशी शब्दों में बयां नहीं कर सकता. मेरे पिता मेरा इंतजार कर रहे हैं. वहां (ईरान में) हालात बहुत खराब हैं."
हुमैरा सादिक़ को घर लौटने की ख़ुशी तो है, लेकिन पढ़ाई बीच में छूटने का दु:ख भी है.
हुमैरा सादिक़ कहती हैं, "मां-बाप से मिलने की ख़ुशी है लेकिन पढ़ाई छूटने का दु:ख भी है. कोर्स का चौथा साल था. उम्मीद थी कि पढ़ाई पूरी करने के बाद ही वापस लौटूंगी लेकिन अचानक से लौटना पड़ा. जो माहौल वहां देखा, उसके हिसाब से कभी लगा नहीं था कि घर वापस आ पाएंगे."
स्टूडेंट्स के मां-बाप क्या बोले?

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हैदर अली और उनकी पत्नी अर्शी हैदर बुधवार देर रात से ही एयरपोर्ट पर अपने बेटे माज़ हैदर का इंतजार कर रहे थे. 21 साल के माज़ हैदर ईरान की उर्मिया यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस के पहले वर्ष के छात्र हैं.
समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में हैदर अली ने कहा, "जब माज़ से बात हो रही थी तो वो कह रहा था कि ईरान का माहौल अच्छा नहीं है. इसलिए उसे भारत वापस आना था. माज़ अपने स्तर पर कुछ करता उससे पहले ही भारत सरकार ने उसे वहां से निकाल लिया और वह अपने देश लौट रहा है. यह बहुत ख़ुशी की बात है."
हैदर और अर्शी के अलावा कई और परिजन भी हैं जो संघर्ष शुरू होने के बाद से अपने बच्चों के भारत लौटने का इंतजार कर रहे थे.
उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के रहने वाले डॉ. परवेज़ आलम पिछले कुछ घंटों से नई दिल्ली एयरपोर्ट के गेट नंबर चार पर नजरें गड़ाए खड़े हैं. उनके बड़े बेटे समीर आलम ईरान से सुरक्षित लौट रहे हैं.
डॉ. परवेज़ आलम ने कहा, "मेरा बेटा समीर दो साल पहले एमबीबीएस करने ईरान के उर्मिया गया था. वहां वह उर्मिया यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहा था. जब से हालात बिगड़े, तब से ही घरवाले चिंतित थे. हम अपनी सरकार के शुक्रगुज़ार हैं."
'ऑपरेशन सिंधु' क्या है?

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भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के मुताबिक़, ईरान और इसराइल के बीच जारी संघर्ष के कारण हालात बिगड़ने के मद्देनजर भारत सरकार पिछले कई दिनों से ईरान में मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए लगातार क़दम उठा रही है.
पहले चरण में भारतीय दूतावास ने 17 जून 2025 को ईरान के उत्तरी हिस्से से 110 भारतीय छात्रों को सुरक्षित बाहर निकाला.
इन छात्रों को सड़क मार्ग से आर्मीनिया पहुंचाया गया, जहां भारतीय दूतावासों की निगरानी में वे राजधानी येरेवान पहुंचे.
18 जून 2025 को दोपहर क़रीब तीन बजे येरेवान से एक विशेष उड़ान के जरिए ये छात्र भारत के लिए रवाना हुए और 19 जून 2025 की तड़के नई दिल्ली पहुंचे. यह ऑपरेशन सिंधु के शुरुआती चरण का हिस्सा है.
शुरुआती चरण में उर्मिया और उसके आसपास के इलाकों में पढ़ने वाले छात्रों को भारत लाया गया है.
इसराइल ने हाल ही में ईरान के तेहरान और इस्फहान शहरों पर हमले तेज किए थे और ये दोनों शहर सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में हैं.
भारतीय छात्र-छात्राएं अभी इन शहरों में फंसे हुए हैं और वापस लौटे स्टूडेंट्स को उम्मीद है कि जल्द ही उन्हें भी सुरक्षित बाहर निकाल लिया जाएगा.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित















