राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ क्या कांग्रेस के लिए चमत्कार कर पाएगी?

राहुल गांधी

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    • Author, सलमान रावी
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, मध्य प्रदेश (मुरैना, ग्वालियर) से

राजस्थान के धौलपुर के बाद राहुल गांधी की 'भारत जोड़ो न्याय यात्रा' गुरुवार को बांसवाड़ा पहुंच रही है.

इससे पहले 2 मार्च को यह यात्रा मध्य प्रदेश में थी. राहुल गांधी के यहां पहुंचने से पहले दिल्ली और मुंबई को जोड़ने वाले ‘नेशनल हाईवे- 44’ पर जाम लगा हुआ था.

उत्तर प्रदेश के आगरा से लेकर राजस्थान के धौलपुर और मध्य प्रदेश के मुरैना के बीच इस ‘हाइवे’ पर सफ़र करना मुश्किल था, क्योंकि छोटे से लेकर बड़े वाहन फंसे हुए थे.

घने बादलों के बीच तेज़ हवाएं चल रही थीं. सुबह से ही हल्की बूंदाबांदी भी हो रही थी.

धौलपुर से लेकर मुरैना तक सड़क के किनारे बड़े बड़े ‘होर्डिंग’ और झंडे पटे हुए थे.

ये यूथ कांग्रेस और कांग्रेस पार्टी के झंडे थे. कांग्रेस के नेता राहुल गाँधी की ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के स्वागत की तैयारियां ज़ोरों पर थीं.

इन सबके बावजूद पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं का जोश देखते ही बन रहा था.

सुरक्षा अमला सतर्क था, लेकिन ख़राब मौसम की वजह से राहुल गांधी के क़ाफिले को पहुँचने में काफ़ी वक़्त लग रहा था. मुरैना पहुँचने का समय दोपहर के 1.30 बजे था.

मगर ख़राब मौसम की वजह से कार्यक्रम समय से पीछे चल रहा था. मुरैना के राष्ट्रीय राजमार्ग के पास ब्रिज के नीचे राहुल गाँधी की सभा होनी थी. उन्हें यहाँ रोड शो भी करना था.

मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सभी दिग्गज नेता यहाँ पहले से पहुंच चुके थे. चाहे पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ हों, दिग्विजय सिंह हों या फिर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी.

मध्य प्रदेश का ग्वालियर-चम्बल संभाग यहाँ की राजनीति के केंद्र में तब से रहा है जब से 2018 के विधानसभा के चुनावों में कांग्रेस ने इस संभाग में एक तरह से स्वीप कर दिया था.

इस जीत की वजह से, लगभग दो दशकों के बाद प्रदेश की सत्ता में कांग्रेस की वापसी भी हुई थी.

हालांकि सरकार ज़्यादा दिन नहीं चल पाई, क्योंकि ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने समर्थक विधायकों के साथ भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए थे.

क्षेत्र की 21 में 17 सीटें हार गई पार्टी

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यहीं से मध्य प्रदेश में कांग्रेस के भीतर चल रहा द्वंद भी सार्वजनिक हो गया.

लोकसभा के चुनाव दोबारा आए और उससे ठीक एक साल पहले 23 नवंबर से लेकर 4 दिसंबर तक राहुल गाँधी ‘भारत जोड़ो यात्रा’ लेकर मध्य प्रदेश के मालवा-निमाड़ के इलाकों से होते हुए गुज़रे थे.

इस इलाके के छह ज़िलों – जैसे बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, इंदौर, उज्जैन और आगर मालवा में उन्होंने 380 किलोमीटर की दूरी पैदल ही तय की थी.

समझा ये जा रहा था कि पार्टी के प्रचार के साथ साथ राहुल गाँधी संगठन के नेताओं के बीच रही उलझन और ‘उठा पटक’ को भी ख़त्म करने का प्रयास करेंगे.

मध्य प्रदेश में 2023 के विधानसभा के चुनावों से ठीक पहले सत्तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी को ‘सत्ता विरोधी लहर’ से जूझना पड़ रहा था. कांग्रेस के लिए राहुल गाँधी की यात्रा से बड़ी उम्मीदें जगी थीं.

मगर जो परिणाम आए, उसने सभी को चौंका दिया. भारतीय जनता पार्टी को 163 सीटों के साथ प्रचंड बहुमत मिला, जबकि कांग्रेस 66 सीटों पर ही सिमट कर रह गई.

भारतीय जनता पार्टी को उन 21 में से 17 सीटों पर जीत मिली, जहां-जहां से होकर राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ निकली थी.

मध्य प्रदेश में दूसरी बार राहुल गांधी फिर यात्रा पर हैं. इस बार जब उनकी ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ मध्य प्रदेश से होकर गुज़र रही है, तो लोकसभा के चुनाव सामने हैं.

जब राहुल गांधी की न्याय यात्रा यहां पहुंची

राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा

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राजनीतिक और सामाजिक हलकों में इस सवाल पर चर्चा तेज़ हो गई है कि क्या दो दशकों से भी ज़्यादा से हाशिए पर सिमट चुकी कांग्रेस पार्टी का राहुल गाँधी की यात्रा के बाद पुनरुद्धार संभव हो सकेगा?

ग्वालियर में राहुल गांधी के ‘रोड-शो’ के इंतज़ाम में लगे कांग्रेस के नेता प्रमोद चौधरी ने बीबीसी से अति उत्साह में कहा, “आदरणीय राहुल जी आ रहे हैं. आपको क्या लग रहा है? भविष्य के हमारे प्रधानमंत्री हैं और मुझे लगता है कि ज़्यादा समय नहीं है, केवल 5 साल के बाद ही आप देख लेना क्या होगा. कहीं इसी बार बन जाएँ... कुछ नहीं कह सकते.”

ग्वालियर के ही ‘चार शहर नाके’ के चौक पर भी तैयारियां ज़ोर शोर पर थीं. डीजे बज रहे थे. झंडे लहराते हुए पार्टी के कार्यकर्ता नारे लगा रहे थे, 'जोड़ो जोड़ो, भारत जोड़ो'.

राहुल गांधी

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जीरा चौक पर भी स्टेज सजा हुआ था. महिलाएं पंखुड़ियां लिए खादी पहने खड़ी थीं और सड़क के किनारे लोगों का हुजूम मौजूद था.

बूंदा बांदी जो रह-रह कर हो रही थी, वो अब रुक गई है. तब तक राहुल का कारवां नज़दीक पहुँच गया. पिछली बार वो पदयात्रा पर थे, लेकिन इस बार वो जीप पर सवार होकर लोगों का अभिवादन करते जा रहे थे.

“राहुल गाँधी जिंदाबाद” के नारों का समां गूँज उठा.

ज़ीरा चौक पर ढोल नगाड़ों का इंतज़ाम भी है. उनका क़ाफ़िला आकर रुक जाता है और वो माइक थाम लेते हैं.

राहुल ने क्या पूछा और भाषण में क्या बोले?

तीन मार्च को ग्वालियर में पूर्व सैनिकों से राहुल गांधी ने मुलाकात की.

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राहुल गांधी जगह-जगह पर जमा हुए लोगों से एक ही सवाल कर रहे हैं, “आपका नाम क्या है? आपकी जाति का महत्वपूर्ण पदों पर प्रतिनिधित्व कितना है?”

यहाँ जमा लोगों की भीड़ में उन्हें तीन लोग मिले. एक कुशवाहा. एक यादव और एक मांझी. उन्होंने बारी-बारी से तीनों को अपने पास बुलाया और जातिगत गणित समझाने की कोशिश की.

उन्होंने कहा, “आप तीनों की जातियों को मिलाकर पूरे देश में आपकी आबादी का हिस्सा 73 प्रतिशत है लेकिन निजी और सरकारी नौकरियों, मीडिया और व्यवसाय में आपके कितने लोग हैं?”

अपने भाषण में राहुल गाँधी लोगों को ये बताने की कोशिश भी कर रहे हैं कि आम जनों के मुद्दे मीडिया से गौण होते जा रहे हैं, क्योंकि मीडिया संपन्न वर्गों और बड़े व्यावसायियों के हाथों संचालित हो रहा है.

‘जातिगत जनगणना’ उनकी इस यात्रा का मुख्य ‘एजेंडा’ है और वो इसको लेकर आम लोगों का समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं.

वो कह रहे हैं, “जातियों का एक्स-रे होना चाहिए. यही तो मैं कह रहा हूँ. यही मेरी मांग है.”

यह कहते-कहते वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाते हैं, “मोदी जी कहते हैं कि समाज में सिर्फ़ दो ही जातियां हैं – अमीर और ग़रीब. फ़िर मोदी जी क्यों ये कह रहे हैं कि वो अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ‘ओबीसी’ से आते हैं?”

हरि शंकर नामदेव (बाएं) और गंगा प्रसाद शुक्ला
इमेज कैप्शन, हरि शंकर नामदेव (बाएं) और गंगा प्रसाद शुक्ला (दाएं)

राहुल की रैली में पहुंचे लोग क्या बोले?

यहाँ लोग राहुल गांधी की एक झलक पाने के लिए उत्साहित हैं. मौसम ख़राब होने के बावजूद वो उन्हें सुनने जमा हुए हैं.

नरेंद्र कुमार, उत्तर प्रदेश से ग्वालियर अपने किसी रिश्तेदार के यहाँ आए हुए हैं. वो राहुल गाँधी को सुनने क्यों आए हैं?

वो कहते हैं, “रागा (राहुल गाँधी) को सुनने आए हैं. देखते हैं क्या बोलते हैं. वो ठीक हैं. उनकी बात सुनने आए हैं.”

गंगा प्रसाद शुक्ला

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कुछ दूरी पर जीरा चौक की स्टेज के पास मौजूद हरि शंकर नामदेव ने ये नहीं बताया कि वो स्थानीय हैं या किसी राजनीतिक दल से सम्बन्ध रखते हैं. वो बोल पड़े, “ये फ़्लॉप शो है. भीड़ ही नहीं है.”

मगर ऐसा नहीं था. भीड़ इतनी थी कि पैर रखने की जगह नहीं थी. लोग राहुल गाँधी को सुनने आ रहे हैं. वो भी ख़ुद से.

रात काफ़ी हो चुकी थी और मौसम एक बार फिर बिगड़ गया था. तेज़ बारिश की बौछार शुरू हो गई. राहुल ने ग्वालियर शहर में ही रात का विश्राम किया.

लेकिन एक बात का सबने संज्ञान लिया. उन्होंने ग्वालियर के महाराज ज्योतिरादित्य सिंधिया का अपनी सभाओं में न नाम लिया ना उनकी आलोचना की.

फ़जीर ख़ान, लंबे वक्त से कांग्रेस के साथ जुड़े हैं. उनका कहना है कि न्याय न तो बीजेपी में है और न ही कांग्रेस में.
इमेज कैप्शन, फ़जीर ख़ान, लंबे वक्त से कांग्रेस के साथ जुड़े हैं. उनका कहना है कि न्याय न तो बीजेपी में है और न ही कांग्रेस में.

स्थानीय कार्यकर्ताओं की शिकायत

यात्रा का अगला दिन. हम ग्वालियर शहर के बाहर हाइवे से लगे मोहना पहुँच चुके थे. यहाँ भी उनका रोड शो निर्धारित है. लोग जमा हैं.

उनके क़ाफिले के आगे दिग्विजय सिंह पैदल चल रहे हैं, जबकि उनकी खुली जीप पर उनके साथ मध्य प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी सवार हैं. एक हारे हुए विधायक लखन सिंह भी उनके साथ गाड़ी पर हैं.

राहुल गाँधी ने रोड शो के दौरान लगभग वही बातें दोहराई, जो वो मुरैना और ग्वालियर में लोगों से कह रहे थे. अपनी बात रखने के बाद उनका कारवां आगे निकल जाता है.

उनको सुनने आये कुछ लोगों को ये लगता है कि कांग्रेस पार्टी के स्थानीय नेता उनकी बातें राहुल गांधी तक नहीं पहुंचा रहे हैं.

फजीर खान

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इनमे से एक हैं फ़जीर ख़ान जो विकलांग हैं. पूछने पर बीबीसी से वो कहते हैं, “चाहे भाजपा हो या कांग्रेस, न्याय कहीं नहीं है. मैं कांग्रेस से लंबे समय से जुड़ा हूँ. मगर हमारी बात बड़े नेताओं तक पहुंचाने वाला कोई नहीं है.”

इनके जैसे कुछ और लोग भी थे जो यही कुछ कह रहे थे. वो बता रहे थे कि राहुल गाँधी आए तो ज़रूर लेकिन बड़े नेताओं से ही घिरे रहे जबकि उनके इलाके के कार्यकर्ताओं को उनके पास फटकने तक नहीं दिया गया.

इसके बावजूद मध्य प्रदेश कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी की यात्रा आम चुनावों से पहले लोगों के बीच पार्टी की बात पहुंचाने में मददगार साबित होगी.

क्या है न्याय यात्रा का उद्देश्य?

पांच मार्च को राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा उज्जैन पहुंची.

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आरपी सिंह कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं और मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता भी हैं.

बीबीसी से अलग से बात करते हुए वो भारत जोड़ो न्याय यात्रा निकाले जाने का उद्देश्य बताते हैं.

उनका कहना था, “राहुल गांधी की न्याय यात्रा देश के पूर्वी हिस्से से पश्चिम की ओर निकाली जा रही है. यह यात्रा समाज के सभी मुद्दों को ‘एड्रेस’ करने के लिए निकाली जा रही है."

वे कहते हैं, "चाहे भारत में वैधानिक व्यवस्था हो, या रोज़गार या किसान या लॉ एंड ऑर्डर- सभी पर अध्ययन करने के बाद ही भारत जोड़ो न्याय यात्रा निकाली गई है. किस प्रकार से आज जनता को न्याय मिले और वह न्याय एक ‘परसेप्शन’ बन कर कांग्रेस के लिए जनमत का काम करें.”

पंकज चतुर्वेदी
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बीजेपी इसे कहती है फ़्लॉप शो

भारतीय जनता पार्टी का आरोप है कि राहुल गाँधी की यात्राएं उन्हें एक ‘बड़े राजनेता’ के रूप में ‘लांच’ करने के उद्देश्य से ही बार-बार आयोजित की जा रही है. भारत जोड़ो न्याय यात्रा उसी की एक कड़ी भर है.

प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता पंकज चतुर्वेदी कहते हैं, “राहुल गांधी के ‘पॉलिटिकल लॉन्च’ के लिए जो यात्राएं हो रहीं हैं वो बार-बार ‘फ़ेल’ और ‘फ्लॉप’ हो रही हैं. पिछली यात्रा का नतीजा सिफ़र (शून्य) था."

"इस यात्रा का नतीजा उससे भी ख़राब होने वाला है. आप देखिए कि नाम है 'भारत जोड़ो न्याय यात्रा'. वो कांग्रेस पार्टी जिसने भविष्य में सबसे ज़्यादा अन्याय किया. आपातकाल से लेकर लूट, भ्रष्टाचार से लेकर परिवारवाद - सब कुछ किया और आज वह न्याय की बात करते हैं.”

कांग्रेस नेता मानते हैं कि चुनौतियां बढ़ी हैं

कांग्रेस नेता आरपी सिंह
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कांग्रेस के नेता, दबी जुबां से ही सही, ये ज़रूर मानते हैं कि मौजूदा चुनावी माहौल में उनके सामने चुनौतियां और भी बढ़ गई हैं.

कांग्रेस नेता आरपी सिंह कहते हैं कि भारतीय जनता पार्टी समा बाँधने के लिए बहुत कुछ कर रही है. मगर लोगों के मुद्दे तो जस के तस हैं.

उनका कहना था, “पब्लिक का ‘सेंटीमेंट’ है वो धीरे-धीरे आक्रोश में परिवर्तित हो रहा है. बेरोज़गारी, महंगाई और किसानों के मुद्दे बड़े हैं. जनता उसको लेकर बात कर रही है."

"सिर्फ़ मीडिया में ही इन मुद्दों पर चर्चा नहीं हो रही है. लोगों के बीच आक्रोश पनप रहा है, देखना होगा कि वो कितना ‘कन्वर्ट’ हो पाता है. यह लाख टके का प्रश्न है, लेकिन कांग्रेस निश्चित रूप से अपना होमवर्क कर रही है. हम सतर्क प्रयास में हैं.”

राजनीतिक विश्लेषक और ख़ास तौर पर मध्य प्रदेश की राजनीति पर नज़र रखने वालों को लगता है इस प्रदेश में कांग्रेस का मज़बूत चुनावी आधार ज़रूर है, लेकिन वो ये भी मानते हैं कि आम कार्यकर्ताओं और पार्टी के बड़े नेताओं के बीच संवादहीनता की एक गहरी खाई है जो सालों से भर नहीं पाई है.

राजनीतिक टिप्पणीकार और वरिष्ठ पत्रकार देव श्रीमाली
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राजनीतिक टिप्पणीकार और वरिष्ठ पत्रकार देव श्रीमाली कहते हैं, “मध्य प्रदेश के संदर्भ देखें तो नीचे तक ‘कनेक्टिविटी’ कांग्रेस की है ही नहीं. वो जुड़ाव ख़त्म हो चुका है."

वे कहते बहैं, "उसके पास समर्पित वोटर ज़रूर हैं, लेकिन वोटर की जानकारी ऊपर तक पहुंचाने की जो ‘पाइपलाइन’ होती है वह पहले ‘पाइपलाइन ब्रेक’ हुई और अब ख़त्म ही हो गई है."

 देव श्रीमाली

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पिछले दो दशकों से भी ज़्यादा समय से मध्य प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस हाशिए पर ही रही है. हां, इस बीच, साल 2018 में उसने कुछ समय के लिए राज्य में सरकार बनाई ज़रूर थी, लेकिन वो चल नहीं सकी.

पिछले विधानसभा चुनाव में सत्ता विरोधी लहर का लाभ भी कांग्रेस को नहीं मिल पाया. अब पार्टी के नेताओं को उम्मीद है कि शायद राहुल गांधी की यात्रा से जातिगत जनगणना की बात आम लोगों के बीच चुनावी मुद्दा बन जाए.

उनका मानना है कि उनके सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं पर वो भी किसी चमत्कार का ही इंतज़ार कर रहे हैं.

तो क्या ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ ये चमत्कार कर पाएगी? यही बड़ा सवाल कांग्रेस के सामने भी है और लोगों के सामने भी.

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